नेक नियति पर शक और व्यवस्थागत सच, अघोषित सिफारिश की मुखालपत

म.प्र. शिवपुरी। सच तो होता है मगर लेाग कहते है कि सच कड़वा होता है अगर ऐसे में किसी भी राज्य के पिछड़े जिले में पदस्थ कोई कलेक्टर सच कह...

म.प्र. शिवपुरी। सच तो होता है मगर लेाग कहते है कि सच कड़वा होता है अगर ऐसे में किसी भी राज्य के पिछड़े जिले में पदस्थ कोई कलेक्टर सच कह दे तो कोहराम क्यों मच जाता है? कहीं यह किसी नेक नियति पर शक और व्यवस्थागत सच के साथ अघोषित सिफारिश की मुखालपत तो नहीं। शायद किसी कलेक्टर ने एक बार फिर से सच बोला है वह भी लेागों के हित में अनौपचारिक तौर पर, मगर वह सच देखते ही देखते सुर्खियाँ बन जाये वह भी गलत है।

ऐसा नहीं कि कानून पसन्द कलेक्टर की कार्य प्रणाली को लेकर बातों का बतंगढ़ नया हो इससे पूर्व भी एक केन्द्र मंत्री रहे एक राष्ट्रीय राजनैतिक दल के प्रदेश अध्यक्ष के साथ अन्य जिले में भी विवाद सुर्खियाँ बन चुका है।
लेागों की दलील है कि उक्त कलेक्टर के साथ ड्रॉ बेक इतना है कि वह सी.एम.के नजदीक है और कानून पसन्द है। बस बात इतनी सी है अगर लेागों को ज्ञान नहीं या फिर जानबूझ कर लोग गलती कर बार-बार मायूस होते है तो इसमें कलेक्टर की गलती कहांं ?
आखिर व्यवहारिक हकीकत और व्यवस्थागत सच पर ही तो कलेक्टर ने अनौपचारिक चर्चा के दौरान पूरी निष्ठा के साथ कत्र्तव्य निर्वहन करने का प्रयास किया है।
आखिर इस व्यवस्थागत सच और व्यवहारिक सुझाव पर लेाग क्यों परेशान है ? उन्होंने सिर्फ इतना ही तो कहां वह ाी औपचारिक तौर पर कि मामला जिस विभाग कर्मचारी अधिकारी से संबंधित ही सबसे पहले आवेदन वहां करना चाहिए न कि सीधे मेरे पास। जब कोई न सुने तब आवेदन मुझे देना चाहिए अफसोस की क्यों इस जिले में ऐसा हो रहा है।

निश्चित ही व्यवस्थागत इस तरह की सोच रखना एक अधिकारी को लाजमी है मगर इसके उलट व्यवहारिक हकीकत यह है कि लेाग परेशान है जि मेदार अधिकारी कर्मचारियों की कत्र्तव्य निष्ठा से लेागों का विश्वास उठ चुका है या फिर इस जिले में सीधे कलेक्टर को आवदेन देने का चलन चल निकला है। उन्हें विश्वास है कि कलेक्टर के यहां न्याय मिलता है। इसी का फायदा उठा विघन सन्तोषियों का कारवां भी झड़े में कूड़ा फैलाने खड़ा रहता है। शायद इसी को लेकर कलेक्टर खिन्न हो, और सुर्खियाँ और सच को लेकर उनकी कार्यप्रणाली अन्य कलेक्टरों से जुदा या भिन्न हो।

आखिर लेागोंं को समझना होगा सरकार और प्रशासन के बीच का अन्तर चूंकि लोकतांत्रिक व्यवस्था मेें सरकार की सीधी जबावदेही जनता के प्रति होती है। वहीं प्रशासन की जबावदेही शासन, सरकार के प्रति होती है। ऐसे में अगर कुछ अनअपेक्षित हो रहा है। तो इसमें गलती स्वयं जनता की है, न कि कलेक्टर की। क्योंकि जितनी थोकबन्द कार्यवाही, अकर्यमण्य अमले के खिलाफ इस जिले में कलेक्टर ने की है शायद ही और किसी अन्य जिले में हुई हो।

किसानों को समसामयिक सलाह : सूरजमुखी की उपज अधिक लेने फूलों पर बोरेक्स के घोल का छिड़काव करना फायदेमंद
रायपुर, ०८ जनवरी २०१५ कृषि वैज्ञानिकों तथा कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को सूरजमुखी की उपज अधिक लेने के लिए इसके फूलों पर सू़क्ष्म उर्वरक बोरेक्स की दो ग्राम मात्रा, प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर कर छिड़काव करने की सलाह दी है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार बोरेक्स का छिड़काव फूल खिलते समय ही करना चाहिए। इससे सूरजमुखी की उपज बढ़ती है और दानों में तेल की मात्रा भी अधिक होती है। एक हेक्टेयर फसल के लिए पांच सौ लीटर का घोल पर्याप्त होता है।
कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा आज यहां जारी विशेष कृषि बुलेटिन में बताया है कि पिछले दिनों के बदली भरे मौसम के कारण सरसों की फसल में एफीड (माहू) के प्रकोप की संभावना बढ़ गई है। एफीड का प्रकोप आर्थिक हानि स्तर से अधिक होने पर उपयोगी कीट नाशकों का उपयोग करना चाहिए। चने की फसल में एकीकृत कीट प्रबंधन के लिए फेरोमोन टेऊप, प्रकाश प्रपंच तथा खेतों में पक्षियों के बैठने के लिए टी आकार की खूंटियां लगाई जानी चाहिए। फेरोमोन प्रपंच में प्रत्येक कीट के लिए निर्धारित ल्यूर का प्रयोग करना जरूरी है। प्रत्येक १५-२० दिन में ल्यूर बदलते रहें तथा पकड़े गए कीड़ों को भी प्रत्येक दिन प्रपंच से हटाते रहे। ल्यूर बदलने के पूर्व हाथ अच्छी तरह धोना चाहिए।

पंचायत राज संस्थाओं के आम चुनाव के दौरान सूखा दिवस घोषित
जयपुर, 8 जनवरी। राज्य सरकार ने एक आदेश जारी कर राज्य की पंचायत राज संस्थाओं के आम चुनाव-2015 के दौरान संबंधित चुनाव क्षेत्रों में सूखा दिवस लागू करने के निर्देश प्रदान किए हैं। आदेश के अनुसार प्रथम चरण से संबंधित चुनाव क्षेत्र तथा ऐसे क्षेत्रों के 5 कि.मी. परिधि क्षेत्र में 14 जनवरी को सायं 5 बजे से 18 जनवरी, 2015 तक सूखा दिवस घोषित किया गया है।
इसी प्रकार द्वितीय चरण के चुनाव क्षेत्रों तथा ऐसे क्षेत्रों केे 5 कि.मी. परिधि में 20 जनवरी को सायं 5 बजे से 24 जनवरी, 2015 तक एवं तृतीय चरण के चुनाव क्षेत्रों में तथा ऐसे क्षेत्रों के 5 कि.मी. परिधि में 28 जनवरी को सायं 5 बजे से एक फरवरी, 2015 तक सूखा दिवस घोषित किया गया है। इस दौरान स बन्धित चुनाव क्षेत्रों में किसी भी प्रकार से मदिरा का विक्रय किया जाना, दिया जाना अथवा वितरित किया जाना पूर्णत: निषेध होगा। 


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Village Times: नेक नियति पर शक और व्यवस्थागत सच, अघोषित सिफारिश की मुखालपत
नेक नियति पर शक और व्यवस्थागत सच, अघोषित सिफारिश की मुखालपत
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