कांग्रेस: भाग्य बदलने, भारत भ्रमण जरुरी

विलेज टाइम्स। कॉग्रेस में किसी भी बढ़े बदलाव के पूर्व या बाद में राहुल का सौजन्य भारत भारत भ्रमण जरुरी है। क्योंकि यह भारत भ्रमण कॉग्रेस के लिये भविष्य में दूर की कोणी साबित हो सकता है। अगर यो कहें कि कॉग्रेस का भविष्य बदलने भारत भ्रमण जरुरी है। तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी।

यह अलहदा है कि राहुल की सुरक्षा के दृष्टिगत कुछ बाधा हो सकती है। क्योकि जितनी जरुरत कॉग्रेस को राहुल की है उससे कहीं ज्यादा जरुरत उन्हें सुरक्षा की भी है।
मगर समय-समय पर प्रकट उनके इरादे, विचारो और पूर्व का उनका गांव चौपाल भ्रमण इस बात की गारन्टी देता है कि वह देश के आम गरीब, मजदूर, किसान और देश के कल्याण के लिये किसी भी बाधा को आड़े नहीं आने देगें।
ऐसे में कॉग्रेस को चाहिए कि वह भ्रमण कार्यक्रम ऐसे निर्धारित करे जिसमें दिन की यात्रा और रात्री विश्राम सुरक्षित हो।

भारत भ्रमण के दौरान राहुल के पास बताने कॉग्रेस और कॉग्रेस के महान नेताओं का स्वर्णिम इतिहास है और सुनने देश भर के आम गरीब किसान, मजदूरों की समस्यायें, और उनके साथ संवाद है। जो उन्हें उन लेागों को समझने का मौका देगा जिनके लिये वह काम करना चाहते है। साथ ही कॉग्रेस के उन मठाधीसों के बारे में भी सीधा समझने का मौका मिलेगा। जो अपने आपको उस क्षेत्र का सर्वमान्य नेता और छत्रप समझते है साथ ही उन सलाहकार और सहयोगियों को भी वह सीधे समझ सकेगें। जो स्वयं को बड़ा उस्ताद और गांधी परिवार का बफादार बताते है।
कहने का मतलब राहुल केे लिये भारत भ्रमण वह आयना साबित होगा जिसमें सब कुछ साफ दिखेगा हो सकता हैं फिर उन्हें न तो जनपथ न ही अकबर रोड़ पर किसी संजय की जरुरत न पढ़े कि बताओं संजय देश और कॉग्रेस में क्या और क्यों हो रहा है। क्योंकि तब आयना उन्हीं के हाथ होगा।
भारत भ्रमण का दूसरा अहम लाभ यह होगा जो लाखों, करोड़ों लेाग चाहते है कि राहुल नेतृत्व कर कॉग्रेस के नीति सिद्धान्तों के साथ देश को आगे ले जाये। वह उनसे मिल संवाद कर उनके साथ कंधे से कन्धा मिला खड़े हो सके। और उनके साथ एक शसक्त, समृद्ध भारत का निर्माण कर सके। जो लाखों करोड़ों समर्पित कार्यकत्र्ताओं नेताओं की टीम, स्वयं कॉग्रेस, स्व. राजीव, इन्दिरा जी के बाद खड़ी न ही कर पाई, वह टीम कॉग्रेस के साथ खड़ी होगी।
बहरहॉल जिस तरह की खबरे दिल्ली के गलियारों में गूंज रही है बेहतर हो उनके मूर्त लेने से पूर्व यह सुनिश्चित हो जाये कि खराब या अनुपयोगी इस दुनिया में कुछ भी नहीं होता। वशर्ते आपको उनकी विशेषता अनुरुप उपयोग करना आना चाहिए। क्योंकि किसी संगठन का मूल मंत्र तोडऩा नहीं जोडऩा होता है। बस लेागोंं के काम और काम करने का तरीका बदल जाता है। और यह सब नेतृत्व पर निर्भर करता है कि किस व्यक्ति से क्या काम लेना है और यह तभी स भव है जब भारत भ्रमण हो।

शालाओं में 16 मार्च से पेयजल, स्वच्छता एवं जागरूकता संबंधी गतिविधियाँ होगी
भोपाल : मंगलवार, मार्च 10, 2015,राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल, स्वच्छता एवं जागरूकता सप्ताह में 16 से 22 मार्च तक मध्यप्रदेश की शालाओं में विभिन्न गतिविधि की जायेंगी। सप्ताह के संबंध में गतिविधियों के संचालन के लिये सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिये गये हैं। सप्ताह के दौरान शालाओं में पेयजल की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिये उसके स्रोत का परीक्षण किया जायेगा। परीक्षण की जाँच रिपोर्ट प्रधानाध्यापक को उपलब्ध करवाई जायेगी। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के समन्वय से यह कार्यवाही होगी। शाला में पेयजल की शुद्धता सुनिश्चित करते हुए पेयजल विद्यार्थियों की पहुँच में रखने तथा उसका संधारण सही तरीके से किया जायेगा। शाला की चाइल्ड केबिनेट द्वारा जागरूकता सप्ताह के दौरान व्यक्तिगत स्वच्छता की मॉनीटरिंग, मध्यान्ह भोजन के पहले साबुन से हाथ धुलवाने की गतिविधि और पेयजल स्रोत के आसपास की सफाई, शिक्षकों की उपस्थिति में की जायेगी। विद्यार्थियों द्वारा शौचालय पर स्वच्छता के संदेश भी लिखे जायेंगे। स्वच्छ भारत मिशन में संचालित किये जाने वाले स्वच्छता दस्तक अभियान में गतिविधियों के संचालन के संबंध में अलग से निर्देश जारी किये गये हैं। इसमें माध्यमिक शाला के विद्यार्थियों की सहभागिता से स्वच्छता रैली होगी। रैली में विद्यार्थियों का समय 45 मिनट से अधिक नहीं लगे, इसका ध्यान रखा जायेगा। खुले में शौच की प्रथा से मुक्ति के लिये अपने घर पर शौचालय के निर्माण, सुधार एवं उपयोग को बढ़ावा देने, विद्यार्थियों के जरिये घरों में स्टीकर लगवाया जायेगा। विद्यार्थियों द्वारा समुदाय में स्वच्छता की स्थिति का संकलन कर प्रधानाध्यापक एवं ग्राम पंचायत के सचिव को दी जायेगी।

ग्रामीणों को लगातार रोजगार देने की पहल
रायपुर 10 मार्च 2015 राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ में ग्रामीणों को लगातार रोजगार के अवसर देने की पहल करते हुए कोसा-रेशम के उत्पादन को बढ़ावा देने की तैयारी शुरू कर दी है। इस सिलसिले में मुख्य सचिव श्री विवेक ढांड ने सभी जिला कलेक्टरों को यहां मंत्रालय (महानदी भवन) से पत्र लिखकर जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं। इस कार्य के लिए सभी जिलों में कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति का गठन किया जाएगा। मुख्य सचिव ने पत्र में लिखा है कि राज्य में कोसा-रेशम उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। यह कार्य लगातार रोजगार सृजन करने वाला भी है। कोसा-रेशम उत्पादन कार्य के विस्तार के लिए शासकीय और निजी भूमि पर होने वाले वृक्षारोपण में कोसा कृमि पालने योग्य वृक्ष जैसे कौहा (अर्जुन), साजा आदि वृक्षों को प्राथमिकता दी जाए। आगामी मानसून में प्रस्तावित वृक्षारोपण के लिए अभी से स्थल का चयन कर नर्सरी आदि तैयार की जाए। नर्सरी तैयार करने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना, 13वें वित्त आयोग, गौण खनिज आदि मदों का उपयोग प्रावधानों के अनुरूप किया जाए।

आवासनियों के विवाह के लिये 31 मार्च तक आवेदन पत्र आमंत्रित
जयपुर,10 मार्च, राज्य महिला सदन जयपुर मे विवाह योग्य आवासनियों का विवाह द्वारा पुर्नवास किया जाना है। इसके लिये 21 से 52 वर्ष तक की आयु के इच्छुक पात्र आवेदकों से 31 मार्च 2015 तक आवेदन आमंत्रित किये है। महिला सदन की सहायक निदेशक सुश्री श्रद्वा गौतम ने बताया कि महिला सदन में 18 वर्ष से 47 वर्ष की 16 सामान्य एवं 19 से 42 वर्ष की 10 मूक बधिर महिला है। उन्होंने बताया कि जयपुर सीकर, झुन्झुनू, दौसा अलवर जिले के आवेदक राज्य महिला सदन जयपुर में, अजमेर, टोंक, नागौर एवं भीलवाड़ा जिले के आवेदन नारी निकेतन अजमेर में, बीकानेर श्रीगंगानगर, हनुमानगढ एवं चूरू के आवेदन नारी निकेतन बीकानेर में, बूदी, बॉरा, कोटा एवं झालावाड जिले के आवेदक नारी निकेतन कोटा में, जोधपुर, जैसलमेर, बाडमेर, पाली एवं सिरोही एवं जालोर जिले के आवेदक नारी निकेतन जोधपुर में, उदयपुर, डूगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौडग़ढ़, प्रतापगढ़ के आवेदक नारी निकेतन उदयपुर तथा भरतपुर, धोलपुर, करौली एवं सवाईमाधोपुर जिले के आवेदक नारी निकेतन भरतपुर के कार्यालय में अपना आवेदन जमा करा सकते है।

समाज को सशक्त बनाने में महिला सशक्तिकरण अनिवार्य है :- डॉ. जितेन्द्र सिंह
नई दिल्ली केन्द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि पूरी मानवता को सशक्त बनाने में महिला सशक्तिकरण अनिवार्य है। डॉ. जितेन्द्र सिंह आज यहां भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अनुसरण में 'महिला सशक्तिकरण' विषय पर आयोजित एक कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मूलविषय के रूप में 'महिला सशक्तिकरण से मानवता सशक्तिकरण की ओर' का बहुत ही सटीक और सार्थक चयन किया गया है। मंत्री महोदय ने कहा कि कभी-कभी पुरुष का सशक्तिकरण एक अकेले व्यक्ति के सशक्तिकरण तक सीमित रहता है, किंतु एक महिला के सशक्तिकरण से उसके माता-पिता, पति और बच्चों सहित पूरे परिवार का सशक्तिकरण होता है। एक ओर जहां कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए अकसर समुचित विधान बनाये जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस बात का भी उतना ही महत्व है कि वहां एक ऐसा कार्य-अनुकूल वातावरण होना चाहिए, जहां महिलाएं न केवल अपनी क्षमता का सर्वश्रेष्ठ निष्पादन करें, बल्कि अपने कार्य के माध्यम से आत्म-सम्मान बढ़ने का अनुभव भी करें।
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