मनरेगा श्रमिक अब पेड़ लगायें, पैसे कमायें

भोपाल : शनिवार, जुलाई 11, 2015, प्रदेश में मनरेगा से जरूरतमंद जॉब-कार्डधारी ग्रामीण परिवार को रोजगार के साथ बड़े पैमाने पर स्थायी आजीविका के मौके सुलभ करवाये जा रहे हैं। अब मनरेगा तथा उद्यानिकी के कन्वर्जेंस से खेतिहर मजदूरों की जमीन पर अच्छी आमदनी करने वाले पौधे लगाये जायेंगे।

एक एकड़ जमीन में हुए पौध-रोपण से महज तीन से 5 साल बाद हितग्राही को 50 हजार से 2.75 लाख रुपये सालाना आमदनी होगी।  ऐसे किसान जो मनरेगा के जॉब-कार्डधारी हैं और जिनके पास कम से कम 0.4 हेक्टेयर जमीन, स्वयं के सिंचाई साधन तथा पौधों की सुरक्षा के इंतजाम है वे इस योजना का लाभ ले सकेंगे। योजना में स्थायी आमदनी करने वाले फल, फूल, औषधि एवं सुगंधित बागानों को लगाया जा सकेगा। इसके अलावा केला, पपीता जैसे पौधे, जिनसे शीघ्र आय होती है, भी लगाये जा सकेंगे।

भारत सरकार ने अगले दशक में मनरेगा तथा ग्रीन इंडिया मिशन के कन्वर्जेंस से पूरे देश में 50 लाख हेक्टेयर भूमि में पौध-रोपण का लक्ष्य रखा है। इसमें मनरेगा के 30 लाख पात्र परिवार को आजीविका से जोड़ा जायेगा। अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती अरूणा शर्मा तथा प्रमुख सचिव उद्यानिकी श्री प्रवीर कृष्ण ने मनरेगा तथा उद्यानिकी विभाग के कन्वर्जेंस से पात्र हितग्राहियों की जमीन पर फलदार पौधे रोपने एवं उनके उचित रख-रखाव संबंधी दिशा-निर्देश मैदानी अमले को भेजे हैं।  योजना में अनुसूचित जाति, जनजाति, आदिम-जाति, अधिसूचित अनुसूचित जनजाति, अन्य गरीबी रेखा वाले परिवार को पात्रता होगी। इसके साथ ही ऐसे परिवार जिनके मुखिया विकलांग या विधवा महिला हैं या जो परिवार इंदिरा आवास, भूमि सुधार के लाभार्थीं हैं, उन्हें भी इस योजना का लाभ दिया जा सकेगा। इसी तरह वन अधिकार अधिनियम में हक प्रमाण-पत्र धारक तथा ऐसे लघु एवं सीमांत कृषक जो कृषि ऋण माफी एवं राहत योजना 2008 में यथा परिभाषित हैं, वे भी इसका लाभ ले सकेंगे।

जिला-स्तर पर पदस्थ उद्यानिकी के सहायक संचालक या उप संचालक इस कार्य के लिये कार्य एजेंसी होंगे। इन्हें मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत की तरह मजदूरी और सामग्री के भुगतान के अधिकार होंगे। श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान एवं सामग्री प्रदाता को सामग्री का भुगतान इलेक्ट्रॉनिक फण्ड मेनेजमेंट सिस्टम से सीधे उनके बेंक खातों में किया जायेगा। जिले में उद्यानिकी के उप संचालक/सहायक संचालक मैदानी अमले के जरिये हितग्राहियों को चुनेंगे तथा तकनीकी स्वीकृति जारी करेंगे। कार्य की प्रशासकीय स्वीकृति कलेक्टर द्वारा जारी की जायेगी।

योजना में हितग्राही द्वारा 90 फीसदी पौधों को जीवित रखने पर तथा एक निश्चित संख्या के पौधों की नींदाई, गुड़ाई एवं रख-रखाव करने की मजदूरी टास्क आधार पर मनरेगा से की जायेगी। पौधों की उचित देखभाल न होने पर हितग्राही को मिल रही राशि में नियमानुसार कटौती भी की जायेगी। काम में जरूरत पड़ने पर हितग्राही परिवार के वयस्क सदस्य के अलावा भी अन्य जॉब-कार्डधारी श्रमिकों को काम पर लगाया जा सकेगा। पौध-रोपण के लिए पौधे एवं उनकी प्रजाति का चयन हितग्राही की पसंद से होगा। अच्छी गुणवत्ता एवं उचित ऊँचाई के स्वस्थ पौधों का ही चयन किया जायेगा। प्रदेश, जिला, जनपद एवं ग्राम-स्तर पर योजना के क्रियान्वयन की सघन मॉनीटरिंग की जायेगी।

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