कॉग्रेस: होम वर्क के आभाव में उठते सवाल

व्ही.एस.भुल्ले। सत्ता के लिये राजनीति में, तो समस्याओं से ग्रस्त जनता के बीच, व मसालेदार खबर के लिये मीडिया के बीच उठते कई सवाल और उनके सार्थक जबाव, आज भी देश व देश वासियों के लिये अबूझ पहेली बन हवा में झूल रहे है।

इसमें कोई शक नहीं कि आज भी कॉग्रेस की कुछ युवा तरुणाई 18-18 घन्टे की निरन्तर कड़ी मेहनत के बावजूद जनता के बीच जाकर उन यक्ष प्रश्रों के जबाव ढूढने का प्रयास कर रही है। जो सवाल कॉग्रेस को बगैर किसी गुनाह के सत्ता से बाहर और अब निस्ताबूत करने पर उतारु है।
मशलन- पहला सवाल कि कॉग्रेस ने आजादी के बाद 47 वर्षो के शासन में क्या किया। जिन सरकारों का नेतृत्व स्व.पण्डित जवाहर लाल नेहरु स्व. लाल बहादुर शास्त्री, स्व.इन्दिरा गांधी, स्व. राजीव गांधी, स्व. पी.वी. नरसिंह राव, और डॉ मनमोहन सिंह ने किया।
दूसरा सवाल कि कॉग्रेस नेतृत्व वाली, स्व.पी.वी. नरसिंह राव सरकार, में हर्षद मेहता और हवाला काण्ड हुआ, वहीं डॉ मनमोहन सिंह सरकार के दौरान एसियाड खेल, 2 जी स्पेक्ट्रम, कौल ब्लॉक और न जाने क्या-क्या का घोटाला हुआ, तीसरा अहम सवाल रॉवर्ड बाडरा से जुड़ा होता है।
वहीं राहुल को लेकर भी कई सवाल बने रहते है। जिसमें सबसे अहम सवाल ओलावृष्टि को लेकर प्रधानमंत्री द्वारा किसानों के बीच जाकर उनके हाल न जानने के जबाव में राहुल पर रहता है कि वह उस भी दौरान कहां थे।
अगर यो कहे कि देश के लिये सबसे अहम और कभी विपक्षी दल और अब सत्ताधारी दलो का सवाल 1977 को लेकर रहता है।
सवाल तो और भी हो सकते है और इनके या उनके जबाव भी हो सकते है। मगर दुर्भाग्य कि होम वर्क न होने के कारण, जो भी सवाल विरोधी दल हवा में उछाल दे और मीडिया मसाला बनाने लपक ले। स्वभागिक है, जबाव भी फौरी तौर पर उसी के पीछे चल देते है। और अब हालात ये है कि सवाल करने का अधिकार विपक्ष का होता है। और जबाव देने का दायित्व सरकार का। मगर यहां तो सब कुछ उल्टा पुल्टा हो रहा है। सत्ताधारी दल या तो स्वयं या फिर मीडिया की आड़ में सवाल करते है। और विपक्ष जबाव देते घूम रहा है। यह सत्ताधारी दलो की तो रणनीति हो सकती है या फिर आदत सवाल करने की, मगर पूरा विपक्ष भी नहीं कह सकते सं या बल आधार पर फिर भी कॉग्रेस जबाव देती घूम रही है। दोनों ही प्रमुख राजनैतिक दलो की यह नूरा कुश्ती देख, जनता भ्रमित हो शायद यह नहीं समझ पा रही कि पक्ष कौन और विपक्ष कौन,  न ही पक्ष समझ पा रहा कि वह अब सत्ता में है, और न ही विपक्ष यह समझने तैयार की वह सत्ता से बाहर हो चुका है। जबकि देश के हालात विकट होते जा रहे है। और कॉग्रेस की हालत पतली है। यह दोनो ही बाते लेाकतंत्र के लिये ही नहीं देश व देश की सवा अरब आबादी के लिये खतरनाक है। बेहतर हो कॉगे्रेस सत्ताधारी दल पर बैसर पैर के आरोप प्रत्यारोप करने के बजाये तथ्यात्मक रुप से जनता के बीच सरकार के जन विरोधी, राष्ट्र विरोधी सच सामने रखे, और सरकार को 4 वर्ष तक काम करने दे। क्योंकि फिलहॉल जनाधार उसके साथ है। और जनता ने स्वयं का भविष्य गढऩे बहुमत के आधार पर उसे चुना है। तब तक कॉग्रेस अपना घर और होम वर्क पर ज्यादा ध्यान दे। सरकार की नाकामी उसका झूठ उजागर करना विपक्ष का कत्र्तव्य है उसके लिये उसे सदन है। सदन में जब नहीं सुना जाये तो फिर सड़क है। यही लेाकतंत्र है। 
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