म.प्र. बेकारी के 20 वर्ष, सियासत ले डूबी सम्मान

मप्र। बात करे 90 के दशक से लेकर आज तक की तो जिन्होंने जवानी में कदम भी रखा था, आज वह उत्तरार्ध की ओर अग्रसर है। समय के थपेड़ों ने इस कदर हलाकान किया। उस जबानी को जिसके बारे में कहावत थी कि अगर इस उम्र में जमीन पर पैर मार दिया जाये तो पानी निकल आये। मगर उन युवाओं को क्या पता था कि बगैर पैर मारे ही उनका पानी यह व्यस्त था।

अपनी कुव्यवस्था और राजनैतिक दांव पैचो के बीच निकाल देगी और म.प्र. में कुछ ऐसा ही हुआ कुछ युवाओं ने तो अपने सुनहरें पल इस बेदिशा सियासत और सरकारों की छत्र छाया में बेकार गबा दियें तो कुछ आज भी सुनहरे भविष्य की तलाश में अपनी जबानी गंवा रहे है।

पटवा सरकार के जाते ही कांग्रेस सरकार ने 10 वर्षो तक प्रदेश को खूब मथा और और कांग्रेस के 10 शाला शासन के बाद आज तक भाजपा सरकार विगत 10 वर्षो से प्रदेश को मथ रही है। मगर न तो प्रदेश के युवाओं को स मान जनक स्थिति ही बन रही है, न ही उनके स मानजनक रोटी, रोजगार की व्यवस्था बन रही है। अब्बल स्वयं को जनता की सेवक कहने वाली सरकार सेवक के नाम स्वयं-भू शासक बन बटोना बांट अपने आप सबसे बड़ा दाता महसूस कर रही है। शायद सरकार के मठाधीसों को यह इल्म नहीं और नहीं वह अपने प्रधानमंत्री से सीखना चाहते कि प्रकृति में मौजूद मानव का कल्याण प्रकृति के अनुरुप भी किया जा सकता है। अर्थात एक ऐसा पर्यावरण जिसमें सभी को स्वतंत्र रुप से जीने का हक हो, और अपने विकास करने का जज्वां। मगर दुर्भाग्य कि न तो उन 10 वर्षो में बन्टाडार का खिताब ले सत्ता से रुखसत हुई कांग्रेस ही कुछ कर पाई और न ही विगत 10 वर्षो में भाजपा ही कुछ कर पाई।

अगर देखा जाये तो उघोग, शिक्षा, सुरक्षा, शुद्ध पेयजल, सड़क और आर्थिक एवं स्वास्थ सुरक्षा के क्षेत्र में कुछ खास नहीं हो पाया। रहा सवाल म.प्र. की आर्थिक और रोजगार की रीढ़ कृषि क्षेत्र तो जिस कृषि उत्पादन का श्रेय किसान को न देकर सरकार के मुखिया भ्रष्ट हो चुके अधिकारी, कर्मचारी तंत्र को टी.व्ही. पर देते दिखे उससे सरकार की मानसिकता का अन्दाजा लगाया जा सकता है।
जबकि होना तो यह चाहिए था कि सरकार युवाओं को एक ऐसा स्वच्छंद वातावरण मुहैया कराती जिससे प्रदेश का युवा खुले रुप से अपना विकास कर स्वा िामान और स मान के साथ जीवन यापन कर पाता मगर जिस तरह से बेरोजगारी से हैरान परेशान युवा तरुणाई को मजबूर कर उनका रोजगार और शिक्षा के नाम म.प्र. में दोहन हुआ और आज भी हो रहा है। उसे देखकर तो बस यहीं कहां जा सकता है, कि अब राजनैतिक दलो को सत्ता सर्वोपरि और स्वयं का विकास दूसरी सीढ़ी बन गया है। एक सशक्त विपक्ष के आभाव में कोई सरकार इतनी अंहकारी हो सकती है तो लेाग म.प्र. को देख ले। तो देश में कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलेगा।

सेना के जवानों ने अब तक १,४२,००० से भी ज्‍यादा लोगों की जान बचाई
जल निकासी पंप और जेनरेटर सेट घाटी भेजे गए सेना के जवानों और एनडीआरएफ ने भीषण बाढ़ से तबाह जम्‍मू-कश्‍मीर में अपने राहत और बचाव कार्यों के तहत राज्‍य के विभिन्‍न हिस्‍सों में अब तक १,४२,००० से भी ज्‍यादा लोगों की जिंदगियां बचाई हैं। जल को शुद्ध करने वाली १३ टन टैबलट और हर दिन १.२ लाख बोतलों को फिल्‍टर करने की क्षमता रखने वाले छह संयंत्र श्रीनगर पहुंच गए हैं। विशाखापत्‍तनम से रवाना किए गए जल निकासी पंप समेत इंजीनियरिंग स्‍टोर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र पहुंच गए हैं। इसी तरह दिल्‍ली से १२ सीवेज पंप घाटी के लिए रवाना किए गए हैं। राहत शिविरों और फील्‍ड हॉस्पिटल में बिजली की आपूर्ति बढ़ाने के लिए ३ से ५ केवीए की क्षमता वाले १३ जेनरेटर सेट भी श्रीनगर भेजे गए हैं। राज्‍य में संचार प्रणालियों को दुरुस्‍त करने के लिए दूरसंचार विभाग, सेना, बीएसएनएल और कुछ निजी कंपनियों के संचार उपकरण वहां भेजे गए हैं। बाढ़ से पीडि़त लोगों के बीच ८,२०० कंबल बांटे गए हैं। इसी तरह इन लोगों को १११९ टेंट मुहैया कराए गए हैं। सशस्‍त्र बल चिकित्‍सा सेवाओं की ८० टीम जोर-शोर से अपने काम में जुट गई हैं। अवंतिपुर, पट्टन, अनंतनाग और ओल्‍ड एयरफील्‍ड में चार फील्‍ड हॉस्पिटल खोले गए हैं जहां रोगियों को चिकित्‍सा सेवा मुहैया कराई जा रही है। अब तक इन्‍होंने २२,५०० मरीजों का इलाज किया है। नैफेड की ओर से २५ टन चना भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया है। भारतीय वायु सेना और आर्मी एविएशन कोर के ८६ परिवहन विमान एवं हेलिकॉप्‍टर राहत और बचाव कार्य में लगे हुए हैं। सेना ने तकरीबन ३० हजार सैनिकों को राहत और बचाव कार्यों में लगाया है। इनमें से २१ हजार सैनिक श्रीनगर क्षेत्र में और नौ हजार सैनिक जम्‍मू क्षेत्र में तैनात किए गए हैं। रक्षाकर्मी बड़े पैमाने पर पानी की बोतलें और खाद्य पैकेट वितरित कर रहे हैं। अब तक चार लाख लीटर पानी एवं १,३१,५०० खाद्य पैकेट और ८०० टन से ज्‍यादा पके खाद्य पदार्थ बाढ़ पीडि़तों के बीच वितरित किए जा चुके हैं। सड़क संपर्क बहाल करने के लिए सीमा सड़क संगठन के पांच कार्यदल, जिनमें ५७०० कर्मी शामिल हैं, श्रीनगर, रजौरी और अखनूर में तैनात किए गए हैं। वे अब तक बटोटे-किश्‍तवार, किश्‍तवार-अनंतनाग और जम्‍मू-पुंछ सड़क संपर्क सफलतापूर्वक बहाल कर चुके हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थितियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और नई दिल्‍ली स्थित आईडीएस के मुख्‍यालय में सुधरते हालात को अपडेट किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने किया चैम्पियंस लीग मैच का अवलोकन
रायपुर, १३ सितम्बर २०१४ मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज रात नया रायपुर के ग्राम परसदा स्थित शहीद वीरनारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित चैम्पियंस लीग के प्रथम दिवस के दूसरे मैच का अवलोकन किया। विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल और गृह मंत्री श्री रामसेवक पैकरा सहित अनेक वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि तथा हजारों की संख्या में क्रिकेट प्रेमी दर्शक इस अवसर पर उपस्थित थे। यह मैच मुम्बई इंडियंस विरूद्ध लाहौर लायंस के बीच खेला गया।

स्त्री-पुरूष एक दूसरे के पूरक है, उनमें सांमजस्य हो -न्यायाधिपति श्रीमती निशा गुप्ता
जयपुर, 13 सित बर। राजस्थान उच्च न्यायालय की न्यायाधिपति श्रीमती निशा गुप्ता ने कहा कि समाज का विकास तभी स भव जब स्त्री-पुरूष एक दूसरे के पूरक हो एवं उनमें सामजस्य हो। न्यायाधिपति श्रीमती गुप्ता राजस्थान उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति द्वारा आयोजित बालिका विधिक जागरूकता एवं आत्मरक्षा तकनीक प्रशिक्षण सप्ताह के अन्तिम दिन शनिवार को शहर के यूनिवर्सिटीज महारानी कॉलेज में आयोजित समापन समारोह को मु य अतिथि के रूप में संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि स्वयं को बड़ा बनाने के लिए समारात्मक विचार होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य बालिकाओं को अपनी शक्ति की पहचान कराना है, पुरूषों को भयाक्रान्त करना नहीं। ममता, दया, सहिष्णुता, उदारता ऐसे गुण है जिन पर केवल नारी का ही अधिकार है, उन्हें विकसित करें। उन्होंने कहा कि परिवार के निर्णय करने में महिला की पूर्ण भागीदारी हो। समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष न्यायाधिपति श्री आर. एस. चौहान, ने इस कार्यक्रम के उदेश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक बालिका को अपराधों से अपना बचाव करने में सक्षम बनाना, उनमें आत्मविश्वास बढ़ाना है। उन्होने कहा कि बालिकाओं को अपनी आंतरिक शक्ति को जगाने के लिए अपने आप में चेतना जाग्रत करने की महती आवश्यकता है। कोई भी समाज तभी सशक्त हो सकता है जब उस देश की आधी आबादी महिलाओं की सुरक्षित और सशक्त हो। उन्होंने कहा कि हर बालिका को अपनी रक्षा कि लिए आत्मरक्षा तकनीक सीखना और कानूनों की जानकारी होना आवश्यक है। 

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