खबर का असर, सीहोर में आबकारी टेंडर पर रोक

म.प्र सीहोर जिले की देशी-विदेशी शराब की 24 दुकान समूहों पर आये सिंगल टेन्डर पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। और सहायक आबकारी आयुक्त नीरजा श्रीवास्तव को आनन-फानन में वहां से हटाते हुये उन्हें आबकारी आयुक्त ग्वालियर अटैच कर दिया गया है। उनके स्थान पर जगन्नाथ किराड़े को जिला आबकारी अधिकारी सीहोर पदस्थ किया गया है।

ज्ञात हो कि 20 फरवरी को हुये सीहोर में देशी-विदेशी शराब दुकान समूहों के टेन्डर हुये थे जिसमें पूर्व ठेकेदार द्वारा ही सभी समूहो पर आबकारी विभाग द्वारा पिछले वर्ष की कीमत से 15 प्रतिशत बढ़ाकर न्यूनतम आरक्षित मूल्य तय किया था। लेकिन जब टेन्डर हुये तो पिछले साल शराब दुकानों का ठेका लेने वाले ठेकेदार की ओर से सभी दुकानों समूहों के लिये सिंगल टेन्डर डाला गया। जो कि निर्धारित आरक्षित मूल्य से मात्र आधा प्रतिशत अधिक थे। जिसकी खबर विलेज टाई स ने आयुक्त आबकारी से फोन पर यथा स्थिति के बारे में जानकारी लेते हुये समाचार प्रकाशित किया था। सीहोर में षडय़ंत्र, पीएस ने की कार्यवाही।

मगर हालिया खबरों की माने तो कलेक्टर सीहोर ने शासन को मार्गदर्शन हेतु पत्र लिखा था जिसका जबाव भी आबकारी आयुक्त के कार्यालय से जिला समिति के अध्यक्ष कलेक्टर सीहोर को भेज दिया गया है। कि शासन की नीति अनुसार टेन्डर स्वीकृति या आस्वीकृति के अधिकार जिला समिति के पास है और वह ही निर्णय ले।

यहां यह बताना उल्लेखनीय है कि 20 फरवरी को ही म.प्र. के झाबुआ जिले में 118 प्रतिशत सिवनी में 101 प्रतिशत, बालाघाट में 90 प्रतिशत, गुना में 73 प्रतिशत, अशोकनगर में 84 प्रतिशत, टीकमगढ़ में 66 प्रतिशत, धार में 55 प्रतिशत, उज्जैन में 43 प्रतिशत, सिंगरौली में 77 प्रतिशत, राजगढ़ में 32 प्रतिशत, नीमच में 33 प्रतिशत अधिक मूल्य के जबकि सीहोर में आरक्षित न्यूनतम मूल्य से मात्र आधा प्रतिशत अधिक के टेन्डर आये।

बहरहॉल प्रमुख सचिव वाणिज्यकर का कहना है कि जब अन्य जिलों में 100 प्रतिशत से अधिक की बढ़त शराब की मिली है वहीं सीहोर में मात्र आधा प्रतिशत इजाफा क्यों हुआ इसकी वह जांच करा रहे है यदि गड़बड़ी पाई गई तो इस टेन्डर को रोक दिया जायेगा।

फिलहॉल एक बात तो तय है कि जब अधिकांश जिलों में शराब ठेको खुलकर बढ़त मिल रही है ऐसे में प्रमुख सचिव का यह कहना कि जांच कराई जा रही है। अगर गड़बड़ी पाई गई तो टेन्डर रोक दिया जायेगा। स्वभाविक सी बात है जिन शराब ठेको को विगत वर्षो से मात्र 20 प्रतिशत राशि बढ़ाकर रिनूबल कर उन्हीं ठेकेदारों को दी जा रही थी या जिन दुकानों के रिन्यूबल न होने कारण निर्धारित मूल्य से कम कीमत पर दी गई। अब जबकि खुले टेन्डर हुये तब 30 प्रतिशत से लेकर 100-200 नहीं बल्कि कुछ समूह दुकानों पर तो 295 प्रतिशत से अधिक दर पर टेन्डर आये है। इससे अन्दाजा लगाया जा सकता है कि सरकार को रिन्यूबल नीति के तहत कितने हजार करोड़ के राजस्व का नुकसान विगत वर्षो में हुआ है, यह यक्ष प्रश्र है ?

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