अक्स को झुठलाना, अस्तित्व को संकट

व्ही.एस.भुल्ले। भले ही ढाई वर्ष पूर्व से आम कॉग्रेसी कलफ अपनी बात कॉग्रेस के मंच और कॉग्रेस मठाधीसों के आगे कॉग्रेस बचाने चिल्लाता रहा ...

व्ही.एस.भुल्ले। भले ही ढाई वर्ष पूर्व से आम कॉग्रेसी कलफ अपनी बात कॉग्रेस के मंच और कॉग्रेस मठाधीसों के आगे कॉग्रेस बचाने चिल्लाता रहा हो, तथा घूम-घूम कर कॉग्रेस सरकारों, संगठनो में मौजूद उन कुरुप चेहरे को दिखाता रहा हो जो स्वयं का भविष्य उज्जवल और कॉग्रेस के अस्तित्व को, संकट खड़े कर अपना उल्लू सीधा कर कॉग्रेस आलाकमान या फिर कॉग्रेस उपाध्यक्ष राहुल की कड़ी मेहनत पर अपनी कारगुजारियों के चलते उंगलियाँ उठवाते रहे है।

मगर राहुल सब कुछ जान कर भी चुप्पी साधे रहे वह भी अपनी मां से मिले संस्कारों बस मगर अब जब कई बड़े प्रदेशों में ही नहीं समुचे देश में सहित अब देश के हदृय स्थल दिल्ली में एक सिरे सूपड़ा साफ हो, अब तो कॉग्रेस के ही अस्तित्व पर ही संकट छा गया हो। फिर भी कांग्रेस के चेहरों की बॉडी लेंग्यूज और संवाद टी.व्ही. चैनलो पर देखने लायक है। इतनी बड़ी हार के बाद भी कॉग्रेसी चेहरों में बदलाब न आना इस बात का स्पष्ट संकेत है, कि जिस कॉग्रेस के लिये पंण्डित जी से लेकर स्व. शास्त्री, स्व.इन्दिरा जी के स्व.राजीव जी और वर्तमान में जो त्याग श्रीमती सोनिया कर रही है। वो कॉग्रेस का बजूद तो है मगर अब उसमें प्रांण नहीं है बरना देश भर के बड़े-बड़े राज्य व देश सहित स्वयं दिल्ली का चेहरा बन ग भीर मसलो पर जो ददीले, संवाद, भाषा, बॉडी लेंग्यूज इतनी हल्की और मशखरी भरी न होती। क्योंकि महात्मा गांधी जो कहते थे जैसे आप है बैसे दिखना ही नहीं लेागों को महसूस भी होना चाहिए।

और कॉग्रेस का बजूद उसकी पहचान पण्डित जी के समाजवाद स्व.शास्त्री के जय जवान जय किसान, स्व.इन्दिरा जी के दूर दृष्टी कड़ी मेहनत, पक्का इरादा जैसे नारो और स्व.राजीव जी के पंचायती, नगर राज के साथ आधुनिक समृद्ध भारत और सोनिया जी के स पूर्ण जीवन त्याग तथा राहुल के संस्कारो से है। शायद कॉग्रेस के चेहरो ने इस इतिहास को बिसार एक नई पहचान कायम की है। जिसे आम कॉग्रेसी ही नहीं समुची कॉग्रेस की आत्मा आम गरीब, किसान सभी ने नकार दिया है परिणाम कि कॉग्रेस आज संगठनात्मक तौर पर तो अस्तित्व पहले ही खो चुकी है अब तो धीरे-धीरे उसके सत्ता केे भी सभी रास्ते बन्द होते जा रहे है इसे देखकर लगता है कि भविष्य में कहीं उसे अपने बजूद से ही संघर्ष न करना पढ़े।

मगर ऐसे में अब भी बड़ी जबावदेही राहुल की बन जाती है कि वह कॉग्रेस के बजूद आम गरीब, किसान, मजदूर, और दबे कुचले वर्ग सेे सरल, सीधा स पर्क और संवाद स्थापित कर एक नई शुरुआत करें। नहीं तो कोई कारण नहीं जो कॉग्रेस में कोई ठोस बदलाव आ सके।

उसके लिये जरुरी है कि वह जिस भी स्थति मे ंहै अपने पिता की तरह भारत भ्रमण अवश्य करे। अपनी मां से मिले संस्कारो के साथ देश व देश के लेागों से स पर्क और संवाद कायम करे। अखण्ड भारत का इतिहास गवाह है जिस भी नायक ने सच्चे दिल, ईमानदारी, से राष्ट्र व राष्ट्र के नागरिको की सेवा का संकल्प लिया है इस देश की महान भूमि और इस पवित्र भूमि पर रहने वाले लेागों ने उन्हें हमेशा स्वीकार जरुर किया है। ये अलहदा बात है कि शुरुआती दौर में वह भले ही अकेला रहा हो, मगर एक समय वह भी आया कि सारा जमाना उसके साथ रहा है। फिर चाहे वह नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, स्वर्गीय महात्मा गांधी, आजाद ागत सिंह, पं.नेहरु, शास्त्री जी, इन्दिरा जी, स्व.राजीव जी, अटल जी, सेानिया जी, मोदी, और अब केजरीवाल यूं तो स्व.लेाहिया, जयप्रकाश नारायण के आन्दोलन से भी चौ.चरण सिंह करपूरी ठाकुर, लालू, मुलायम जैसे नेता गड़े गये। पटनायक, करुणानिधि, जयलिता, ममता,माया एनटीरामाराव, चन्द्रशेखर, जैसे नेता निकले सभी को जनता ने उनकी मेहनत का पुरुषकार दिया तो वहीं आर्थिक और भ्रष्ट राजनीति की चकाचौंध ने एक ओर ईमानदार संघर्षशील लेाहियावादी, रघु भाई को नकार भी दिया है। जो आज भी सच्चे समाजवाद के लिये संघर्षरत है। इसलिये बेहतर हो कि कॉग्रेस की पहचान के साथ मां से मिले संस्कारों की छत्र छाया में राहुल भारत भ्रमण की शुरुआत करें। भारत वह पुण्य भूमि है जिसने अशोक सम्राट ही नहीं, चन्द्रगुप्त, पृथ्वीराज चौहान, शिवाजी, हैदर अली, टीपू सुल्तान, महाराणा प्रताप, सुभाष बाबू, महात्मा गांधी जैसे वीर सपूत दिये। किसी को चाड़क्य जैसे महान विद्ववान, तो किसी को चन्द्रवस्दाई अगर यो कहेंं कि किसी किसी को तो मां के तौर पर मार्गदर्शक मिले जिन्होंने अपनी काबलियत और देश भक्त सहयोगियो के सहारे सत्ता हासिल कर जनसेवा राष्ट्र सेवा के माध्ययम से अपना जीवन सफल कर लिया।

स्वाईन फ्लू से निटपने युद्ध स्तर पर करें प्रयास बेहतर उपचार के लिये शासकीय-निजी चिकित्सकों की समन्वय समिति बनेगी
भोपाल : बुधवार, फरवरी 11, 2015, मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में स्वाईन फ्लू को नियंत्रित करने के लिये युद्ध स्तर पर तैयारियाँ करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि स्वाईन फ्लू से निपटने के लिये सभी अस्पतालों में पर्याप्त व्यवस्थाएँ हैं। दवाओं की कोई कमी नहीं है। राज्य सरकार द्वारा अधिकृत निजी अस्पतालों को भी सरकार की ओर से दवाएँ एवं अन्य सुविधाएँ दी जा रही हैं। श्री चौहान आज यहाँ मंत्रालय में स्वाईन फ्लू के उपचार और नियंत्रण की व्यवस्थाओं और तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में प्रदेश के निजी अस्पतालों को भी बुलाया गया था। मुख्यमंत्री ने निजी अस्पतालों से सहयोग का आग्रह करते हुए कहा कि सरकार के साथ टीम भावना से मिलकर काम करें। स्वाईन फ्लू से पीड़ित मरीजों के जीवन की रक्षा करना सबसे पहला उद्देश्य है। मरीजों को अविलम्ब बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाना ही सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने अधिकृत निजी अस्पतालों को दवाइयाँ, मास्क एवं अन्य उपकरण उपलब्ध करवाने के निर्देश दिये। निजी अस्पताल सरकार से उपलब्ध करवाई सुविधाओं के लिये मरीजों से किसी प्रकार की फीस नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उपलब्ध सभी चिकित्सा सुविधाएँ चाहे वह सरकारी हों या निजी प्रदेश के लोगों के लिये हैं। यह अवसर मानवीय सोच प्रदर्शित करने का है। मिल-जुलकर काम करने से स्वाईन फ्लू को नियंत्रित करना संभव होगा।

रबी फसलों की 85 प्रतिशत बोनी पूर्ण
रायपुर, 11 फरवरी 2015 छत्तीसगढ़ में चालू रबी मौसम में 15 लाख 90 हजार हेक्टेयर से अधिक रकबे में विभिन्न फसलों की बोनी पूरी हो चुकी है, जो निर्धारित लक्ष्य का 85 प्रतिशत है। राज्य शासन के कृषि विभाग द्वारा इस वर्ष 18 लाख 76 हजार हेक्टेयर में रबी फसल बोने का लक्ष्य रखा गया है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि रबी मौसम में गेहूं, धान, मक्का और जौ-ज्वार सहित अन्य अनाज फसल चार लाख 20 हजार हेक्टेयर में बोने का लक्ष्य रखा गया है। इसके विरूद्ध नौ फरवरी की स्थिति में तीन लाख 56 हजार 380 हेक्टेयर में किसानों ने बोनी पूर्ण कर ली है। दलहनी फसलों के अंतर्गत तीन लाख 48 हजार 340 हेक्टेयर में चना, 47 हजार 180 हेक्टेयर में मटर, 27 हजार 420 हेक्टेयर में मसूर, 15 हजार 310 हेक्टेयर में मंूग, 10 हजार 870 हेक्टेयर में उड़द, तीन लाख 34 हजार 660 हेक्टेयर में तिवरा, 27 हजार 900 हेक्टेयर में कुल्थी तथा छह लाख 880 हेक्टेयर में अन्य दलहनी फसलें बोयी जा चुकी है। इस प्रकार कुल आठ लाख 18 हजार 560 हेक्टेयर में दलहनी फसलों की बुआई हो चुकी है। प्रदेश में रबी मौसम में अलसी, तिल, सूरजमुखी, राई, सरसो, तोरिया, कुसुम, मूंगफल्ली के साथ-साथ अन्य तिलहनी फसलें ली जाती है। चालू रबी मौसम में लगभग दो लाख 32 हजार 30 हेक्टेयर में दलहनी फसलों की बोनी पूरी हो चुकी है। वर्तमान में 24 हजार 430 हेक्टेयर में गन्ने की रोपाई हो चुकी है। इसी प्रकार एक लाख 95 हजार हेक्टेयर से अधिक रकबे में साग-सब्जी की बोनी भी की जा चुकी है। एक लाख 83 हजार 900 हेक्टेयर में अन्य फसलें भी बोयी जा चुकी है।

जिले में तय होगी विकास की पांच प्राथमिकताएं - उद्योग मंत्री
जयपुर, 11 फरवरी। जोधपुर के जिला प्रभारी एवं उद्योग मंत्री श्री गजेन्द्रसिंह खींवसर ने बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में जिले के विकास पर विचार विमर्श किया। उन्होंने बताया कि जोधपुर जिले में विकास की पांच प्राथमिकताएं तय होंगी जिसकी सूची मु यमंत्री को प्रस्तुत की जाएगी। जिला प्रभारी मंत्री ने बैठक में निर्देश दिये कि आगामी बजट में हर जिले में विकास के कार्य योजनाबद्घ ढंग से हो, इसलिए मु यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने हर जिले में विकास की पांच प्राथमिकताएं तय करने के निर्देश दिए हैं। इनमें विश्लेषण कर आने वाले बजट में शामिल किए जाने का प्रावधान किया जा सके। उन्होंने बैठक में उद्देश्य की जानकारी देते हुए विधानसभावार विकास पर चर्चा की तथा सांसद, विधायकों व प्रधानों से बातचीत कर विकास की प्राथमिकताओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बैठक में विचार-विमर्श कर प्रमुख रूप से सीवरेज, नए एयरपोर्ट के लिए भूमि, ए स रोड, ग्रामीण जल प्रदाय योजना, चिकित्सा , शिक्षा, मिसिंग लिंक रोड्स, विद्युत तंत्र आदि के बारे में प्राप्त सुझाव एवं प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया। जिला प्रभारी मंत्री ने कहा कि इनमें से पांच प्राथमिकताएं तय की जाएंगी जिसकी सूची प्रभारी सचिव और जिला कलक्टर तय करेंगे। जिले के विकास की इन पांच प्राथमिकताओं की सूची को आगामी बजट के लिए मु यमंत्री को पेश किया जाएगा।
श्री खींवसर ने बैठक में विभिन्न योजनाओं के बारे में भी विचार-विमर्श किया। सांसदों, विधायकों, महापौर एवं प्रधानों ने विकास कार्यो के बारें में जानकारियां दी और प्रस्तावित कार्यो के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक माह में एक बैठक आयोजित कर जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों से विचार विमर्श करके समीक्षा की जाएगी। जिला प्रभारी सचिव श्री दीपक उप्रेती ने भी जिला कलेक्टर एवं विभिन्न विभागों के अधिकारियों से एक अन्य बैठक में विचार विमर्श किया और विभिन्न योजनाओं एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की समीक्षा की।

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Village Times: अक्स को झुठलाना, अस्तित्व को संकट
अक्स को झुठलाना, अस्तित्व को संकट
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