काली सियासत का कुरूप चेहरा, सत्यानाश हो गया, स्वच्छंद जीवन का

व्ही.एस.भुल्ले@तीरंदाज।  इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए कि प्रकृति प्रदत्त स्वच्छन्द जीवन जीने के लिये प्रकृति ने अपना एक पैमाना रख...

व्ही.एस.भुल्ले@तीरंदाज। इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए कि प्रकृति प्रदत्त स्वच्छन्द जीवन जीने के लिये प्रकृति ने अपना एक पैमाना रख छोड़ा है जिस पर प्रकृति की सारी कयानात खड़ी है। अगर उसके अनुरुप या उसके इर्द-गिर्द कोई भी इन्सान स्वच्छन्द जीवन जीने के लिये व्यवस्था बना जीवन जीता है तो निश्चित ही वह स्वर्णयम युग या व्यवस्था मेें जीवन जी रहा है।

मगर अनाधी काल से विवेक अनुसार निर्धारित स्वार्थ परख व्यवस्थाओं ने इन्सानियत को ताक पर रख जो कयानत खड़ी की है, उसमें सबसे बड़ा योगदान सियासत का है जिसने लगभग अब हर क्षेत्र में अपनी सत्ता बनाये रखने या खड़ी करने इन्सानियत का कत्ल कर हैवानियत का सहारा ले रखा है।
दुर्भाग्य हमारा यह कि जो जानते है वह बोलते नहीं, जो बोलते है उनकी बॉइस (आवाज) इतनी कारगार तेज नहीं जिससे अधिक से अधिक इन्सान उन्हें सुन सके।

अर्थयुग के साथ चल रहे कलयुग में धन के ढोल नगाड़ों के बीच इन्सानियत ही नहीं मानवता को भी बड़ी बेहरमी से स्वार्थो के वूट तले रौंध उसे तिल-तिल मरने पर मजबूर हो गई है और इन्सानो की कदकाठी इस काली सियासत में सरेयाम दम तोड़ रही है।

शायद महान चाड़क्य ने सही ही कहा था जिस राष्ट्र के लेाग राजनीति में रूचि नहीं रखते उस राष्ट्र का विनाश सुनिश्चित होता है।

निश्चित ही वह जानते थे कि राजनीति ही वह रास्ता है जो सत्ता तक पहुंचाता है जहां से मानवता इन्सानियत को जिन्दा रखने व्यवस्था बना राजनीति व संवैधानिक संस्थाओं को नियंत्रित कर धर्म, सामज और अर्थ जो इन्सान के जीवन के अहम अंग है। का निर्धारण होता है चाहे वह राजतंत्र हो, संघीय ढांचा हो या फिर लेाकतंत्र चूकि राजतंत्र वंशानुगत होता है। और लेाकतंत्र वोट आधारित जहां राजतंत्र में वंश पर परा रहती है। सत्ता सिंहासन के लिये वहीं लेाकतंत्र में आम मतदाता का मत महत्वपूर्ण होता है।

जहां राजतंत्र में वंशानुगत पर परा इन्सानियत, मानवता के लिये जब तब खतरनाक साबित हुई है वहीं लेाकतंत्र में सतत सत्ता में बने रहने का लालच और स्वार्थ खतरनाक साबित हो रहा है।

लेाकतंत्र में सत्ता के लालची लेाग अब न तो संगठनो की प्रकृतियो को ही नियंत्रित कर पा रहे है। न ही वह संवैधानिक संस्थाओं में फैली अर्कमणयन्यता, अराजकता भ्रष्टाचार को रोक पा रहे है। क्योंकि सतत सत्ता में बने रहने के लिये कुछ संवैधानिक संस्थाओं का भी अहम रोल होता है।

रहा सवाल धर्म, समाज और अर्थ का तो धर्म, और समाज के अर्थ की ओर बढ़ते रुझान और पैसे के लिये पागल लेागों को देख इनका इस्तमाल भी खुलकर सतत सत्ता में बने रहने के लिये किया जा रहा है।

क्योंकि लेाकतंत्र में धर्म का स्थान छद्दम धर्म गुरुरओं ने ले रखा है जिन्हें सतत सत्ता में बने रहने वाले बजन देते है। जिन्होंने आज असल धर्म गुरुओं का स्थान अघोषित रुप में ले रखा है असल धर्म गुरुओं के नाम पर दिखावा और चमक दमक से समाज प्रभावित रहता है सो धर्म की अपनी सत्ता धन बल पर चल रही है। वहीं जातियों में विभक्त होता समाज अपने अपने अग्रजो को सामने रख अपनी अपनी समाज सेवा सत्ता में भागीदारी हासिल करने सतत सत्ता में बने रहने वालो के आगे कदम ताल कर अपना भविष्य खोजती रही है।
जिस अर्थ को किसी भी राष्ट्र की रीढ़ माना जाता है। वह आर्थिक जमात भी अपनो के बीच अपनो को ही लूट सतत सत्ता में बने रहने वालो की जमात की गलबहियों कर खूब पोषित कर रही है।

राष्ट्र में राष्ट्र के अन्तिम व्यक्ति की व्यव्स्थित, शिक्षित, प्रशिक्षित देश वासियों के माध्ययम से चल रही आर्थिक भावनात्मक सामाजिक, धार्मिक एवं सेवा सुविधाओं की जबरदस्त लूट का नजारा देख तो अन्तोदय वाले हमारे स्व. पण्डित जी, गांधी और न जाने कितने धर्म, समाज, अर्थ गुरुओं सहित उन महान राजनैतिज्ञों, राष्ट्र भक्तो तक की आत्मा कलफति होगी मगर दुर्भाग्य अर्थयुग का जहर अब हमारे महान लेाकतंत्र हमारे महान राष्ट्र में सर चढ़ कर बोल रहा है। और वर्षो पुरानी हमारी नीति स यता, संस्कार सहित हमारे महान राष्ट्र और इसके लेाकतंत्र को निगल रहा है। जिसमें मानवता और इन्सानियत की चीथ पुकार मची है। मगर सतत सत्ता में बने रहने के स्वार्थो के सामने किसको राष्ट्र और इस महान लेाकतंत्र की पढ़ी है..........................?

सामाजिक सम्मेलन आपस में जुड़ने का मौका देते हैं
भोपाल : रविवार, दिसम्बर 21, 2014, जनसंपर्क, ऊर्जा एवं खनिज मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि सामाजिक सम्मेलन लोगों को आपस में जुड़ने का मौका देते हैं। साथ ही इससे कई सामाजिक काम सरलता से संभव हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज संस्कारों व अच्छे कामों की दृष्टि से सभी समाज का मार्ग-दर्शन करता रहा है। इसी परंपरा को ध्यान में रखते हुए समाज को आगे बढ़ना है। उन्होंने सामाजिक बुराइयों को दूर करते हुए समाज के सक्षम लोगों को कमजोर वर्ग की मदद करने में आगे आने का आव्हान किया। श्री शुक्ल आज उज्जैन में सनाढ्य ब्राह्मण एवं औदिच्य ब्राह्मण समाज के परिचय सम्मेलन में बोल रहे थे। इसके पूर्व जनसंपर्क मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री पारस जैन, पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री सुरेश पचौरी, विधायक डॉ. मोहन यादव ने माँ सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप जलाकर सनाढ्य ब्राह्मण समाज द्वारा आयोजित अखिल भारतीय सर्व ब्राह्मण वैवाहिक परिचय सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर देवास के महापौर श्री सुभाष शर्मा सहित समाज के वरिष्ठजन मौजूद थे। कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा समाज के श्री निरंजन लाल पुरोहित, श्री ब्रज किशोर शर्मा और श्री रविन्द्र भारद्वाज आदि का सम्मान किया गया।

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तीरंदाज,328,व्ही.एस.भुल्ले,523,
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