बैवस लोकतंत्र, बदबहास लोग...?

व्ही.एस.भुल्ले@ तीरंदाज 
भैया- भले ही हारा लेाकतंत्र विश्व के महान लेाकतंत्रों में सुमार हो, मगर जिस तरह की बैवसी छोटी-छोटी या नैसर्गिक बातों से लेकर हमारे लेाकतंत्र में है उन बातों ने हमें बैवस बना दिया है। चाहे, बात राष्ट्र, समाज, दल, जनाकांक्षाओं की हो या फिर जनभावनाओं की सभी की स्थति एक भूत के समान है।
जिसका नाम तो हो, मगर उसमें जान नहीं। आखिर कै करुं। पैदा होने के पूर्व से लेकर अन्तिम संस्कार तक भारतीय कानून की जकड़ में जकड़े। पैदा होने वाले इन्सान को पता ही नहीं कि वह जन्म की माला के साथ भारतीय कानूनों की कितनी मालाऐं पहन पैदा हो रहा है। और जीते जिन्दा कितनी मालाये कानून की पहन उसे मरना है। कै भाया यहीं हारा महान लेाकतंत्र है।
भैये- कै थारे को मालूम कोणी कानून का अर्थ समझने हारे लेाकतंत्र में संविधान के रुप में पूरा महान ग्रन्थ है। फिर भी न समझ सके तो कई कानूनों के रुप में कानूनी किताबों के कई उपनिषद है। 
जो कानूनन, कानून रुपी लेाकतंात्रिक व्यवस्था की, कानूनी व्य या करते है। अब इनमें थारे जैसे गंाव के लोगों को खुद का सुरक्षित भविष्य नहीं दि ाता तभी तो हम समस्त भारतवंशी इसे बगैर पढ़े ही अंगीकार करते है। 
भैया- तो क्या होगा हारी दो पीढ़ी का जो हुआ सो हुआ क्या हारा व हारी आने वाली नस्ल का भी जीवन लेाकतंत्र की आड़ में नैसर्गिक सुविधा हासिल करने संघर्षरत रह, आभाव ग्रस्त रहकर, यू ही कट जायेगा। 
या फिर लेाकतंत्र में आस्था रखने वालो के लिये हारा जीवन लेाकतंत्र में एक नजीर बन जायेगा। 
भैये- तने तो बावला शै कै थारे को मालूम कोणी के आजकल केवल कलयुग ही नहीं अब अर्थयुग भी चल रहा है। पैसे के लिये पागल लेागों का दौर खुलकर तो नकली व नकली लेागों का हुजूम दौलत पाने लेाकतंत्र की भीड़ में तैयार खड़ा है। 
ऐसे में लेाकतंत्र का पुजारी बैचारा निढाल खड़ा है। 
अब देखो न वोटो के कमाल को, कि अब न तो दलो और न ही दलेा से बनी सरकारों में कोई प्रकृति का रक्षक और न ही इन्सानों के बीच इन्सान दिख रहा है, आदमी पैसे के लिये पागल तो, इन्सानियत का सरेयाम चीर हरण हो रहा है। स यता, संस्कृति, संस्कार, नैतिकता डोल रही है। और हैवानियत अब तो भाया सिर चढ़कर बोल रही है। 
भैया- मने समझ लिया, लेाकतंत्र की आड़ में हारा तो बैड़ा गरग हो लिया, मगर कहना चाहूं। जैसा कि काड़ू बोल्या, गर मौका मिला तो मने भी दल बनाऊंगा और हाथों हाथ देश की जनता को प्रलोभन दे मने भी एक ऐसी सरकार बनाऊंगा। और लेाकतंत्र के नाम आम गरीब को लूटने वालो को हाथों हाथ, चोटी का सबक सिखाऊंगा। तब बहस न दलील होगी, मेरे महान भारत में महान लेाकतांत्रिक सरकार होगी। 

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