मप्र का सच: ममता अभियान में, मौत का सामान

व्ही.एस.भुल्ले। मप्र सरकार की सबसे महती योजना को नजर तब लग गई जब मप्र के ग्वालियर संभाग के शिवपुरी जिले में ममता अभियान के प्रचार-प्रसार के रथ को हरी झण्डी दिखाने से पूर्व ऐक्सपायरी डेट की दवा का पैकेट स्वयं हरी झण्डी दिखाने वालो ने देख लिया!

फिर क्या था सवाल जबाव का बवाल कट गया इस सबकेे बीच इतनी गम्भीर लापरवाही पर गाज तो गिरना स्वाभाविक थी सो गर्दन सबसे पहले बाबू की नपी और नोटिस अधिकारी को थमा दिया गया! मगर इस बीच आनन-फानन में ग्वालियर संभाग के आयुक्त शिवपुरी अचानक आ धमके फिर क्या था उनके संज्ञान में मामला आते ही उन्होंने तत्काल प्रभाव से सीएमएचओ को निलंबित कर दिया! ज्ञात हो कि आज समुचे मप्र में ममता अभियान के रथों को प्रचार-प्रसार हेतु हरी झण्डी दिखाकर रवानगी होना थी।

उसी क्रम में शिवपुरी जिले में कलेक्टर शिवपुरी और विधायक पोहरी हरी झण्डी दिखाने वाले थे, इससे पूर्व कि हरी झण्डी दिखा रथ को रवाना किया जाता कलेक्टर की नजर दवा के पैकेटों पर जा पड़ी, जब उन्होंने उन पैकेटों की डेट देखी तो वह ऐक्सपायरी डेट के थे! जिस पर कलेक्टर तिलमिला उठे और लताड़ लगाते हुये बाबू की कक्षा ले डाली इतना ही नहीं कलेक्टर ने तत्काल बाबू को निलंबित कर सीएमएचओ को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया!

कुछ समय पश्चात ग्वालियर आयुक्त केके खरे जा पहुंचे और उनके संज्ञान में मामला आते ही उन्होंने इस घटना को गम्भीर लापरबाही मानते हुये तत्काल सीएमएचओ को निलंबित करने का आदेश दे डाला!

बहरहाॅल म.प्र. में मुख्यमंत्री जी आपकी सरकार का यह तीसरा सच है,जिसे किसी प्रमाण की जरूरत नहीं, अगर कलेक्टर की नजर उस दवा पर न गई होती जो ममता अभियान के तहत बांटी जानी थी,अगर वह गांवों में बांट दी जाती! तो अंदाजा लगाया जा सकता है, कि सरकार कितने अंहकार में है,सेवाओं की तो बात इतर अब तो सीधे सीधे आम जनता की जान पर आ पड़ी है आपकी सरकार के कारिन्दो के चलते!

जापान और भारत को विस्तारवाद की वैश्विक प्रवृत्तियों के बीच विकासवाद के लिए एक ताकत बनना चाहिए- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
01-सितम्बर, 2014 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज घोषणा की कि जापान के वित्तीय प्रस्तावों में मदद करने के लिए सीधे प्रधानमंत्री के कार्यालय के अधीन एक विशेष प्रबंधन दल स्थापित किया जाएगा। जापान के वाणिज्य और उद्योग चैम्बर एवं जापान-भारत व्यापार सहयोग समिति-निप्पॉन किडनरेन द्वारा उनके सम्मान में दिए गए दोपहर भोज के अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि व्यापार प्रस्तावों की समीक्षा के लिए जापान द्वारा चयनित दो नामजद व्यक्ति निर्णय लेने वाले दल का हिस्सा होंगे।
उन्होंने उल्लेख किया कि गुजरात के मुख्यमंत्री के रुप में शायद उनका जापानी व्यापार जगत के साथ बहुत महत्वपूर्ण संबंध रहा है। उन्होंने कहा कि वह सुशासन, व्यापार सुविधा और नीतियों को सरल बनाने की नीतियों के महत्व को समझते हैं। उन्होंने जापान के व्यवसायियों और निवेशकों को अनावश्यक देरी समाप्त करने के लिए नीति संचालित निर्णय लिए जाने का आश्वासन दिया। अपनी सरकार के पहले सौ दिनों की पहल पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नियमों को सरल बनाने के कदम की व्यापक सराहना हुई है। वर्ष 2014-15 की पहली तिमाही में 5.7 प्रतिशत की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि से एक बड़ी सकारात्मक भावना का सृजन हुआ है। भारत और जापान दोनों देशों की सरकारों को मिले स्पष्ट जनादेश से राजनीतिक स्थिरता पैदा हुई है और इससे द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वह चाहते हैं कि भारत कौशल विकास के लिए जापानी मॉडल का अनुसरण करे, ताकि इसके जनसांख्यिकीय लाभ से कुशल कामगारों की वैश्विक आवश्यकता को पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रबंधन के जापानी सिद्धांतों को शुरू करने का कदम उठाने की पहल उन्होंने ही की थी।
जापान के व्यवसायियों से भारत में निवेश करने का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत-जापान संबंधों को न केवल व्यापार बल्कि इससे आगे ले जाना है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी एशिया की सदी होगी। लेकिन आश्चर्य व्यक्त किया कि यह कैसे दिखेगी। इस सदी के लोगों की उम्मीद को पूरा करने के लिए भारत और जापान को बड़ी भूमिका निभानी होगी।
विकास वाद बनाम और विस्तार वाद के दृष्टिकोण की रूप रेखा बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत और जापान को दुनिया को बुद्ध की राह दिखानी चाहिए और विकास के लिए एक शक्ति के रूप में कार्य करना चाहिए। उनके साथ भारत के व्यापार जगत की कौन-कौन सी हस्ती जापान आई है इस बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि ये सभी लोग भारत को आगे ले जाने में भागीदार हैं। अब भारत और जापान को एशिया और विश्व अपनी भागीदार निभानी चाहिए।

एनएचएआई ने पीडब्ल्यूडी को सौंपे 5 राष्ट्रीय उच्च मार्ग
जयपुर, एक सितम्बर। मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे एवं केन्द्रीय भूतल परिवहन मंत्री श्री नितिन गड़करी के बीच जुलाई माह में दिल्ली में हुई वार्ता में बनी सहमति के अनुसार राष्ट्रीय उच्च मार्गों में क्रमोन्नत राज्य की 9 में से 5 सड़कों को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा रख रखाव, क्रमोन्नयन एवं विकास के लिए पुन: सार्वजनिक निर्माण विभाग को सौंप दिया गया है। मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने केन्द्रीय मंत्री के समक्ष इन राजमार्गों को राज्य को जल्द से जल्द सौंपे जाने की मांग की थी ताकि इनकी समुचित मरम्मत की जा सके। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार राज्य को पुन: सौंपे गए सड़क मार्ग :-
१- मेड़ता-लाम्बिया-रास-ब्यावर-बदनौर-आसींद-मांडल (एनएच 158),
२- पाली-मारवाड़-नाडल-देसूरी-कुम्भलगढ़-हल्दीघाटी-नाथद्वारा-मावली-भाटीवार
( एनएच 162 विस्तार),
३- उदयपुर-कुन्डल-नयाखेड़ा-झाडोल-सोने नलवा-दाइया(गुजरात सीमा), इदार (एनएच 58 विस्तार),
४- मध्यप्रदेश सीमा-बांसवाड़ा -सागवाड़ा-डूंगरपुर- खेरवाड़ा-कोटरा-स्वरूपगढ (एन एच 927-ए) एवं
५- हरियाणा सीमा-पिलानी-राजगढ़ (एनएच 709 विस्तार) हैं।
सार्वजनिक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता (एनएच) श्री आर.के.गुप्ता ने बताया कि इन राजमार्गों के सामयिक नवीनीकरण एवं मरम्मत हेतु परिवहन मंत्रालय से वांछित राशि की सहमति प्राप्त हो गई है और निविदा प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी गई है। वर्ष 2011 एवं 2012 में इन स्टेट हाईवे के नेशनल हाईवे में क्रमोन्नयन के बाद से ही इन सड़कों का एनएचएआई को हस्तांतरित किए जाने के बाद से ठीक से रखरखाव नहीं किए जाने से इन ी हालत खराब हो रही थी। अब पुन: इन सड़कों के पीडब्ल्यूडी को मिल जाने से इन्हें जल्द ही ठीक किया जा सकेगा। श्री गुप्ता ने बताया कि इनके अलावा शेष 4 राजमार्गों यथा ऊंचा नंगला-खानुआ-धौलपुर (एनएच 123), उनियारा-नैनवां-हिन्डोली- जहाजपुर-शाहपुरा- गुलाबपुरा-पाडासोली- भीम (एनएच 148डी), लाडनू- खाटा- डेगाना- मेड़तासिटी- लाम्बिया- जैतारण- रायपुर- भीम (एनएच 458) वं लाडपुरा-भीलवाड़ा-राजसमन्द (एनएच 758) का विकास, रख रखाव एवं संचालन एनएचएआई द्वारा ही किया जाएगा।

दो सितम्बर से शिशु संरक्षण माह
रायपुर 01 सितम्बर 2014 मुख्यमंत्री डॉण् रमन सिंह ने कल दो सितम्बर से छत्तीसगढ़ में शुरू हो रहे शिशु संरक्षण माह की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं दी हैं। डॉण् सिंह ने शिशु संरक्षण माह के दौरान होने वाले कार्यक्रमों में पंच.सरपंचोंए नगरीय निकायों के पार्षदों और सभी जनप्रतिनिधियों तथा राज्य के नागरिकों से सहयोग की अपील की है। शिशु संरक्षण माह के शुभारंभ की पूर्व संध्या पर आज यहां जनता के नाम जारी अपील में मुख्यमंत्री ने कहा है कि बच्चे हमारे देश का भविष्य होते हैं। वे हमारे भावी नागरिक हैं। किसी भी राज्य और देश को विकास की राह पर तेजी से आगे ले जाने के लिए वहां की वर्तमान और भावी पीढ़ियों का स्वास्थ्य भी बेहतर होना चाहिए। आज के स्वस्थ बच्चे ही आगे चलकर स्वस्थ और समृद्ध भारत और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी भावना को ध्यान में रखकर राज्य सरकार ने शिशु संरक्षण माह मनाने का निर्णय लिया है। इस माह के अंतर्गत प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को सभी सरकारी जिला अस्पतालोंए सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप स्वास्थ्य केन्द्रों में शिशुओं को विभिन्न बीमारियों से बचाने के लिए टीके लगाए जाएंगे। उनकी माताओं के स्वास्थ्य की भी जांच की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में तीन वर्ष से छह वर्ष तक आयु समूह के बच्चों के लिए जहां आंगनबाड़ी सेवाएं संचालित की जा रही हैए वहीं तीन वर्ष से कम उम्र के शिशुओं को कुपोषण से बचाने के लिए प्रदेश के 27 में से 19 जिलों के 85 आदिवासी बहुल विकासखंडों में ढाई हजार से ज्यादा फुलवारी केन्द्र भी शुरू किए जा चुके हैं। राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के शिशुओं और उनकी माताओं के अच्छे स्वास्थ्य के लिए लगातार सजग और सक्रिय है।
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1 comments:

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