सीखना है, तो सीखो, इसे कहते है गुड गर्वनेन्स

जिस राष्ट्र में उस राष्ट्र और उसके नागरिकों की सुरक्षा तथा स मान सर्वोपरि हो। अनुशासन ऐसा कि कानून की कयानात देख, अच्छे-अच्छे अपराधियो की रुह तक कांप जाये। फिर चाहे वह उस राष्ट्र का नागरिक हो, या फिर दुश्मन, वह कितना ही बड़ा अहम और प्रभावशाली व्यक्ति ही क्यों न हो ? अगर अपराध किया है तो सजा भी सुनिश्चित होनी चाहिए क्योंकि वहां राष्ट्र और उसके नागरिको की सुरक्षा तथा उनका स ाान ही सर्वोपरि होता है।

मगर उसके उलट हम है तथा उस राष्ट्र से दो कदम आगे, फिर भी हम असफल है। राष्ट्रीय सुरक्षा और आम नागरिकों की सुरक्षा तथा स ाान के नाम, जहां हमारा नारा है देश भक्ती और गुडगर्वनेन्स अगर हमारा नारा सही है, तो राष्ट्र के दुश्मन आज तक खुली हवा में क्यों घूम रहे है, हम आज भी वैचारिक तौर पर, क्यों पंगू है ? क्यों हमारा गर्वनेन्स उन दुसासियों के सामने वेवस है ? जो आये दिन रुट टू वोटम हमारे राष्ट्र के नागरिकों को भावनात्मक तौर पर ठग रहे है।

भावनाओं की ऐसी ठगी, विश्व के शायद ही किसी मुल्क में हो, वह ठगी चाहे सामाजिक धार्मिक, आर्थिक या फिर राजनैतिक तौर पर हो, ऐसी ठगी को देखकर लगता है, कि मानो किसी को भी सेवा और सच से कोई वास्ता ही नहीं रह गया।

हर क्षेत्र में भावनात्मक लूट का खेल खुलेयाम चल रहा है। इमोस्नल हुनर के सहारे प्रोफेसनल उस्तादो ने हमारे राष्ट्र में एक ऐसी कयानात खड़ी कर दी है जिसमें इन्सानियत निरवस्त्र हो इन्सानियत का मातम मनाने में लगी है।

जिस सत्ता के खेल ने अपने क्षणिक स्वार्थ, और सामंती सत्ता को चिरंजीवी बनाये रखने भोले भाले लोगों के बीच भावनात्मक ठगी का खेल खेला है या खेल रहे है वह इस महान राष्ट्र और इस राष्ट्र के भोले भाले भावुक लेागों के साथ ही नहीं स्वयं और उनकी आने वाली पीढ़ी के साथ अन्याय कर रहे है। क्योंकि जो हालात राष्ट्र और राष्ट्र के लेागों के सामने है भले ही वह सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, राजनैतिक रुप से हो। वह बड़े ही खतरनाक है। जिसके लिये आने वाली पीढ़ी उन्हें कभी क्षमा नहीं करेगी जिन्होंने ये हालात पैदा किये है। याद रहे कि तो हालात इस महान देश में बनते जा रहे है या मौजूद है उन्हीं हालातों में सभी को जिन्दा रहना है। चाहे वह सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, राजनैतिक, पुरोद्दा या उस्ताद हो।

स्वामी विवेकानन्द ने भारत की श्रेष्ठ विरासत से विश्व को परिचित करवाया

भोपाल : सोमवार, जनवरी 12, 2015, 17:29 ISTमुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वामी विवेकानन्द की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ट्वीटर पर कहा कि स्वामी जी ने विश्व को भारत की आध्यात्मिक विरासत से परिचित करवाया। स्वामी जी ने पश्चिमी जगत में भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को लेकर षड़यंत्रपूर्वक फैलाई गई भ्रांतियों को निर्मूल सिद्ध कर विश्व को भारत की संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत की श्रेष्ठता से परिचित करवाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के गौरव और आदर्श स्वामी विवेकानंद में तरुणाई की तेजस्विता और ऋषियों की मनस्विता का अदभुत संगम था। इन दोनों के मिलन से ही भारत का नव-निर्माण हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी जी ने सदियों से राजनैतिक दासता के कारण भारत के लोगों में गहराई से घर कर गई हीन भावना और आत्महीनता को दूर कर उन्हें आत्म-विश्वास से भर दिया। स्वामी विवेकानंद ने भारतीयों को बताया कि उनमें अपार दिव्य शक्तियाँ मौजूद हैं। उन्होंने इन शक्तियों को जगाकर उनका स्वयं के उत्थान और राष्ट्र नव-निर्माण में उपयोग करने प्रेरित किया।

कुपोषण मुक्ति अभियान : छत्तीसगढ़ में दस फरवरी से शुरू होगा नवा जतन योजना का चौथा चरण
राज्य के 3.50 लाख बच्चों को कुपोषण मुक्त करने का लक्ष्य
रायपुर, 12 जनवरी 2015 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के निर्देशों के अनुरूप छत्तीसगढ़ के बच्चों में कुपोषण दर को न्यूनतम स्तर पर लाने और सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए दस फरवरी से नवाजतन योजना का चौथा चरण शुरू होगा। इस चरण में नवाजतन योजना के तहत प्रदेश के तीन लाख 50 हजार बच्चों को चिन्हांकित किया जा रहा है। इस संबंध में राज्य शासन के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मंत्रालय (महानदी भवन) से पिछले माह की 23 तारीख को राज्य के सभी कलेक्टरों और विभागीय जिला कार्यक्रम अधिकारियों तथा जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारियों को परिपत्र जारी किया जा चुका है।
परिपत्र में कहा गया है कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा प्रदेश के बच्चों में व्याप्त कुपोषण को न्यूनतम स्तर पर लाने और सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए नवाजतन योजना के चौथे और पांचवें चरण को प्रभावी ढंग से समय-सीमा में संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्देश के परिपालन में फरवरी 2015 से दिसम्बर 2015 तक प्रदेश के सात लाख बच्चों को नवाजतन योजना के अंतर्गत लक्ष्यांकित कर प्रदेश में कुपोषण का स्तर 25 प्रतिशत तक सीमित करना है, इसके लिए पूर्ण क्षमता के साथ समयबद्ध तरीके से कार्य करना होगा। परिपत्र के अनुसार बच्चों के चिन्हांकन के लिए बेसलाइन एवं एण्डलाइन सर्वे की जाएगी, जिसके तहत बाल विकास परियोजना अधिकारियों के नेतृत्व में विभागीय पर्यवेक्षक, मुख्यमंत्री सुपोषण दूत, मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी केन्द्र स्तर पर गठित मूल्यांकन एवं अनुश्रवण समिति के सदस्य और महिला स्वसहायता समूह आदि की उपस्थिति में आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों का वजन लिया जाएगा। वजन लिए गए बच्चों की प्रविष्टि नवाजतन साफ्टवेयर में की जाएगी। साफ्टवेयर में प्रविष्टि के बाद जो बच्चे मध्यम तथा गंभीर कुपोषण की श्रेणी में होंगे, वही संबंधित आंगनबाड़ी केन्द्र के लिए लक्ष्यांकित होंगे। इन बच्चों की मानिटरिंग राज्य स्तर से की जाएगी। आंकड़ों की सत्यता के लिए यूनिसेफ, केयर एवं अन्य संस्थाओं द्वारा बेसलाइन एवं एण्डलाइन सर्वे का सत्यापन किया जाएगा। उल्लेखनीय है प्रदेश में कुपोषण के स्तर को न्यूनतम स्तर पर लाने और दिसम्बर 2015 तक सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कुपोषण मुक्ति अभियान संचालित किया जा रहा है। कुपोषण मुक्ति अभियान के तहत नवाजतन योजना और मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना के क्रियान्वयन, पोषण पुनर्वास केन्द्रों के प्रभावी उपयोग एवं विभिन्न विभागों के समन्वय से विगत वर्ष में कुपोषण के स्तर में उल्लेखनीय कमी आयी है।
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