आयेगेंं सिधिया सुनेगें समस्या: समाधान के मार्ग में, सियासत बड़ी बाधा

व्ही.एस.भुल्ले। भ्रष्टाचार पर कॉग्रेस के हल्ला बोल को भले ही फिलहॉल वजन न मिल रहा हो, मगर क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिधिया के आगमन ...

व्ही.एस.भुल्ले। भ्रष्टाचार पर कॉग्रेस के हल्ला बोल को भले ही फिलहॉल वजन न मिल रहा हो, मगर क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिधिया के आगमन से सियासती हल्को में हलचल अवश्य तेज है। सूत्रों की माने तो शिवपुरी स्थित सिधिया जनस पर्क कार्यालय पर लगे बड़े पण्डाल में बैठ सिधिया लेागों से स पर्क कर उनसे मिलेगें व समस्यायें भी सुनेगें मगर कितनी समस्याओं का समाधान होगा फिलहॉल यह सुनिश्चित नहीं, अगर हम पिछला इतिहास खगाले तो समाधान के नाम स्थानीय लेागों के हाथ ढाक के चार पात ही है।
कारण जोड़ तोड़ और श्रेय की हल्की सियासत जो समाधान के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। ऐसा नहीं कि म.प्र. में अब फलफूल चुकी ओछी सियासत का यह कोई पहला मामला हो। यह क्रम तो विगत 3 दशको से चल रहा है। सरकारे म.प्र. में फिर चाहे किसी भी दल की रही हो।
मगर हालिया विगत 6 वर्षो में जनसुविधाओं की बिना पर जो ओछी राजनीति शुरु हुई है, वह बड़ी ही शर्मनाक है।
चुनावी हार जीत, और राजनैतिक उठा पटक के रास्ते सियासत में और हो सकते थे। मगर जिस तरह से बिजली, सड़क, पानी, चिकित्सीय सुविधाओं सुरक्षा, रोजगार के लिये लेागों को कलपाया जा रहा है। वह किसी से छिपा नहीं जिस तरह का भ्रम फैला षडय़ंत्र पूर्ण राजनीति म.प्र. में चल रही है, उससे सिधिया का संसदीय क्षेत्र भी अछूता नहीं रहा। जहां पॉलोटेक्निक कॉलेज से लेकर 4 लेन आगरा-मु बई राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण, सीवर लाइन, नवीन चिकित्सालय और सबसे अहम सिन्ध जलावर्धन की पेयजल योजना सहित भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी झील संरक्षण और पायलट प्रोजक्ट जैसी योजनायें है हालात यह है कि सारी की सारी योजनायें वर्षो बीत जाने के बावजूद धक्के खाने पर मजबूर है। इस बीच जनसुविधाओं के लिये जद्दोजहद करने वालो का आलम यह रहा है कि साम, नाम, दण्ड, भेद की नीति में पारंगत लेागों ने उन्हें भी षडय़ंत्र पूर्ण राजनीति से इस हद तक मजबूर कर दिया कि वह भी अब इन षडय़ंत्रकारियों की कारगुजारियों के चलते वह भी हटो बचो की मुद्रा में है।
अब ऐसे में अन्दाजा लगाया जा सकता है कि क्या है समाधान और कैसे सुलटेगी समस्यायें जबकि ओछी सियासत आज भी बाधा बन सामने खड़ी है। राजनैतिक हालात ये है कि षडय़ंत्रकारी खा भी रहे है और गुर्रा भी रहे है। और तोहमत मेहनत कसो के सर, बरना आज विकास के परिणाम कुछ और ही होते।

ऐसी राज्य व्यवस्था बनाना है जिसमें हर व्यक्ति सुखी हो- मुख्यमंत्री श्री चौहान
भोपाल : शनिवार, सितम्बर २७, २०१४, मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि केवल विकास दर बढ़ाने से काम नहीं चलेगा। विकास का लाभ प्रत्येक प्रदेशवासी को मिलना चाहिये। सुशासन का अर्थ ऐसी राज्य व्यवस्था बनाना है जिसमें हर व्यक्ति शरीर, मन, बुद्धि, आत्मा से सुखी हों। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज यहाँ प्रशासन अकादमी में मंथन-२०१४ के उदघाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस तीसरे मंथन की थीम 'सुशासन' निर्धारित की गयी है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि राज्य शासन द्वारा वर्ष २००७ और वर्ष २००९ में आयोजित किये गये मंथन के बेहतर परिणाम मिले हैं। इनसे प्राप्त सुझावों के आधार पर कई प्रशासनिक सुधार किये गये तथा नई योजनाएँ प्रारंभ की गयीं। उन्होंने कहा कि मंथन के पीछे कोई सतही सोच नहीं है। यह टीम मध्यप्रदेश का प्रदेश की जनता को बेहतर सुविधाएँ देने का गंभीर प्रयास है। मंथन का उद्देश्य सुशासन के माध्यम से जनता को बेहतर सुविधाएँ देने वाली व्यवस्था बनाना है। उन्होंने कहा कि साम्यवाद, समाजवाद, पूँजीवाद आदि सभी विचारधाराओं के मूल में यह है कि मनुष्य को सुखी कैसे बनाया जाये परंतु भारतीय विचारधारा इससे आगे जाकर मनुष्य को निरोगी, सुखी और मनुष्य के कल्याण की बात करती है। भारतीय चिंतन में शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के सुख की बात कही गयी है। श्री चौहान ने कहा कि शासन व्यवस्था ऐसी होना चाहिये जिसमें लोगों को अपने मन की प्रवृत्ति के अनुरूप काम करने का मौका मिले। आत्म-संतोष मिलने से जीवन सार्थक होता है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा सुशासन वही है जिसमें गुणवत्तापूर्ण कार्य समय-सीमा में और पारदर्शिता से हो। राज्य सरकार के लिये खेती को लाभ का धंधा बनाने, गाँवों में लघु और कुटीर उद्योगों का जाल बिछाने, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास, ग्रामीण और शहरी विकास, बेहतर कानून व्यवस्था, कुपोषण पर रोक सुशासन के हिस्से हैं। इसी तरह व्यक्ति को भटकाव से बचाने के लिये हाल ही में लिया गया शपथ-पत्र अनिवार्यता समाप्त करने का निर्णय भी सुशासन का अंग है। उन्होंने कहा कि आम लोगों की छोटी-छोटी कठिनाइयों को दूर करने के लिये आधुनिक तकनीक का उपयोग होना चाहिये। करों का संग्रहण मधुमक्खी की तरह होना चाहिये, जो फूल से शहद तो लेती है पर फूल मुर्झाता नहीं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि उनकी उत्कट आकांक्षा मध्यप्रदेश को समृद्धशाली और विकसित राज्य बनाने की है। वे ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जिसमें सामान्य से सामान्य व्यक्ति को भी शासन व्यवस्था का समान रूप से लाभ मिले। इस मंथन का आयोजन भी इसी उद्देश्य से किया जा रहा है कि इससे प्राप्त अमृत से मध्यप्रदेश का जन-जीवन सुखी हो। मुख्य सचिव श्री अंटोनी डि सा ने मंथन २०१४ की रूपरेखा बताते हुए कहा कि सात विषय पर अधिकारियों के विचार समूह बनाये गये हैं। प्रत्येक समूह का समन्वयक एक वरिष्ठ अधिकारी को बनाया गया है। इन विषयों में हितग्राहीमूलक योजनाओं के संबंध में समग्र व्यवस्था, अधोसंरचना निर्माण, स्वास्थ्य-शिक्षा-सार्वजनिक वितरण प्रणाली, नियामक सेवाएँ, प्रशासनिक सुधार, वित्तीय संसाधनों को बढ़ावा-संसाधनों का अधिकतम उपयोग तथा आधुनिक तकनीक का उपयोग शामिल है। राज्य शासन की प्राथमिकताएँ और दृष्टि पत्र को ध्यान में रखते हुए इन विषय पर चर्चा होगी। प्रत्येक समूह मंथन के दूसरे दिन २८ सितम्बर को अपने निष्कर्षों और अनुशंसाओं पर आधारित प्रस्तुतिकरण करेगा। मंथन में मंत्रीगण, मंत्रालय तथा क्षेत्र में पदस्थ वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सभी सात समूह में जाकर वहाँ चल रहे मंथन, विचार-विमर्श को गहराई से देखा। उन्होंने कुछ समूहों की चर्चा चुपचाप पीछे बैठकर देखी-समझी। कुछ समूहों की चर्चा में पहुँचकर उन्होंने अपने सुझाव भी दिये। सभी समूहों से संबंधित विभागों के मंत्री भी विचार-विमर्श में शामिल हुए। सभी समूहों में खुल कर चर्चा हुई। नयी योजनाओं के सुझाव दिये गये। कुछ प्रचलित योजनाओं को और अधिक व्यवहारिक बनाने के सुझाव भी मंथन में दिये गये। समूहों में हुई चर्चा के निष्कर्षों की प्रस्तुति २८ सितम्बर को की जायेगी। सुशासन को मजबूत करने वाले जनोपयोगी तथा व्यवहारिक सुझावों को अमल में लाने के लिये तदनुसार योजनाओं, नियम, प्रक्रिया में सुधार किये जायेंगे। उद्घाटन सत्र के अंत में प्रमुख सचिव सामान्य प्रशासन श्री के. सुरेश ने आभार व्यक्त किया।

दीपावली पर इस साल नहीं बिकेंगे अधिक शोर करने वाले पटाखे
रायपुर, २७ सितम्बर २०१४ नगर निगम रायपुर ने इस बार पटाखों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण से निबटने के लिए तय्यारी शुरू कर दी है। नगर पालिक निगम के उपायुक्त (बाजार) ने बताया कि इस बार पटाखा व्यापारियों को आवेदन पत्र के साथ साथ अनिवार्य रूप से शपथ पत्र भी देना होगा कि उनकी दुकान में चार मीटर से अधिक दूरी तक शोर करने वाले और १२५ डेसिबल और १४५ डेसिबल से अधिक अधिक शोर करने वाले पटाखे नहीं बेचे जायेंगे। साथ ही पटाखों की लड़ियों में भी पटाखों की नियत संख्या भी तय की गयी है। उल्लेखनीय है की हर साल राजधानी रायपुर के मोतीबाग के पास मेला मैदान सहित अनेक स्थानों पर अस्थायी पटाखों की दुकाने लगती हैं, जिनके लिए हर साल नगर निगम द्वारा लाइसेंस के लिए आवेदन मंगाए जाते हैं। इस साल दुकान लगाने के इच्छुक व्यवसाइयों को ४ अक्टूबर तक शपथ पत्र के साथ आवेदन जमा करना होगा।

राजस्थान को मिला 'बैस्ट वैडिंग डेस्टीनेशनÓ का अवार्ड
जयपुर, 27 सित बर। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर शनिवार को हिमाचल प्रदेश के शिमला में आयोजित ÓÓथर्ड इंटरनेशनल टूरिज्म कॉन्क्लेव एण्ड टै्रवल अवार्ड'' कार्यक्रम में राजस्थान को ''बैस्ट वैडिंग डेस्टीनेशन'' अवार्ड से स मानित किया गया है। यह पुरस्कार हिमाचल प्रदेश के मु यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह से राजस्थान सरकार के दिल्ली स्थित पर्यटक स्वागत केन्द्र के सहायक निदेशक, श्री राजेन्द्र कुमार सैनी ने ग्रहण किया। पुरस्कार ग्रहण करने के बाद श्री सैनी ने बताया कि सरकार द्वारा निरतंर पर्यटन को बढ़ावा दिये जाने के प्रयासों के कारण आज राजस्थान देश-विदेशी सैलानियों के लिए मु य आकर्षण का केन्द्र बन गया है। उन्होंने बताया कि देशी-विदेशी पर्यटकों द्वारा राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहरो, महलों एवं किलों में शादियों का आयोजन करना उनकी प्रमुख पसंदों में शामिल है।

प्रधानमंत्री ने ९/११ स्मारक और संग्रहालय का दौरा किया
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज सुबह न्यूयार्क में ९/११ स्मारक और संग्रहालय का दौरा किया और ११ सितम्बर, २००१ को आत्मघाती आतंकी हमले में मारे गये लोगों को श्रद्धांजलि दी।
स्मारक न्यूयार्क शहर के उस च्च्ग्राउण्ड जीरोज्ज् पर स्थित है, जहां आतंकी हमले के दौरान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के दोनों टॉवर ध्वस्त हो गये थे। प्रधानमंत्री ने हमले में मारे गए भारतीय मूल के लोगों को भी श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री ने संग्रहालय का दौरा किया और स्मारक पेड़ पर माल्यार्पण किया।

समाज को जोड़ने वाली भाषा है उर्दू- मुख्यमंत्री
लखनऊ: २७ सितम्बर, २०१४ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने कहा है कि उर्दू भाषा समाज में एकता कायम करने और लोगों को जोड़ने वाली भाषा है। समाजवादियों की हमेशा यह कोशिश रहती है कि भाषाओं के माध्यम से समाज में एकता स्थापित की जाए। हिन्दी और उर्दू एक दूसरे की पूरक हैं, क्योंकि दोनों भाषाएं एक-दूसरे के शब्दों आदि का बेहिचक इस्तेमाल करती हैं। वही भाषा आगे बढ़ सकती है जो दूसरी भाषाओं के शब्दों को अपनाए। सरकार की हमेशा यही कोशिश रहती है कि सभी भाषाओं का सम्मान हो। उन्होंने कहा कि उर्दू के साथ समानता का व्यवहार होगा और उसे पूरा समर्थन मिलेगा। मुख्यमंत्री ने उर्दू अकादमी की सहायता के लिए डेढ़ करोड़ रुपए में से ७५ लाख रुपए की किस्त अवमुक्त कर दी है। मुख्यमंत्री आज यहां इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान में प्रदेश के विभिन्न जनपदों के हाईस्कूल तथा इण्टरमीडिएट की वर्ष २०१४ की परीक्षाओं में उर्दू विषय में जिला टाॅप करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने छात्र-छात्रओं को पुरस्कार सहित प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने इन मेधावी विद्यार्थियों को लैपटाॅप भी प्रदान किए। उन्होंने कहा कि तकनीकी में लगातार प्रगति होने के कारण दुनिया में बड़ी तेजी से बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में, अपनी संस्कृति को बचाने में भाषा बहुत मदद करती है। श्री यादव ने कहा कि ढाई वर्ष पूर्व जब समाजवादी सरकार सत्ता में आई तो विभिन्न भाषाओं में दिए जाने वाले सभी सम्मान बन्द पड़े थे। संस्कृत, हिन्दी तथा उर्दू भाषाओं में दिए जाने वाले सभी सम्मानों को समाजवादी सरकार ने पुनर्जीवित किया और २ अब इन भाषाओं के विद्वानों का सम्मान किया जा रहा है। इसी क्रम में उर्दू अकादमी के तत्वावधान में उर्दू के विद्वानों का सम्मान किया गया था।

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Village Times: आयेगेंं सिधिया सुनेगें समस्या: समाधान के मार्ग में, सियासत बड़ी बाधा
आयेगेंं सिधिया सुनेगें समस्या: समाधान के मार्ग में, सियासत बड़ी बाधा
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