लुट गया रे लेाकतंत्र...?

तीरंदाज। 
भैया- कहीं धन-बल तो कहीं बाहुबल चल गया रे, मुओं के मुंह पर माटी ढले,जिस तरह से गांव चौपाल की सत्ता हथियाने ल_ लुहागी चमक सरेयाम संगीने गरजी है। पऊआं, पैसा लेने देने वालो में होड़ मची है। ऐसे पंच सरपंचो के चुनाव देख लगता है अब तो परमेश्चर भी कांप रहा है। लेकिन गांव चौपालो पर पहुंचने वाले पंचपरमेश्चरों से कितना स्वराज बचेगा मने तो सोचकर ही कलेजा कांपे।
क्या हारे अंहिसा के पुजारी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इसी दिन के लिये ग्राम स्वराज की कल्पना की थी। ईमान बिच गया। ल_ लुहांगियो से आम गरीब पिट गया न जाने आग उगलती संगीनों से कितनो का भाग्य बदल गया। मैं तो बौल्यू भाया अब तो पंचायती राज में चुनाव, लेाकसभा, विधानस ााओं से भी महंगा हो गया। लेाकतंत्र के भगवानो की ऐसी भक्ति शायद ही कभी किसी चुनाव में हुई होगी। जहां शराब नोटो की शायद ही कोई कमी रही होगी। दबंगई ऐसी कि खुलेयाम वोट हथियाने त मचे चल गये, कुछ अस्पताल तो कुछ ऊपर हो लिये। अब तू ही बता भाया मने के करुं। नगरीय निकाय चुनावों में खुलकर चले शराब, पैसों के बटौने देख सोचा था। शहर छोड़ किसी गांव के ग्राम स्वराज में ठिया जमा लू, ऐसे लेाकतंत्र से तो कम से कम जान छुड़ा लू, अब जब ग्राम स्वराज में ही जान के लाले है, जब ग्राम स्वराज के मुखिया ही शराब, पैसा बांट ल_ लुहांगी तमंचों की ताकत पर बनने वाले है, तो मने जाऊं तो जाऊं कहां।
भैये- तने तो बावला शै कै थारे को मालूम कोणी हारा महान लोकतंत्र फिलहॉल पूरे चरम पर चल रहा है। फिर जनता के द्वारा जनता के लिये, चुने जाने वाला शासन ही तो हमारा लेाकतंत्र है। अब अगर ऐसे में जनता के ही लेाग नेाट लेते है और वोट देते है और फिर ल_, लुहांग, तमंचे, संगीने चलाने वाले भी तो जनता के बीच से ही है, तो हर्ज कैसा ?
भैया- तो क्या लेाक अलग और तंत्र अलग हो लिया है, फिलहॉल लेाक तो कुछ करने से रहा मगर तंत्र क्या कर रहा है। 
भैये- मुये पूरे चुनाव में तंत्र ने ही तो कानून का पालन किया है। कै थारे को मालूम कोणी बैठकों पर बैठके, नियमित दिशा निर्देषों पर निर्देश और जो भी अमला था उसी को लेकर तो चुनाव किया है। अगर ऐसे में पऊंआ, पैसा, ल_, लुहांगी, तमंचे चले है, तो कार्यवाहीं कानून के तहत होगी। अगर अपराध हुआ है तो सजा भी अवश्य होगी। 
भैया- मने समझ लिया तने भी तंत्र की ही भाषा बोल रहा है। हम लुटे पिटे गांव के गरीबों की कहां सोच रहा है। मने तो बोल्यू अगर इसी तरह स्वराज मिला तो वोटर लिस्ट से ही नाम कटा लूगां, जैसे भी हो ऐसे पंच परमेश्चरों से अपनी जान बचा लूगां। मने न लागे हारा जैसा भी भला आदमी इस मारकाट, वोटो की लूटपाट, खरीदा, बैची के बीच इस जन्म में कभी चुनाव लड़ पायेगा। मने तो लागे हारी काठी के चुनाव का सपना तो अगले जन्म ही पूरा हो पायेगा। क्योंकि कानून का राज है। उसमें जनता भगवान, और भगवान के आर्शीवाद से आसीन भक्त सत्तासीन है। ऐसे में हारी देश भक्ति की फिल्म कहां चल पायेगी, मने तो बोल्यू हारी फिल्म तो बॉक्स ऑफिस पर पहले ही दिन पिट जायेगी। 

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