असंवेदनशीलता के बीच, संवेदनशीलता की शुरुआत

व्ही.एस.भुल्ले/ विलेज टाईम्स, म.प्र. 28 जून 2015। आज जिस तरह से संवैधानिक संस्थाओं में असंवेदनशीलता पसरी पढ़ी है जिसका अनुशरण कर मजबूरी बस समाज का एक बड़ा वर्ग उसमें अपना खुशहाल स पन्न भविष्य तलाश रहा है हर दिन कुछ करने के बजाये कहने में मशगूल लेागों के हुजूम को दे ाकर यह नहीं लगता कि आने वाले समय में गरीब के लिये कुछ खास होने वाला है। भले ही देश के प्रधानमंत्री बनने के साथ ही भारतीय राजनीति में एक नये युग की शुरुआत भारतीय स यता, संस्कृति, पर परायें, संस्कारों की छत्र छाया में की हो ? 

ज्ञात हो जिस तरह से प्रधानमंत्री ने लेाकतंत्र की सबसे बड़ी संस्था संसद की सीढिय़ों को मत्था टेक लेाकतंत्र की सेवा करने के स्पष्ट संकेत दे, सर्व प्रथम शिक्षा को प्रमुख स्थान देने देश के बच्चों से सीधी बात की, तत्पश्चात स्वस्थ रहने स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता अभियान, हर सांसद द्वारा एक आदर्श ग्राम निर्माण, देश के आम गरीब, मजदूर, किसान की आर्थिक सुरक्षा, और राहत के लिये जन, धन, बीमा, पेन्शन योजनाओं की शुरुआत, उसके बाद देश में 100 स्मार्ट शहर व 500 अमृत शहर सहित 2 करोड़ गरीबों को मकान देने के साथ ही प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत नई नई स्कीमो की शुरुआत हो रही है।

जिससे छोटे से छोटा सीमान्त किसान भी एक-एक बूंद पानी का उपयोग कर कृषि उत्पादन और उत्पादकता का उच्चतम स्तर पूर्ण गुणवत्ता के साथ प्राप्त कर कृषि को लाभ का धन्धा बना सके। ये नये प्रधानमंत्री द्वारा शुरु की जाने वाली योजनाओं का वह प्रतिबि ब है। जो यह दर्शाता है कि देश के प्रधानमंत्री देश व देश के नागरिकों को लेकर कितने संवदेनशील है।

मगर देश का सबसे यथार्थ और बड़ा पहलू यह भी है कि देश भर की कई संवैधानिक संस्थाओं में असंवेदनशीलता किस हद तक फैली हुई है। कि आम गरीब ही नहीं, आम नागरिक भी त्राही, त्राही कर उठा है। चाहे वह बिजली, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ, सुरक्षा का क्षेत्र हो या फिर संचार, मानव स्वास्थ सुरक्षा का मसला हो, हर क्षेत्र में संवेदनशीलता कोसो दूर तक नजर नहीं आती जिसका अनुशरणशील समाज में भी आज असंवेदनशील फौज का एक बड़ा रुप नजर आता है। और इन्सानियत कांपती दि ााई पड़ती है।

देखा जाये तो तीन वाई छ: सोने, दो टाईम का भोजन और दो वस्त्रो की प्रमुख जरुरत के बजाये इन्सान पैसो के लिये इस हद तक पागल हुआ पड़ा है। कि उसे यह ऐहसास ही नहीं बचा कि वह कैसे समाज की नींव र ाने में लगा है।  वहीं वह वर्ग जिस पर पैसा है वह अंहकार और सत्ता के नशे में डूबा पड़ा है। ऐसे में जब अन्धे बन लेाग पैसा प्राप्त करने कुछ भी करने में लगे है, ऐसे में जो लेाग पैसे से सब कुछ चाहते है शायद उन्हें यह नहीं पता कि उनका खुशहाल जीवन आज भी उनसेे कोसो दूर खड़ा है। काश कहने के बजाये लेाग कुछ करने का जुनून बना पाते, तो यह देश स्वत: ही खुशहाल, स पन्न बनने के रास्ते में लोग रोड़ा नहीं बन पाते।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना मध्यप्रदेश ने बनायी सबसे ज्यादा सड़क, अब तक ६१२७१ किलोमीटर सड़क का निर्माण 
भोपाल : रविवार, जून २८, २०१५ प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा सड़कें बनी हैं। मध्यप्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य है, जिसे इस योजना में सबसे ज्यादा राशि मिली है। योजना की शुरूआत से अब तक ६९ हजार ६४३ किलोमीटर लम्बी १६ हजार ३४६ सड़क के निर्माण के लिये मंजूरी हासिल हुई। इसमें नक्सल प्रभावी जिलों के साथ ही समेकित कार्य-योजना (आईएपी) में मंजूर सड़कें भी शामिल हैं। इनमें से अब तक ६१ हजार २७१ किलोमीटर लम्बाई की १३ हजार ६१८ सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है। योजना में शुरू से अब तक १९ हजार १४३ करोड़ रुपये की मंजूरी केन्द्र से मिल चुकी है और १५ हजार ३६८ करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। योजना में अब तक ५७ हजार ५९३ किलोमीटर लम्बी १३ हजार ४८८ सड़क के लिये १५ हजार २१९ करोड़ रुपये और एशियन डेव्हलपमेंट बेंक (एडीबी) की मदद से १२ हजार ४९ किलोमीटर लम्बी २८५८ सड़क के लिये ३४७८ करोड़ रुपये की सहायता मिली है। गत माह तक प्रदेश में योजना में ५१ हजार ३९१ किलोमीटर लम्बी ११ हजार ५८३ सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है। इन कार्यों पर १२ हजार ६५५ करोड़ रुपये खर्च हुए। इसी तरह एशियन डेव्हलपमेंट बेंक की सहायता ९८८० किलोमीटर लम्बी २०३५ सड़क का निर्माण किया गया है। इन कार्यों पर २५८३ करोड़ राशि खर्च हुई है। भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के वित्त की पूर्ति के लिये एडीबी से ली गयी ऋण सहायता की राशि मध्यप्रदेश को अनुदान के रूप में हासिल होगी। प्रदेश में इस योजना में मंजूर कुल १६ हजार २० सड़क में से १३ हजार ६१८ सड़क बन गई है। इन सड़कों से एक हजार से अधिक की आबादी वाले ५८३६ गाँव और ५०० तथा २५० तक की आबादी वाले ६६६८ गाँव को बारहमासी आवागमन सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। केन्द्र ने समेकित कार्य-योजना में शामिल प्रदेश के ८ जिले में १६६५.७९ किलोमीटर लम्बी ४५८ सड़क के लिये वित्त वर्ष २०११-१२ में ५३२.८२ करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इस योजना से ६०३ बसाहट लाभान्वित होंगी। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस मकसद से त्रि-स्तरीय गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था लागू की गयी है। इसमें विभागीय निरीक्षण के अतिरिक्त, स्टेट क्वालिटी मॉनीटर तथा नेशनल क्वालिटी मॉनीटर रखे गये हैं, जो समय-समय पर सभी काम का निरीक्षण करते हैं। कामों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिये विभागीय अमले के अलावा सुपरविजन एवं क्वालिटी कंट्रोल कंसलटेंट भी नियुक्त किये गये हैं।

सरकार तथा खाद्य व्यापार संघ के मध्य हुई वार्ता सफल 29 जून को प्रस्तावित मंडियों की एक दिवसीय हड़ताल स्थगित
जयपुर, 28 जून। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री हेम सिंह भडाना ने कहा कि राज्य में दालों की कालाबाजारी रोकने और बढ़ती कीमतों पर काबू करने के लिए राज्य सरकार ने दाल और दलहन की स्टॉक लिमिट तय की है। इसमें मिल मालिकों से लेकर थोक व खुदरा विक्रेता अब तय सीमा तक ही दालों का स्टॉक कर सकेंगे। रविवार को खाद्य मंत्री के सरकारी आवास पर दाल मिल मालिकों व थोक विक्रेता संघ के पदाधिकारियों के मध्य वार्ता हुई। व्यापार संघ के प्रतिनिधियों द्वारा मंत्री को अवगत करवाया गया कि वर्तमान में राज्य के व्यापारियों के पास दलहनों का स्टॉक बैंक के माध्यम से प्लेज किया जा कर संग्रह किया गया है तथा बैंक से स्टॉक रिलीज करवाने मे समय लगेगा तथा धन राशि की भी व्यवस्था करनी होगी, उसके बाद ही स्टॉक बाजार मे बिक्री किया जा सकेगा। उनके द्वारा यह भी बताया गया कि राज्य चने का उत्पादन पर्याप्त मात्रा में हुआ तथा चने को वर्तमान में 2500 क्विंटल की लिमिट में ही रखा गया है । इसलिए चने की स्टॉक सीमा पृथक से रखी जाये। बैठक मे पर्याप्त विचार विमर्श के बाद सभी की सहमति से निर्णय लिया गया कि दाल और दलहन की स्टॉक लिमिट लागू होने की तिथि 15 जुलाई, 2015 से होगी। वार्ता  में यह भी निर्णय लिया गया कि दालों की स्टॉक लिमिट के संबंध में वर्णित अधिकतम भण्डारण सीमा का पुन: निर्धारण किया गया। जिसमें चना हेतु पृथक से थोक विक्रेता द्वारा 2000 क्विंटल, खुदरा विक्रेता हेतु 25 क्विंटल भण्डारण सीमा होगी तथा अन्य सभी तरह की दालों (चने के अतिरिक्त) की थोक विक्रेता द्वारा 2000 क्विंटल तथा खुदरा विक्रेता द्वारा 25 क्विंटल अधिकतम भण्डारण सीमा रहेगी। बैठक में खाद्य विभाग के अतिरिक्त खाद्य आयुक्त श्री महावीर प्रसाद शर्मा, उपायुक्त श्री आकाश तोमर, खाद्य मंत्री के विशिष्ट सहायक श्री गौरव चतुर्वेदी, व्यापार संघ के पदाधिकारी श्री बाबू लाल सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

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