सिस्टम पर संकट, सत्ता बनी बाधा

सत्ता में बने रहने की जुगत जो भी हो, मगर सत्ता में निरन्तर बने रहने के नशे ने समुचे सिस्टम को ही संकट में डाल दिया है। सरकारों में जि मे...

सत्ता में बने रहने की जुगत जो भी हो, मगर सत्ता में निरन्तर बने रहने के नशे ने समुचे सिस्टम को ही संकट में डाल दिया है। सरकारों में जि मेदारना पदो बैठे लेागों का सिर्फ एक लक्ष्य है कि वह जनता को खुश रख या फिर कोई ऐसी जुगत लगा निरन्तर सत्ता में कैसे बने रह सकते है। के सोचने के अलावा उनके पास समय ही कहां जो वह सिस्टम पर ध्यान गढ़ा सके।

नित नये ढंग से सत्ता में बने रहने के फॉरमूलो ने सब कुछ चौपट कर दिया। सरकार के सिस्टम की हालत ऐसी है। कि वह मूल कार्यो से भटक अब केवल सरकार के नये नये प्रयोगों की प्रयोगशाला के पात्र मात्र बन कर रह गये है। जिनकी भरपूर कीमत अदाकर सरकार के लेाग इन्हें संवैधानिक संस्थाओं का नौकर न मान कार्यकत्र्ताओं की तरह कार्य ले रही है। जो किसी भी सिस्टम के लिये उचित नहीं।
मगर सत्ता के मद में चूर सत्ता में बने रहने की खातिर जिस तरह से जड़ीय समस्याओं को छोड़, हल्की लेाकप्रियता की खातिर कार्य चल रहे वह लोकतंत्र के लिये बड़े ही खतरनाक है।

सत्ता में जो बैठे है जो कुछ कर सकते है उन पर समय कहां जो वह इस दिशा में सोच सके। शायद उन्हें यह इल्म नहीं कि जिस सिस्टम की बिना पर वह सस्ती लेाकप्रियता बटोर सत्ता सुख भोग स्वयं को सम्रान्ट समझने की भूल कर रहे है। उन्हें व उनकी आने वाली पीढ़ी को भी आज नहीं तो कल इसी चौपट होते जा रहे सिस्टम में ही जिन्दा रहना होगा। फिर इस व्यवस्था में वहीं बिजली, सड़क, पानी, शिक्षा, सुरक्षा, सिस्टम और ऐसी ही हल्की लेाकप्रियता बटोरने वाली सरकारे सामने होगी। अगर आज भी वर्तमान को देख भविष्य को बड़ी सोच के साथ सिस्टम, सत्ता और समाज को बेहतर ढंग से नहीं गढ़ा गया तो वो दिन दूर नहीं जब लेाग सत्ता में भी रहकर न तो सुरक्षित ही रह पायेगें न ही समस्याओं का समाधान ढूढ़, जनसेवा कर पायेगें।

देखा जाये तो शासकीय सिस्टम में जिस तरह की अव्यवस्था पसरी पढ़ी है वह किसी से छिपी नहीं सिर्फ बहाने, स्वयं के स्वार्थो पर टिकी सेवाओं का आलम यह है कि आम आदमी कलफ रहा है। या फिर कानूनों की परवाह किये बगैर मनमानी हरकते कर रहा है। जिसका मूल कारण कुछ लेाग ऐसे है जिनकी पगार तो ऊंची है मगर काम थेले भर का नहीं कुछ पर काम इतना है कि चाह कर भी उसको पूरा नहीं कर सकते।

देखा जाये तो जिस रफतार से आबादी बढ़ रही है। जिस रफतार से लेागों की जरुरतेे बढ़ रही है। निस्त नये ढंग से नई-नई समस्यायें बढ़ रही है, उस रफतार से सिस्टम में सेवको की सं या बढऩे के बजाये घट रही है। और दिन व दिन कार्य की मार बढ़ रही है। रहा सवाल सबसे अहम सुरक्षा का तो पुलिस की फौज किस बिल में छिपी है। शायद ही किसी को पता हो, मगर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से पूछो तो उनके पास सुरक्षा बल की कोई कमी नहीं है। भले ही दिन व दिन लेागों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही हो। और जनता सुरक्षा की नीद न सो रही हो, जब लेाग बन्द तालो में भी सुरक्षित न हो तो कैसे उ मीद की जा सकती है, कि लेाग सुरक्षित है। गाँवों से लेकर शहरो तक पसरी अराजकता इस बात का प्रमाण है कि सुरक्षित बंगलो में सुरक्षा कर्मियों के बीच रहने वालो को आम गरीब की कोई परवा नहीं न ही सत्तासीनो का कोई ऐसा सिस्टम जिसे कुट-पिट रहे लेागों की पढ़ी हो, शायद किसी ने सच ही कहां है जाको मरे वहीं रोयी, मन सुुख दास मड़ी में सोयी।

अब छोटी सड़कों का निर्माण लोक निर्माण नहीं ग्रामीण विकास विभाग करेगा
भोपाल : शुक्रवार, सितम्बर २६, २०१४, मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि ८ - १० किलो मीटर तक की छोटी सड़कों के निर्माण के कार्य लोक निर्माण से लेकर ग्रामीण विकास विभाग को दिया जायेगा। इन सड़कों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना, खेत-सड़क योजना की सड़कें शामिल होंगी। मुख्यमंत्री ने सड़कों के निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिये। 

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज यहाँ मंत्रालय में ग्रामीण विकास विकास विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि २०१८ तक सभी गाँव की सड़कों से जोड़ने के लिये अभी से योजनाबद्ध तरीके से कार्य करें। उन्होंने कहा कि सभी विधायकों को अपने-अपने क्षेत्र का विकास दृष्टि-पत्र बनवाने का आग्रह किया गया है। ये दृष्टि-पत्र ग्रामीण विकास विभाग को सौंपे जायेंगे ताकि सड़कों और अन्य कार्यों की प्राथमिकता का निर्धारण किया जा सके। श्री चौहान ने मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस समारोह के दौरान एक नवम्बर से ७ नवम्बर, २०१४ तक किसी एक दिन महिलाओं के स्व-सहायता समूह का सम्मेलन बुलाने के निर्देश दिये। 

बैठक में बताया गया कि ग्रामीण सड़कों के लिये समग्र संधारण नीति का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसे केबिनेट के समक्ष विचार के लिये रखा जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के क्रियान्वयन में देश में सबसे उत्कृष्ट काम किया है। इसमें शेष रह गयी सड़कों की स्वीकृति के लिये केन्द्र से आग्रह किया जायेगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में बड़ी सड़कों की नियमित रूप से जाँच होनी चाहिये और निर्माण की गुणवत्ता के प्रति सजग रहने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के दूसरे चरण के लिये नये प्रस्तावों को अभी से तैयार करने के निर्देश दिये।

COMMENTS

BLOGGER: 1
Loading...
Name

तीरंदाज,316,व्ही.एस.भुल्ले,510,
ltr
item
Village Times: सिस्टम पर संकट, सत्ता बनी बाधा
सिस्टम पर संकट, सत्ता बनी बाधा
http://4.bp.blogspot.com/-KD10GLl3v68/VCbzZePFC0I/AAAAAAAA5mY/wPFW4l12qEM/s1600/6941105529_a3056be361_z.jpg
http://4.bp.blogspot.com/-KD10GLl3v68/VCbzZePFC0I/AAAAAAAA5mY/wPFW4l12qEM/s72-c/6941105529_a3056be361_z.jpg
Village Times
http://www.villagetimes.co.in/2014/09/blog-post_27.html
http://www.villagetimes.co.in/
http://www.villagetimes.co.in/
http://www.villagetimes.co.in/2014/09/blog-post_27.html
true
5684182741282473279
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy