प्रधामंत्री के नेपाल दौरे की प्रमुख सुर्खिया

04-अगस्त, 2014 प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की नेपाल यात्रा की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:-
चार स पर विशेष ध्‍यान : सहयोग, संपर्क, संस्‍कृति, संविधान
भारत नेपाल को एक अरब डॉलर का ऋण प्रदान करेगा। यह वर्तमान में जारी किसी भी ऋण के अतिरिक्‍त होगा।

पंचेश्‍वर विकास प्राधिकरण की स्‍थापना की जाएगी और डीपीआर को एक वर्ष में अंतिम रूप दिया जाएग
भारत और नेपाल 45 दिनों में ऊर्जा व्‍यापार समझौते को करने पर सहमत हो गये हैं।
भारत महाकाली नदी पर वाहनों के आवागमन हेतु एक सेतु के निर्माण में सहायता प्रदान करेगा।
भारत तराई के लिए प्रमुख और सहायक सड़कों के निर्माण में तेजी लाएगा।
प्रधानमंत्री ने पशुपतिनाथ मंदिर को 2500 किलोग्राम चंदन की लकड़ी भेंट करने की घोषणा की। पशुपतिनाथ विकास प्राधिकरण द्वारा शीघ्र ही एक धर्मशाला के निर्माण कार्य को प्रारंभ करने में भारत मदद प्रदान करेगा।
परिसर के नवीकरण और पुनरूद्धार में भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण की विशेषज्ञता का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए 25 करोड़ रूपए की सहायता प्रदान करेगा।
भारत, बौद्ध सर्किट के एक अंग के तौर पर जनकपुर-लुम्‍बनी के विकास में सहायता प्रदान करेगा।
नेपाली छात्रों की छात्रवृतियों को 180 से बढ़ाकर 250 किया गया।
कृषि पर संयुक्‍त कार्यकारी समूह की शीघ्र बैठक होगी। भारत मिट्टी के परीक्षण में सहायता प्रदान करेगा।
नेपाल ने भारत को आश्‍वासन दिया है कि नेपाली भूमि का किसी भी तरह से भारतीय हितों के खिलाफ उपयोग नहीं होने दिया जाएगा।
अपने विस्‍तृत राजनैतिक कार्यक्रम में, नेपाली नेताओं के साथ अपनी बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने उनसे अपील की ‘’दल के हित में मत सोचो, देश के हित में सोचो’’

मध्यप्रदेश में सतही स्त्रोतों पर आधारित समूह जल प्रदाय योजनाओं को प्राथमिकता
भोपाल : सोमवार, अगस्त 4, 2014,मध्यप्रदेश सरकार भू-जल के निरंतर गिरते स्तर को ध्यान में रखते हुए अब सतही स्त्रोतों पर आधारित समूह जल प्रदाय योजनाओं के क्रियान्वयन को प्राथमिकता दे रही है। योजनाओं के क्रियान्यन को गति देने के लिए गठित मध्यप्रदेश जल निगम इस दिशा में कार्य कर रहा है। वर्तमान में नल-जल योजना के माध्यम से ग्रामीण आबादी को पेयजल उपलब्धता का राष्ट्रीय औसत 47.60 एवं मध्यप्रदेश का औसत 26.10 प्रतिशत है। इस दृष्टि से राष्ट्रीय औसत के बराबर आने एवं वर्ष 2022 के लिए निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बड़ी संख्या में नल-जल प्रदाय योजनाओं का क्रियान्वयन करवाया जाना जरूरी होगा।
इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए जल निगम द्वारा सतही स्त्रोतों पर आधारित समूह जल प्रदाय योजनाओं के पहले चरण में 19 जिले के 889 ग्राम को चिन्हित किया गया है। इन ग्राम की 25 समूह पेयजल योजनाओं पर 1337 करोड़ 88 लाख रुपये की लागत आयेगी, जिसकी स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। स्वीकृत योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए निविदाएँ भी आमंत्रित की जा चुकी हैं। तीन योजना के क्रियान्वयन के लिए कार्यादेश जारी किये गये हैं और उनका कार्य भी प्रगति पर है। शेष 22 योजनाओं की निविदा की कार्यवाही भी चल रही है।
दूसरे चरण में 33 समूह जल प्रदाय योजना का चयन कर सर्वेक्षण एवं डीपीआर बनवाने का कार्य किया जा रहा है। इनमें से 11 योजना की डीपीआर तैयार कर तकनीकी स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। अब प्रशासकीय स्वीकृति की कार्यवाही चल रही है। शेष 22 समूह जल प्रदाय योजना का डीपीआर बनाया जा रहा है। इन योजनाओं के अलावा अन्य जल प्रदाय योजनाओं को चिन्हित कर सर्वेक्षण एवं डीपीआर बनाने का कार्य भी किया जा रहा है।

बुन्देलखण्ड पैकेज
बुन्देलखण्ड विकास विशेष पैकेज फेस-2 में जल निगम द्वारा 7 समूह जल प्रदाय योजना का क्रियान्वयन किया जायेगा। इनमें से 4 योजना की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। निविदा संबंधी कार्यवाही प्रक्रिया में है। शेष 3 योजना की डीपीआर तैयार कर उनकी तकनीकी स्वीकृति प्रदान की गई है तथा प्रशासकीय स्वीकृति भी जारी की जा रही है।
ग्रीष्म काल के दौरान बुन्देलखण्ड में प्रतिवर्ष किसी न किसी जिले को पेयजल संकट के दौर से गुजरना पड़ता है। पेयजल संकट के स्थायी निराकरण के लिए बुन्देलखण्ड विशेष पैकेज में लगभग 100 करोड़ की लागत से 6 जिले क्रमश: सागर, छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, दमोह एवं दतिया में 1287 पेयजल योजनाएँ स्वीकृत की गई थी। इनमें से 1103 योजना के कार्य पूर्ण किये जा चुके हैं तथा 1047 योजनाओं से जल प्रदाय भी प्रारंभ हो चुका है। इस कार्य पर अब तक 95 करोड़ 53 लाख की राशि व्यय की जा चुकी है। शेष सभी योजनाओं के कार्य प्रगति पर है। इस साल दिसम्बर माह तक सभी योजना को पूर्ण करवाने का लक्ष्य है।

बारिश प्रकृति का वरदान,लेकिन मानसून के दौरान आपदा प्रबंधन की अग्रिम तैयारी भी जरूरी : डॉ. रमन सिंह
रायपुर, 04 अगस्त 2014मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य में लगातार हो रही मानसून की बारिश को जहां खेती किसानी के लिए प्रकृति का वरदान बताया है। उन्होंने कहा है कि इसके साथ-साथ हमें मानसून के दौरान संभावित अतिवृष्टि और संभावित बाढ़ आदि से जनजीवन की सुरक्षा के लिए आपदा प्रबंधन की अग्रिम तैयारी रखने की भी जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने इसके लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को राजधानी से लेकर सभी जिलों में परस्पर समन्वय से आपदा प्रबंधन के सभी उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने जल संसाधन, कृषि, पशुधन विकास, पंचायत और ग्रामीण विकास, राजस्व और आपदा प्रबंधन, पुलिस, होम गार्ड, वन, लोक निर्माण, स्वास्थ्य, बिजली, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और अन्य संबंधित विभागों को बाढ़ राहत की अग्रिम तैयारी रखने का भी आदेश दिया है। डॉ. रमन सिंह ने जल संसाधन विभाग को नदी-नालों के जल स्तर और सिंचाई जलाशयों में जल भराव की स्थिति पर लगातार निगाह रखने और बांधों का गेट खोलने की जरूरत होने पर पर्याप्त समय पहले मुनादी करने तथा प्रचार माध्यमों के जरिए आम जनता तक सूचना पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। डॉ. रमन सिंह ने जिला कलेक्टरों से कहा है कि वे अपने-अपने जिलों में मानसून के दौरान संभावित भारी वर्षा से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर विशेष रूप से ध्यान दें। जिला मुख्यालयों सहित तहसील मुख्यालयों में भी बाढ़ नियंत्रण कक्ष चौबीसों घण्टे चालू रखें और उनके टेलीफोन नम्बरों की जानकारी प्रचार माध्यमों के जरिए आम जनता को दी जाए। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को जिला एवं तहसील स्तर पर बाढ़ नियंत्रण अधिकारी नामांकित करने के भी निर्देश दिए हैं। उनके निर्देशों के अनुरूप राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों को परिपत्र जारी कर दिया है।
ज्ञातव्य है कि राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष राजधानी रायपुर के गांधी चौक स्थित आयुक्त भू-अभिलेख के कार्यालय में दस जून से शुरू हो गया है। इसका टेलीफोन नम्बर 0771-2510593 और टेली फैक्स नम्बर 0771-2510823 है। मुख्यमंत्री ने राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग के माध्यम से सभी जिला कलेक्टरों को ऐसे क्षेत्रों की पहचान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, जहां लगभग हर साल बाढ़ की स्थिति निर्मित होती है। उन्होंने कहा है कि ऐसे इलाकों के लिए आपदा प्रबंधन की अग्रिम तैयारी की दृष्टि से राहत शिविर आदि लगाने की कार्य योजना तैयार कर ली जाए। संक्रामक बीमारियों के इलाज के लिए पर्याप्त मात्रा में जीवन रक्षक दवाईयों का स्टाक मितानिनों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को उपलब्ध करा दिया जाए। उन्हें कुओं और हैण्डपम्पों के जल शुद्धिकरण के लिए ब्लीचिंग पावडर भी पर्याप्त मात्रा में दिया जाए। उप स्वास्थ्य केन्द्रों तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और जिला अस्पतालों में भी इन दवाईयों का पर्याप्त स्टाक रखा जाए। बाढ़ से बचाव के लिए जो भी उपकरण जिलों में उपलब्ध हैं, उन्हें ठीक हालत में रखा जाए। शहरी क्षेत्रों में बड़े नालों और छोटी नालियों की साफ-सफाई नियमित रूप से हो, ताकि पानी अवरूद्ध होने पर सड़कों पर जल जमाव की स्थिति निर्मित न होने पाए।

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