कुछ तो करिये, माननीय, श्रीमानो, हम बैहाल है, आपको तो, संवैधानिक संरक्षण, शक्तियाँ प्राप्त है

व्ही.एस.भुल्ले |  न तो सुरक्षा रही, न नहीं मान स मान, स्वाभिमान बचा है कमीशन खोरी ऐसी कि सत्ता प्रतिष्ठान तो दूर की कोणी अब तो व्यापार के नाम समुचा समाज ही संगठित गिरोह के रुप में एक दूसरे को लूटने में लग गया है।
जिस तरह रिश्वत कमीशनखोरी के बावजूद सत्ता प्रतिष्ठानो का विश्वास नहीं बचा है, उसी तरह व्यापार के नाम चल रहे कारोबार में भी असली, नकली का फर्क नहीं बचा है। कमीशन का ऐसा मोटा मुनाफा कि टॉप टू वॉटम इन्सीनियत तो गई तेल लेने, खुलेयाम लेागों का जमीर बिच रहा है। 
इन सब व्यवस्थाओं के बीच अनजाने में ही सही बैभाव आम आदमी कलफ रहा है। 
दिल्ली मे निर्भया हो या फिर दीमापुर की सरेयाम फांसी, दोनो ही घटना हमारी व्यवस्था पर कलंक है। काश माननीय और श्रीमानो ने दिल्ली के निर्भया काण्ड से सबक लिया होता और दिल्ली में उमड़े जनसैलाब का आकलन किया होता, तो आज दीमापुर (नागालैंण्ड) जैसा घटना क्रम नहीं हुआ होता। 
आज जब देश, समाज में तेजी से परिवर्तन, सूचना समझ के बढऩे का दौर चल रहा है। ऐसे में भी हमारे माननीय, श्रीमानो की यह गलत फहमी की कानून का राज पूरी मुस्तैदी से हमारे लेाकतंत्र में चल रहा है। 
कैसे बताये, माननीयो और श्रीमानो को कि सरकारे है शासन, प्रशासन है और कानून की मोटी-मोटी किताबे भी है। मगर कानून का पालन नहीं हो रहा है। हालात ये है कि जिन कानूनो का पालन कराने, नये कानून बनाने, बनवाने की सीधे-सीधे जबावदेही आपकी है। उनका पालन माननीय न्यायालयों को करवाना पढ़ रहा है। चाहे वह मामले पर्यावरण, कोयला आवंटन, स्पेक्ट्रम, कुपोषण, या फिर मानव अधिकारों से जुड़े हो, बैचारे आम नागरिक को ही जनहित में न्यायालयों की शरण में जाना पढ़ रहा है। 
शायद संवैधानिक संरक्षण शक्तियाँ प्राप्त हमारे माननीयों, श्रीमानों को एक और गलत फहमी है कि वह इस भीड़ तंत्र से निकल, अब सर्बाधिक सुरक्षित, स पन्न, रसूखदार बन चुके है। जैसे, तैसे, स्थापित व्यवस्था में तो उनकी स्वर्ग की तरह जिन्दगी कट जायेगी और उनकी आने वाली पीढ़ी भी उनके द्वारा बनाये गये, स्वयं के साम्राज्य में उनकी बिरासत को स हाल उन्हीं की तरह स्वर्ग के सुख उठायेगी। 
मगर माननीय, श्रीमानो लेाकतंत्र का स पूर्ण सच यह नहीं है, जहां विकट हालातो में बैहाल भीड़ दिन दूनी रात चौ$गुनी रफतार से जागरुक हो बढ़ रही है। उसमें शायद कोई आपको माई बाप मान निवेदन करे क्योंकि जिस तरह से लेाकतांत्रिक व्यवस्था में नई पीढ़ी के अन्दर समझ और सवालो की सीख बढ़ रही है।
और जो नरक आप लेागों की खुशफहमी के चलते तैयार हो रहा है। जिस तरह से समाज और व्यवस्था में स्वयं स्वार्थ का सैलाब बढ़ रहा है,अगर कभी इस सैलाब में उफान आया तो क्या बचेगा, कल्पना की जा सकती है। क्योंकि दीमापुर की घटना हमारे लेाकतंत्र के लिये एक शर्मनाक शुरुआत है। 
इसलिये हमारे माननीय और श्रीमान समय रहते ऐसी घटनाओंं को रोको माननीय जहां निरन्तर सत्ता में बने रहने का सपना तो श्रीमान अपनी अच्छी पोस्ंिटग और स्वार्थ को छोड़ो कहते है प्रकृति से छेड़छाड़ या प्रकृति द्वारा स्थापित सिद्धान्तो के प्रति मूकदर्शक की भूमिका दोनो ही मानव स यता के लिये ठीक नहीं, व्यवस्था तो बाद की बात है। 
सच तो यह है कि देश में कानून का पालन ही नहीं, वह लेागों को महसूस भी होना चाहिए। 

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च पर महिलाएँ बन रही हैं डिजिटल एवं इंटरनेट के प्रति जागरूक
भोपाल : शनिवार, मार्च 7, 2015,महिलाओं में इन्टरनेट एवं कम्प्यूटर के उपयोग को बढ़ावा देने एवं उनमें इसके प्रति जागरूकता लाने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा मध्यप्रदेश की 5 लाख महिलाओं को इन्टरनेट प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से विशेष अभियान की शुरूआत की गई है। इसे ई-शक्ति अभियान नाम दिया गया है। इसमें दैनंदिन के जीवन में डिजिटल, इन्टरनेट एवं कम्प्यूटर के उपयोग से होने वाले फायदों से अवगत करवाया जा रहा है । इससे महिलाएँ कम्‍प्‍यूटर के प्रति यूज्‍ड-टू हो रही हैं । अभियान ‘गूगल इंडिया’ के सहयोग से मेप-आईटी द्वारा संचालित है । ‘आम तौर पर कामकाजी महिलाएँ अपनी ड्यूटी से संबंधित कामकाज और गृहणियाँ अपने घर-परिवार के काम से सरोकार रखती हैं । पर अब यही महिलाएँ लेपटॉप-कम्‍प्‍यूटर के की-बोर्ड और माउस पर भी अपने हाथ आजमा रही हैं। प्रदेश में ई-शक्ति अभियान के जरिए महिलाओं में डिजिटल तथा इंटरनेट साक्षरता के लिए अभियान की शुरूआत हो गई है। डिजिटल मध्‍यप्रदेश की दिशा में यह एक महत्‍वपूर्ण कदम है । ई-शक्ति अभियान के पहले चरण में प्रदेश में एक लाख 59 हजार से अधिक महिलाओं को कम्‍प्‍यूटर का बेसिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है । प्रशिक्षण का काम निरंतर जारी है । अभी तक भोपाल सहित प्रदेश के 20 जिले – इंदौर, मुरेना, सिंगरौली, उज्‍जैन, रीवा, शाजापुर, शिवपुरी, आगर- मालवा एवं खरगोन आदि जिले में प्रशिक्षण का काम शुरू किया जा चुका है । अभियान में इंटरनेट की मूलभूत बातों जैसे-मोबाइल/लेपटॉप पर इंटरनेट ब्राउज़ करना, खोज विकल्‍प का उपयोग करना, ऑनलाइन वीडियो खोजने तथा देखने के लिए यू-ट्यूब का उपयोग, ई-मेल का परिचय तथा ई-मेल अकाउंट प्रारंभ करना और मेल तथा सोशल मीडिया और त्‍वरित संदेश के बारे में जागरूकता आदि विषयों को शामिल किया गया है । सभी विषयों पर वीडियो तथा ट्यूटोरियल लाइव प्रदर्शनों द्वारा जानकारी दी जाती है ।

महिला सशक्तिकरण आज की सबसे बड़ी जरूरत : डॉ. रमन सिंह
रायपुर 07 मार्च 2015 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कल आठ मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आम जनता सहित महिलाओं को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी है। डॉ. सिंह ने महिला दिवस की पूर्व संध्या पर आज यहां जारी शुभकामना संदेश में कहा है कि महिला सशक्तिकरण आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। महिलाएं घर-परिवार के साथ-साथ समाज और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी के लिए त्रि-स्तरीय पंचायत राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत आरक्षण दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जिसने देश का पहला खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा कानून बनाया है और उसमें राशनकार्ड घर की वरिष्ठ महिला मुखिया के नाम पर जारी करने का कानूनी प्रावधान किया गया है। राज्य में महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण के आंदोलन को दूर-दराज गांवों तक पहुंचाया गया है। छत्तीसगढ़ में स्कूली बच्चों के मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के संचालन में भी महिला स्व-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी देखी जा सकती है। डॉ. सिंह ने कहा कि बालिकाओं के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण को बदलने, कन्या भू्रण हत्या रोकने और बेटियों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए प्रदेश सरकार ने नोनी सुरक्षा योजना की शुरूआत कर दी है। इसमें राज्य शासन द्वारा गरीबी रेखा श्रेणी के परिवार की अधिकतम दो बालिकाओं के नाम पर प्रतिवर्ष पांच-पांच हजार रूपए जीवन बीमा निगम में जमा किए जाएंगे और बालिका 18 वर्ष की होगी तो उसे एक लाख रूपए मिलेंगे। प्रदेश सरकार ने बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कॉलेजों में स्नातक कक्षाओं में उन्हें निःशुल्क शिक्षा देने का निर्णय लेकर उस पर भी अमल शुरू कर दिया है। सरस्वती साईकिल योजना के क्रियान्वयन से राज्य के हाई स्कूलों में बालिकाओं की दर्ज संख्या में उत्साहजनक वृद्धि देखी जा रही है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सभी महिलाओं के उज्जवल भविष्य की कामना की है।

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं को सही मायने में अधिकार स पन्न बनाएं-मु यमंत्री
जयपुर, 7 मार्च। मु यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के अवसर पर प्रदेश की सभी महिलाओं को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। श्रीमती राजे ने अपने संदेश में कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा इस वर्ष महिला दिवस का सूत्र वाक्य ''मेक इट हेपन'' रखा गया है। महिलाओं को सही मायने में अधिकार स पन्न बनाकर और स माननीय दर्जा देकर ही इस वाक्य की सार्थकता सिद्घ की जा सकती है। मु यमंत्री ने कहा कि आज महिलाएं अपने बल पर अधिकार और प्रतिष्ठा हासिल कर रही हैं किन्तु हमें उनके खिलाफ होने वाली हिंसा को पूरी तरह खत्म कर उन्हें समाज में समान व्यवहार और अधिकार देना चाहिए तभी दुनिया सच्चे अर्थों में प्रगति कर सकेगी।
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