भारत महान में, राष्ट्रभक्त की हुंकार...

व्ही.एस.भुल्ले तीरंदाज/विलेज टाइम्स/28 फरवरी 2015
भैया- मने तो पहले ही बोल्या, बगैर सोचे समझे, आग, पानी से दूर ही रहना ठीक है। मगर मशखरों का क्या ? सो भाई लेाग कूद पढ़े कैडर वालो की सरकार के प्रस्तुत होने वाले बजट की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान, जब से सत्ता क्या गई भाई लेागों का तो हाजमा ही बिगड़ा हुआ है।
सो रे रे कर जब भी मौका मिलता है सदन की सीढ़ी पर माथा टेक, सदन में कह चुके भक्त की 2019 में वह अपना प्रोगे्रस कार्ड लेकर आयेगें। को कासेने, मजाक उड़ाने में लग जाते है। और यह भूल जाते है कि सर पर कफन बांध सेवा के लिये निकला सैनिक या सच्चा देश भक्त अंगारो से भरा होता है। सो चर्चा में बगैर तैयारी के हाथ डालने पर जलना स्वभाविक ही था, फिर ये क्या बात हुई कि अपना घर तो स हल नहीं रहा, बात-बात में कई घरों के दो वक्त के चूल्हे जलाने वाले अडनानी, अ बानी को ले आते है दिल जले।
अब तू ही बता भैया में कै करुं। हारे को तो हारी र्दुगति पर छाती कूटना आवे, हद तो तब हो गई जब भक्त ने हारी,
महान योजना, महात्मा गांधी, राष्ट्रीय रोजगार गारन्टी को हारे संगठन का मकबरा तक बोल दिया। और मसखरे सुनते रहे किसी ने भी न बोल्या कि भक्त जी आपकी निष्ठा और राष्ट्र भक्ति पर हमें कोई संदेह नहीं, देश व देश वासियों के कल्याण के लिये हमारी तरह आपकी पीढ़ा भी हो सकती है। देश व देश वासियों की सेवा हमने भी की है। और आज भी कर रहे। और भविष्य में भी करते रहेगें। मगर मनरेगा किसी का मकबरा नहीं गांव के गरीब, मजदूरो का यह सुरक्षा कवच है और देश व देश वासी आज जिस स्थति में है हमारी देन है। आज दिल्ली की सत्ता विकेन्द्रीकरण के कारण देश में ग्राम नगर स्वराज से लेकर देश भर के गली, मोहल्लो, चौपालो तक नगरीय निकाय, पंचायती राज के रुप में गरीब के घर तक जा पहुंची है वह हमारी ही देन है। ऑटो मोबाइल क्रान्ति, ऊर्जा, संचार, इलैक्ट्रॉनिक क्रान्ति, जिसकी दम पर आप देश को मेकइन इण्डिया बनाने का सपना देख रहे है वह हमारी देन है। 
जिन पटरियों पर आपके रेल मंत्री 200 कि.मी. की रफतार से ट्रेन दौड़ाने का सपना देख रहे वह हमारी ही देन है। जिन स्वास्थ सेवाओ, कृषि उत्पादन, बड़े बड़े बाँधो, आर्थिक नीतियों के चलते देश समृद्धी की ओर अग्रसर है वह हमारी देन है। 
जिन आधार कार्ड, खाद सुरक्षा के सहारे जन धन का डंका पीटा जा रहा है। वह हमारी देन है। 
जिन पूरी हुई हाल ही में बड़ी योजनाओं का फीता काट आपने देश का धन्यवाद लिया वह उसी की देन है। जिसके मकबरे को आप मनरेगा के रुप में सुरक्षित रख बार-बार ढेाल पीटना चाहते है। 
ौये- तने क्या बावला शै आखिर कै बोले जा रिया शै। कै थारे को मालूम कोणी हारे महान राष्ट्र भक्त जी सरकार का महान बजट चल रहा है,उसमें जिसको जो भी मिले मगर राष्ट्र कल्याण बिल्कुल स्पष्ट दिख रहा है। 
गांव के गरीब मजदूर के मान स मान के सुरक्षा कवच पर थारे को इतना गुस्सा आया के तने भी बेसुरा बोले जा रहा है। क्या तने भी अपने संगठन वालो की तरह गलती दोहरा रिया शै। कै थारे को मालूम कोणी 9 महिने से एक राष्ट्र भक्त को बार-बार मनरेगा, कालाधन, भ्रष्टाचार, भूमि अधिग्रहण को लेकर कोसा जा रहा है। व बगैर सर पैर के ही आरोप मड़ा जा रहा है। अगर बैचारे भक्त को भी क्षणिक गुस्सा आ गया तो कोई पहाड़ थोड़े ही टूट पड़ा, मैं बोल्यू भैये कि अब तो राजनीति का दौर खत्म है। और राष्ट्रनीति का दौर शुुरु हो चुका है अगर कोई नेक सलाह है भारत को फिर भारत महान बनाने की तो सुना और अपने संगठनों वालो को भी हाथों हाथ बता कि अगर सलाह नेक, सकारात्मक रचानात्मक है, तो सुनी जायेगी बरना अभी तो बात मकबरे की हुई है बात चली तो बहुत दूर तलक जायेगी। क्योंकि ाक्त के सर पर राष्ट्र व राष्ट्र वासियों के कल्याण का भूत सवार है। सो तो मैं तो बौल्यू चुप ही कर, इतने पर तो चल जायेगी, बरना थारी तो थारी हारे चिन्दी पन्ने की भी मिट्टी खामे खा वैभाव पिट जायेगी।
भैया- मने समझ लिया थारा इसारा मगर मने हारे महान मशखरों का कै करुं जो बगैर तैयारी के ही टी.व्ही. चैनल तो चैनल, अखबार अलग से, हद तो तब है जब अब तो भाई लेाग सदन में भी कुछ तो पैल जाते है। और मुंह की खाकर रसभरी की तरह मुंह बिगाड़ चले आते है। बेहतर हो मने प्रशिक्षण शिविर लगा लू और एक ही बार में गाड़ी भरे बुलाकर समझा दूं। कि देश, कॉग्रेस और नेता महान कैसे बनते है। 
क्योंकि इतने पर तो चल जायेगी आज नहीं तो कल अवश्य हमारी बारी आयेगी। क्योंकि हारे गांव, गली के बुजुर्ग कहते है कि कभी घूरे के भी दिन फिरते है जहां मैदान थे वहां महल होते है, जहां महल होते है वहां कभी खण्डर होते है। 
भारत माता की जय हो । 
बोल भैया कैसी रही। 

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