बड़ा बदलाव ही, कॉग्रेस बचने का रास्ता

50 वर्ष के संघर्ष के बाद अचानक देश की सत्ता पर पूर्ण बहुमत में भाजपा का काबिज हो और कॉग्रेस मुक्त भारत की कल्पना पूर्ण कान्फिडेस के साथ ...

50 वर्ष के संघर्ष के बाद अचानक देश की सत्ता पर पूर्ण बहुमत में भाजपा का काबिज हो और कॉग्रेस मुक्त भारत की कल्पना पूर्ण कान्फिडेस के साथ करना। कॉग्रेस के लिये आम बात ही नहीं अहम मसला होना चाहिए।

ये अलहदा बात है कि कॉग्रेस ने कॉग्रेस में कुछ सुधार की प्रक्रिया तो शुरु की मगर किसी बढ़े बदलाव की शुरुआत हुई हो ऐसा नहीं, जिसकी कॉग्रेस को स त जरुरत है। जबकि केन्द्र में भाजपा की बहुमत वाली सरकार को काबिज हुये पूरे 6 माह हो चुके है मगर आज भी कॉग्रेस के हालात ढाक के चार पात की तरह बने हुये है। न तो उसके पास फिलहॉल स्पष्ट ढांचा है और न ही ऐसे प्रवक्ता जो समय की नजाकत को देख सार्थक मुद्दों पर सटीक और तार्किक बात रख सके। हालात यह है कि जिस रणनीति के सहारे भाजपा देश की सत्ता में पूर्ण बहुमत में काबिज है उसका सटीक तोड़ अभी तक कॉग्रेस के रणनीतिकार नहीं खोज पाये।

देश के अहम मसलो या फिर विरोधी दलो के हमलो पर कॉग्रेस के व्यानो की ग भीरता देख बड़ा ही अफसोस होता है देखकर सुनकर बड़ा ही दु:ख होता है। कि जिसका पूरा लाभ विगत 25 वर्षो से विरोधी दल उठाते रहे है। कुछ विरोधी दल के उस्तादो ने तो हमारे महान लेाकतंत्र के जंगल में सबसे ताकतवर रही, कॉग्र्रेस की हालात एक हाथी की तरह बना दी है। जब चाहे तब उसे उछाले गये मुद्दों पर चिघाडऩे पर मजबूर कर देते है। फिर वहीं विरोधी दल इसी कमी का फायदा उठा जनता को कमजोर बता कॉग्रेस का माखौल उड़ाते रहते है। मगर पुरानी कहावत है कि मरा हाथी भी सवां लाख का होता है। जिसमें कॉग्रेस तो अभी भी जिन्दा हाथी की तरह है। जिसे एक अच्छे प्रशिक्षित अहलावत की जरुरत है।

जहां तक कॉग्रेस को बचने, और बदलाव का सवाल है तो कॉग्रेस ने जिस तरह से संगठनात्मक स्तर पर बदलाव की शुरुआत की है इसी तरह की शुरुआत सभी स्तरो पर उसे करनी होगी।
चाहे वह वैचारिक रुप से हो या फिर आलाकमान स्तर से जिसमें मसौदे के साथ सक्षम रणनीति भी होना चाहिए।

खासकर सॉशल मीडिया में जिस तरह के घटिया, अर्थ विहीन, दिशा हीन सवाल जबाव का दौर चल रहा है वह भी विरोधियों की रणनीति का एक हिस्सा है।

ऐसे में सबसे अहम जबावदेही कॉग्रेस उपाध्यक्ष राहुल की अधिक बन जाती है। क्योंकि फिलहॉल कॉग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अपनी मजबूरियाँ और हालात है।

कहते है व्यवहारिक प्रशिक्षण का सबसे बड़ा माध्ययम सबसे अधिक भ्रमण, और अधिक से अधिक लेागों से संवाद करना होता है। जिससे देश ही नहीं लेागों को समझने की कला ाी सीखने मिलती है। इसलिये राहुल को चाहिए कि वह सक्षम शुभ चिन्तक के साथ बजाये किसी ताम झाम के देश ा्रमण कर, देश के लेागों को सुने कि देश और देश के लेाग क्या चाहते हैै ? और यह कोई बड़ा काम नहीं कॉग्रेस के लिये यह अदना-सा कार्य है जिसे बखूबी कॉग्रेस द्वारा किया जा सकता है।

देखा जाये तो, भ्रमण पश्चात जो भी मसौदा हो उसे वैचारिक तौर पर रख रणनीति तैयार कर संगठनात्मक स्तर तक पहुंचाया जाये। साथ ही जो अनु ावी बुजुर्ग, तर्जुवेकार वरिष्ठ नेताओं से भी सलाह मशविरा किया जाये।
जिसमें सबसे अहम है जनता के बीच मीडिया के माध्ययम से मिलने वाले मौको पर पार्टी के क्रियाकलाप, इतिहास, विचारधारा की प्रस्तुति जो जनाकांक्षओं को उत्साहित करती हो।

क्योंकि कॉग्रेस का सबसे बड़ा ड्रा बैक उसकी किसी भी मुद्दे मसले पर स्पष्ट रणनीति का नहीं होना है।
साथ ही संगठनात्मक ढांचे का संचालन आर्थिक रुप सक्षम न होते हुये व्यक्ति विशेष तक सिमट जाना है जिससे कार्य करने वाले कार्यकत्र्ता आभाव ग्रस्त रह पूरी सक्षमता से कार्य नहीं कर पाते।
बेहतर हो छोटे-मोटे कम से कम 50 शसक्त संगठनो के सहारे सत्ता पर काबिज या अन्य प्रदेशों में धन बाहुबल के सहारे क्षेत्रीय राजनीति कर सत्ता में बैठे संगठनो का मुकाबला करना है।

तो बदलाव तो जरुरी है तभी कॉग्रेस बच सकती है क्योंकि जो हालात फिलहॉल कॉग्रेस में चल रहे है अगर वैसे ही चलते रहे तो अभी कॉग्रेस में कई युवा चमकदार नेतृत्व मौजूद है जिसमें पहला नाम स्वयं राहुल का है जिस रणनीति के तहत कॉग्रेस आज यहां तक पहुंची है उसका दोषारोपण किसी भी युवा नेतृत्व पर कर उसे नेपथ्य मेें डाल देना है। यह उस नेतृत्व के साथ अन्याय है। क्योंकि जन्म से कोई सीख कर नहीं आता सभी ने इसी दुनिया मेे और आकार सीखा है। और अपनी गलतियों में सुधार करते हुये स्वयं का लेाहा मनवाया है। फिर वह स्व.इन्दिरा, अटल, मोदी हो या फिर देश के अन्य महापुरुष, सो समय भी है। वृहत संगठन भी, अगर पुन: शुरुआत राहुल के नेतृत्व में देश भ्रमण, संवाद पश्चात हो बदलाव की शुरुआत होती है तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी कि डूबती कॉग्रेस की नांव को बचाया जा सके और गतमय तक पहुंचाया जा सके, तभी कॉग्रेस बच सकती है। 

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तीरंदाज,328,व्ही.एस.भुल्ले,523,
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बड़ा बदलाव ही, कॉग्रेस बचने का रास्ता
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