वन अधिकार को बट्टा, नहीं सुनते सचिव गरीबो की

मप्र शिवपुरी। शिवपुरी जिले के विकासखण्ड खनियाधाना की ग्राम पंचायत झलकुई के हालात कुछ ऐसे ही है। जहां वन अधिकार को लेकर नेसर्गिक सुविधा विहीन आदिवासी अपना वन अधिकार प्राप्त करने यहां वहां भटक रहे है। मगर उनकी सुनने वाला कोई नहीं। ऐसा ही मामला गत दिन जिला मु यालय पर देखने में आया।

ग्राम पंचायत झलकुई से डेढ़ दो किलो मीटर दूर बिहाबांन जंगल में मौजूद मजरा झलकुई के आदिवासी ग्राम पंचायत झलकुई के सचिव के तानाशाही पूर्ण रवैये की शिकायत ले, जिला मु यालय पहुंचे मगर जिलाधीश से मुलाकात न होने के कारण वह अपना दुखड़ा पत्रकारो को सुना वापस हो लिये। झलकुई मजरे से आये सन्तोष, गणेशा, हरि भान, रैना आदिवासी ने बताया कि हमारे मजरे में 50-60 लेागों की बस्ती है, जहां सभी आदिवासी जाति के लेाग रहते है। जहां न तो स्कूल, आंगनबाड़ी, राशन की दुकान है, न ही बिजली, पानी। हम परिवारो के जीवोत्पार्जन का माध्ययम मात्र खेती किसानी ही है। जिस भूमि पर काबिज रह हम खेती किसानी करते है, उसी भूमि को हमें अधिकार स्वरुप वन अधिकार अधिनियम के तहत अधिकृत तौर पर लेने अपना दावा प्रस्तुत करने ग्राम सभा में आवेदन भरना है। जो कि 20 पृष्ठिये है। हमारे अनपढ़ होने के कारण जब भी हम ग्राम पंचायत सचिव के पास आवेदन भराने जाते है, तो हमें दुदकार कर सचिव द्वारा भगा दिया जाता है।
ज्ञात हो कि म.प्र. सरकार ने शिवपुरी जिले में वन अधिकार अधिनियम के तहत 2005 से पूर्व वर्षो से काबिज वन वासियो को वन अधिकार पत्र देने हेतु 19 अगस्त से 31 अगस्त तक चिन्हित ग्रामों में कई टीमें गठित कर वन अधिकार पत्र के आवेदन संकलित करने का अभियान चलाया था। मगर ग्राम पंचायत सचिव की हठधर्मिता के चलते हम आदिवासी अपना दावा ग्राम सभा में प्रस्तुत नहीं कर सके। बहरहॉल जो भी हो, यह तो आदिवासी मजरा झलकुई का नजारा है। अगर ऐसे ही अन्य गाँव मजरे, टोलो पर नजर दौड़ाई जाये तो कई गाँव इस तरह की लापरवाही के शिकार मिल जायेगें।

सहरिया बच्चों के स्वास्थ्य के लिए माईक्रोप्लान
जयपुर, 22 सित बर। बारां जिले के शाहाबाद एवं किशनगंज के सहरिया बाहुल्य क्षेत्रों के बच्चों के स्वास्थ्य एवं कमजोर बच्चों को प्रतिदिन पोषाहार देने को सुनिश्चित करने के लिए माईक्रोप्लान बनाया गया है। जिला कलक्टर श्री ललित कुमार गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि माईक्रोप्लान के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा सहयोगिनी एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर स पर्क करेंगे। ये सुनिश्चित करेंगे कि सर्वेशुदा 0 से 6 वर्ष आयु तक के बच्चों को दिए जाने वाला सप्ताह का पोषाहार प्रतिदिन दिया जाए। बच्चों के स्वास्थ्य के बारे में परामर्श देंगे तथा स्वास्थ्य कार्यक्रम टीकाकरण एवं पोषाहार का फोलोअप करेंगे।
जिला कलक्टर ने बताया कि टीम द्वारा यदि कोई बच्चा कमजोर या कुपोषित पाया जाएगा तो उसे एमटीसी में रेफर कर स्वास्थ्य सुधार के लिए भर्ती किया जाएगा। यहां ऐसे बच्चे को उचित उपचार एवं पोषाहार प्रदान कर उसे स्वस्थ किया जाएगा। आवश्यक होने पर घर पर खाने के लिए दवाइयां भी दी जाएंगी।

दुगुना पोषाहार
जिला कलक्टर ने बताया कि विद्यालयों में चल रहे मिड-डे-मील कार्यक्रम के तहत सहरिया क्षेत्र के बच्चों को दुगुना पोषाहार दिया जा रहा है। इसके साथ ही बच्चों को शिक्षा से जोडऩे के लिए स्कूली ड्रेस व किताबें नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।

34 हजार से अधिक बच्चों को पोषाहार
उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी केन्द्रों पर 0 से 3 वर्ष आयु के बच्चों को सप्ताह भर का पोषाहार घर पर खिलाने के लिए एक साथ उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी प्रकार तीन से छह वर्ष आयु के बच्चों को केन्द्र पर ही प्रतिदिन पोषाहार पका कर उपलब्ध कराया जाता है। केन्द्र पर बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण के साथ-साथ स्वस्थ रहने के लिए स्वास्थ्य पोषण सलाह प्रदान की जाती है। सहरिया क्षेत्रों में चलाए जा रहे 266 आंगनबाड़ी केन्द्रों से 34 हजार 485 बच्चे पोषाहार एवं स्वास्थ्य सेवाओं से लाभान्वित हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि मां-बाड़ी केन्द्रों पर छह वर्ष से अधिक के छात्र-छात्राओं को शिक्षा के साथ-साथ दो वक्त नाश्ता एवं दोपहर व शाम का भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। सहरिया क्षेत्रों मेें चलाए जा रहे 324 मां-बाड़ी केन्द्रों से 9 हजार 500 से ज्यादा छात्र-छात्राएं लाभान्वित हो रहे हैं।


दोनों राज्यों के निवेशकों के सम्मेलन में आन्ध्र के मुख्यमंत्री ने कहा अन्तर्राज्यीय संबंध देश की सबसे बड़ी ताकत: डॉ. रमन सिंह
रायपुर, २२ सितम्बर २०१४/ आन्ध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एन. चन्द्रबाबू ने कहा है कि कोई भी राज्य नेतृत्व की कुशलता से ही विकास की राह पर आगे बढ़ता है। मुझे खुशी है कि मात्र १४ साल पहले गठित नया छत्तीसगढ़ राज्य अपने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में विकास के कई क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। श्री नायडू ने आज शाम राजधानी रायपुर में आयोजित निवेशक सम्मेलन में आन्ध्र और छत्तीसगढ़ के उद्योगपतियों को सम्बोधित कर रहे थे। श्री नायडू ने कहा- डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का भविष्य सुरक्षित है। रमन सरकार की कई योजनाएं निश्चित रूप से शासन-प्रशासन में नये प्रयोगों और नवाचारों का प्रतीक हैं, जिनका फायदा व्यापक रूप से यहां समाज के सभी जरूरतमंद वर्गो को मिल रहा है। श्री नायडू ने कहा- मैंने आज दिन भर के प्रवास में यहां नया रायपुर की विकास परियोजनाओं का अवलोकन किया और डॉ. रमन सिंह तथा उनके अधिकारियों की बैठक में विभिन्न योजनाओं का प्रस्तुतिकरण भी देखा। निवेशक सम्मेलन का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (सी.एस.आई.डी.सी.) द्वारा किया गया। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने सम्मेलन में प्रदेशवासियों की ओर से आन्ध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए कहा- श्री नायडू पिछली बार लगभग दस वर्ष तक मुख्यमंत्री के रूप में आन्ध्रप्रदेश का नेतृत्व किया था, उनके नेतृत्व में आन्ध्र ने चमत्कारिक विकास किया है। अब एक बार फिर आन्ध्र को श्री नायडू का नेतृत्व मिला है। डॉ. रमन सिंह ने उन्हें छत्तीसगढ़वासियों की ओर से शुभकामनाएं दी। डॉ. रमन सिंह ने दोनों राज्यों के बीच परस्पर सहयोग को बढ़ावा देने की मंशा की प्रकट करते हुए कहा- आज के समय में अन्तर्राज्यीय संबंध देश की सबसे बड़ी ताकत हो सकते हैं।

अनुकम्पा नियुक्ति के प्रावधान में संशोधन
भोपाल : सोमवार, सितम्बर २२, २०१४, मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज सम्पन्न मंत्रि-परिषद् की बैठक में कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए अनुकम्पा नियुक्ति के संशोधित एकजाई निर्देश के प्रारूप को अनुमोदन किया गया। अब शासकीय कर्मचारी की विवाहित पुत्री/पुत्रियों, वैधानिक रूप से गोद ली गई दत्तक संतान को अनुकम्पा नियुक्ति के पात्र सदस्यों में जोड़ा गया है। चतुर्थ श्रेणी की पात्रता रखने अथवा पद उपलब्ध न होने की स्थिति में दी जाने वाली अनुकम्पा अनुदान की राशि एक लाख २५ हजार से बढ़ाकर २ लाख कर दी गई है। दैनिक वेतनभोगी, कार्यभारित एवं आकस्मिकता निधि से वेतन पाने वाले कर्मचारियों को दी जाने वाली अनुकम्पा अनुदान की राशि भी एक लाख २५ हजार से बढ़ाकर २ लाख कर दी गई है। यह भी प्रावधान किया गया है कि शासकीय सेवक के परिवार का पात्र आश्रित सदस्य यदि नियमित सेवा में कार्यरत हो तो ही उसके परिवार का अन्य सदस्य अपात्र होगा। शासकीय सेवक की कोई संतान वयस्क नहीं है तो प्रथम संतान के वयस्क होने की तिथि से एक वर्ष तक उसे अनुकम्पा नियुक्ति दी जा सकेगी।


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