सरल सेवक ही नहीं अच्छा शासक भी हो सरकार का मुखिया

म.प्र. के नगरीय निकाय चुनावों की जब से डाडी पिटी है तभी से टिकिट कबाड़ुओं के बीच अपनी अपनी जीत को लेकर मशक्कत चल रही है।

म.प्र. के नगरीय निकाय चुनावों की जब से डाडी पिटी है तभी से टिकिट कबाड़ुओं के बीच अपनी अपनी जीत को लेकर मशक्कत चल रही है।

यूं तो म.प्र. के इस छोटे से शहर का कोई बहुत पुराना इतिहास नहीं मगर फिर भी 150 वर्ष पूर्व एक ऐतिहासिक घटना जो भारत महान स्वतंत्रता संग्राम सैनानी शहीद तात्याटोपे की शहादत से जुड़ी है। तो दूसरी पहचान 100 वर्ष पूर्व सिंधिया स्टेट की राजधानी के रुप में सर्वसुविधा युक्त शहर की रही है। जिसकी 10 फीसदी सुविधायें भी अब इस शहर को नसीब नहीं। 100 वर्ष पूर्व बसे इस शहर के पास शहर के नाम पर अब कुछ मौजूद है। तो वह है धूल भरी हवा, न पीने योग्य पेयजल और पर्यटन नगरी के नाम बदनुभा दाग।
और यह देन है हमारी शहरी सरकारों की जो आजादी से लेकर आज तक हर 5 वर्ष में चुनी जाती रही है। और आज भी हो रहे चुनावों में ऐसी ही शहरी सरकारों को चुनाव होना है।

यूं तो शहर की सरकारों को शहर वासियों ने खूब सेवक दिये, कभी किसी के कहने पर तो कभी, पैर छूने पर शिवपुरी शहर की जनता ने विगत 65 वर्षो में खूब दरिया दिली से वोट दिया मगर उसके पास 40 दशक पूर्व मौजूद शुद्ध पर्यावरण मिनी कश्मीर के नाम प्रसिद्ध ठंण्डा वातावरण शुद्ध पेयजल चौड़ी चौड़ी सड़के का जाल सुन्दर चौराहे फलदार बाग, बगीचे, तालाबों का मनोरम दृश्य बचा, न हीं घरो के अन्दर 2 टाइम आने वाला नल, न ही कभी न जाने वाली लाइट के साथ ही शाम होते ही जलने वाली स्ट्रीट लाइटो का दौर बचा। साफ सफाई ऐसी की सुबह शाम नियमित मोहल्लो वार्डो में झाड़ू लगती थी और नाली भी मसक के पानी से धुलती थी।

मगर आज जो वर्षा का पानी छोटी-छोटी पक्की नहरो से बहकर तालाबों मेें इक_ा होता था वह न तो तालाब बचे और न ही नहरे अगर कुछ बचा है, इस शहर में तो नहरों के रुप में गन्दे नाले जिनसे होकर बर्षाती पानी ही नहीं शहर का गन्दा पानी बहकर इन तालाबों में इक_ा होता है। जिसे शुद्ध कर शहर की जनता वर्षो से पीने पर मजबूर है। विगत 20 वर्ष से वॉर बैल और तालाबों का पानी शहर की जनता बड़ी मशक्त से हासिल कर, संघर्ष पूर्ण जीवन जी रही है। सच तो यह है कि लाख मशक्कत के बावजूद शुद्ध पेयजल की एक बून्द भी शहर वासियों को नहीं मिल रही है।

उस पर टिकिट हासिल कर सेवा की मारा मारी कहां तक सफल होगी हाथ जोड़ पैर छूने की प्रथा और कब तक चलेगी। अब तो इन जन सेवको से जनता भी कलफ चुकी है। इसीलिये वह अब इस चुनाव में आक्रोशित खड़ी है। ये सही है कि भोली भाली शहर की जनता का वोट हथियाने फिर से हर बार की तरह दौर चलेगा। मगर इस मर्तवा सेवा का अवसर किसे मिलेगा। कहना मुश्किल मगर अपने राम का तो बस यहीं कहना कोई भी चुनाव लड़े या जीते उसे सरल सेवक के साथ शसक्त शासक भी होना चाहिए। क्योंकि जो पालिका मु यमंत्री, मंत्री तो दूर की कोणी स्थानीय मालिक कलेक्टर को भी छका दे वहां सेवक सहित शसक्त शासक लगेगा तभी सिंधिया वंश द्वारा बसाया गया सर्वसुविधा युक्त यह सुन्दर शहर का स्वरुप बच सकेगा।

नगरीय निकाय आम चुनाव के कार्यक्रम एवं क्रियान्वयन स्थगित: आदर्श आचरण संहिता भी स्थगित
रायपुर, १५ नवम्बर २०१४ छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग ने आज प्रदेश के सभी कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारियों (स्थानीय निर्वाचन) को परिपत्र जारी कर प्रदेश में नगरीय निकायों के आम चुनाव २०१४ की आदर्श आचरण संहिता आगामी आदेश तक स्थगित किए जाने की जानकारी दी है। परिपत्र में उच्च न्यायालय बिलासपुर के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उच्च न्यायालय के पारित आदेश के अनुपालन में नगर पालिक निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों के आम/उप निर्वाचन २०१४ के लिए विहित समय अनुसूची (कार्यक्रम) संबंधी आदेश सात नवम्बर २०१४ को जारी किया गया था, जिसे आगामी आदेश तक स्थगित किया गया है।

राजस्थान पवेलियन में महिलाएं कर रही है लू स पर कोटा डोरिया साडिय़ां बनाने का जीवंत प्रदर्शन
जयपुर, 15 नव बर, 2014। नई दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेला में राजस्थान मंडप आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। विशेष कर मंडप में हथकरद्या (लू स) पर महिलाओं द्वारा कोटा डोरिया साडिय़ा बनाने का जीवंत प्रदर्शन दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। राजस्थान पवेलियन में कोटा डोरिया की साडिय़ों को लू स पर तैयार करने का जीवंत प्रदर्शन कर रहे कैथून, गांव (कोटा) की श्रीमती मोहसिना बानो एवं श्री नजमूल अहमद ने बताया कि उच्च गुणवत्ता की कोटा डोरिया मार्का की साडिय़ों का निर्माण करना हमारा पुस्तैनी काम है और कई पीढिय़ों से हम बुनाई का काम करते रहे है। हथकरधा पर ताना-बाना से निर्मित की जाने वाली इन साडिय़ों को तैयार करने में बुनकर विशेष रूप से सिल्वर गोल्डन जरी, रेशम, सूत, कॉटन के धागों का मिश्रित रूप से उपयोग करते है।ये उच्च गुणवत्ता के धागे मु यत: बेंगलूरू (कर्नाटक) सूरत (गुजरात), कोय बटूर (तमिलनाडु) से मंगवाये जाते हैं। कोटा डोरिया की साडिय़ों की कीमत 5000 से 70,000 तक है। उन्होंने बताया कि कोटा डोरिया की नकली साडिय़ों का उत्पादन आज सबसे बड़ी समस्या एवं चुनौती बन कर उभर रही है। वर्तमान में देश के विभिन्न हिस्सों में इसकी नकली साडिय़ां भी बाजार में सस्ते दामों पर उपलब्ध हो रही है। जिससे हमारे पुस्तैनी व्यवसाय को थोड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि यह व्यवसाय कोटा के मांगरोल एवं कैथुन के आसपास के गांवों और कस्बों में विशेष रूप से बुनकर परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है। अकेले कैथुन में लगभग चार हजार लू स कार्यरत है। उन्होंने बताया कि राजस्थान में हाडौती अंचल के कोटा जिले की विश्व प्रसिद्घ ''कोटा डोरियाÓÓ से बने वस्त्र जैसे साडिय़ां, सूट और दुपटें की नई दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में खासी मांग है। श्रीमती मोहसिना बानो एवं श्री नजमूल ने बताया कि कोटा डोरिया के नकली उत्पादों से बचने के लिए रूड़ा संस्था काफी प्रयास कर रही है एवं बुनकरों को प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नकली उत्पादों से बचने के लिए बुनाई के दौरान कोटा डोरिया मार्का को बुनाई में ही बना दिया जाता है, जिससे इन वस्त्रों एवं साडिय़ों की वास्तविकता को पहचाना जा सकता है। राजस्थान पवेलियन में कोटा डोरिया साडिय़ों की बिक्री भी हो रही है। वे बताते है कि राजस्थान सरकार खासकर राजस्थान स्टेट हैंडलूम डवलपमेंंट कॉरपोरेशन कोटा डोरिया के उन्नयन एवं प्रचार-प्रसार का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि ''कोटा डोरिया ब्रांडÓÓ के उन्नयन के लिए प्रयास और अधिक तेज किए जाए तथा नकली तरीके से तैयार सस्ती साडिय़ों की आवक रोकी जानी चाहिए। साथ ही और भी अधिक बुनकरों को उच्च गुणवत्ता बनाए रखने का प्रशिक्षण प्रदान किया जाए तो इसकी प्रतिष्ठा को विश्वभर में और ज्यादा फैलाया जा सकता है।


सरकारी कार्यालयों, बंगलो व कालोनियों में बिजली की खपत निर्धारित लोड के मुताबिक सुनिश्चित कराई जाए- मुख्यमंत्री
लखनऊ: १५ नवम्बर, २०१४ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने कहा है कि सरकारी कार्यालयों, बंगलों तथा कालोनियों में निर्धारित लोड के मुताबिक बिजली की खपत सुनिश्चित कराई जाए। उन्होंने इस सम्बन्ध में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। यह जानकारी आज यहां देते हुए राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि समिति इस तथ्य का अध्ययन करेगी कि सरकारी कार्यालयों, बंगलों तथा कालोनियों में विद्युत का उपभोग अनुमन्य सीमा के तहत किया जा रहा है अथवा नहीं। यदि बिजली की खपत तयशुदा लोड से अधिक है तो किस प्रकार लोड की सीमा की बढ़ोत्तरी सुनिश्चित की जाए, समिति इस सम्बन्ध में भी अपनी संस्तुति देगी। प्रवक्ता के अनुसार ऊर्जा, लोक निर्माण तथा राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव एवं राजस्व परिषद के सचिव इस समिति के सदस्य होंगे।


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तीरंदाज,328,व्ही.एस.भुल्ले,523,
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Village Times: सरल सेवक ही नहीं अच्छा शासक भी हो सरकार का मुखिया
सरल सेवक ही नहीं अच्छा शासक भी हो सरकार का मुखिया
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