शिवपुरी में जल आन्दोलन का आगाज: सिन्ध का समाधान, सरकार के गर्व में

व्ही.एस.भुल्ले 10 जून 2015। म.प्र. ग्वालियर, विलेज टाईम्स। ग्वालियर-चम्बल में शुद्ध पेयजल के लिये अभिशाप बना शिवपुरी शहर शुद्ध पेयजल ही नहीं, अब तो जैसा भी पानी हो, उसके भी न मिल पाने से हैरान परेशान है। लठयाई से लेकर आये दिन होने वाले पानी को लेकर सर फुटब्बल इस बात के संकेत है। कि शिवपुरी में पेयजल की स्थति कितनी विकट और ग भीर है। मगर करोड़ों फूकने के बावजूद शिवपुरी में सिन्ध का नामो निशान तक नहीं। हालात ये है कि सिन्ध जलावर्धन येाजना का ठेका लेने वाली क पनी जाप्ते में योजना छोड़ जा चुकी है।

अब यह क्यों हुआ, कैसे हुआ, एक अलग विषय है मगर अब शिवपुरी शहर की 2 लाख से अधिक की आबादी का क्या होगा फिलहॉल इसका जबाव शायद किसी के पास नहीं ?
फिलहॉल पानी की पीड़ा झेलने सरकारों के झूठे वादों से आहत कुछ शहर के नागरिक यूं तो अपने-अपने स्तर से सिन्ध पेयजल की बात धरना, ज्ञापन सौंप अपनी पीढ़ा राष्ट्रपति से लेकर राज्यपाल तक व्यक्त कर चुके है। जिसको लेकर शिवपुरी शहर में अब वही रुप जागरुक लेागों का जल आन्दोलन के रुप में सामने है जिसने जन्म ले अपनी यात्रा शुरु कर दी है। अब जब शिवपुरी में शुद्ध पेयजल मुहैया नहीं है, और जैसा भी पीला हरा पानी मौजूद है उसी को लेकर आये दिन मारपीट, ल_, लुहांगी चल, लोगों के सर फूट रहे है। तो कुछ  पानी के लिये जिन्दगी मौत से संघर्ष कर रहे है। और सरकार तथा उसके नौकरशाह मीटिंग पर मीटिंग कर रहे है।
हो सकता है शहर के लोग अपनी इन्सानियत, भलमंसाहत और भोलेपन, या फिर ऐसे किसी अज्ञात अपराध की सजा भुगत रहे हो, जो उसने किया ही नही। मगर कहते है लेाकतंत्र में सबकुछ स भव है। भले ही सिन्ध का समाधान म.प्र. सरकार के गर्व में हो, मगर लेाकतंत्र की आड़ में कुछ ऐसी ताकते सक्रिय है। जो अपना भला कर, भले लेागोंं को बुरा बताने में संकोच नहीं करती। साथ ही भाड़े के कुछ ऐसे लेाग भी सक्रिय है, जो जनता की आवाज को ही बुलन्द नहीं होने देती। अब इसे, इस शहर का सौभाग्य कहे या दुर्भाग्य कि ऐसी विकट स्थिति बन गई है, जिसका कोई सार्थक समाधान तो फिलहॉल नहीं दिखता।
बेहतर हो शिवपुरी की सिन्ध जलावर्धन योजना को सरकार अबिल ब शुरु कराए जिससे शहर वासियों को शुद्ध पेयजल नसीब हो सके।  बेहतर हो कि सरकार अपनी अर्कमण्यता त्याग, कैबीनेट में निर्णय कर विभागीय स्तर पर ही सिन्ध परियोजना के कार्य को पूर्ण करा, सिन्ध को शिवपुरी लाने की शुरुआत करे। जिसके लिये उसके पास पी.एच.ई. से लेकर जलसंसाधान जैसे महत्वपूर्ण विभाग मौजूद है। विभागीय स्तर पर ही सरकार सिन्ध की शुुरुआत करे, तब तो शिवपुरी की समस्या कुछ ही दिनों में सुलट सकती है। बरना यह योजना जिस स्थति में बन्द पढ़ी है और जिस तरह के लेाग शिवपुरी वासियों से द्वेष रख षडय़ंन्त्र कर रहे है जैसी कि आम चर्चा है तो यह परियोजना और कुछ वर्षो तक  उसी स्थति में पढ़ी रह सकती है। जैसी कि आज है। फैसला म.प्र. सरकार को करना है और मांग शहर वासियों को करना है।                

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