BSNL: लुटते पिटते उपभोक्ताओं से ऐसी बैरहमी क्यों ?

माननीय सुनते नहीं श्रीमान, लाखो करोड़ों की पगार, काम धेले भर का नहीं, कलफ रहे है, हम माननीयों वोट देते वक्त शायद हमें यह इल्म न रहा हो...

माननीय सुनते नहीं श्रीमान, लाखो करोड़ों की पगार, काम धेले भर का नहीं, कलफ रहे है, हम
माननीयों वोट देते वक्त शायद हमें यह इल्म न रहा हो, मगर अब पीढ़ा सहन के बाहर है। क्षेत्र जो भी हो, सुविधा जैसी भी हो, मगर पूरे दाम चुकाने के बाद भी किसी को कोई सरोकार नहीं हमसे। फिलहॉल तो भारत संचार निगम के श्रीमान का कहना है पूरा बिल फिक्स प्लान मय समस्त टेक्सो के चुकाने के बाद की इच्छा आपकी है।
कि आप बी.एस.एन.एल ब्रॉडबेन्ड सुविधा रखे या न रखे। मैं बता दूं ये श्रीमान म.प्र. के शिवपुरी जिले में पदस्थ है। शायद इन्हें यह इल्म नहीं कि जिस हजारों लाखों, करोड़ों की पगार चुका, व करोड़ों रुपया इस बी.एस.एन.एल को खड़ा करने में जनता का खर्च हुआ और हो रहा है। वह इसलिये नहीं कि ऑफ जबानी जमा खर्च कर पगार पाये। माननीयों आपको भी भारत का संविधान यह हक नहीं देता कि आप ऐसे लेागों पर हजारों, लाखों, करोड़ों रुपया पगार के रुप में लुटाये क्योंकि यह राष्ट्रीय संपत्ति है।

न जाने म.प्र. ही नहीं समुचे देश में कितने ऐसे श्रीमान है जो नौकरी हासिल कर स्वयं को खुदा समझ आम जनता या उपभोक्ता को न चीज समझते है।

अजीब है माननीय तुम्हारी व्यवस्था जो आप उन निरीह लेागों को संरक्षण दे सुविधाये नहीं दिला पा रहै। जिनके वोट की दम पर आज आप को माननीय जैसे शब्दों से पुकारा जाता है।

माननीय कुछ तो करो, कम से कम म.प्र. के शिवपुरी जिलें में पदस्थ श्रीमान की कार्यप्रणाली ही दिखा ले या फिर बी.एस.एन.एल की सुविधाओं का भट्टा क्यों बैठा है। बिजलेन्स से जांच करा ले। आखिर लुटते पिटते उपभोक्ताओं से ऐसी बैरहमी क्यों ?

आखिर क्या अपराध है हम निरीह उपभोक्ताओं का, बस यहीं कि हम हमारी सरकार के उपक्रम के उपभोक्ता है। हमारा निवेदन है माननीयों, मत बनाओं ऐसी व्यवस्था, जिसमें कभी आपको भी इस पीढ़ा का एहसास करना पड़े, तब हो सकता है, जब आपके पास करने कुछ न हो।

छत्तीसगढ़ में बिजली आज भी सबसे सस्ती : डॉ. रमन सिंह
रायपुर, 24 मार्च 2015 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि छत्तीसगढ़ आज भी देश में सबसे सस्ती बिजली देने वाला राज्य है। हमारे यहां बिजली की दरें अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम हैं। डॉ. सिंह ने आज दोपहर यहां विधानसभा में अपने विभागों से संबंधित नये वित्तीय वर्ष 2015-16 की बजट अनुदान मांगों पर सदन में हुई चर्चा का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि विद्युत पारेषण और वितरण में हानि कम करके उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने वाले छत्तीसगढ़ देश का अग्रणी राज्य है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में बिजली आपूर्ति की औसत लागत (एवरेज कास्ट ऑफ सप्लाई) वर्ष 2014-15 में 4 रूपए 40 पैसे प्रति यूनिट है, जो अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है। मध्यप्रदेश में यह दर 4 रूपए 62 पैसे, गुजरात में 5 रूपए 25 पैसे, केरल में 5 रूपए 28 पैसे, महाराष्ट्र में 5 रूपए 56 पैसे और दिल्ली में 7 रूपए 80 पैसे प्रति यूनिट है। डॉ. रमन सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री शहरी विद्युतीकरण योजना के तहत राज्य के नगर निगम क्षेत्रों के विद्युती विहीन इलाकों में लाइन विस्तार किया जा रहा है और गरीबी रेखा श्रेणी के सभी परिवारों को निःशुल्क विद्युत कनेक्शन दिए जा रहे हैं। आगामी वित्तीय वर्ष 2015-16 के बजट में इस योजना के लिए 50 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने सदन को यह भी बताया कि सौर ऊर्जा प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए ग्रामीणों को सोलर पम्पों से पेयजल देने में भी छत्तीसगढ़ देश का अग्रणी राज्य है। हमारे यहां सुदूर गांवों में विगत तीन वर्ष में दो हजार 395 स्थानों पर सौर ऊर्जा चलित पम्पों के जरिये ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।

राजस्थान को पैरा मेडिकल हब बनाया जायेगा
जयपुर, 24 मार्च। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री राजेन्द्र राठौड़ ने कहा है कि चिकित्सा के क्षेत्र में रोजगार के व्यापक अवसर सृजित करने लिये प्रदेश को पैरा मेडिकल हब बनाया जायेगा।
श्री राठौड मंगलवार को विधानसभा परिसर में आयोजित राजस्थान पैरा मेडिकल कॉन्सिल की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने बताया कि राजस्थान पैरा मेडिकल कॉन्सिल द्वारा पैरा मेडिकल के विभिन्न पाठ्यक्रम संचालित कर युवाओं को रोजगार परक प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा। चिकित्सा मंत्री ने बताया कि राजस्थान पैरा मेडिकल कॉन्सिल द्वारा विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया संचालित की जायेगी एवं इन पाठ्यक्रमों की परीक्षायें चिकित्सा विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित की जायेगी। विभिन्न पाठ्यक्रमों के संचालन हेतु आव६यक आधारभूत ढांचे एवं अन्य आवश्यकताओं का निर्धारण करने के लिये अतिरिक्त मिशन निदेशक श्री नीरज के. पवन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। बैठक में प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्री मुकेश शर्मा, प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा शिक्षा श्री जे.सी. महान्ति, अतिरिक्त मिशन निदेशक श्री नीरज के. पवन, संयुक्त सचिव डॉ. एस.पी. सिंह, सवाईमानसिंह मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ.यू.एस. अग्रवाल, संयुक्त सचिव श्रीमती नीतू बारूपाल एवं राजस्थान पैरा मेडिकल कॉन्सिल के रजिस्ट्रार श्री गुंजन सोनी सहित स बन्धित अधिकारीगण मौजूद थे।

अधिकारियों के लिए 'तनाव से राहत' कार्यक्रम सरकार आयोजित करेगी: डॉ जितेंद्र सिंह
नई दिल्ली- पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि भारत सरकार का
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) आईएएस, सिविल सेवा और अन्य सरकारी अधिकारियों के लिए नियमित रूप से "तनाव से राहत" कार्यक्रमों की एक श्रृंखला का आयोजन करेगा, ताकि उनके मन को शांत रखने के साथ-साथ उन्हें हमेशा चुस्त-दुरुस्त भी रखा जा सके। इस श्रृखंला के तहत योग, कार्यशालाएं, खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम इत्यादि आयोजित किये जायेंगे। इस समय, डीओपीटी तीन राज्यों जम्मू-कश्मीर, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में राज्य सेवाओं में शामिल हुए नए कर्मचारियों के लिए प्रेरणा पाठ्यक्रम में एक अध्याय के रूप में "तनाव प्रबंधन" को भी रखने पर विचार कर रहा है और इन तीन राज्यों से प्राप्त अनुभव के आधार पर इस प्रयास को अन्य राज्यों में दोहराया जाएगा। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जो अधिकारी काम के बढ़ते बोझ और कार्यालय तनाव से परेशान हैं उनके लिए इस तरह के प्रयासों से न केवल उन्हें ऊर्जा मिलेगी बल्कि पूरे भारत में सिविल सेवा अधिकारियों की बिरादरी को एक साथ लाने में भी मदद मिलेगी। डॉ. सिंह ने कहा कि इससे प्रशासनिक कार्य में अपने कार्य की जिम्मेदारी लेने और जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसलिए, घर में तनाव प्रबंधन के प्रावधानों को अपनाने के लिए कहा जाता है। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि अधिकारियों को दो दिवसीय "तनाव प्रबंधन" कार्यक्रम में भेजा जाएगा जिसे इस महीने की 28 और 29 को तारीख को नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है तत्पश्चात् अप्रैल से भारत भर में चालीस विभिन्न केन्द्रों में अधिकारियों के लिए योग पाठ्यक्रम शुरू किया जायेगा। डॉ. सिंह ने कहा कि डीओपीटी न केवल सरकारी अधिकारियों के लिए इन कार्यक्रमों की योजना बना रहा है, बल्कि उनके बच्चों के लिए भी शैक्षिक ट्यूटोरियल, समर कोचिंग कैंप, आदि कार्यक्रमों के बारे में भी गंभीरता से विचार कर रहा है। 

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BSNL: लुटते पिटते उपभोक्ताओं से ऐसी बैरहमी क्यों ?
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