ये तो हद है मुख्यमंत्री जी! मुफ्त का चन्दन, घिस मेरे नन्दन

व्ही.एस.भुल्ले। लगता है कि तीसरी मर्तवा सत्ता में आई भाजपा सरकार की जीत की खुमारी उतरी नहीं। जो सत्ता के मद में चूर हो, कुछ भी टीव्ही, कैमरों के सामने बोल बैठती है। जबकि यूपीए सरकार को जाये पूरे 100 दिन हो चुके है। मगर सरकार है, जो आज भी श्रेय लेने का कोई भी मौका चूकना नहीं चाहती।

अगर श्रेय को लेकर काश सर्वश्रेष्ठ पुरुषकार बट रहे होते तो मप्र के उस्ताद पहले नंबर पर खड़े होते। तभी तो पहले अंधेरे में डूबी अटल ज्योति और अब बढ़ती मप्र की आर्थिक विकास दर के व्यान ने आम बुद्धिजीवी ही नहीं मप्र के आम नागरिकों को भी यह सोचने पर मजबूर कर दिया, कि आखिर कौन सी और कैसी सरकार मप्र में चल रही है। जो कुछ तो भी बोल रही है।

हाल ही में प्रदेश के मुखिया ने मप्र की आर्थिक दर पर टीव्ही कैमरे पर बोलते हुये कहां कि मप्र के अधिकारी कर्मचारी बधाई के पात्र है जिनकी घनघौर मेहनत के बल पर मप्र की आर्थिक विकास दर इतनी बढ़ रही है। अब कौन समझाये माननीय को, कि म.प्र. कृषि प्रधान प्रदेश है जहां मौसम लगातार किसानों के हित में रहा है। और प्रदेश के गरीब किसानों की कड़ी मेहनत का परिणाम है जो उसने बिजली के इन्तजार में काली राते काट प्रदेश का उत्पादन बढ़ाया वो भी नकली खाद, नकली बीज आसमान छूती खाद बीज की दरो के बीच उसने उत्पादन बढ़ाया। तो सच्चा श्रेय और धन्यवाद तो प्रदेश के उस गरीब किसान अन्न दाता को मिलना चाहिए था, जिनका खून प्रदेश के भ्रष्ट अधिकारी, कर्मचारियों एवं नकली खाद, बीज विक्रताओं ने जमकर चूस केवल मांस नहीं खाल को छोड़ा है। ऐसे अन्न दाता की अनदेखी राजनैतिक स्वार्थ बस उचित नहीं।

हो सकता है कि सरकार बनवाने और बिगड़वाने में अधिकारी, कर्मचारियों की कुछ भूमिका रहती हो, मगर म.प्र. की जान तो इस प्रदेश के किसान ही है। जिन्हें अटल ज्योति के आंसूओं के बाद शायद पहली मर्तवा ठेस पहुंची हो।
फिलहॉल जिस तरह की चर्चा आम है कि शायद यह अधिकारी, कर्मचारियों की घनघौर मेहनत का ही परिणाम है, कि जब भी प्रदेश में लेाकायुक्त या ई.ओ.डब्लू. का छापा डलता है तो इन घनघौर मेहनत कसो के यहां करोड़ों रुपये की स पत्ति या नोटो का अ बार निकलता है, जिसके कई उदाहरण प्रदेश में मौजूद है।
बहरहॉल मुखिया की नजर में सच जो भी हों,सरकारी आंकड़े जो भी संकलित हो मगर सच यह है, कि म.प्र. के गरीब को न तो शुद्ध पेयजल, न ही बिजली, सड़क, मयस्सर है रहा सवाल सुरक्षा का तो आलम यह है कि अपराधी, खुलेयाम शहरों में लूटपाट, हत्याये कर रहे है। घरों के ताले ही नहीं सरियो से मेहनत कस लेागों के लूट के लिये सर फूट रहे है।
रहा सवाल बेरोजगारी का तो आलम यह कि अगर कहीं पर भृत्य के 3-4 स्थान भरने विज्ञापन निकल रहे है, तो हजारो बेरोजगार रोजगार के लिये आवेदन कर रहे है। रहा धन्धा खनिज का तो कानून को सरेयाम ठेंगा दिखा पेट भरने धन्धे के लिये खदान माफियाओं के संरक्षण में सरेयाम अवैध उत्खन्न कर सरकारी कर्मचारियों को धुन रहे है।
रहा सवाल मजदूरी का तो मजदूरी की म.प्र. में मदर बनी मनरेगा में मनमाने घोटालो के बीच 4-4 वर्ष बाद कार्मोत्तर स्वीकृति के नाम बड़े-बड़े खेल चल रहे है।
शराब के ठेके भले ही जाप्ते में गिने चुने हो, मगर समुचे म.प्र. के 90 फीसदी गावों में अघोषित तैार पर मयखाने चल रहे है, न कि प्रदेश में कोई नये उघोग धन्धे खुल रहे।
आखिर यह भी तो विकास ही है। शायद सरकार इन पर भी अपने आंकड़े या व्यान रखे तो बेहतर होगा। तभी तो लेाग कहते है, कि मुफत का चन्दन घिस मेरे नन्दन।

मुख्यमंत्री ने बाढ़ग्रस्त जम्मू एवं कश्मीर से राज्य के लोगों को सुरक्षित वापस लाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए स्थानिक आयुक्त जम्मू एवं कश्मीर के प्रशासन से समन्वय स्थापित कर प्रदेश के लोगों की वापसी सुनिश्चित कराएं: मुख्यमंत्री
लखनऊ: १० सितम्बर, २०१४ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने जम्मू एवं कश्मीर की बाढ़ में फंसे राज्य के लोगों को सुरक्षित वापस लाने के लिए अधिकारियों को सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने नई दिल्ली में तैनात प्रदेश के स्थानिक आयुक्त को निर्देशित किया है कि वे जम्मू एवं कश्मीर के स्थानीय प्रशासन से आवश्यक समन्वय स्थापित कर बाढ़ प्रभावित इलाकों से प्रदेश के लोगों को वापस लाने की व्यवस्था सुनिश्चित कराएं। ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री से आज विधायक श्री हेमराज वर्मा ने मुलाकात कर उन्हें यह जानकारी दी कि लखीमपुर-पीलीभीत क्षेत्र के लगभग २,००० लोग जम्मू-कश्मीर में फंसे हैं। श्री वर्मा ने इन लोगों को सुरक्षित प्रदेश वापस लाए जाने का मुख्यमंत्री से अनुरोध किया। श्री यादव ने उन्हें आश्वस्त किया कि राज्य सरकार बाढ़ प्रभावित जम्मू-कश्मीर में फंसे प्रदेश के लोगों को वापस लाने के लिए सभी आवश्यक प्रबन्ध करेगी।

सेना के सहायता मिशन के बारे में ताजा सूचनाएं (९ सितंबर २०१४ को शाम ५.३० बजे की स्थिति)
१०-सितम्बर, २०१४ सेना द्वारा चलाई जा रही मानवीय सहायता अब बचाव से राहत कार्यों में बदल रही है। सेना के २१५ सैन्य दल सहायता कार्यों में आज तक लगा दिए गए हैं जिन्‍होंने ३८,७०० लोगों की जान बचाई हैं। इनमें से २४,००० लोग अकेले श्रीनगर शहर के हैं। श्रीनगर में सैन्य दलों ने राजबाग, शिवपुरा, इंदिरा नगर, बे‍मीना और टैंकपुरा इलाकों में ही अपने प्रयास केंद्रित किये हैं। श्रीनगर में ही ४,००० लोगों को बचाकर सुरक्षित स्‍थानों पर पहुंचाया गया। इनमें नेपाल के राजदूत और उनके प्रतिनिधि मंडल के १७ सदस्‍य तथा पाकिस्‍तानी गोल्‍फ टीम के २८ सदस्‍य भी शामिल हैं। इन लोगों को ८ सितंबर २०१४ को बचाया गया। ये सार्क देशों की टीम के सदस्‍य थे। जम्‍मू कश्‍मीर में ६५ से ८० मेडिकल टीमें तैनात की गईं। जो अतिरिक्‍त प्रयास किए गए, उनमें एक फील्‍ड अस्‍पताल का संचालन, एक इंजीनियर टास्‍क फोर्स, खाने के लिए तैयार भोजन, पैक किया हुआ दूध, कंबल, पेयजल, बेबी फूड (०७ टन) आदि शामिल हैं। लगभग २०० नावें बचाव कार्यों में लगा दी गई हैं और अतिरिक्‍त नावों की व्‍यवस्‍था की जा रही है। सेना ने १३ चेतक और ०५ एडवांस लाइट हेलीकॉप्‍टर बचाव कार्यों में लगा दिए हैं। ये लोग रोजाना राहत कार्यों के लिए १०० से १२० उड़ानें भर रहे हैं।

मण्डी मध्यस्थता योजना के अन्तर्गत २०८४ मीट्रिक टन सेबों की खरीद
बागवानी विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां कहा कि मण्डी मध्यस्थता योजना के अन्तर्गत ७ सितम्बर, २०१४ तक २०८४ मीट्रिक टन सेबों की खरीद की गई है। उन्होंने कहा कि योजना के अन्तर्गत इस अवधि के दौरान हिमाचल प्रदेश विपणन निगम ने १४७०.३५४ मीट्रिक टन सेब तथा हिमफैड ने ६१३.३९८ मीट्रिक टन सेब की खरीद की है। उन्होंने कहा कि अभी तक हिमफैड और एचपीएमसी द्वारा १७८ सेब एकत्रण केन्द्र खोले गए हैं, जिनमें एचपीएमसी द्वारा ९२ केन्द्र तथा हिमफैड द्वारा ८६ केन्द्र खोले गए हैं। प्रवक्ता ने कहा कि ७ सितम्बर, २०१४ तक २६०५८ ट्रकों के माध्यम से ११७२८०२४ सेब के बक्सों में २३४५६० मीट्रिक सेब प्रदेश से बाहर निर्यात किए गए हैं। 

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