शिवपुरी में, सिन्ध के लिये, जल आन्दोलन 8 जून को

म.प्र.शिवपुरी। पेयजल समस्या किसी एक की नहीं बल्कि शहर के 2 लाख से अधिक लोगों की है बाबजूद इसके जलावर्धन जैसी महत्वाकांक्षी योजना में जानबूझकर पेंंच लगाए जा रहे है जो शहर वासियों के साथ अन्याय है। जब माननीय न्यायालय ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाई और उस कमेटी ने क्या कुछ किया, आप सब जानते ही है ऐसे में आम जनता के साथ जुड़कर अब जल आन्दोलन का शंखनाद किया है
जिसके प्रथम चरण में 51 सदस्यीय कोर कमेटी बनी और अब इसी कमेटी के बैनर तले आगामी 8 जून सोमवार को माधवचौक पर सांकेतिक धरना देकर ज्ञापन सौंपा जाएगा। हम आशान्वित है कि मीडिया और जन सामान्य इस आन्दोलन से जुड़कर इसे सफल बनाएगा और एक दिन यह जल आन्दोलन घर-घर पानी पहुंचाकर ही रहेगा। उक्त बात, एड.पीयूष शर्मा ने पत्रकारों को स्थानीय होटल हैप्पीनेस में जल-आन्दोलन के संबंध में स बोधित करते हुये कही।  इस प्रेसवार्ता में उनके साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग भी थे जिसमें वीरेन्द्र शर्मा भुल्ले, हरिओम राठौर हट्ईयन, अशोक सक्सैना, भूपेन्द्र विकल मौजूद थे।

जिन्होंने सरकारों की लापरवाही एवं शहर वासियों की पीड़ा को व्यक्त किया।
प्रेसवार्ता में इन सभी ने मिलकर एक ही स्वर में अपनी बात रखी जिसमें कहा गया कि हमारा जल आन्दोलन ना तो किसी दल, ना ही किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ है, यह जल आन्दोलन हम शिवपुरीवासियों का दर्द और असहनीय पीड़ा भर मात्र है। यह उन लोगों के लिए ही नहीं, हमारे लिए भी एक संबल मात्र है जिनकी उपेक्षा राज्य व केन्द्र सरकार सहित उनके नौकरशाह विगत 30 वर्षों से कर रहे है। हालात ये है कि हम विगत 30 वर्षों से शहर के नालों से गुजर इकठ्ठा होने वाला मलमूत्र युक्त बारिश का जल ले रहे है अब तो उसके भी लाले है। यह जल आन्दोलन उन सरकारों और उनके उन नौकरशाहों के खिलाफ है जो हमें हमारे मूल अधिकार पेयजल अथवा नैसर्गिक सुविधाओं की प्राप्ति की राह में रोड़ा बने हुए है।

जल आन्दोलन के माध्यम से जो प्रमुख मांगे है उनमें प्रमुख मांगे इस प्रकार है.
* सरकारें जनता को बताऐं कि इस शहर में 30 वर्ष पूर्व जन्म लेने वाला बच्चा आज जवान है और 30 वर्ष का युवा बूढ़ा हो चुका है और कई बुजुर्ग हमारे बीच से यह पीड़ा झेल जा चुके है और नई पीढ़ी सामने है मगर शहरवासियों को शुद्ध पेयजल आज तक क्यों नहीं नसीब हुआ।
* सरकारें बताऐं कि वन-पर्यावरण से एक मर्तबा स्वीकृति मिलने के बाद योजना को किस कानून के तहत व किसके आदेश पर जलावर्धन येाजना का कार्य रोका गया।
* अगर वन पर्यावरण की मंजूरी गलत थी तो ए पॉवर कमेटी को संयुक्त सर्वे कर रिपोर्ट करने वाले अधिकारी-कर्मारियों के खिलाफ क्या कार्यवाही हुई।
* सिंध जलावर्धन का ले आउट किस अधिकारी द्वारा दिया गया तथा कार्य शुरू करने से पूर्व वर्क प्लान क्रियान्वयन एजेंसी से किस अधिकारी ने लिया। दोंनों को सार्वजनिक किया जाए।
* क्या सरकारें और सरकार के नौकरशाह ऐसे नौकरशाहों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा सीबीआई जांच संपूर्ण  मसले की कराऐगी। जिनकी त्रुटि या हठधर्मिता के चलते शासन का करोड़ो रूपया बर्बाद हुआ और जनतो को असहनीय पीड़ा झेलनी पड़ रही है।
* क्या सरकारें लिखित रूप से हम शहरवासियों यह अवगत कराऐंगी कि कब तक शिवपुरीवासियों को सिंध का शुद्ध पेयजल मिल सकेगा और तब तक की स्थिति में शहरवासियों को शुद्ध पेयजल मिल सके, इसके लिए क्या व्यवस्था रहेगी।

अनुशासित व शांतिपूर्ण ढंग से होगा धरना, ज्ञापन
जलावर्धन योजना के लिए संचालित किया गया जल आन्दोलन की भूमिका में रहने वाली कमेटी ने बताया कि भाईयों हमारा जल आन्दोलन अनुशासित व शांतिपूर्ण है जिसमें मन,क्रम,वचन,भाषा व आचरण में कतई किसी भी प्रकार की हिंसा या वाणी को कोई स्थान नहीं है इसके अलावा धरने में शामिल होने वाले सभी लोगों से अनुरोध है कि वह शांतिपूर्ण स मानित ढंग से आन्दोलन में भाग लें। किसी भी प्रकार की हिंसा के लिए हमारे साथ कोई स्थान नहीं है, ना ही वह हमारा साथी हो सकता है हमारा आन्दोलन अहिंसक, शांतिपूर्ण और अनुशासित है अन्यथा की स्थिति में यह आन्दोलन हमें उसी क्षण उसी स्थिति में स्थगित करना पड़ेगा।

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