पुरुष प्रधान राजनीति की हनक फिर महिला राजनेता निशाने पर

व्हीएस भुल्ले। भारतीय समाज में मातृव शक्ति का सर्वोच्च स मान ही भारत का विधान है। मगर जिस तरह से ललित मोदी की आड़ में देश की दो कद्दावर महिला राजनेताओ पर राजनैतिक हमला हुआ है। यह कोई भारत की पुरुष प्रधान राजनीति में कोई नई बात नहीं, इससे पूर्व भी 1977 में स्व. इन्दिरा गांधी, उसके बाद सोनिया गांधी, फिर बहिन उमा भारती, मायावती, जयललिता, ममता बनर्जी और अब सुषमा स्वराज, बसुन्धरा राजे है। इस राजनीति का शिकार है, आ िार भारत की पुरुष प्रधान राजनीति भारतीय समाज को क्या संदेश देना चाहती है ?

बहरहॉल मातृसशक्तिकरण का नारा बुलन्द कर भारतीय संस्कृति और संस्कारों का दम भरने वालो को सोचना होगा, जो रास्ता राजनीति से होकर सत्ता तक जाता है। उसकी यथा स्थति भारतीय राजनीति में क्या है ?
मगर इस दिशा में कोई सोचना नहीं चाहता, जबकि भारतीय समाज का सच यह है कि मातृत्व शक्ति ही भारत की असली पहचान है। जिसकी रक्षा व स मान करना हर भारतीय अपना कत्र्तव्य समझता है और हर भारतीय का यह कत्र्तव्य  होना चाहिए।
आखिर क्यों बार-बार सत्ता तक पहुंंच मातृत्वशक्ति पर सवाल उठाये जाते है। फिर चाहे वह किसी भी दल या प्रदेश ही नहीं देश से ही क्यों न हो।
मगर जो सवाल आज सुषमा स्वराज, और बसुन्धरा को लेकर उठ रहे है, क्या उन सवालों को केवल सुषमा स्वराज या बसुन्धरा राजे तक ही सीमित होना चाहिए। जो सवाल स्मृति रानी को लेकर उठते है। क्या उन पर जबाव होना चाहिए अगर इन्सानियत से पूछो तो बिल्कुल भी नहीं। क्योंकि यह पुरुष प्रधान राजनीति की कलूसित मानसिकता है, अब इस तरह के उठते सवालों के पीछे के कारण, कारक जो भी हों। मगर इन्सानियत तो तब है जब पुरुष प्रधान राजनीति, मातृत्व शक्ति पर सवाल खड़े करने के पूर्व देश को सत्ता तक पहुंचने का अपना असली सच और इतिहास बताये। तभी पुरुष प्रधान राजनीति को सवाल खड़ें करने का हक है। मगर शायद ही पुरुष प्रधान राजनीति ऐसा कर पाये।
आखिर क्या अपराध था स्व.इन्दिरा जी का जिन्होंने महिलाओं के स मान की खातिर इमरजेन्सी और देश की बढ़ती आबादी रेाकने परिवार नियोजन जैसे माहती कार्यक्रम चलाये, ाले ही वह नौकरशाही की अकमर्णता के चलते रौंद दिये गये हो और देश की जनता द्वारा इन्दिरा जी की सरकार को पलट दिया गया हो, मगर  स्व.राजीव गांधी ही नहीं स्व.इन्दिरा गांधी की सरेयाम हत्या के बाद देश व दल के आग्रह पर राजनीति में आई और एक  मर्तवा देशी विदेशी के मुद्देे पर वह भी पुरुष प्रधान राजनीति का शिकार हुई। उसके बाद तो मायावती से लेकर जनसेवा के रुप में सुश्री उमा भारती, जिन्हें बगैर किसी अपराध और देश के महान झण्डे के कारण पुरुष प्रधान राजनीति ने अपना शिकार बना म.प्र. के मु यमंत्री का पद छोडऩे मजबूर होना पड़ा। वहीं जयललिता को तो जेल तक जाना पड़ा वही ममता जैसी जीवट महिला ने 35 वर्ष तक सत्ता सुख भोगने वाली सा यवादियोंं को चुनावों में प्रचण्ड बहुमत हासिल कर पश्विम बंगाल में अपनी सरकार बनाई। वहां भी पुरुष प्रधान राजनीति उन्हें चैन से नहीं बैठने दे रही। कभी यात्राओं के सहारे राजस्थान  की खाक छान मु यमंत्री बनी बसुन्धरा ने समुचे राजस्थान में पुन: मु यमंत्री बन अपना परचम लहराया, मगर कभी संसद में भाजपा की सिरमेार रही सुषमा, जो आज भारत सरकार में विदेश मंत्री है। उन्होंने ने भी देश भर में भाजपा को खड़ा करने में काफी योगदान भरी भूमिका निभाई है।
ऐसे में पुरुष प्रधान समाज में मातृत्व शक्ति पर सवाल होने के बजाये वह सवाल पुरुष प्रधान राजनीति पर लाजमी है देखने होगा जीत पुरुष प्रधान राजनीति की होगी या मातृत्व शक्ति की। मगर यह चलन भारतीय राजनीति के लिये शुभसंकेत बिल्कुल भी नहीं।

प्रदेश में होगी जलमार्गों की शुरूआत, प्रदेश में सड़कों के निर्माण के लिए राशि की कमी नहीं होने दी जाएगी
भोपाल : शनिवार, जून 20, 2015 केन्द्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं जहाजरानी मंत्री श्री नितिन गडकरी ने आज जबलपुर में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर में प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग की 9 परियोजना की आधार-शिला रखी। परियोजनाओं की कुल लागत 4023 करोड़ से अधिक है। श्री गडकरी ने प्रदेश की प्रमुख नदियों में जलमार्गों की शुरूआत करने की बात भी कही। केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी ने कहा कि मध्यप्रदेश को न्याय मिलने का समय अब आ गया है। उन्होंने कहा कि दिसम्बर तक 13 हजार 500 करोड़ रूपए के कार्य प्रारंभ होंगे। आने वाले समय में 7 हजार करोड़ के अन्य कार्य भी स्वीकृत किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अन्य सड़क निर्माण कार्यों सहित 50 हजार करोड़ रूपए सड़क निर्माण पर खर्च किए जायेंगे। स्वीकृत कार्यों के लिए शीघ्रतिशीघ्र राशि उपलब्ध करवाकर कार्य शुरू किए जायेंगे। श्री गडकरी ने प्रसन्नता व्यक्त की कि प्रदेश सरकार ने विकास की अपनी अवधारणा में रोड सेक्टर को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द प्रदेश की नर्मदा, बेतवा, क्षिप्रा व केन तथा अन्य नदियों में जलमार्ग बनाए जायेंगे। केन्द्रीय मंत्री ने देश में सर्वोच्च कृषि विकास दर तथा बड़े पैमाने पर सिंचाई की व्यवस्था के लिए प्रदेश सरकार की सराहना की। सड़क परिवहन मंत्री ने कहा कि गाँवों को जोड़ने की दिशा में प्रदेश सरकार के प्रयासों में केन्द्र मदद करेगा। इसके लिए कम दरों पर सीमेंट भी मुहैया करवाया जाएगा। श्री गडकरी ने मांग के अनुरूप सीआरएफ के कार्यों के लिए 1600 करोड़ की मंजूरी भी दी। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि शीघ्र ही सरकार खेत सड़क योजना में खेतों की सड़कों को पक्का बनाने की दिशा में कदम उठाएगी। सड़कों के मामले में मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बनाने के प्रयासों में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। उन्होंने पूर्व में राष्ट्रीय राजमार्गों की दुर्दशा का जिक्र करते हुए कहा कि श्री गडकरी ने कार्यभार संभालते ही बिना किसी भेदभाव के सड़कें दुरूस्त करवाई। श्री चौहान ने श्री गडकरी से आग्रह किया कि बड़ी सड़कों के निर्माण का दायित्व वे संभालें। राज्य सरकार सारे मजरे-टोलों और ग्रामों को जोड़ने की जिम्मेदारी उठाएगी। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जबलपुर के निकट खाद कारखाना स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जबलपुर, रीवा, सतना, सीधी, शहडोल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने नवयुवाओं को उद्योगपति के रूप में स्थापित करने सम्बन्धी योजनाओं का भी जिक्र किया और कहा कि मध्यप्रदेश में लघु व कुटीर उद्योगों का जाल बिछाया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने घटना की तीव्र निन्दा की : नर्स के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला
रायपुर, 20 जून 2015 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राजधानी रायपुर के एक प्रायवेट अस्पताल में कार्यरत एक नर्स के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बारे में प्राप्त समाचारों को गंभीरता से लिया है। उन्होंने घटना की तीव्र निन्दा की है। डॉ. सिंह ने कहा है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पुलिस पूरी गंभीरता और तत्परता के साथ मामले की जांच कर रही है। किसी भी दोषी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। अपराधियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

नारी शिक्षा से समाज का उत्थान संभव-ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री
जयपुुर, 20 जून। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्री सुरेन्द्र गोयल ने कहा कि नारी के शिक्षित होने पर ही सामाजिक उत्थान की सोच को बल मिलेगा। नारी शिक्षित होने पर दो परिवार शिक्षित और संस्कारित होते हैं। सर्व समाज के बुद्घिजीवियों को इस दिशाा में प्रयास करने चाहिए। श्री गोयल बीकानेर में कान्ता खतुरियां कॉलोनी में श्री प्रजापति छात्रावास के उद्घाटन अवसर पर आयोजित समारोह में मु य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि समाज में बालिकाओं की तुलना में लड़कों की शिक्षा व पालन-पोषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जो अनुचित है। उन्होंने कहा कि एक बालिका बड़ी होकर, विभिन्न रूपों में समाज के प्रति अपनी जि मेदारी का निर्वहन करती है। उसके शिक्षित होने पर न केवल दो परिवार शिक्षित होंगे, वरन संस्कारवान भी बनेेंगे। बच्चों को पहली शिक्षा उसकी माँ से ही मिलती है। उन्होंने बीकानेर में प्रजापति समाज के छात्रावास के निर्माण में योगदान करने वाले समाज के भामाशाहों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण परिवेश की बालिकाओं को उच्च शिक्षा के लिए इस व$जह से वंचित रहना पड़ता है कि शहरों में उनके लिए आवास की सुविधा नहीं है। ऐसे मेें समाज के भामाशाहों को इस दिशा में भी प्रयास करने चाहिए।  ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि समाज में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, परन्तु सीमित आर्थिक साधन होने के कारण वे उच्च शिक्षा एवं प्रतियोगी परिक्षाओं की तैयारी नहीं कर पाते। इसलिए जरूरी है कि प्रजापति समाज एक कोष की स्थापना करे। इस कोष के माध्यम से प्रतिभाओं को अध्ययन के लिए सहायता प्रदान की जाए। उन्होंने समाज के भामाशाहों का आह्वान किया कि खुले दिल से इस कोष में धन राशि दान करें। उन्होंने कहा वही समाज प्रगति करता है, जो संगठित है। हमें  छोटी-छोटी बातों को न$जर अन्दाज करते हुए समाज हित में काम करना चाहिए।
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