भारत भ्रमण से पूर्व जबावदेही, गलत

व्ही.एस.भुल्ले। निश्चित ही खबरों की दुनिया में कॉग्रेस आलाकमान के वह पत्र का मजमून, जो उन्होंने कॉग्रेस कमेटियों को लिखा है। वह कॉग्रेस के हित में है और मलाई का मुगालता पालने वालो व मक्खन लगाने वालो को स्पष्ट संकेत है कि कॉग्रेस की दिशा और दशा क्या होगी?

संदेश साफ है कि सोनिया के बाद कॉग्रेस की बागडोर एक ऐसे युवा तुर्क के हाथ होगी जो भले ही अपने पिता की तरह भोला भाला और शरीफ संस्कारिक इन्सान हो मगर आम गरीब और देश के लिये उतना ही संवदेनशील सजग और सिद्धान्त: शसक्त इन्सान है जो देश व देश वासियों के हित लिये स्वयं को भी भूलने में मिनिट ही नहीं सैंकेण्ड भी नहीं लगाता फिर परिणाम जो भी हो।

ऐसे ही नेता की आज कॉग्रेस और देश को सख्त जरुरत है। भले ही देश का माहौल जो भी हो, ऐसे में उस युवा तुर्क के सम्बन्धन में कोई भी अहम निर्णय या तो जल्द बाजी होगी या फिर उन स्वार्थियों की सलाह का षडय़ंत्र जो राहुल की आढ़ में अपने मंसूबे को पूरा करने का मलाल लिये अभी भी असफल मसक्कत करने में लगे है।

बेहतर हो आलाकमान रैली, रैला या फिर बेमतलब की पद यात्राओं, आन्दोलनों से इतर राहुल को भारत भ्रमण के माध्ययम से उन विपक्षियों और संगठन के अन्दर ही पैदा होने वालो सवालो को उनका सटीक जबाव दें जो उस युवा तुर्क को बच्चा समझते है।

भारत भ्रमण के दौरान सुरक्षित संपर्क, संवाद तो हो ही, मगर विषय वस्तु में कॉग्रेस का इतिहास कॉग्रेसी नेताओं की कुर्बानियों और भारत निर्माण में स्व. नेहरु, शास्त्री, इन्दिरा, राजीव जी के योगदान और कुर्बानियों के साथ श्रीमती सेानिया गांधी द्वारा संगठन को बनाये रखने उनका त्याग और उन्हीं के संरक्षण मार्गदर्शन में डॉ.मनमोहन सिंह जैसे ईमानदार इन्सान द्वारा किये गये आर्थिक सुधार जिसका चमत्कारिक लाभ हर वर्ग के गरीब, मजदूर, किसान, मध्ययम उच्च परिवारों को तो मिला ही, साथ ही देश के उद्यौगिक क्षेत्र सहित व्यापार के क्षेत्र में भी लेागों को स्वच्छंद वातावरण में काम करने का मौका मिला जिसके दर्शन स्वयं राहुल भारत भ्रमण के दौरान कर सकते है।

भारत भ्रमण में सबसे अहम एक और बात है जो सार्थक परिणाम कॉग्रेस को दिला सकती कि राहुल की इस अहम यात्रा में उनके सहयोगी तो रहे, मगर मार्गदर्शक बिल्कुल भी नहीं, क्योकि यह यात्रा विशुद्ध रुप से व्यापाक श्रवण शक्ति के साथ संवाद और स पर्क के माध्ययम से सुनने, समझने की है न कि बोलने और व्यानबाजी की। जैसी कि स्वर्गीय इन्दिरा जी के निर्देश पर स्वर्गीय राजीव जी ने की थी क्योंकि अच्छी श्रवण शक्ति ज्ञान और समझने की क्षमता बढ़ाती है जो किसी भी महान नेता में होना लाजमी है। न कि बहस और बेमतलब की व्यान बाजी, कर वेमतलब के मुद्दों में उलझने के अगर दूसरे शब्दों में कहें तो यह भारत भ्रमण यात्रा संगठन के लिये तो यह अमृत बूटी साबित हो सकती है।

बहरहॉल इन सावधानियों के साथ अगर आलाकमान कॉगे्रस के भावी नेता के रुप में राहुल को भारत भ्रमण का निर्देश देती है। तो यह कॉग्रेस संगठन, देश, देश वासियों सहित स्वयं राहुल के साथ न्याय होगा। जिसकी की उन्हें स त जरुरत है और जिसके लिये उनके पास समय भी है और वे सक्षम भी। बरना इससे पूर्व भी वह कई रोड शॉ और गांवों की यात्रायें मार्गदर्शको, शुभ चिन्तको के साथ कर चुके है और परिणाम सामने है।

कहते है इतिहास गवाह अच्छे शासक या सेवक को शिक्षा ग्रहण करनी होती थी तो वह कड़े परिश्रम के साथ अनुशासित रह शिक्षा लेने होती थी जिसमें स्वच्छंद वातावरण मौजूद होता था। मगर राहुल का यह सौभाग्य है। कि ऋषि मुनियों, साधु, संतो, ऑलिया, फकीरो कड़ी तपस्याओं से तराषी गई समुची भारत भूमि ही नहीं समुचा हिन्दुस्तान उनके के लिये गुरुकुल है। और इस भू-भाग पर रहने वाले विभिन्न विधाओं के उस्ताज उनके शिक्षक जिनसे भारत भ्रमण में राहुल को कॉग्रेस जैसे महान संगठन और देश को स हालने का गुर सीखना है। क्योंकि लाखों, करोड़ों कॉग्रेसी व शुभन्तिकों को उनका इन्तजार है जो समुचे भारत वर्ष में फैले पढ़ें है। इस भारत भूमि पर सेकड़ों हजारों गुरिल्ले युवा तुर्क पढ़े है।

जो राहुल को सक्षम और शसक्त, सम्पन्न, राष्ट्र के नेता के रुप में पूरी लेाकतांत्रिक आस्था के साथ देखना चाहते है। मगर यह तभी सम्भव जब राहुल का भारत भ्रमण स्वच्छंद माहौल में हो, जिसमें दिन का भ्रमण गांव तो रात्री विश्राम जिला, संभाग मु यालयों पर रहे। देश बड़ा है और समय कम तब तक शेष कॉग्रेसि सोंनिया जी के नेतृत्व में कॉग्रेस के लिये रणनीति तैयार करे, कि कॉग्रेस को करना क्या है ? क्योंकि तब राहुल पर सवालो के जबाव व देश और देश वासियों सहित संगठन का स पूर्ण ज्ञान होगा। तभी कॉग्रेस का भला हो सकता है।

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