जंग में तब्दील, ग्राम स्वराज: सेवा के नाम संगठित लूट की शुरुआत

सत्ता हासिल करने सेवा के नाम गांवों में शराब, पैसा, चन्दा, या फिर बटौना बांट, वोट हथियाने या फिर ल_ लुहागि लहरा जनमत स्वयं के पक्ष में करने खुलेयाम कट्टे, बन्दुको के इस्तमाल ने साबित कर दिया कि हमारा लेाकतंत्र किस दिशा में बढ़ रहा है।

अभी तक तो लेाकसभा विधानसभाओं के चुनावों में जब तक इस तरह की घटनायें सामने आती थी और नगरीय चुनावों में प्रलोभन देकर चुनाव जीतने की कहानियां सुनाई जाती थी।
मगर ग्राम स्वराज या पंयायती राज की अवधारणा कभी इस तरह से लेाकतंत्र में मूर्त रुप लेगी, शायद ही कानून बनाने वालो ने कभी सपने में भी न सोचा होगा।
अपुष्ट सूत्रों की माने तो सरपंची में 1 हजार से लेकर 5000 तक पर व्यक्ति इसी तरह जनपद, जिला सदस्यी के लिये भी हजार से लेकर दो हजार तक तथा जनपद, जिला पंचायत अध्यक्षी में 20-20 लाख तक चर्चे है आखिर हमारा जनतंत्र किस दिशा में चल निकला है।
जिनके पास धन कमाने के सिवाए जनसेवा के लिये समय ही नहीं फिर उनके द्वारा जनसेवा के नाम इतना मेाटा खर्च आखिर क्यों ?
क्या ग्राम स्वराज की अवधारणा सत्ता की खातिर जंग का मैदान बनती जा रही है। चुनावों मे बढ़ते धन बल, बाहुबल के चलते क्या जनतंत्र की भावना जीवित रह पायेगी ?
जिस तरह से शराब उपहार नगद या सार्वजनिक स्थलो को विकास के नाम धन लिया या दिया जा रहा है। जिस तरह से गांव-गांव ल_ लूहागी, तमन्चे चल रहे उसे देखकर तो नहीं लगता कि यह सेवा या ग्राम स्वराज की जंग है।
मगर यहां यक्ष प्रश्र यह है कि अगर इस तरह की सेवा की बीमारी ने जनतंत्र को जकड़ जीत में महारथ हासिल कर ली और लेाकतंत्र में अपना स्थान मुक्कमल कर लिया तो कोई कारण नहीं जो 70 फीसदी आबादी कभी सत्ता में पहुंच जनसेवा के सपने देख पायेगी। अब्वल गरीबों की फौज तो स्वत: ही सत्ता से वंचित हो जायेगी क्योंकि ऐसी सत्ता प्राप्ति और जनसेवा के लिये उसके पास न तो इतना धन है और न ही बाहुबल है। चेतना होगा, हमारी संवैधानिक संस्थाओं और सरकारों को जहां संवैधानिक संस्थाओं को लोगों को लेाकतंत्र में मिले अधिकारों की रक्षा करनी होगी।
वहीं सरकारों को भी समझना होगा कि अघोषित साम्राज्यवाद न तो हमारे राष्ट्र न ही हमारे लेाकतंत्र के हित में है। क्योंकि बात अब केवल टॉप लेवल की नहीं, अब तो राजनैतिक गन्दगी वॉटम लेवल तक आ पहुंची है। जिसका सुदृणीकरण, शुद्धीकरण जरुरी है। जिसमें सभी की भूमिका अहम है। 
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