मप्र: घृणित राजनीति से आहत लेाग

व्ही.एस.भुल्ले। म.प्र. ग्वालियर विगत दो दशक से जनसुविधाओं की बिना पर पनपी घृणित राजनीति ने प्रदेश के भोले भाले लेागों के साथ अन्याय ही नहीं घोर अपराध कर आहत भी किया है जिसके खुले प्रमाण भी अब मिलना शुरु हो चुके। हालिया मामला है राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 3 आगरा-मु बई का है।
जिसके 4 लेन निर्माण के लिये वन पर्यावरण की अनुमति की फाइल 15 करोड़ जमा करने के बावजूद भी 1 वर्ष तक प्रदेश सरकार के मंत्रालय ने ही रोके रखा। दूसरा मामला है ग्वालियर संभाग के शिवपुरी जिला मु यालय की सिन्ध जलार्वधन योजना का जो अब बन्द होने के कागार पर है। जिसे भी लगभग 60 फीसदी काम पूर्ण होने के बावजूद वन पर्यावरण के उल्लंघन के नाम पर रोक दिया गया। जनसुविधाओं की बिना पर श्रेय की घृणित राजनीति का नंगा नाच शायद ही और किसी प्रदेश में देखने मिले जो म.प्र. में देखने मिल रहा है।

ग्वालियर से देवास तक का आगरा-मु बई एन.एच. क्रमांक 3 का निर्माण जहां लगभग 3 हजार 600 करोड़ से होना है। वहीं सिन्ध जलावर्धन का निर्माण 82 करोड़ की लागत से होना था।
रहा सवाल विगत 25 वर्षो से गन्दे नालो से बहकर चाँदपाठा झील में एक_ा हो, सप्लाई होने वाले पेयजल से निजात दिलाने का जिसके लिये सिन्ध जलावर्धन जैसी महात्वकांक्षी योजना शुुरु की गई थी। मगर श्रेय की होड़ और राजनैतिक द्वेस भावना ने इस योजना को कहीं का नहीं छोड़ा।

इसी प्रकार कई महत्वपूर्ण लेागों सहित हजारों निरअपराध लेागों की एक्सीडेन्ट में जान ले हजारो को विकलांग बनाने वाले इस आगरा मु बई राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक. 3 को पूर्व लेाक निर्माण मंत्री रहे कैलाश विजयवर्गीय ने विलेज टाई स संपादक के सवाल पर एक्सीडेन्टल जॉन तक करार दिया था। तब वह पत्रकारों को भोपाल-इन्दौर मार्ग को फॉर लेन बनाने की बात बता रहे थे। तभी विलेज टाई स के सवाल पर लेाग निर्माण मंत्री ने इस रोड़ को एक्सीडेन्टल जॉन करार देते हुये इस मार्ग का भी फॉरलेन कराये जाने की इच्छा जाहिर की थी। विगत वर्षो मेंं इन्दौर भोपाल मार्ग तो फॉरलेन बन गया मगर विगत 7 वर्ष में ग्वालियर देवास मार्ग फॉरलेन नही बन सका।

हालाकि क्षेत्रीय सांसद होने के नाते ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भारत सरकार से ग्वालियर-देवास मार्ग की स्वीकृत करा केन्द्रीय मंत्री से भूमि पूजन तक करा दिया। मगर वह विगत वर्षो में केन्द्रीय मंत्री रहते वे इस सड़क का कार्य शुरु नहीं करा सके। कारण साफ है कि जब केन्द्र में यू.पी.ए. की सरकार थी और क्षेत्रीय सांसद उस सरकार में कांग्रेस की ओर से केन्द्रीय मंत्री जिन्होंने क्षेत्रीय जनता की सुविधा बतौर सिन्ध जलार्वधन और ग्वालियर-देवास फॉरलेन के निर्माण हेतु केन्द्र शासन से 82 करोड़ जलावर्धन लगभग 3 हजार 600 करोड़ की भारी भरकम राशि की स्वीकृति दिलाई। बस यहीं बात राज्य सरकार को खल गई और विधानसभा चुनाव 2013, लेाकसभा चुनाव 2014 को देखते हुये राज्य की भाजपा सरकार ने जलावर्धन के 62 करोड़ मिलने और ग्वालियर-देवास फॉरेलेन को 1 वर्ष पूर्व केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय की स्वीकृति मिलने के बाद भी राज्य सरकार का वन एवं पर्यावरण मंत्रालय फाईल को दवाये रखा जिससे कार्य शुरु न हो सके। इसी प्रकार जब सिंधिया शिवपुरी कलेक्टर परिसर में पत्रकारों से यह कहकर गये कि वह केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ से जल्द ही सिन्ध जलार्वधन योजना का लेाकार्पण करायेगें, उसके बाद ही वन विभाग द्वारा अचानक वन क्षेत्र में स्वीकृति पश्चात चल रहे पेयजल लाइन बिछाने के कार्य पर नेशनल पार्क (वन) विभाग द्वारा रोक लगा दी गई। कि वन एवं पर्यावरण का उल्लघंन हो रहा है। यह ग्वालियर संभाग में चल रही घृणित राजनीति की पराकाष्ठा थी। इतना ही नहीं स्वयं म.प्र. सरकार के मु यमंत्री अटल ज्योति अभियान के शुभार भ के मौके पर पोलो ग्राउण्ड की भरी सभा में लेागों से कह गये थे कि अगली बार जब भी आयेगें सिन्ध का पानी लेकर आयेगें। तब से अब तक माननीय मु यमंत्री 3 मर्तवा शिवपुरी हो गये। मगर उन्होंंने एक मर्तवा भी सिन्ध का नाम लेना तक उचित नहीं समझा। एक मर्तवा जब विलेज टाई स ने शिवपुरी सर्किट हाउस पर पत्रकारों से मुखातिब मु यमंत्री को उनके वचन की याद दिलाई तो वो दो मर्तवा तो वह अनसुना कर गये विलेज टाई स के बार-बार आग्रह के बाद मु यमंत्री ने कहां कि वह सारी फॉरमल्टियाँ पूरी कर सिन्ध की स्वीकृति पर्यावरण मंत्रालय से जल्द ही दिलायेगेें। मगर तब से अब तक तीसरी मर्तवा मु यमंत्री बनने वाले शिवराज सिन्ध का पेयजल तो दूर स्वीकृति तक नहीं दिला पाये, जबकि अब तो केन्द्र में उन्हीं की पार्टी भाजपा की सरकार है। और सिन्ध जलार्वधन योजना बन्द होने के कगार पर।

ऐसा ही हाल कुछ आगरा-मु बई राष्ट्रीय राजमार्ग क्र.3 के ग्वालियर से देवास मार्ग का है। इससे घृणित राजनीति लेाकतंत्र में और क्या हो सकती है कि ग्वालियर से देवास तक की सड़क के परखच्छे उड़ जाने के बावजूद जहां नदियों के घातक पुल, पुलियो की बांउड्री बॉल तक साफ हो चुकी हो, और हर वर्ष इस सड़क पर एक्सीडेन्टों में मरने वाले और अपाहिज होने वालेा की सं या हजारों हो, उस पर से वाहनों में टूट-फूट से अरबों की राष्ट्रीय संपत्ति का नुकसान और लेागों की इस मार्ग पर जान हथेली पर रख कर जलालत भरी यात्राऐं आखिर क्या कहेंगा स य समाज और प्रदेश को मन्दिर समझ जनता को भगवान मान सेवा करने वाली सरकार को। जिसका न तो कोई दीन दिखता है,न ही जनता के प्रति कोई ईमान।

बहरहॉल जो भी हों, जिस तरह से घृणित और श्रेय तथा सत्ता में बने रहने की राजनीति ने स्वार्थो का आगरा-मु बई राष्ट्रीय राजमार्ग को लेकर नंगा नाच किया है, ऐसी सरकारों, ऐसे नेताओं और ऐसे दलो को एक्सीडेन्टों में मरने वाली हजारों र्निअपराध लेागों की आत्माऐं ही माफ करेंगी न ही वर्षो से मल-मूत्र युक्त बर्षाति नालो से चाँदपाठें में इक_ा हों, सप्लाई होने वाले पेयजल को मजबूरी बस पीने वाले वो लाखों लेाग जिनसे छल कर लेाग सत्ता सिंहासन पर बैठ अंहकारी बातें भोली-भाली जनता से करते है। यह हमारे लेाकतंत्र का दुर्भाग्य ही है कि राजनैतिक समझ से अनभिज्ञ भोली-भाली जनता को चुनावों के वक्त भ्रम फैला, उनसे उनका बहुमूल्य वोट कबाड़ लिया जाता है।

एनटीपीसी के लिए सुरक्षा पुरस्कार
व्यावसायिक स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली में अपनी उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए प्लेटिनम श्रेणी में २०१४ (ऊपर अधिकांश न्यायाधीश) - एनटीपीसी ग्रीनटेक सेफ्टी अवार्ड से सम्मानित किया गया है. श्री एचएम गंगोपाध्याय, उप महाप्रबंधक (सुरक्षा) - सीसी और श्री ए.के. सामंत, त्रत्ररू (सिम्हाद्री) हैदराबाद में आयोजित एक समारोह में यह पुरस्कार प्राप्त किया.चार एनटीपीसी स्ह्लड्डह्लद्बशठ्ठह्य- सिम्हाद्री, सिंगरौली, तालचर (थर्मल) और औरैया गोल्ड अवार्ड और बोंगईगांव और विंध्याचल अवसर पर रजत श्रेणी में पुरस्कार प्राप्त प्राप्त किया.

अबूझमाड़ में हरित क्रांति : महिला किसान को मिली शानदार कामयाबी अबूझमाड़िया किसानों के लिए च्रोल मॉडलज् बनी तुलसी पटेल
रायपुर, १८ सितम्बर २०१४ प्रदेश सरकार द्वारा संचालित किसान हितैषी नीतियों के उत्साहवर्धक परिणाम छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल अबूझमाड़ जैसे भौगोलिक दृष्टि से कठिन इलाके में भी देखे जा रहे हैं। हिंसक नक्सल घटनाओं की वजह से अब तक इस इलाके की एक नकारात्मक छवि बाहरी दुनिया में बनी हुई थी, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में विभिन्न योजनाओं के जरिये जब छत्तीसगढ़ सरकार इस इलाके तक पहुंची तो अबूझमाड़ को लेकर विकास और विश्वास की एक सकारात्मक इमेज बाहरी दुनिया में भी उभरने लगी।
अबूझमाड़ के सहज-सरल स्वभाव के मेहनतकश किसान अब नक्सल हिंसा का जवाब शांतिपूर्ण हरित क्रांति से देने लगे हैं। इसका ताजा उदाहरण है अबूझमाड़ विकासखंड के मुख्यालय ओरछा की महिला किसान श्रीमती तुलसी बाई पटेल, जिन्हें छत्तीसगढ़ सरकार के कृषि विभाग की च्आत्माज् योजना के तहत सर्वश्रेष्ठ किसान के रूप में प्रशस्ति पत्र और २५ हजार रूपए की सम्मान निधि से सम्मानित किया गया है। कलेक्टर श्री टी.एस. सोनवानी ने उन्हें इस सम्मान राशि के साथ प्रशस्ति पत्र भेंट किया। इतना ही नहीं बल्कि श्रीमती तुलसी बाई के गृह जिले नारायणपुर के ग्राम महिमागवाड़ी में कृषि विभाग द्वारा कल आयोजित च्कृषक चौपालज् कार्यक्रम में भी बड़ी संख्या में मौजूद किसानों और ग्रामीणों के बीच जिला प्रशासन द्वारा उन्हें प्रगतिशील किसान के रूप में शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। कृषि अधिकारियों का कहना है कि श्रीमती तुलसी बाई पटेल अबूझमाड़ के किसानों के लिए रोल मॉडल बन गयी हैं। कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं के जरिये उन्होंने खेती के उन्नत तौर-तरीके अपना कर अपने आठ एकड़ के रकबे में धान के अलावा साग-सब्जियों की खेेती करके अपने परिवार को आर्थिक दृष्टि से आत्मनिर्भर और खुशहाल बना दिया है। वह चार एकड़ में धान और शेष रकबे में तरह-तरह की ताजी और हरी सब्जियां उगा रही हैं। उन्होंने अपने खेतों की मेड़ पर आम, नारियल, कटहल और अनार के पौधे भी लगाए हैं। मछलीपालन भी कर रही हैं। उनका गांव ओरछा जिला मुख्यालय नारायणपुर से लगभग ६५ की दूरी पर है। ओरछा को अबूझमाड़ का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। उनके गांव और खेतों तक कृषि विभाग की टपक सिंचाई योजना (ड्रीप इरिगेशन) जैसी योजनाओं के पहुंचने से पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी। वह अपने दो बेटों के साथ कुल आठ एकड़ में से चार एकड़ खेतों में धान की पैदावार लेकर बाकी समय रोजी-मजदूरी करके परिवार का गुजारा चलाती थी। करीब तीन साल पहले कृषि विभाग के उद्यानिकी अधिकारियों ने उनसे से सम्पर्क किया और उन्हें साग-सब्जियों की खेती की सलाह देकर विभागीय योजनाओं की भी जानकारी दी। श्रीमती तुलसी पटेल ने पहले दो एकड़ में साग-सब्जी लगाना शुरू किया। उससे कुछ आर्थिक लाभ हुआ, तो उन्होंने एक साल पहले स्वयं के पैसों से खेत में सिंचाई नलकूप खुदवाया। पिछले साल २०१३-१४ में उन्होंने उद्यानिकी अधिकारियों के मार्गदर्शन में खेतों में टपक सिंचाई (ड्रीप इरिगेशन) प्रणाली की स्थापना की। इसके लिए उन्हें एक हेक्टेयर के रकबे में ७५ हजार रूपए का सरकारी अनुदान मिला। उद्यानिकी अधिकारियों की सलाह पर उन्होंने साग-सब्जियों के उन्नत बीजों का उपयोग किया, रासायनिक उवर्रकों का भी संतुलित इस्तेमाल किया। इसके उत्साहवर्धक नतीजे उन्हें मिलने लगे। करेला, भिंडी, मिर्च, बैंगन और बरबट्टी की भरपूर पैदावार मिलने लगी। साग-सब्जियों की खेती में तुलसी और उनके परिवार की मेहनत तथा उनकी इस शानदार कामयाबी को देखकर उद्यानिकी अधिकारियों ने उन्हें राज्य सरकार की ओर से दो लाख रूपए के अनुदान पर प्री-कुलींग चेम्बर भी उपलब्ध कराया है। इस चेम्बर में साग-सब्जियां एक सप्ताह तक ताजी और हरी-भरी रह सकती है और उनकी क्वालिटी भी ठीक रहती है। इससे साप्ताहिक बाजारों में ग्राहकों को उनके द्वारा अच्छी गुणवत्ता की ताजी सब्जियां दी जा सकती है। श्रीमती तुलसी बाई पटेल के परिवार में दस सदस्य हैं। वह और उनके दो बेटे-बहू भी पूरा समय खेती-किसानी में लगा रहे हैं। दोनों बेटे ओरछा और छोटे डोंगर के साप्ताहिक बाजारों में हर हफ्ते लगभग तीन हजार से चार हजार रूपए की साग-सब्जी बेचकर अच्छी आमदनी हासिल कर रहे हैं। उन्हांेने अपने खेत की जमीन पर डबरी बनाकर मछली पालन भी शुरू कर दिया है।

दण्ड प्रक्रिया संहिता (राजस्थान संशोधन) विधेयक, 2014 ध्वनिमत से पारित
जयपुर, 18 सित बर। राज्य विधानसभा ने गुरुवार को दण्ड प्रक्रिया संहिता (राजस्थान संशोधन) विधेयक, 2014 ध्वनिमत से पारित कर दिया। इससे पहले ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्री गुलाब चंद कटारिया ने विधेयक को सदन के पटल पर रखा। विधेयक पर हुई चर्चा के बाद इसके उद्देश्यों और कारणों पर प्रकाश डालते हुए श्री कटारिया ने कहा कि इस संशोधन के जरिए राज्य सरकार दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 29 की उप-धारा (2) को जुर्माने की रकम को दस हजार रुपए से बढ़ाकर 50 हजार रुपए करते हुए संशोधित कर रही है, जिससे राज्य में प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट को ऐसे मामले पर विचार करने का अधिकार मिल सके। श्री कटारिया ने कहा कि इससे पूर्व राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 को 2007 में संशोधित किया गया था। इसके तहत बीस हजार रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान था। उन्होंने कहा कि इस दृष्टि से प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट की जुर्माना लगाने की शक्ति को 10 हजार रुपए से बढ़ाकर 50 हजार रुपए किया जाना आवश्यक है, ताकि वह ऐसे मामलों की सुनवाई कर सके।
इससे पहले सदन ने विधेयक को प्रवर समिति को भेजने एवं जनमत जानने के लिए परिचारित करने के प्रस्ताव को ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिया।

मुख्यमंत्री से मध्य प्रदेश की उच्च स्तरीय विधानसभा प्राक्लन समिति की भेंट
१८ सितम्बर २०१४ हिमाचाल प्रदेश मध्य प्रदेश की उच्च स्तरीय विधानसभा प्राक्लन समिति के सदस्यों ने समिति अध्यक्ष श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा के नेतृत्व में आज यहां मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह से उनके आधिकारिक निवास च्ओक ओवरज् में भेंट की। विधायकों ने प्रदेश में विभिन्न विकास के मुद््दों और अलग-अलग क्षेत्रों में अर्जित सफलताओं पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने पेयजल सुविधाओं के सन्दर्भ में उनके प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि प्रदेश के लगभग सभी गांवों में नलों के माध्यम से पेयजल सुविधा उपलब्ध है और सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके घरों को पेयजल सुविधा उपलब्ध करवा रही है। श्री वीरभद्र सिंह ने उच्च स्तरीय समिति को प्रदेश की बारहमासी नदियों से जल उठाव तकनीक के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में शत-प्रतिशत विद्युतीकरण के लक्ष्य को हासिल किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने राज्य की वन सम्पदा के संरक्षण और संवर्धन के लिए कदम उठाए हैं। उन्होंने प्रदेश में विकास और जन कल्याण के लिए किए जा रहे कार्यों और विषयों पर भी चर्चा की। श्री वीरभद्र सिंह ने समिति के सदस्यों को परम्परागत हिमाचली शाॅल और टोपी भेंट कर सम्मानित किया। समिति के सदस्यों ने प्रदेश सरकार द्वारा उन्हें दिए गए आदर सत्कार के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

महाराष्‍ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव-२०१४ की अवधि के दौरान जनप्रतिनिधित्‍व अधिनियम १९५१ की धारा १२६ के अनुसार मीडिया कवरेज
१८-सितम्बर, २०१४ जनप्रतिनिधित्‍व अधिनियम १९५१ की धारा १२६ के तहत विधानसभा क्षेत्र में मतदान समाप्‍त होने के ४८ घंटें पहले की अवधि के दौरान अन्‍य माध्‍यमों के साथ-साथ टेलीविजन या इसके जैसे अन्‍य संचार माध्‍यमों द्वारा किसी भी प्रकार की चुनाव सामग्री का प्रदर्शन प्रतिबंधित है। उक्‍त धारा १२६ के संबंधित हिस्‍सो को दोबारा नीचे दिया जा रहा है:-
१२६ धारा में मतदान समाप्‍त होने के ४८ घंटे पहले की अवधि के दौरान सार्वजनिक बैठकें आयोजित करने पर प्रतिबंध है।
१ कोई भी व्‍यक्ति ऐसा नहीं कर सकता-
(क) किसी भी चुनाव के लिए मतदान क्षेत्र में मतदान समाप्‍त होने के समय से ४८ घंटे पहले की निर्धारित अवधि के दौरान चलचित्रण, टेलीविजन या इसी प्रकार के अन्‍य माध्‍यम के जरिये किसी प्रकार की चुनाव सामग्री का सार्वजनिक प्रदर्शन; (ख) ऐसा कोई भी व्‍यक्ति जो उपधारा (१) के प्रावधानों का उल्‍लंघन करता है तो उसे जेल की सजा हो सकती है जिसकी अवधि दो वर्ष के लिए बढाई जा सकती है या हर्जाना या दोनों सजाएं मिल सकती हैं। (ग) इस धारा में चुनाव सामग्री का मतलब ऐसी सामग्री से है जिसका मकसद एक चुनाव के परिणाम को प्रभावित करना है।
२ चुनाव के दौरान टीवी चैनलों द्वारा अपने पैनल विचार-विमर्श/बहस और अन्‍य समाचार और वर्तमान मामलों के प्रसारण में जन प्रतिनिधि अधिनियम १९५१ की उपरोक्‍त धारा १२६ के प्रावधानों का कभी-कभी उल्‍लंघन करने के आरोप लगाए जाते हैं। आयोग ने पहले भी स्‍पष्‍ट किया है कि उपरोक्‍त धारा १२६ में किसी मतदान क्षेत्र में मतदान समाप्‍त होने के समय से ४८ घंटे पहले की निर्धारित अवधि के दौरान टेलीविजन या इसी प्रकार के अन्‍य माध्‍यम के जरिये किसी प्रकार की चुनाव सामग्री का प्रदर्शन प्रतिबंधित है। उक्‍त धारा में चुनाव सामग्री को ऐसी सामग्री के रूप में परिभाषित किया गया है जो चुनाव परिणाम को प्रभावित करने के मकसद से तैयार की गई हो। धारा १२६ के प्रावधान का उल्‍लंघन करने पर अधिकतम २ वर्ष की जेल या हर्जाना या दोनों सजाएं हो सकती हैं।
३ इस संदर्भ में जनप्रतिनिधित्‍व अधिनियम १९५१ की धारा १२६ए पर भी ध्‍यान दिलाया जाता है जिसके तहत निर्धारित अवधि यानि मतदान शुरू होने के लिए निर्धारित घंटे से मतदान समाप्‍त होने के बाद के समय के दौरान एक्जिट पोल और उनके परिणाम का प्रसारण प्रतिबंधित है।
४ आयोग ने फिर जोर दिया कि टीवी/रेडियो तथा केबल नेटवर्क को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि धारा १२६ में बताई गई ४८ घंटों की अवधि के दौरान उनके द्वारा अपने कार्यक्रम के प्रसारण/प्रदर्शन में पैनलिस्‍ट/प्रतिभागियों के विचार/अपील सहित ऐसी कोई सामग्री न हो जिससे किसी दल विशेष या उम्‍मीदवार (उम्‍मीदवारों) अथवा चुनाव परिणाम पर असर/प्रभावित हो। इसमें किसी एक्जिट पोल के परिणाम का प्रदर्शन और बहस, विश्‍लेषण, दृश्‍य और साउंड बाइट सहित अन्‍य सामग्री शामिल है।

मुख्यमंत्री ने जी.एम.यू. की लगभग ३५० करोड़ रु की परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया
लखनऊ: १८ सितम्बर, २०१४ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने कहा है कि किंग जाॅर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (के.जी.एम.यू.) को देश ही नहीं बल्कि दुनिया की अव्वल दर्जे की संस्था बनाने के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने के.जी.एम.यू. की विशिष्टता एवं कार्य को देखते हुए यहां के शिक्षकों का वेतनमान एस.जी.पी.जी.आई., लखनऊ के समकक्ष करने तथा राजकीय मेडिकल काॅलेजों की फैकल्टी की रिटायरमेंट आयु ६५ वर्ष करने की घोषणा की। उन्होंने के.जी.एम.यू. कैम्पस को बेहतर बनाने के लिए जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा विश्वविद्यालय को विश्वस्तरीय सिग्नेचर बिल्डिंग बनाने के लिए सभी सम्भव मदद देने की बात भी कही है। मुख्यमंत्री आज यहां साइंटिफिक कन्वेंशन सेण्टर में के.जी.एम.यू. द्वारा आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने के.जी.एम.यू. की लगभग ३५० करोड़ रुपए की विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। जिन परियोजनाओं का लोकापर्ण किया गया, उनमें आधुनिक शैक्षणिक ब्लाॅक, विभिन्न प्रकार के आवासों के ०३ ब्लाॅक, १०० बिस्तरों वाले ब्वायज हाॅस्टल, वर्चुअल क्लास तथा हाॅस्पिटल कम्प्यूटराइजेशन और फाइबर आॅप्टिक केबल नेटवर्क फेज़-१ शामिल हैं। इस मौके पर उन्होंने के.जी.एम.यूइंस्टीट्यट आॅफ स्किल्स, २५० बिस्तरों वाले गल्र्स हाॅस्टल, ६५० बिस्तरों वाले नर्स हाॅस्टल तथा ९३२ बिस्तरों वाले ब्वायज हाॅस्टल की आधारशिला भी रखी। विश्व में के.जी.एम.यू. की प्रतिष्ठा की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न देशों में कार्यरत यहां के चिकित्सक अपने को जाॅर्जियन कहलाने पर गर्व महसूस करते हैं। राज्य सरकार के.जी.एम.यू. की इस प्रतिष्ठा को बनाए रखने तथा इसमें और अधिक वृद्धि के लिए पूरा सहयोग प्रदान करेगी। सरकार द्वारा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए गए कार्यों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आदरणीय नेताजी ने अपने कार्यकाल में चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए काफी कार्य किया था। उनके प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए वर्तमान राज्य सरकार ने भी इस क्षेत्र में तेजी से काम किया है। प्रदेश का शायद ही कोई ऐसा गांव हो, जहां इलाज के लिए लोगों को अपनी जमीन न बेचनी पड़ी हो। सरकार जनता की इस समस्या से वाकिफ है, इसीलिए गम्भीर बीमारियों के इलाज की निःशुल्क व्यवस्था के साथ-साथ कई और फैसले भी लिए गए, जिनका लाभ जनता को मिल रहा है।

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