मोदी की पाठशाला में 18 लाख बच्चे

व्ही.एस.भुल्ले। देश में संभवत: यह पहला प्रयोग है जिसमें लगभग 18 लाख बच्चों ने देश के प्रधानमंत्री को एक साथ सुना वह भी शिक्षक दिवस के मौके पर भले ही यह देश में नई शुरुआत हो, मगर इस शुरुआत से देश के अन्दर कई मार्ग प्रस्त होगें।

जरुरत है बेहतर योजना प्रबन्धन की क्योंकि जिन पर पराओं, संस्कृति, संस्कारो को चौपट होने में सेकड़ो वर्ष लगे हो उसे एक दिन पाठशाला में पुर्न स्थापित नहीं किया जा सकता। इसके लिये एक बड़ी दृढ़ इच्छा शक्ति और बेहतर प्रबन्धन के सहारे मात्र 10 वर्षो के अन्दर ही 250 वर्षो के नुकसान की भरपाई के साथ देश और देश की आवाम को हमारी, पर परा, संस्कृति, संस्कार अनुरुप शिक्षित और विश्व में श्रेष्ठ बनाया जा सकता है।

जरुरत है सही योजनाओंं के साथ सटीक शुरुआत की निश्चित ही आज की टेक्नोलॉजी और मानव शक्ति के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर इस लक्ष्य को आसानी से पाया जा सकता है।
धन्यवाद की पात्र है भारत सरकार और देश प्रधानमंत्री जिन्होंने, चुनावी सरगर्मी से लेकर नवीन संसद सदस्यो की शुरुआत से लेकर बच्चों के बीच शिक्षक बन नई ऊर्जा का संचार देश वासियो में किया है।

अगर यो कहें कि देश के प्रधानमंत्री लीडर कम एक बेहतर सी.ई.ओ. भी है तो कोई अतिसंयाक्ति न होगी। मगर यह तभी स भव है जब उनकी दृष्टि मजे हुये घाग नेता की तरह देश के सवां अरब लेागों के बीच से उस कार्यकत्र्ता को पहचाने की है जो देश व देश लेागों को संगठित रख सही दिशा में ले जाये।  उनकी दृष्टि ऐसे उन विद्धान व आयडिया, योजनाओं के माध्ययम से देश को शसक्त, खुशहाल संपन्न बनाने की है।

और यह तभी स भव है जब स्वंय प्रधानमंत्री चील दृष्टि से उन प्रतिभाओं की खेाज करे। जो आसमान में ऊंचाई पर उडऩे के बावजूद अपना निवाला कोसो दूर देख लेती है। तभी देश शसक्त खुशहाल स पन्न और महान बन सकेगा। न कि नेट पर आयडिया बेबसाईट खोल लाल फीता शाही के सहारे।

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