सत्ताएं तो बदली, मगर समस्यायें नहीं सुलझी, फिर से वोट कबाडऩे की तैयारी

म.प्र. शिवपुरी। पहले विधानसभा फिर लेाकसभा और अब नगर पालिका चुनाव की तैयारी जैसे-जैसे नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियाँ जोर पकड़ती जा रही...

म.प्र. शिवपुरी। पहले विधानसभा फिर लेाकसभा और अब नगर पालिका चुनाव की तैयारी जैसे-जैसे नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियाँ जोर पकड़ती जा रही है। वैसे-वैसे पालिका अध्यक्ष की कुर्सी पर नजर गड़ाये बैठे लेागों की गतिविधियाँ तेज हो गई है। मगर विगत 4 अध्यक्ष चुने जाने के बावजूद सत्ताये तो बदली मगर समस्याये नहीं सुलझी।

ले देकर उंगलियों पर गिने जाने वाली समस्याये सड़क, बिजली, पानी की समस्यायें 20 वर्ष बाद भी शहर में जस की तस है। मगर इस बीच 4-4 अध्यक्ष अपना कार्यकाल पूर्ण कर अपनी अपनी नेता गिरी चमका अपना-अपना रण कौशल चमका चुके है। जिसमें एक अध्यक्ष महोदय तो विगत 5 वर्ष तक विधायिकी का लाभ उठा, फिर से भाग्य आजमाने की जुगत में है।

बहरहॉल सवाल यहां शहर की अहम समस्याओं को लेकर है जिसमें सबसे बड़ी और अहम समस्या शुद्ध पेयजल की है। जिसका निदान 20 वर्ष खराब करने और लगभग 40 करोड़ फूकने के बाद फिलहॉल नजर नहीं आता। परिणाम शहर वासी या तो डस्टयुक्त वॉरबैलो या फिर गन्दे नालो से गुजर चाँद पाठे में इक_ा हो सप्लाई होने वाला पानी पीने पर मजबूर है। दूसरी समस्या स्ट्रीट लाइट की तो भ्रष्टाचार का केन्सर लिये वह भी रात में लोगों को ठीक से रोशनी नहीं दे पाती।

रहा सवाल साफ सफाई और सड़को का तो कई मोहल्लो में तो लेाग नरकीव जीवन जीने पर मजबूर है ही। शहर की सड़को का आलम यह है कि लगातार वेरोक टोक अतिक्रमण के चलते सड़के गलियो खन्दको में तो गलियो सिकुड़ चुकी है। खुदा न खास्ता घनी वस्तियों में अगर कोई घटना दुर्घटना हो जाये तो फायर बिग्रेड या बचाव दल को पहुंचने में भी पसीने छूट जायेगें। रहा सवाल साफ सफाई का तो यहां भी सफाई अधिकारियों के रहमो करम का ही इन्तजार करना होता है, बरना भगवान भरोसे व्यवस्था है।

अब ऐेसे में पुन: नगरीय निकाय सामने है और भाई लेाग अध्यक्षीय भोगने तैयार जिसमें प्रमुख राजनैतिक दलो सहित कई उस्ताद इस जुगत में है कि कैसे फतह हासिल हो पाये 1 सो लेागों ने अपनी अपनी गोंटियाँ तक जमाना शुरु कर दी है। देखना होगा इस बार कौन भाग्यशाली होगा जो शहर की जनता को ऊंचे-ऊंचे सबज बाग दिखा और अपनत्व की गंगा बहा अध्यक्ष की कुर्सी हासिल कर पाता है।

यहां आपको मिलेगा घर जैसा माहौल: डाॅ. रमन सिंह मुख्यमंत्री ने नये मेडिकल काॅलेज के प्रथम बैच के विद्यार्थियों का बढ़ाया हौसला
रायपुर, २० सितम्बर २०१४/ मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह आज जिला मुख्यालय राजनांदगांव में प्रदेश के नये शासकीय एलोपैथिक मेडिकल काॅलेज के शुभारंभ के दौरान एमबीबीएस के प्रथम बैच के विद्यार्थियों के बीच उनके अभिभावक और चिकित्सा शिक्षा के एक अनुभवी प्राध्यापक की भूमिका में भी नजर आए। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों और अन्य राज्यों से आए विद्यार्थियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि उन्हें राजनांदगांव में घर से बाहर रहकर भी घर जैसा आत्मीय माहौल मिलेगा। उन्होंने मेडिकल काॅलेज के शुभारंभ के बाद एमबीबीएस की कक्षा में छात्र-छात्राओं के साथ अलग से मुलाकात की। इन विद्यार्थियों ने पुष्प गुच्छ भेंटकर कक्षा में मुख्यमंत्री का स्वागत किया। डाॅ. सिंह ने उनसेे घर-परिवार की भी जानकारी ली। उन्होंने यह जानकर खुशी जतायी कि कुल १०० सीटों में से ९८ सीटों में प्रवेश हो चुका है और इनमें प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों में ४४ छात्राएं भी हैं। उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि आज इस मेडिकल काॅलेज का पहला दिन है, इसलिए वह उनकी पूरी क्लास नहीं ले रहे हैं, लेकिन भविष्य मंें उनसे समय-समय पर मुलाकातें होती रहेंगी। डाॅ. सिंह ने मेडिकल छात्र-छात्राओं को राजनांदगांव शहर की सामाजिक-सांस्कृतिक विशेषताओं की भी जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि राजनांदगांव को देश भर में हाॅकी के खेल की नर्सरी के रूप में जाना जाता है। लगभग एक वर्ष पहले यहां पर राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ के प्रथम अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के एस्ट्रोटर्फ हाॅकी स्टेडियम का निर्माण किया है। इस शहर का गणेश उत्सव काफी प्रसिद्ध है और यहां के आलू पोहे का स्वाद भी निराला है। उन्होंने विद्यार्थियों को एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए पांच वर्ष तक कड़ी मेहनत करने की सलाह दी और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।

मु यमंत्री के मीडिया सलाहकार के पिता के निधन पर शोक व्यक्त
जयपुर, 21 सित बर। मु यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे के मीडिया सलाहकार श्री महेन्द्र भारद्वाज के पिता श्री रामनारायण भारद्वाज के निधन पर दिल्ली स्थित राजस्थान सूचना केन्द्र के प्रभारी और कर्मचारियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। दिल्ली स्थित राजस्थान के समस्त कार्यालयों के प्रभारियों और कर्मचारियों ने अपने शोक संदेश में ईश्वर से श्री रामनारायण भारद्वाज की दिवगंत आत्मा की शांति एवं उनके शोक संतप्त परिजनों को यह आघात सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की है। उल्लेखनीय है कि श्री रामनारायण भारद्वाज का शनिवार को सायं सवाई मानसिंह अस्पताल में हृदयाघात से निधन हो गया था। वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे।

आत्महत्या की रोकथाम एक सेहत प्राथमिकताः स्वास्थ्य मंत्री मानसिक सेहत को दायरे में लाने के लिए सार्वभौमिक स्वास्थ्य आश्वासन कार्यक्रम
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने हताश हो जाने पर युवाओं में आत्महत्या करने की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण बहुमूल्य मानव संसाधन के राष्ट्रीय
नुकसान पर चिंता जताई है। आत्महत्या की बढ़ती दर के बारे में आम जनता को जागरूक करने के लिए आज केरल के त्रिसूर में आयोजित एक जनसंपर्क कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, च्आत्महत्या की बढ़ती घटनाएं वैश्विक महत्व का एक जन स्वास्थ्य मुद्दा बन गया है, जिसके बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट में बताया गया है। सरकार आत्महत्या की रोकथाम के लिए एक रणनीति अपनाएगी जिसके तहत सलाह-मशविरा देने और विषाद के इलाज के केंद्रों के विस्तार पर विशेष जोर दिया जाएगा।ज् वैसे तो विश्वभर में सर्वाधिक आत्महत्या की घटनाओं वाले देशों की सूची में भारत १२वें स्थान पर है, लेकिन दुर्भाग्यवश १५-२९ साल के आयु वर्ग वाले सर्वाधिक लोग भारत में ही आत्महत्या करते हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, च्यह कोई मरने की आयु नहीं है। ये ऐसे लोग हैं जो राष्ट्र निर्माण में काफी योगदान दे सकते हैं क्योंकि इनमें से ज्यादातर काफी शिक्षित रहते हैं। वे किसी तरह का मोहभंग होने के चलते विषाद की स्थिति में आत्महत्या करने का कदम उठा लेते हैं। अगर समय पर उन्हें सही सलाह दी जाए तो उनकी जान बचाई जा सकती है।ज् उन्होंने इस ओर ध्यान दिलाया कि भारत में हर साल १५ से २० लाख लोग आत्महत्या करते हैं। इसके अलावा, कलंक लगने के डर से आत्महत्या की कई घटनाओं के बारे में तो पुलिस को बताया ही नहीं जाता है। मंत्री ने बताया, च्मेडिकल, मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले छात्र, नौजवान प्रोफेशनल और यहां तक कि सरकारी पदाधिकारी भी बड़ी संख्या में आत्महत्या कर रहे हैं। भविष्य में इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।ज् डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम करने वाली रणनीति के तहत बंगलुरू स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और स्नायु विज्ञान संस्थान ने आत्महत्या के साथ-साथ इस तरह का कदम उठाने से लोगों को रोकने के लिए एक जागरूकता कार्यक्रम शुरू किया है। विश्वभर में २८ देश पहले से ही इस तरह का कार्यक्रम चला रहे हैं। मंत्री ने बताया कि च्गेटकीपरज् नामक इस कार्यक्रम के तहत सभी क्षेत्रों के लोगों को आत्महत्या की प्रवृत्ति के बारे में आवश्यक जानकारी देने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है तथा समुचित जानकारी दी जाती है। ये गेटकीपर आत्महत्या की प्रवृत्ति वाले मामलों का पता लगाएंगे और फिर उन्हें सलाह-मशविरा के लिए आगे लाएंगे।

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Village Times: सत्ताएं तो बदली, मगर समस्यायें नहीं सुलझी, फिर से वोट कबाडऩे की तैयारी
सत्ताएं तो बदली, मगर समस्यायें नहीं सुलझी, फिर से वोट कबाडऩे की तैयारी
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