समझदारों के बीच, न समझ का नया रुप

व्ही.एस.भुल्ले। सुन तो लो भैया, आपके प्रधानमंत्री, देश के प्रधानमंत्री, फायदा आपका ही है, नुकसान हमारा है, सलाह तो सुन ले, क्यों नहीं प...

व्ही.एस.भुल्ले। सुन तो लो भैया, आपके प्रधानमंत्री, देश के प्रधानमंत्री, फायदा आपका ही है, नुकसान हमारा है, सलाह तो सुन ले, क्यों नहीं प्रधानमंत्री किसानों के बीच जाते उनका दुख दर्द बांटते, 60 फीसदी मजदूर किसान है। बैसे भी प्रधानमंत्री जी की राजनैतिक नफा नुकसान की समझ हमारे से बेहतर है।
आदि-आदि लब्बो लुबाब से भरे उस न समझ नेता ने समझदारों के बीच अपने संस्कारिक और संयमित भाषण से समुची संसद में समा बांध दी। और भाषणों के माध्ययम से दिशा भी तय कर दी कि वह देश के 60 फीसद गरीब, मजदूर, किसानो के लिये दिल जान से काम करना चाहते है। क्योंकि लेाकतंत्र की असली ताकत भी यही है। और सत्ता सरकारों के सुख के हकदार भी। छ: गये गुरु।

संसद में राहुल के नेतृत्व में जो हमला कॉग्रेस के युवा तुर्को ने सिलसिले बार मोदी सरकार पर बोला वह देखने लायक था। इस सत्र में किसी को कुछ मिले या न मिले, मगर देश की लगभग 80 फीसदी आबादी की दिशा और दशा अवश्य सुनिश्चित हो जायेगी। अब जबकि समुचा विपक्ष भूमि अधिग्रहण बिल के विरोध में और सत्ता पक्ष कई संसोधनों सलाह पश्चात पक्ष में है, जिसे लेाकसभा में पूर्ण बहुमत और राज्य सभा में अल्पमत प्राप्त है। अब ऐसे में इस बिल का क्या होगा फिलहॉल भविष्य के गर्भ में है।

मगर जिस तरह की रणनीति सत्ता पक्ष द्वारा अपनाई जा रही है। उसके चलते कॉग्रेस के कई आरोप, शूट-बूट वाली सरकार, गरीब, किसान विरोधी सरकार इत्यादि हो और उसका विरोध भी सतत बना रहे। मगर जिस तरह के धैर्य का परिचय, सत्ता पक्ष संसद में दे रहा है। तमाम, आरोप प्रत्यारोपो के बीच उसे देखकर लगता है। कि वह अपने मंसूबे मेें कामयाब हो सकता है।

बहरहॉल जो भी हो जिस सार्थक समझ का परिचय संसद के अन्दर आंखों में आंखे डालकर पूर्ण आत्म विश्वास के साथ राहुल ने दिया है। उससे कोई गद-गद हो, या न हो, मगर समझदार इसमें तर्क खोज ही लेगें, मगर जो वर्क अभी होना बाकी है। वह है मैदानी जहां सामने राहुल और उन्हें निहारती वह लाखों करोड़ोंं में आंखे होगी। जो अपने नेता की नजदीक से परख कर सवाल करना चाहेंगी। तब राहुल का क्या जबाव होगा, देखना होगा।

मगर फिलहॉल तो जिस आत्म विश्वास के साथ टोका-टोकी के बीच उन्होंने अपनी बात रखी है। उसे देखकर लगता है कि समझदारों की भले ही घिग्गी बन्द हो, मगर कॉग्रेस आलाकमान सर्वाधिक खुश होगी। भैया अपुन तो बस इतना कहेगें, छ: गये गुरु।

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तीरंदाज,328,व्ही.एस.भुल्ले,523,
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Village Times: समझदारों के बीच, न समझ का नया रुप
समझदारों के बीच, न समझ का नया रुप
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