यह सरकार की सेवा है या प्रतिशोध, सुन्दर शहर बना सियासत का अड्डा

व्ही.एस.भुल्ले/विलेज टाईम्स, मप्र शिवपुरी। अपनी नैसर्गिक सुविधा व मूल अधिकार के लिये 2-4 होती शिवपुरी की जनता का अब इसे सौभाग्य कहे या दुर्भाग्य, जो उसे विगत 30 वर्षो से शुद्ध पेयजल के इन्तजार में यहां, वहां भटकना पड़ रहा है। हालात ये कि शहर में जो भी जैसा भी जल मौजूद है अब तो उसके भी लाले है। अब इसे शिव सरकार की सेवा कहे या फिर एक नहीं दो-दो हार का प्रतिशोध, फिलहाल कुछ समझ नहीं आता। 


मगर जनभावनाऐं शुद्ध पेयजल की असहनीय पीढ़ा झेल अब स्पष्ट है कि अब जब वह सड़क पर है ऐसी स्थति में वह लेाकतंत्र के नाम जनभावनाओं से चल रहे खिलबाड़ को किसी भी स्थति, में स्वीकारने तैयार नहीं, फिलहॉल तो वह सड़क पर है। और उसकी सुनने वाला आज भी कोई नहीं। भगवान का पुजारी मनाली तो पुजारी का प्रबन्धक पानी को कलफती जनता की जनभावनाओं को रौंध बैंगलोर जा चुके है, जैसी कि खबर है।  अब ऐसे में क्षेत्रीय सांसद का शहर को संदेश है कि वह जल्द ही जल क्रान्ति केे मंच पर आ रहे। साथ ही एक बैठक और पत्रकार वार्ता भी कर दूसरे दिन शहर की समाज सेवी संस्थाओं, संगठन और प्रतिनिधियों से भी मिलने वाले है।
बहरहॉल ये भी कुछ दिनों में हो जायेगा, मगर क्या इस सब के चलते सिन्ध का पानी शिवपुरी आ जायेगा।
अगर जानकारो की माने तो बगैर किसी रोक के विगत 1 वर्ष से बन्द पड़े सिन्ध जलावर्धन के काम को शुरु करने म.प्र. सरकार के मुंह से बोल नहीं फूट रहे है। अगर फूटे भी तो ग्वालियर वायपास तक पानी आने में 3 माह से 6 माह लग सकते है।

अगर कानून की बात फिर षडय़ंत्र पूर्ण तरीके से हुई तो तकनीकी कारणों से 2 वर्ष भी लग सकते है।
मगर यहां यक्ष प्रश्र यह है कि ऐसी नौवत ही क्यों आई ?
अपुष्ट सूत्रों की माने तो सारा बखेड़ा पूरे सुनियोजित षडय़ंत्र के तहत फॉरलेन सड़क निर्माण एजेन्सी की सुविधा के लिये किया गया है। जिसके लिये स्वीकृत क्षेत्र से पाइप लाइन न डाल अस्वीकृत क्षेत्र में खुदाई की गई, और शर्तो के उल्लघंन के आभाव में एजेन्सी अपराधी बन गई। हड़बड़ी में कार्य बन्द कर एजेन्सी जाती रही।
रहा सवाल सिन्ध जलावर्धन का तो जिसमें केन्द्र सरकार की 59 करोड़ की राशि दांव पर है, अगर इसकी स पूर्ण जांच सी.बी.आई. से हो जाये तो सारे तथ्य शहर के सामने होगें ?
फिलहॉल जिस तरह की आम चर्चा है कि यह एक दशक पुरानी म.प्र. सरकार का शिवपुरी वासियों से एक नहीं दो-दो हार का प्रतिशोध है, तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी। इतना अत्याचार तो कभी अंग्रेजी हुकूमत ने नहीं किया होगा जिस दर्जे का अत्याचार इस निर्दोष शहर के साथ हो रहा है। इस शहर मेें अब न तो शुद्ध अशुद्ध पेयजल ही सहर्ष उपलब्ध है न ही मु यमंत्री द्वारा उदघाटित अटल ज्योति जिसकी हालत ऐसी पतली है, कि उसके आने जाने का समय तो दूर की कोणी, शहर में टूटते बिजली तारो से मरने जलने का सिलसिला जारी है। जरा सी हवा में जलती, बुझती अटल ज्योति का सच जो भी हो, मगर जिस तरह की दुर्गति इस शहर की सेवा सुविधाओं के नाम है। और व्यवस्था में पसरे भ्रष्टाचार की है। शायद ही किसी शहर की ऐसी हालत हो, फिलहॉल तो आश ही नहीं, शहर के आम नागरिक उ मीद है कि सिन्ध आयेगी मगर कैसे और कब तक आयेगी यह बताने कोई तैयार नहीं।

अधिकाधिक जापानी निवेश का आकांक्षी है मध्यप्रदेश
भोपाल : शुक्रवार, जून 26, 2015,मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने जापान के निवेशकों को मध्यप्रदेश की औद्योगिक मित्र नीतियों का हवाला देते हुए प्रदेश में व्यापक निवेश का आव्हान किया है। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज नई दिल्ली में ताजमहल होटल में जापानी निवेशकों के साथ इन्टरऐक्टिव सेशन को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया, मुख्य सचिव       श्री अन्टोनी डिसा, सी.आई.आई.  के डायरेक्टर जनरल श्री चन्द्रकांत बैनर्जी, डिपार्टमेंट ऑफ इण्डस्ट्रियल पालिसी एण्ड प्रमोशन के सचिव श्री अमिताभ कान्त, भारत में जापान के राजदूत श्री ताकेशी यागी, जेट्रो के चीफ डायरेक्टर जनरल श्री नाओपोशी नोगुची उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि  भारत और जापान एशिया के दो ऐसे देश हैं, जो परस्पर सहयोग का इतिहास रच सकते हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश औद्योगिक क्षेत्र में जापान के सहयोग का आकांक्षी है। उन्होंने कहा कि जापान ने पिछले 50 वर्ष में विकास और प्रगति का जो उदाहरण प्रस्तुत किया है, वह अनुकरणीय है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि बौद्ध इतिहास में जापान और मध्यप्रदेश का एक मजबूत रिश्ता है। भारत के प्रधानमंत्री की जापान यात्रा के दौरान हुए निवेश प्रस्तावों में मध्यप्रदेश भी भागीदारी चाहता है। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जापान से निवेश के लिये अलग से कई स्थान पर भूमि आरक्षित कर ली गयी है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जापानी निवेशकों को बताया कि मध्यप्रदेश सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रानिक, आटोमोबाइल, हाई स्पीड ट्रांसपोर्ट, फूड-प्रोसेसिंग, अधोसंरचना और निर्माण के क्षेत्र में निवेश चाहता है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि मध्यप्रदेश में पर्याप्त मात्रा में बिजली है, जो प्रदेश की बड़ी शक्ति है। उन्होंने निवेशकों को ईज ऑफ बिजनेस क्षेत्र में किये जा रहे प्रदेश के प्रयासों की भी जानकारी दी। सेशन को वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ने भी संबोधित किया।
सेशन के प्रारंभ  में श्री चन्द्रजीत बनर्जी ने स्वागत कथन किया। मुख्य सचिव श्री अन्टोनी डिसा ने मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों पर केन्द्रित प्रेजेंटेशन दिया। जापान के राजदूत श्री ताकेशी यागी ने भी सेशन को सम्बोधित किया। सेशन में निवेशकों की जिज्ञासाओं का भी समाधान किया गया। प्रदेश के प्रमुख सचिव वाणिज्य और उद्योग श्री मो. सुलेमान ने आभार प्रदर्शन किया। सेशन में फूजी फिल्म्स, हिताची, होण्डा, जेट्रो, मित्सुबिशी, पेनासोनिक, रिको, सोनी, बेंक ऑफ टोकियो जैसे प्रतिष्ठित जापानी औद्योगिक संस्थानों के तीस से भी अधिक सीईओ और प्रतिनिधि शामिल हुए।
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