उघोग मंत्री का धमाकेदार दौरा, जनसमस्याओं पर भड़की उघोग मंत्री

म.प्र. भोपाल। गत दिनों म.प्र सरकार में उघोग वाणिज्य एवं खेल मंत्री श्रीमंत यसोधरा राजे सिंधिया अपने विधानसभा क्षेत्र शिवपुरी के भ्रमण पर थी, उन्हें शिवपुरी क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यो का अवलोकन एवं जिला प्रशासन समीक्षा बैठक के साथ ही स्थानीय सर्किट हाउस पर लेागों की समस्या सुन उनका निराकरण भी करना था।
इससे पहले कि वह समीक्षा बैठक कर पाती कि वह सीधे खेल परिसर जा पहुंची, जहां वह टाईल्सो को देख नाराज हो उठी और उन्होंने उन्होंने निर्माणाधीन कार्यो का अवलोकन कर गुणवत्ता पूर्ण कार्य कराये जाने के निर्देश दिये। उसके पश्चात जब वह जनसमस्या सुन बैठक में जा ही रही थी, कि लेागों ने शहर में डल रही सीवर लाइन से हुई खराब सड़कों की हालात पर उन्हें बताया तो वह उन्हीं मार्गो से जा निकली, जो सड़के सीवर लाइन खुदाई के कारण दल-दल हो लेागों के निकलने लायक नहीं बची थी। 

फिर क्या था जनसमस्याओं की हालात देख मंत्री महोदय भड़क उठी और उन्होंने अधिकारियों को ताकीत करते हुये कहां कि दो घन्टें में यह सड़क लेागों के चलने लायक बन जाना चाहिए, नहीं तो मैं खुद बरते पानी में छत्री लेकर बताऊंगी कि सड़क कैसे ठीक होगी। इतना ही नहीं उन्होंने बैठक में जाते वक्त एक घन्टे पश्चात देखा कि सड़क को ठीक करने कार्य चल रहा है। पूरे दौरे के दौरान मंत्री के तेवर देख अधिकारी,कर्मचारियों की सांसे फूली नजर आई। जिसकी प्रतिक्रिया सरकारी हल्को में ही नहीं आम जनता में भी चर्चा का विषय बनी रही।

२०१७ तक खुले में शौच को पूर्ण रूप से समाप्त करने का लक्ष्य अगले पाँच वर्ष में बीपीएल के लिये साढ़े तीन लाख शौचालय बनेंगे
भोपाल : गुरूवार, अगस्त ७, २०१४, मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष २०१७ तक प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों से 'खुले में शौच'' को पूर्ण रूप से समाप्त करवाने का लक्ष्य रखा है। राज्य सरकार के सामने नगरों में स्वच्छता सबसे बड़ी चुनौती है। इसको गंभीरता से लेकर गठित मुख्य मंत्री शहरी स्वच्छता मिशन की गतिविधियाँ निरंतर चल रही हैं। राज्य सरकार ने दृष्टि पत्र-२०१८ में भी शहरी स्वच्छता को महत्वपूर्ण स्थान दिया है।
मुख्यमंत्री शहरी स्वच्छता मिशन के अंतर्गत शहरों में गरीब वर्ग के लिये व्यक्तिगत शौचालय तथा आवश्यकता के अनुसार सामुदायिक एवं सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण भी करवाया जा रहा है। साथ ही ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, अपशिष्ट जल प्रबंधन एवं मैला निपटान प्रबंधन के कार्य भी करवाये जा रहे हैं। शहरों में समग्र स्वच्छता की व्यवस्था के हर-संभव प्रयास किये जा रहे हैं। अभी तक इस योजना के अंतर्गत १४० नगरीय निकाय में ९२ हजार ४०६ व्यक्तिगत शौचालय तथा ६०८ सामुदायिक शौचालय के निर्माण की स्वीकृति दी जा चुकी है। इन शौचालयों के निर्माण पर २०८ करोड़ ७५ लाख रुपये की लागत आयेगी। चालू माली साल में इसके लिये ८७ करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है।
मुख्यमंत्री शहरी स्वच्छता मिशन के पूर्व राज्य के नगरीय क्षेत्रों में स्वच्छता की स्थिति को उन्नत करने एवं नगरीय पर्यावरण में सुधार लाने के लिये एकीकृत नगरीय स्वच्छता कार्यक्रम वर्ष २००९ में पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में प्रारंभ किया गया था। इस कार्यक्रम को वर्ष २०१२-१३ में मिशन के रूप में अपग्रेड कर अगले पाँच साल के लिये ४५९ करोड़ ४४ लाख रुपये की कार्य-योजना बनाकर क्रियान्वित किया जा रहा है। मिशन के तहत आगामी पाँच वर्ष में गरीबी की रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवारों के लिये साढ़े तीन लाख व्यक्तिगत स्वच्छ शौचालय बनाये जायेंगे। इसके अलावा ३९० सामुदायिक/सार्वजनिक शौचालय के निर्माण का लक्ष्य भी रखा गया है।
राज्य शासन ने आधुनिक तथा वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को निजी जन-भागीदारी के अंतर्गत क्षेत्रीय लैंड फिल साइट के माध्यम से क्रियान्वित करवाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाये हैं। इसके पहले चरण में कटनी नगर निगम तथा उसके समीप जिले में स्थित नगरीय निकायों के लिये घर-घर से कचरा एकत्रित करके वैज्ञानिक क्षेत्रीय लैंड फिल साइट तक कचरे के डिस्पोजल के कार्य के लिये कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में प्रदेश के अन्य नगरों की कार्य-योजना भी तैयार की गई है।
रक्षा मंत्रालय के वित्तीय सहयोग से ग्वालियर शहर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की परियोजना का क्रियान्वयन करवाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त इंदौर में एशियाई विकास बैंक तथा जेएनएनयूआरएम के समन्वित स्रोतों से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का कार्य भी हो रहा है। नगरीय क्षेत्रों को कचरा-मुक्त करवाने की दिशा में मिशन के तहत महेश्वर एवं नामली नगर परिषद द्वारा शत-प्रतिशत घरों से कचरा एकत्रीकरण के द्वारा जैविक खाद बनवाने की कार्यवाही भी की जा रही है। १०० दिन की कार्य-योजना में भी सभी नगर निगमों के २ वार्ड में घर-घर से कचरा एकत्र करने का कार्य भी आरंभ किया गया है।

नये सिरे से होगा पंचायतों का परिसीमन : मुख्यमंत्री
रायपुर, ०७ अगस्त २०१४ मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित की गई। बैठक में छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम में संशोधन के लिए अध्यादेश लाने का निर्णय लिया गया। इस संशोधन के जरिए नवीन जनगणना वर्ष २०११ के आधार पर वर्तमान पंचायतों का परिसीमन होगा और उनमें सीटों का नये सिरे से आरक्षण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बैठक में राज्य में मानसून की बारिश, फसलों की स्थिति और अधिक वर्षा वाले जिलों में बाढ़ राहत के लिए प्रशासन द्वारा किए जा रहे उपायों की भी समीक्षा की। उन्होंने राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग को अतिवृष्टि तथा बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए तत्परता से कदम उठाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अतिवृष्टि से प्रभावित परिवारों को राजस्व पुस्तक परिपत्र के खण्ड ६-४ के प्रावधानों के अनुसार सर्वेक्षण कर जल्द से जल्द उचित मुआवजा दिया जाए और प्रशासन के अधिकारी उन्हें हर संभव सहयोग करें। डॉ. सिंह ने अतिवृष्टि तथा बाढ़ पीड़ितों को राज्य सरकार की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया। बैठक में राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में इस बार मानसून के दौरान विगत एक जून से कल छह अगस्त तक सभी २७ जिलों में कुल ६९५.४ मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है। यह पिछले दस वर्षों की औसत वर्षा का १०८.७ प्रतिशत है। जल संसाधन विभाग के ४२ सिंचाई जलाशयों में कल छह अगस्त की स्थिति में ९४.२३ प्रतिशत जल भराव हो चुका है। मानसून के दौरान प्रदेश में धान सहित विभिन्न खरीफ फसलों की बोनी तेजी से चल रही है। इस मौसम में अब तक धान की ७५ प्रतिशत बोनी हो चुकी है। राज्य में इस वर्ष लगभग ३६ लाख ४१ हजार ७६० हेक्टेयर में धान बोने का लक्ष्य है। इसमें से अब तक २७ लाख ३९ हजार ७२० हेक्टेयर में बोनी हो गई। इसी तरह मक्का, अरहर, उड़द, सोयाबीन, मूंगफली और सब्जियों सहित कुछ अन्य फसलों की बोनी पांच लाख ७४ हजार हेक्टेयर में की गई है, जो निर्धारित लक्ष्य का ८४ प्रतिशत है। अधिकारियों ने बैठक में बताया कि कल छह अगस्त की स्थिति में प्रदेश के १८ जिलों में १०० प्रतिशत से ज्यादा बारिश हो चुकी है, इनमें रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, गरियाबंद, महासमुन्द, धमतरी, बेमेतरा, बालोद, राजनांदगांव, कबीरधाम, बिलासपुर, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, कोरबा, सूरजपुर, कोरिया, कांकेर और कोण्डागांव शामिल हैं। इनके अलावा चार जिलों - दुर्ग, सरगुजा, नारायणपुर और सुकमा में ८० प्रतिशत से १०० प्रतिशत तक तथा चार जिलों- बलरामपुर-रामानुजगंज, बस्तर (जगदलपुर), दंतेवाड़ा और बीजापुर में ६० प्रतिशत से ८० प्रतिशत तक वर्षा हुई है और जशपुर जिले में ६० प्रतिशत से कम बारिश दर्ज की गई है।
डॉ. रमन सिंह ने राज्य के कुछ जिलों में पिछले कुछ दिनों में हुई भारी वर्षा की वजह से उत्पन्न बाढ़ की स्थिति और वहां प्रशासन द्वारा किए जा रहे राहत उपायों के बारे में भी राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग से जानकारी ली। मंत्रिपरिषद की बैठक में राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि चार और पांच अगस्त की अतिवृृष्टि में पांच जिलों - बिलासपुर, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, रायगढ़ और कोरबा के ७३ गांव प्रभावित हुए है। इन गांवों की ४५ हजार ६५८ जनसंख्या पर बाढ़ का असर हुआ है। बताया गया कि प्रदेश में अतिवर्षा से जनहानि के आठ और पशु हानि के २९ प्रकरण हुए हैं। पूर्ण रूप से एक हजार ४४८ मकानों को और आंशिक रूप से छह हजार ३९६ मकानों को क्षति पहुंची है। लगभग पंद्रह हजार ७७३ हेक्टेयर में फसलों को नुकसान पहुंचा है। बाढ़ प्रभावितों के लिए संबंधित जिलों में ७३ राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें तेरह हजार ७१८ लोगों को ठहराया गया है और उनके लिए भोजन आदि की निःशुल्क व्यवस्था की गई है।

एनटीपीसी को मिला पीएसयू अवार्ड
नई दिल्ली। गत रोज आयोजित एक समारोह में एनटीपीसी को भारत सरकार के गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह, द्वारा भारत पुरस्कार -२०१४ प्रबंध प्रतिष्ठित ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (एआईएमए) पर वर्ष २०१४ से बकाया पीएसयू स मान से सम्मानित किया गया है. पुरस्कार ६ अगस्त, २०१४ को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में डॉ अरूप रॉय चौधरी, सीएमडी, एनटीपीसी द्वारा प्राप्त किया गया था. पुरस्कार एनटीपीसी केवल सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी होने के साथ विभिन्न श्रेणियों में ग्यारह चयनित विजेताओं को सम्मानित किया गया. सुश्री रेखा सेठी, महानिदेशक, ए आई एम ए, सुश्री क्कह्म्द्गद्गह्लद्धड्ड रेड्डी राष्ट्रपति ए आई एम ए,भारत पुरस्कार जूरी, स्नद्बह्म्स्रशह्यद्ग ङ्कड्डठ्ठस्रह्म्द्ग1ड्डद्यड्ड, उपाध्यक्ष, ए आई एम ए और प्रख्यात दिग्गज के एक मेजबान के प्रबंध श्री संजीव गोयनका, अध्यक्ष, भी समारोह के दौरान उपस्थित थे.

च बल नदी की सफाई एवं संरक्षण पर 31 करोड़ 51 लाख रुपये खर्च
जयपुर, 7 अगस्त। संसद सत्र के दौरान लोकसभा में कोटा के सांसद श्री ओम बिरला और एक अन्य सांसद द्वारा पूछे गये नदियों की सफाई से जुड़े सवाल के जवाब में केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा जीर्णोद्वार मंत्री सुश्री उमा भारती ने बताया कि वर्ष 2011 से 2014-15 के मध्य राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना और राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण कार्यक्रमों के अंतर्गत कुल 1744.18 करोड ़ रुपये व्यय किये गये हैं। इनमें से राजस्थान की चंबल नदी के संरक्षण एवं सफाई पर करीब 31 करोड़ 51 लाख रुपये का व्यय किया हुआ है।
सुश्री भारती ने बताया कहा कि गंगा नदी के अतिरिक्त अन्य नदियों के लिए राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय (एनआरसीडी), राज्य सरकारों के साथ मिलकर लागत हिस्सेदारी के आधार पर राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (एनसीआरपी) नाम से केन्द्र प्रायोजित योजना कार्यान्वित करता है।
राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम
श्री बिरला एवं चुरू के सांसद श्री राहुल कस्वां द्वारा पूछे गये राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एनआरडीडब्लूपी) से जुड़े सवाल के जवाब में केन्द्रीय पेयजल एवं स्वच्छता राज्यमंत्री श्री उपेन्द्र कुशवाहा ने बताया कि 2011-12 से 2013-14 के दौरान Óएनआरडीडब्लूपी' के अंतर्गत राजस्थान में कुल 28 हजार 134 बसावटों को पेयजल सुविधा उपलब्ध करवाने का लक्ष्य रखा गया था। इनमें से करीब 16 हजार 72 बसावटों को पेयजल उपलब्ध करवाया गया। साथ ही इस पर राजस्थान में करीब 4 हजार 204 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके है।
राजस्थान में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यान्वयन पर करीब 9 हजार 360 करोड़ रुपये खर्च लोकसभा में अतारांकित सवाल के माध्यम श्री बिरला द्वारा उठाये गए सड़क संपर्क के मुद्दे पर केन्द्रित ग्रामीण विकास मंत्री राज्यमंत्री श्री उपेन्द्र कुशवाहा ने बताया कि जून, 2014 तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अंतर्गत राजस्थान में लक्षित करीब 17 हजार पात्र बसावटों को सड़कों से जोडऩे के विपरीत करीब 12 हजार पात्र बसावटों को संपर्क सड़कों से जोड़ा गया है। जिस पर केन्द्र सरकार अभी तक करीब 9 हजार 360 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। उन्होंने कहा कि पीएमजीएसवाई देश को ग्रामीण क्षेत्रों के कोर नेटवर्क में मौजूद सभी सड़क संपर्क विहीन पात्र बसावटों को बारहमासी सड़कों से जोडऩे का केन्द्र प्रायोजित कार्यक्रम है।

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1 comments:

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