भय, भूख, भ्रष्टाचार युक्त माहौल में विकास उन्मुख बजट

वीरेन्द्र शर्मा/विलेज टाइम्स/1 मार्च 2015। बजट जैसा भी हो फिलहॉल यह कोई परिणाम नहीं, यह तो भावी योजनाओं का प्रतिबि ब मात्र है। कि भारत स...

वीरेन्द्र शर्मा/विलेज टाइम्स/1 मार्च 2015। बजट जैसा भी हो फिलहॉल यह कोई परिणाम नहीं, यह तो भावी योजनाओं का प्रतिबि ब मात्र है। कि भारत सरकार की मंशा देश व देश वासियों को किस दिशा में कैसे-कैसे ले जाना चाहती है। और उसकी क्या तैयारी है सो नकारात्मक, सकारात्मक टीका टिप्पणियों के बजाये गर किसी के पास और बेहतर सुझाव हो तो आना चाहिए। क्योंकि देश सभी का है। और अगले आने वाले 4 वर्ष तक देश बजट प्रस्तुत करने वाली सरकार का ही चलाना है।

मगर इस बजट के लिये यक्ष प्रश्र यह है कि वह भय, भूख, और भ्रष्टाचार युक्त माहौल में, संघीय ढांचे की भावनाओं का स मान करते हुये। अपने विकास उन्मुख बजट की भावी योजनाओं को कैसे पूरा कर पायेगी। जबकि कई प्रदेशों में आज भी उनके धुर विरोधी दलो की सरकारे है। अगर यूं कहे कि केन्द्र में तो भय, भूख, भ्रष्टाचार से निवटने की शुुरुआत ऊपर से हो चुकी है। मगर राज्यों में भय, भूख, भ्रष्टाचार से कटे बबालो का क्या होगा ?
आखिर जमीनी स्तर पर तो केन्द्र की येाजनाओं और उसके बजट की भावनाओं को अमली जामा तो राज्य सरकारे को ही पहनाना है।
क्योंकि जिस तरह का भय भारत के आम नागरिक में शिक्षा, स्वास्थ, सड़क, सुरक्षा, रोजगार और स्वयं के कत्र्तव्य, अधिकारों को लेकर है। वह बड़ा ही वी ात्स और खतरनाक है। क्योंकि जहां शिक्षा को लेकर पालको में भय है कि उनका बच्चा सरकारी स्कूल गया तो क्या उसे स्कूल में शिक्षक मिल जायेगें। शिक्षक मिल गये तो क्या वह पढऩे योग्य स्थान पर बैठ पायेगें ? का शिक्षक वाक्य में पढ़ायेगा। अगर इन सबसे इतर पालक इतना कमा सकता है कि उसका बच्चा और किसी अच्छे प्रायवेट स्कूल के नाम बने शिक्षा के शॉरुमों में पढ़ाना चाहे तो क्या उस शिक्षा की कीमत वह चुका पायेगा। इन सबके बावजूद भी अगर वह जितना भी पढ़ ले क्या उसकी शिक्षा अनुसार या उसके अधकुचले अथवा अधूरी शिक्षा के चलते वह कौशल प्राप्त हो पायेगा। जिससे उसेे रोजगार मिल सके ?
रहा सवाल स्वास्थ का तो ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली लगभग 70 फीसदी आबादी और शहरी आबादी को यह विश्वास नहीं कि जिन्दगी मौत से जूझते व्यक्ति को शासकीय चिकित्सालय में दाखिला मिल जायेगा। जिस हालत में उसका जीवन है उस हालत में क्या वह दवाओ के अनचाहे बिलो का भुगतान कर पायेगा।
सड़क परिवहन की हालत ऐसी कि कई राज्यों में तो हाइवे है ही नहीं अगर है भी तो हालत ऐसी कि सड़क में गड्डे है या गड्डों में सड़क। वहीं एक्सीडेन्टो में अपाहिजो होने और मरने वालो के आंकड़े बताते है कि देश में ट्राफिस सेन्स की हालत कैसी है। मनचाहे चक्का जैम, वाहनो की तोड़ फोड़, आगजनी अवैध बसूली, हाइवे पर अपहरण लूटपाट इत्यादि।
रहा सवाल सुरक्षा का तो हाईवे के हालातो से तो आप परिचित हो लिये। देश की राजधानी ही नहीं कई राज्यों में मासूम बच्चियों के साथ बलात्कार घर में घुसकर बलात्कार, खेत पर बलात्कार, शौच जाते वक्त बलात्कार, चोरी डकैती, अपहरण, अवैध बसूली कानून की आड़ में बसूली बैवजह टेरर जमाने, अमानवीय मारपीट, मातृशक्ति से दुव्र्यवहार और उस पर करोड़ों युवा बेरोजगार हालात ये है काम करने लायको को काम नहीं नकाराओं के विस्थापन की भी कोई व्यवस्था नहीं। यह सही है कि तत्वरित और स मान जनक रोजगार हेतु एवं देशी उत्पादन बढ़ाने कल कारखानों की जरुरत होती है। मगर जिस देश में 70 फीसदी आबादी का जीवोत्पार्जन कृषि हो जिससे देश के लेाग जिन्दा रह देश चलाने में सहयोग करते हो।
उनके लिये सबसे बड़ा कल कारखाना जल होता है जिससे उसके खेती के रुप में स्थापित छोटे-छोटे कल कारखाने चल, बड़े-बड़े कल कारखानों को रो मंटेरियल देते है। जिससे देश को आर्थिक गति मिलती है।
अगर इन गांवों के लाखों हेक्टर कारखानों को कुछ भी न मिले बस केवल खेती योग्य जल और सड़क मिल जाये तो देश के अन्दर एक,दो लाख,दस लाख ही नहीं करोड़ों हाथों को रोजगार स्वत: ही मिल जायेगा।
मगर हालात ये है कि बिजली पर तो अरबो खरबो रुपये लुटाये जाते है मगर सिंचाई क्षेत्र की हालत अब भी बद से बत्तर बनी हुई है। किसानो को नहीं पता कि वह जो बीज, खाद, कर्जा लेकर जमीन पर हाड़ तोड़ मेहनत कर डाल रहे है, उसे इसकी फसल मिल जायेगी या नहीं, अगर भगवान भरोसे फसल हो भी गई तो मंडियोंं में बगैर चेारी हुये उसे उसकी फसल की सही कीमत मिल जायेगी, या नहीं।
आज न तो नागरिक ही स्वयं अपने आपको कत्र्तव्य अधिकारों की तराजू पर समान रख पा रहा है और न ही सरकारे बस जैसे भी हो देश में सब कुछ चल रहा है। कानून है मगर ठीक से पालन नहीं हो रहा है। कई उदाहरण देश के अन्दर है कि माननीय न्यायालयों को सरकारों को जनहित याचिकाओ मे दिशा निर्देश ही नहीं स्पष्ट आदेश भी देने पढ़ रहे है।
मगर फिर भी उस गति से काम नहीं हो रहा है चाहे घपले घोटाले हो या फिर नीतिगत निर्णय स ाी ने माननीय न्यायालयो के निदेशों के के बावजूद काम की गति ठीक नहीं है। जिस कत्र्तव्य अधिकार का बोध न्यायालय को कार्यपालिका को कराना पढ़ जाये ऐेसे में उ मीद की जा सकती है, व्यवस्था की। सवाल ये नहीं कि किस सरकार का कैसा बजट रहा, लगभग सभी सरकारे अपनी समझ, नीतियों अनुसार अपना-अपना बजट राष्ट्र व जनकल्याण के लिये पूरी निष्ठा ईमानदारी से लाती है।
मगर जहां संस्कृति, स यता, संस्कारो का ही जनाजा निकल चुका हो, लेाग और लेागों के समूह या संगठन स्वयं में लीन हो, जिनकी जमी भ्रष्टाचार और असमा अंहकार हो, तो फिर हाय तौबा कैसी।
जिसके लिये जरुरी है देश में मुहर बन्द जबावदेही फिर भले ही क्षेत्र जो हो, प्रधानमंत्री जी आपने तो अपनी संस्कृति, स यता, संस्कारों का सदन के दर पर माथा टेक साबित कर दिया कि आप कैसा भारत देखना चाहते है मगर उनका क्या जो आज भी स्वयं के स्वार्थो की खातिर भ्रष्टाचार, अंहकार की गोद में बैठ अठखेलियाँ करना चाहते है।
अगर वाक्य में ही आप बार-बार ढेाल पीट किसी की बरबादी के मकबरे का आनन्द लेना चाहते है। तो वह है अंहकार और भ्रष्टाचार अगर आप यह सब कर पाये तो, आपकी सरकार के सारे बजट सार्थक होगें, बरना 67 वर्ष तो निकल ही चुके एक एक 5 वर्ष और जुड़ जायेगें।

COMMENTS

Name

तीरंदाज,328,व्ही.एस.भुल्ले,523,
ltr
item
Village Times: भय, भूख, भ्रष्टाचार युक्त माहौल में विकास उन्मुख बजट
भय, भूख, भ्रष्टाचार युक्त माहौल में विकास उन्मुख बजट
http://2.bp.blogspot.com/-kdTDlWVmL3M/VKOBNv4i8rI/AAAAAAAA8_E/dKOzXHwdf8g/s1600/narendra%2Bmodi.jpg
http://2.bp.blogspot.com/-kdTDlWVmL3M/VKOBNv4i8rI/AAAAAAAA8_E/dKOzXHwdf8g/s72-c/narendra%2Bmodi.jpg
Village Times
http://www.villagetimes.co.in/2015/02/blog-post_86.html
http://www.villagetimes.co.in/
http://www.villagetimes.co.in/
http://www.villagetimes.co.in/2015/02/blog-post_86.html
true
5684182741282473279
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy