नीतिगत राहुल के साथ, फिर राजनीति

व्ही.एस.भुल्ले। 9 मई 2015 विलेज टाईम्स। जिस तरह से पूर्व में भी अहम मुद्दों, रणनीति  के आभाव में जागीरों में बट निस्तनाबूत होते, कॉग्रे...

व्ही.एस.भुल्ले। 9 मई 2015 विलेज टाईम्स। जिस तरह से पूर्व में भी अहम मुद्दों, रणनीति  के आभाव में जागीरों में बट निस्तनाबूत होते, कॉग्रेस संगठन को पुर्नजीवित कर उसे उसके मूर्तरुप में लाने कवायत शुरु की गई थी। इतना ही नहीं 2014 के लेाकसभा  चुनाव की रणनीति जिस प्रकार से चली थी, लगता है कॉग्रेस के रणनीतिकारों ने कोई बहुत ज्यादा सबक नहीं लिया।
आखिर जरा-सी बात कॉग्रेस के मूड़धन्यो को क्यों समझ नहीं आती कि जब तक संगठन या तो जागीरदारी प्रथा या फिर संगठनात्मक आधार पर खड़ा करने की शुरुआत नहीं होती और आम जन से जुड़े मुद्दों पर रणनीति तैयार नहीं होती तब तक कॉग्रेस के बड़े घाग कॉग्रेस की छाती पर इसी तरह अकर्यमणता के होरे भूंज उसे इसी तरह निस्तनाबूत होते देखते रहेगें।

कारण साफ है कि जो संगठनात्मक दुर्गति लेाकसभा चुनाव से पूर्व कॉग्रेस की थी उससे बत्तर स्थिति कॉग्रेस की होती जा रही है। क्या कारण कि आलाकमान स्पष्ट निर्णय लेने में अक्ष य साबित हो रहा है। या तो सत्ता लोलुप लेागों का आलाकमान पर जबरदस्त प्रभाव है। या फिर जमीनी नेता और कार्यकत्र्ताओं की कमी, जो कॉग्रेस के विकास में सबसे बड़ी बाधा है।

मगर यहां यक्ष प्रश्न यह है कि जब समुचा कॉग्रेस संगठन आलाकमान और राहुल के ही सहारे चलना है, तो फिर संगठनात्मक सुधार प्रचार-प्रसार  और अहम मुद्दों पर चुप्पी क्यों ? आखिर कॉग्रेस आलाकमान और स्वयं राहुल उन नेताओं के आगे स्पष्ट निर्णय लेने में क्यों वैबस नजर आते है, जिनके कारण आज कॉग्रेस की यह र्दुगति है। क्या कॉग्रेस को यह इल्म नहीं कि लेाकसभा 2014 के चुनाव में देश की जनता ने कॉग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार या फिर स्व. इन्दिरा और राजीव गांधी की नेतृत्व वाली सरकारों ने अन्तिम छोर पर खड़े आम गरीब के लिये क्या कुछ नहीं किया। चाहे स्व. इन्दिरा जी के नेतृत्व में भारत का लेाहा विश्व बिरादरी में मनमानी की बात रही हो, या देश भर में महिलाओं की सुरक्षा बात, चाहे स्व. राजीव जी के नेतृत्व में शिक्षा, संचार, इलैक्ट्रॉनिक, वाहन क्रान्ति, सत्ता विकेन्द्रीकरण के लिये नगरीय निकाय एवं पंचायती राज की स्थापना के अलावा सूचना का अधिकार, मनरेगा, किसान के्रडिट कार्ड, भूमि अधिग्रहण बिल, महिला एवं बाल विकास, जननी सुरक्षा एवं ग्राम स्वास्थ अभियान आदि आदि अहम योजनाओं के बावजूद 5 वर्ष तक विपक्ष में बैठने का आदेश दिया है। और कॉग्रेस को संगठनात्मक मजबूती और आत्म चिन्तन का मौका दिया है। साथ ही जनता की यह अपेक्षा भी होगी कि वह सदन में बैठ मौजूद राजग सरकार पर नजर रख यह देखे कि वह कोई ऐसा निर्णय न ले सके जो जन विरोधी या आम जन को संकट में डालने वाले हो। अगर सरकार सदन में न सुने तब सड़क पर उतर आम जनता के सज्ञान में लाये।

मगर इसके बावजूद भी बैवजह के मुद्दों पर वेतर्क व्यानबाजी कर समय खराब करना  कॉग्रेस के लिये स्पष्ट संकेत है कि कॉग्रेस अभी भी उन अदृश्य कॉग्रेस के भस्मासुरो से मुक्त नहीं हो सकी है। जिन्होंने कॉग्रेस की अपने निहित स्वार्थो के चलते यह र्दुगति की है। भले ही कॉग्रेस में फिर से जान फूकने की शुरुआत राहुल के आने के बाद आक्रामक ढंग से हो गई हो, जिसमें राहुल का प्रदर्शन भले ही सर चढ़कर बोल रहा हो, मगर स्पष्ट रणनीति के आभाव में आज भी ठाक के चारपात नजर आ रहे है। कारण साफ है जो गलती कॉग्रेस विगत दो दशक से वैचारिक और व्यवहारिक तौर पर करती आ रही है वह आज भी अनवरत जारी है।

चाहे यू.पी.ए. वन और यू.पी.ए. टू सरकार बनाने बैमेल संगठनो से समझौता हो, या फिर देश भर में मौजूद जनाधार वाले अल बरदार हो या फिर कॉग्रेस चलाने वाले वो शुभचिन्तक सहयोगी, या फिर सलाहकार जिनका न तो कॉग्रेसी विचार से दूर-दूर का वास्ता रहा, न ही व्यवहारिक हकीकत से कोई वास्ता जो अपने स्वार्थ सामने रख कॉग्रेस को बिन मांगी सलाह परोसते रहे और येन-केन प्राकेरण वहीं लेाग आज भी कॉग्रेस पर हावी है।
कॉग्रेस के चश्मो चिराग बने श्रीमती सेानिया गांधी, राहुल गांधी कितना ही कड़ा परिश्रम क्यों न कर ले। अगर यहीं है हाल रहा तो कॉग्रेस की पार पढऩे वाली नहीं।

यह अलहदा बात है कि जितना कड़ा परिश्रम कर राहुल जमीनी स्तर पर कॉग्रेस के अन्दर जान फूकने की तैयारी में है मगर सत्ता लालचियों स्वार्थियों की जमात उन्हेंं कितना कुछ कर दे चाहेगी यह भविष्य के गर्भ में है।
बात साफ है जितनी घृणित, धटिया राजनीति ने हमारे लेाकतंत्र में जड़े जमा रखी है उसके बारे में सोच किसी भी भले व्यक्ति दिल सहर जाना स्वाभाविक है।

ऐसे में कॉग्रेस के शुभचिन्तकों और खासकर स्वयं राहुल की जबावदेही अधिक बन जाती है, कि वह अपनी भारत भ्रमण यात्रा को जारी रखते हुये लेागों के साथ जीवंत स पर्क के अलावा सीधे तौर पर भी देश भर से लेागों को जोडऩे का कार्य करे, क्योंकि एक वर्ष तो निकल चुका है अभी 4 वर्ष का समय बांकी है। यह सौभाग्य की बात है कि कॉग्रेस को स हालने स्वयं कॉग्रेस आलाकमान एवं सदन स हालने संसदीय दल के नेता दिल्ली में मौजूद है। उन्हें तो काकस से दूर खुले दिमाग से देश व देश के लोागों को समझने कॉग्रेस द्वारा किये कार्यो की छत्र-छाया में पूरे गर्भ के साथ भारत भ्रमण के दौरान सिर्फ कॉग्रेस की बात रखना चाहिए। सरकार के खिलाफ बात रखने या विपक्षी दलो को तार्किक रुप से अपनी बात रखने संगठन में तमाम लेाग है।

अगर राहुल इतना कुछ कर पाते है तो निश्चित ही उन्हें बहुत कुछ समझ आ जायेगा, कि देश और देश की जनता तथा आम कॉग्रेस कार्यकत्र्ता उनसे क्या चाहता है। तभी कॉग्रेस का कल्याण स भव है।

COMMENTS

Name

तीरंदाज,328,व्ही.एस.भुल्ले,523,
ltr
item
Village Times: नीतिगत राहुल के साथ, फिर राजनीति
नीतिगत राहुल के साथ, फिर राजनीति
http://1.bp.blogspot.com/-BAuR3tqwBks/VTT7hfwbViI/AAAAAAAAOLU/Xbx3FSZ-Q_o/s200/Rahul-Gandhi-bhopalsamachar.jpg
http://1.bp.blogspot.com/-BAuR3tqwBks/VTT7hfwbViI/AAAAAAAAOLU/Xbx3FSZ-Q_o/s72-c/Rahul-Gandhi-bhopalsamachar.jpg
Village Times
http://www.villagetimes.co.in/2015/05/blog-post_9.html
http://www.villagetimes.co.in/
http://www.villagetimes.co.in/
http://www.villagetimes.co.in/2015/05/blog-post_9.html
true
5684182741282473279
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy