मनोवैज्ञानिक मायाजाल में, उलझी कॉग्रेस

दिमाक जिसका भी हो और रणनीति जो भी मगर इतना तय है कि अगर मनोवैज्ञानिक, मायाजाल में उलझ, कॉग्रेस इसी तरह स्वयं पर होने वाले औपचारिक अनौपचा...

दिमाक जिसका भी हो और रणनीति जो भी मगर इतना तय है कि अगर मनोवैज्ञानिक, मायाजाल में उलझ, कॉग्रेस इसी तरह स्वयं पर होने वाले औपचारिक अनौपचारिक हमलो पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करती रही तो कोई कारण नहीं जो कॉग्रेस मुक्त भारत का मंसूबा पाल अपने अभियान में जुटे लेागों को सफलता हासिल हो जाये।

अब इसे हमारे लेाकतंत्र का सौभाग्य कहे या दुर्भाग्य कि हमारे देश में लेाकतांत्रिक व्यवस्था तो है मगर इस लोकतंत्र में अहम भूमिका निभाने वाले राजनैतिक दलो में अब आन्तरिक तौर पर लेाकतंत्र नहीं बचा।
परिणाम की न तो मौजूद सत्ता धारी दल ही इस महान लेाकतंत्र को मजबूत बना पा रहै। न हीं विपक्ष इस लेाकतंत्र को बचा पा रहा। हर येक स्वयं स्वार्थ में डूब अंहकार की लड़ाई लड़ स्वयं को सुरक्षित रखना चाहता है।
कुछ उ मीद देश के सबसे बड़े महान दल कॉग्रेस से लेाकतांत्रिक व्यवस्था से उ मीद र ाने वालो को थी मगर वह भी अंहकार बस मनोवैज्ञानिक षडय़ंत्र का शिकार हो, सिर्फ और सिर्फ अपने अस्तित्व को बचाने में लगी है।
बड़े ही दुर्भाग्य कि बात है कि जिस रणनीतिक तरीके से 1984 के बाद कॉग्रेस को ठिये ठिकाने लगाने का इन्तजाम हुआ वह क्रम आज भी अनवरत जारी है।

यहां तक कि जिस दल को कभी पूर्ण बहुमत में सरकार बनाने की उ मीद न थी, साम, दाम, दण्ड, भेद की नीति के चलते आज वह केन्द्र में पूर्ण बहुमत में है।

जिस तरह से देश के एक युवा तुर्क के जमीनी प्रयासो को षडय़ंत्र पूर्ण तरीके से धरासायी किया गया आखिर किससे छिपा है सच तो यह है कि कॉग्रेस पर विगत 10 वर्षो में जो मनोवैज्ञानिक हमले षडय़ंत्र पूर्ण तरीके से हुये। निश्चित ही उसका सूत्रधार कॉग्रेस का ही कोई शुकनी या फिर जयचन्द रहा होगा। बरना आराम के दिनो में देश के गांवों की खाक छानती वह महान महिला जिसने इस देश के लिये वो हर अग्नि परीक्षा दी। जिसे शायद ही संस्कारों के इतिहास में संस्कारिक तरीके से दी हो। छोड़ शत युग को सिर्फ इसलिये जिसके लिये उसने सबकुछ न्यौछावर किया, कहीं उस पवित्र आत्मा को कोई कष्ट न हो, उस खानदान पर कोई सवाल न हो, जो भारत के लिये जिये और अपनी शहादत भी दी, जिससे न तो कॉग्रेस न ही देश को कभी शर्मिदा होना पढ़े। आज भी इस तपन भरी गर्मी में आम गरीब, किसान के बीच पहुंंच उनका दुख साझा कर संतावना देने में पीछे नहीं। इसी से हड़बड़ाई उन षडय़ंत्र कारियो की फौज जो मनोवैज्ञानिक हमले कर सत्ता सिंहासन तक पहुंची है। औछी हरकतो पर उतर आई है। और स्वयं संस्कारों को भूल ओछी बातें करने वालो को बढ़ावा दे रही है।
मगर लगता नहीं उस नेक दिल इन्सान जीवट महिला के इरादो पर कोई फर्क पढऩे वाला है, जिसने कभी बीमार होने के बावजूद भी फूड सिक्योरिटी बिल पास कराने अन्तिम समय तक संसद में डटी रही।
मगर दुर्भाग्य कि आज भी कॉग्रेस सबक सीखने तैयार नहीं। वह वो वही रियक्ट करती है जैसा कि सत्ता धारी दल चाहता है।
बेहतर हो कि आम कॉग्रेसी अपने नेता की त्याग, तपस्या बलिदान देख हो हल्ले के बजाये उनसे कुछ संस्कार सीख पाते।

सार्वजनिक पेयजल सुविधाओं के लिए व्यापक रणनीति: डॉ. रमन सिंह : मुख्यमंत्री ने कहा-चालीस साल का मुकाबला एक साल में करने का लक्ष्य
रायपुर, दो अपै्रल 2015 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में जनता को स्वच्छ पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी राज्य के रूप में एक नई पहचान मिली है। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत राज्य में विगत 40 वर्षों में एक लाख 73 हजार घरेलू नल कनेक्शन दिए गए थे, जबकि इस योजना के तहत अगले एक साल में दो लाख कनेक्शन देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार हम 40 साल का मुकाबला एक साल में करने का लक्ष्य लेकर और दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ पेयजल सुविधाओं के लिए एक व्यापक रणनीति बनाकर काम कर रहे हैं। डॉ. रमन सिंह ने गर्मी के मौसम को देखते हुए जिला कलेक्टरों और लोक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सभी जिलों में सार्वजनिक पेयजल व्यवस्था का विशेष रूप से ध्यान रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि हैण्डपम्पों और नल-जल प्रदाय योजनाओं की पानी टंकियों में पानी के शुद्धिकरण पर लगातार ध्यान दिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने हैण्डपम्पों के नियमित रखरखाव पर भी विशेष रूप से बल दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष 2014-15 में प्रदेश के गांवों में लगभग 2400 नल-जल प्रदाय योजनाओं के माध्यम से 94 हजार 400 परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन दिए गए। राज्य सरकार को 73 हजार से अधिक ग्रामीण बसाहटों में कम से कम एक-एक पेयजल स्त्रोत उपलब्ध कराने में भी अच्छी सफलता मिली है। मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वच्छ पेयजल की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने कल एक अप्रैल से शुरू हुए नये वित्तीय वर्ष 2015-16 के अपने बजट में 862 करोड़ रूपए का प्रावधान किया है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के लिए इस वित्तीय वर्ष का यह बजट प्रावधान पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले 14 प्रतिशत अधिक है। डॉ. रमन सिंह ने बताया कि नये बजट में 19 ग्रामीण सामूहिक नल-जल योजनाओं के लिए पांच करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है, इनमें से पन्द्रह सामूहिक नल-जल योजनाएं आदिवासी बहुल क्षेत्रों में मंजूर की गई हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि नये वित्तीय वर्ष के बजट में प्रदेश के 22 शहरों को भी नल-जल योजना में शामिल किया गया है। इसके लिए 28 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष 2014-15 में राज्य की दो हजार 232 ग्रामीण बसाहटों में और 734 स्कूलों में नये हैण्डपम्प लगाए गए। इसे मिलाकर विगत ग्यारह वर्षों में राज्य के लगभग 39 हजार स्कूलों में बच्चों के लिए नये हैण्डपम्प लगाकर स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जा चुकी है। अब इन्हें मिलाकर 47 हजार से ज्यादा स्कूलों में स्वच्छ पेयजल की सुविधा मिलने लगी है।

राजस्थान को छत्तीसगढ मेंं एक और कोल ब्लॉक का आवंटन
जयपुर, 2 अप्रेल। राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम को बिजली परियोजनाओं के लिए कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कोयला मंत्रालय द्वारा छत्तीसगढ मे स्थित ''केंते एक्सटेंशनÓÓ कोल ब्लॉक का आवंटन 31 मार्च को किया गया है। यह जानकारी देते हुए ऊर्जा राज्यमंत्री श्री पुष्पेन्द्र सिंह ने बताया कि भारत सरकार के कोयला मंत्रालय ने ''केंते एक्सटेंशनÓÓ कोल ब्लॉक का आवंटन राज्य को पूर्व में आवंटित ''पारसा ईस्ट एवं कांटा बासनÓÓ तथा ''पारसाÓÓ कोल ब्लॉक्स के अतिरिक्त किया है। ऊर्जा राज्यमंत्री ने बताया कि कोल ब्लॉक्स के आवंटन से उत्पादन निगम की वर्तमान में चल रही 250-250 मेगावाट की छबड़ा में स्थित दो इकाईयों एवं 600-600 मेगावाट की कालीसिंध में स्थित दो इकाइयों को कोयले की आपूर्ति सुचारू रूप से हो सकेगी। इसके अतिरिक्त निर्माणाधीन सुपरक्रिटिकल तकनीक पर आधारित 660-660 मेगावाट की छबडा में स्थित दो इकाइयों व 660-660 मेगावाट की सूरतगढ में स्थित दो इकाइयों के लिए भी कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित हो गई है। जिससे इन निर्माणाधीन ताप बिजलीघरो की इकाइयों को गति मिल सकेगी।

प्रस्तावित सड़क परिवहन एवं सुरक्षा विधेयक में ज्यादा जुर्माने का प्रावधान
नई दिल्ली 02-अप्रैल, 2015 सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सड़क परिवहन एवं सुरक्षा विधेयक के मसौदे का प्रस्ताव रखा है, जिस पर आम जनता से व्यापक सलाह-मशविरा किया गया और फिर उसे संबंधित मंत्रालयों को प्रेषित कर दिया गया है, ताकि कैबिनेट में पेश करने से पहले उनकी टिप्पणियों से अवगत हुआ जा सके। इस विधेयक में अनेक सुधारों का जिक्र किया गया है। सड़कों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना और विभिन्न अपराधों के लिए जुर्माने (पेनाल्टी) में वृद्धि करना भी इनमें शामिल है। आम जनता के साथ-साथ अन्य हितधारकों से मिली जानकारियों के आधार पर पहले मसौदे में प्रस्तावित पेनाल्टी को तर्कसगंत कर दिया गया। यही नहीं, अब चौथे मसौदे में प्रस्तावित पेनाल्टी पहले के मुकाबले काफी ज्यादा वृद्धि को दर्शाती है, जिसे संलग्न तुलनात्मक तालिका में दर्शाया गया है। जुर्माने की राशि वर्तमान मोटर वाहन अधिनियम, 1988 में उल्लेखित अर्थदण्ड से बहुत ज्यादा है। जुर्माना दरअसल वर्गीकृत पेनाल्टी के साथ-साथ जेल की सजा, नाम उजागर कर शर्मसार करने, सामुदायिक सेवा इत्यादि के रूप में भी है। बार-बार अपराध करने की स्थिति में जुर्माना राशि बढ़ाने का भी प्रावधान इसमें है। यही नहीं, विभिन्न अपराधों के लिए 'अवगुण अंक' भी दिए जाएंगे, जिनके आधार पर लाइसेंस निलंबित भी किया जा सकता है। मंत्रालय ने प्रस्ताव किया है कि अपराधों के कारणों से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद उस अनुसूची में परिवर्तन भी किया जा सकता है, जिसमें अर्थदण्ड का प्रावधान किया गया है।

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Village Times: मनोवैज्ञानिक मायाजाल में, उलझी कॉग्रेस
मनोवैज्ञानिक मायाजाल में, उलझी कॉग्रेस
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