मप्र में महिला सशक्तिकरण या शोषण

विलेज टाईम्स म.प्र. 3 जून 2015। म.प्र. में महिला सशक्तिकरण का डंका कितना ही क्यों न पीटा जाये मगर लगता है हकीकत इससे उलट है। सरकार की न...

विलेज टाईम्स म.प्र. 3 जून 2015। म.प्र. में महिला सशक्तिकरण का डंका कितना ही क्यों न पीटा जाये मगर लगता है हकीकत इससे उलट है। सरकार की नाक के नीचे ही शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं में कार्यारत महिला का जिस तरह से शोषण हो रहा है, वह काबिले गौर है जो महिला सशक्तिकरण का दम भरने नहीं थकते। 


हालिया मामला तब सामने आया जब भारतीय मजदूर संघ से संबंंध म.प्र. के शिवपुरी जिले की आंगनबाड़ी कार्यकत्र्ता, सहायिका संघ ने मु यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने अपनी मांगों में उल्लेख किया कि शासकीय सेवको की भांति आंगनबाड़ी कार्यकत्र्ता, सहायिका को अवकाश की पात्रता, प्रसूती अवकाश, चिकित्सा अवकाश, प्रदान किया जावे। विभागीय कार्य एवं प्रशिक्षण हेतु आने जाने का भत्ता तथा मृत्यु या स्थाई अपंगता होने की स्थिति में उसके ही परिवार की किसी महिला को नियुक्ति एवं शादी होने पर स्थानातांरण, साथ ही कलेक्टर रेट पर मान देय दिया जावे। 

ज्ञापन में इस बात का भी उल्लेख है कि उन्हें माह फरवरी 2015 से वेतन नहीं मिला है, उसका तत्काल भुगतान तथा आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पहुंचाई जाने वाली सामग्री के परिवहन का भुगतान शासन द्वारा किया जाये न कि आंगनबाड़ी कार्यकत्र्ताओं से एवं आंगनबाड़ी किराया तथा दूरांचल गांवों में आवास सुविधा मुहैया कराई जावे। 
आंगनबाड़ी कार्यकत्र्ता, सहायिकाओं का ज्ञापन इस बात का प्रमाण है कि शासन अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं को चलाने के लिये किस हद तक शोषण कर रहा है। इतना ही नहीं जिस तरह से केन्द्र सरकार से आंवटन के आभाव में विभिन्न योजनाओं कार्यरत योजना में कार्यरत लेागों को कई वर्षो तक काम लेने के बाद हटाया गया है। वह बड़ा ही शर्मनाक है। चाहे अनुसूचित जनजाति के भाषाई शिक्षक हो या फिर बीआरसीएफ योजनाओं में कार्यारत लेाग। जिसमें योजना विभाग ने तो हजारों युवाओं को हटाकर नजीर प्रस्तुत की है। जिसमें कईयों का तो बकाया मान देय तक नहीं दिया गया। यह म.प्र. की वो हकीकत है जो इस इंतजार में है कि शायद उसे फिर से किसी सच का नाम मिल जाये। मगर जिस तरह से आंगनबाड़ी कार्यकत्र्ता, सहायिकाओं का शोषण और विभिन्न योजनाओं से बेरोजगार युवा-युवतियों के साथ अन्याय हुआ है वह महिला सशक्तिकरण के जुमले को मुंह चिढ़ाने काफी है। 

तीन समूहों की मदिरा दुकानों की अनुज्ञप्ति निरस्त 12 जून 2015 को होगा पुनर्निष्पादन
विलेज टाईम्स म.प्र. शिवपुरी 02 जून 2015/ जिला कलेक्टर श्री राजीव दुबे ने समूह क्रमांक 16 (देशी मदिरा दुकान पोहरी, पिपरघार, परिच्छा एवं विदेशी मदिरा दुकान पोहरी), समूह क्रमांक 22 (दे.म.दु.बैराड़, गाजीगढ़, नदौरा एवं वि.म.दु.कालामढ़) एवं समूह क्रमांक-30 (दे.म.दु.झिरी, ऐचवाड़ा, खटका एवं भटनावर) के लायसेंसियों द्वारा देय संपूर्ण वार्षिक लायसेंस शुल्क जमा नही करने के कारण तीनों समूहों मदिरा दुकानों की अनुज्ञप्ति निरस्त कर दी गई है। इन मदिरा दुकानों की वर्ष 2015-16 की शेष अवधि हेतु 12 जून 2015 को पुनर्निष्पादन का कार्य किया जाएगा। 

उल्लेखनीय है कि पूर्व मे भी समूह क्रमांक-15 (दे.म.दु.खरई, सेसई एवं वि.म.दु.पडौरा चैराहा ) एवं समूह क्रमांक-24 (दे.म.दु. सुरवाया, लुधावली एवं वि.म.दु. करईडांडा तिराहा फोरलेन) एवं समूह क्रमांक-25 (दे.म.दु. भवेड, सुभाषपुरा, भानगढ़ एवं वि.म.दु.सुभाषपुरा) के लायसेंसियो द्वारा देय संपूर्ण वार्षिक लायसें फीस जमा न करने के कारण उक्त समूहों की मदिरा दुकानों की अनुज्ञप्ति निरस्त कर पुनःनिष्पादन की कार्यवाही की जा चुकी है। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य शासन के आदेशानुसार जारी सूचना विज्ञाप्ति में कहा गया है, कि शिवपुरी जिले की समूह क्रमांक 16, 22,30 की 10 देशी मदिरा एवं 2 विदेशी मदिरा की फुटकर ब्रिकी की दुकानों पर वर्ष 2015-16 की शेष अवधि के लिये कलेक्टर शिवपुरी की अध्यक्षता में गठित जिला समिति द्वारा कलेक्टोरेट शिवपुरी में 12 जून 2015 दिन शुक्रवार को जिला आबकारी अधिकारी शिवपुरी के कार्यालय से समूह क्रमंाक 16, 22, 30 की मदिरा दुकानों/एकल समूहों के लिये 2 जून 2015 से 11 जून 2015 तक कार्यालयीन समय प्रातः 10ः30 बजे से सायंकाल 5ः30 बजे तक तथा 12 जून 2015 को दोपहर 12 बजे तक टेन्डर प्रपत्र विक्रय किये जायेगें। तथा भरे हुये टेन्डर प्रपत्र जिला आबकारी अधिकारी शिवपुरी के कार्यालय में दिनांक 12 जून दोपहर 1 बजे तक जमा किये जायेगें। 12 जून को ही मदिरा दुकानो/एकल समूह के लिये प्राप्त टेन्डर कलेक्टोरेट सभाकक्ष शिवपुरी में दिनांक 12 जून को ही दोपहर 2 बजे खोले जायेगें। 
                  
बेटे-बेटियों के बीच भेदभाव संकीर्ण मानसिकता का परिचायक : डॉ. रमन सिंह
रायपुर, तीन जून 2015 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य के बालोद जिले के एक गांव में बेटे की चाहत में एक पिता द्वारा अपनी दो बेटियों की कुएं में ढकेलकर हत्या किए जाने की घटना की तीव्र निन्दा की है। उन्होंने कहा है कि यह एक अत्यंत शर्मनाक और निन्दनीय घटना है। उन्होंने जिले के ग्राम फरदडीह में इस घटना में दोनों बालिकाओं की मृत्यु पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि हमारी भारतीय संस्कृति में बेटियों को हमेशा सरस्वती, लक्ष्मी और दुर्गा के रूप में आदर और सम्मान के साथ देखा जाता है। आधुनिक युग में बेटे और बेटियों के बीच फर्क करना संकीर्ण मानसिकता का परिचायक है। ऐसी रूढ़ीवादी मानसिकता से परिवार, समाज और देश का भला नहीं हो सकता। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ सहित देश भर की बेटियां शिक्षा, ज्ञान-विज्ञान, कला-संस्कृति, खेल आदि विभिन्न क्षेत्रों में बेटों की तुलना में काफी आगे हैं और अपनी प्रतिभा का अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। बेटे-बेटियों में भेदभाव नैतिक और सामाजिक दृष्टि से भी उचित नहीं है। छत्तीसगढ़ सरकार ने हमेशा बेटियों के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। डॉ. सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जिसने बालिकाओं को कक्षा पहली से लेकर कॉलेज स्तर तक निःशुल्क शिक्षा की सुविधा देने का निर्णय लेकर उस पर अमल भी शुरू कर दिया है। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग सहित सभी वर्गों के गरीबी रेखा श्रेणी के परिवारों की बालिकाओं को हाई स्कूल में प्रवेश लेने पर निःशुल्क साईकिल दी जाती है। इसके लिए सरस्वती साईकिल योजना का संचालन किया जा रहा है। त्रिस्तरीय पंचायतों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है।

अवैध रूप से भू्रण लिंग परीक्षण में लिप्त महिला चिकित्सक गिर तार
जयपुर, 3 जून। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की पीसीपीएनडीटी इकाई ने सोमवार की देर सायं एक डिकॉय ऑपरेशन कर सड़क पर कार में अवैध रूप से भू्रण लिंग परीक्षण में लिप्त महिला चिकित्सक डॉ. संतोष पारीक को पीबीआई इन्जार्च द्वारा पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत गिर तार कर लिया। अवैध भू्रण लिंग परीक्षण का मामला दर्ज कर नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है। भू्रण लिंग परीक्षण करने वाले सोनोलॉजिस्ट मनोज कुमार शर्मा की तलाश की जा रही है। अध्यक्ष, राज्य समुचित प्राधिकारी (पीसीपीएनडीटी) एवं विशिष्ट शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग श्री नवीन जैन ने बताया कि सोमवार को सायं मुखबीर द्वारा सूचना प्राप्त होते ही आधे घन्टे की अवधि में डिकॉय आपरेशन की तैयारी की गयी। मुखबीर ने सूचित किया कि आज ही डॉ. संतोष पारीक भ्रूण लिंग परीक्षण करने हेतु तैयार है तथा वह प्रति गर्भवती महिला से 13 हजार रुपये भू्रण परीक्षण की मांग कर रही है। मिशन निदेशक ने इस सूचना पर पीसीपीएनडीटी प्रकोष्ठ प्रभारी श्री किशनाराम इशरवाल एवं प्रभारी अपराध शाखा  श्री विक्रम सेवावत को तत्काल डिकॉय आपरेशन करने के निर्देश दिये। एक गर्भवती महिला को इसके लिये तैयार किया गया एवं उसे मुखबीर के साथ मांगी गयी 13 हजार रुपये की राशि देकर रवाना किया गया। महिला चिकित्सक ने गर्भवती महिला को घाटगेट से एक कार में बिठाकर दिल्ली रोड़ की ओर ले गयी। रास्ते में घाटगेट से दो अन्य महिलाओं को भी सोनोग्राफी के लिये कार में बिठाया गया। श्री जैन ने बताया कि चंदवाजी के पास महिला चिकित्सक इस कार से उतर गयी एवं सोनोलॉजिस्ट ने कार में बैठकर कार को हाईवे से अन्दर की सड़क की ओर खड़े ट्रकी की ओट में स्वि ट डिजायर गाड़ी ले जाकर गर्भवती महिला की सोनोग्राफी की। गर्भवती महिला को सोनोग्राफी के उपरान्त पुन: चन्दवाजी में लाकर महिला चिकित्सक के साथ बस से जयपुर रवाना करने का आग्रह किया। लेकिन इस दौरान गर्भवती महिला ने पीसीपीएनडीटी अधिकारियों को बुला लिया एवं महिला चिकित्सक को आमेर थाने ले जाकर गिर तार कर लिया गया। महिला चिकित्सक के पास मौके पर ही गर्भवती महिला द्वारा सौंपे गये 500 रुपये के 20 नोट सहित कुल 1 लाख 58 हजार रुपये की राशि जब्त की गयी। गर्भवती महिला द्वारा महिला चिकित्सकों को दी गयी शेष 3 हजार रुपये की राशि महिला चिकित्सक द्वारा सोनोलॉजिस्ट को दी जा चुकी थी। मिशन निदेशक ने बताया कि पीसीपीएनडीटी थाने में अभियोग दर्ज कर अनुसंधान किया जा रहा है एवं सोनोलॉजिस्ट व अवैध भू्रण लिंग परीक्षण में लिप्त अन्य व्यक्तियों की तलाश की जा रही है। उन्होंने बताया कि नवीनतम प्रावधानों के अनुसार अवैध भू्रण लिंग परीक्षण की सही जानकारी देने वाले मुखबीर और उनके सहयोगियों को 2 लाख रुपये की राशि दी जायेगी। मुखबीर को 40 प्रतिशत, डिकॉय हेतु कार्य करने वाली महिला को 40 प्रतिशत एवं गर्भवती महिला के सहयोगी को 20 प्रतिशत राशि देने का प्रावधान है। 

पांच राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए एनटीपीसी को सराहनीय प्रदर्शन
एनटीपीसी के पांच स्टेशनों वर्ष 2013-14 के लिए विद्युत क्षेत्र में सराहनीय प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किया। दादरी गैस (840 मेगावाट) रजत पुरस्कार, कोरबा (2600 मेगावाट) और रामागुंडम (2600 मेगावाट) कांस्य पुरस्कार, विंध्याचल (4260 मेगावाट) और अन्ता (419 मेगावाट) योग्यता प्रमाणपत्र प्राप्त प्राप्त प्राप्त किया। क्षेत्र में दक्षता और प्रदर्शन के लिए ये पुरस्कार आज नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में श्री पीयूष गोयल, बिजली, कोयला और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) द्वारा प्रस्तुत किए गए।
7, संयुक्त चक्र गैस / तरल ईंधन, 1 हाइड्रो, 7 संयुक्त उद्यम स्टेशन (6 कोयला आधारित और एक गैस आधारित) और 8 आधारित 17 कोयला - एनटीपीसी की वर्तमान स्थापित क्षमता 40 विद्युत स्टेशनों के शामिल (संयुक्त उपक्रम के माध्यम से 6196 मेगावाट सहित) 44,598 है अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं। वित्तीय वर्ष 2014-15 के दौरान, एनटीपीसी के सभी कोयला स्टेशनों 83% से ऊपर की क्षमता घोषित हासिल की। एनटीपीसी ने कोयला स्टेशनों 64.46% के राष्ट्रीय पीएलएफ के खिलाफ के रूप में 80.23% की पीएलएफ हासिल की। वित्तीय वर्ष 14-15 में एनटीपीसी की कुल आय रुपये की वृद्धि हुई। रुपये में कर के बाद लाभ के साथ 241.261 अरब यूनिट के लिए 75,362.37 करोड़, जनरेशन। 10,290.86 करोड़ रुपये रहा। कंपनी पैदा करते हैं और अभिनव पर्यावरण के अनुकूल प्रौद्योगिकियों, जिससे देश की आर्थिक विकास, समाज के सामाजिक उत्थान के लिए योगदान के साथ कई ऊर्जा संसाधनों के उपयोग के अनुकूलन और एक स्वस्थ वातावरण को बढ़ावा देने से स्थायी तौर पर प्रतिस्पर्धी कीमतों पर विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है । एनटीपीसी ने हाल ही में Koldam में अपनी पहली पनबिजली परियोजना कमीशन और 2014-19 के दौरान अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 10,000 मेगावाट के विकास के लिए भारत सरकार को एक हरे रंग की प्रतिबद्धता दिया गया है। पर्यावरण के लिए चिंता '- जीएचजी तीव्रता को कम करने उच्च पीढ़ी पर जा रहे हैं' के अपने पर्यावरण दृष्टि से प्रेरित हैं जो एनटीपीसी के विकास की रणनीति का अभिन्न अंग है। एनटीपीसी हमेशा उत्सर्जन के स्तर को नियंत्रित करने के लिए उद्योग में नवीनतम तकनीकों और सर्वोत्तम प्रथाओं में निवेश किया है। एनटीपीसी ऊर्जा प्रौद्योगिकी और अनुसंधान गठबंधन (नेत्रा) जलवायु परिवर्तन, अपशिष्ट प्रबंधन, स्टेशनों और स्टेशनों की विश्वसनीयता के लिए वैज्ञानिक समर्थन से संबंधित विभिन्न परियोजनाओं पर काम कर रहा है।

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Village Times: मप्र में महिला सशक्तिकरण या शोषण
मप्र में महिला सशक्तिकरण या शोषण
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