प्रधानमंत्री जन-धन योजना.......?

लिखने का मन तो मेरा भी है। मगर मैं पहली मर्तवा मजबूर हूं, कि आखिर मजबून क्या लूं? मगर मेरा कर्तव्य बोध नहीं मानता कि देश में करोड़ों लेागो...

लिखने का मन तो मेरा भी है। मगर मैं पहली मर्तवा मजबूर हूं, कि आखिर मजबून क्या लूं? मगर मेरा कर्तव्य बोध नहीं मानता कि देश में करोड़ों लेागों के कल्याण हेतु कोई महत्वकांक्षी योजना की शुरुआत हों और लिखने के लिये अज्ञानता के आभाव में शब्द न हो, इसलिये जो मिला सो प्रस्तुत है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी 28 अगस्त, 2014 को नई दिल्ली में 'प्रधानमंत्री जन-धन योजना (पी.एम.जे.डी.वाई)' के नाम का सुझाव देने के लिए सुश्री प्रिया शर्मा को पुरस्कार प्रदान करते हुए। साथ में हैं केंद्रीय वित्त, कारपोरेट मामलों और रक्षा मंत्री श्री अरुण जेटली, वाणिज्य एवं उद्योग (स्वतंत्र प्रभार), वित्त और कारपोरेट मामलों की राज्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव श्री नृपेन्द्र मिश्रा, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर श्री रघुराम राजन और अन्य गणमान्य व्यक्ति।

अध्यक्ष एवं उपाध्यक्षों की नियुक्ति से प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर कोई प्रभाव नहीं
28 August 2014 कुछ समाचार पत्रों में इस आश्य का समाचार प्रकाशित हुआ है कि प्रदेश में अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष की नियुक्तियों से राज्य की वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इस संबंध में वित्त विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां स्पष्ट किया कि बोर्ड व निगमों में अध्यक्ष तथा उपाध्यक्षों की नियुक्ति एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसे हर सरकार द्वारा अपने कार्यकाल में किया जाता है। वर्तमान सरकार द्वारा अध्यक्षों एवं उपाध्यक्षों की नियुक्ति में कुछ भी नया नहीं है। उन्होंने इस दावे का भी खंडन किया कि प्रत्येक अध्यक्ष पर प्रतिमाह 4 लाख रुपये व्यय हो रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अध्यक्ष/उपाध्यक्ष को प्रतिमाह केवल 15,000 हजार रुपये का मानदेय दिया जाता है और वर्तमान कर्मचारियों में से ही उनके साथ तैनाती की जाती है। इस प्रकार उन पर किया जा रहा व्यय बहुत कम है और राज्य की वित्तीय स्थिति पर इसका प्रभाव न के बराबर है। उन्होंने कहा कि इस वित्त वर्ष में प्रदेश का कुल बजट परिव्यय 23,613 करोड़ रुपये आंका गया है। इसमें से अध्यक्ष/उपाध्यक्ष पर किया जाने वाला व्यय इतना कम है कि यह प्रदेश के वित्त को प्रभावित करने वाला नहीं है। वर्ष 2014-15 में प्रदेश में मुख्य खर्च वेतन पर 7650 करोड़, पैंशन पर 3450 करोड़ और ब्याज की अदायगी पर 2750 करोड़ रुपये आंका गया हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रणाली में कार्यक्रमों और नीतियों के कार्यान्वयन एवं निर्धारण में राजनीतिक इनपुट बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए नीति निर्धारण में मूल्यवान राजनीतिक फीडबैक प्राप्त करने के लिए अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की नियुक्तियां आवश्यक हैं। जहां तक प्रदेश के कर्मचारियों के कल्याण का मामला है तो प्रदेश सरकार सदैव ही कर्मचारियों के कल्याण को अधिकाअधिक सुनिश्चित बनाने के लिए वचनबद्ध है। केवल इस वर्ष में ही प्रदेश सरकार ने प्रथम अप्रैल, 2014 को मंहगाई भत्ते की 10 प्रतिशत की पहली किश्त और 15 अगस्त, 2014 को इसी दर पर दूसरी किश्त जारी की है। इस वित्त वर्ष में प्रदेश सरकार के कर्मचारियों को दी गई मंहगाई भत्तेे की इन्ही दो किश्तों से 1160 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। प्रदेश सरकार के सभी कर्मचारियों को इस वित्त वर्ष में एक वर्ष का विस्तार दिया गया है। सरकार ने अकुशल दिहाड़ीदारों की न्यूनतम दिहाड़ी 150 रुपये से बढ़ाकर 170 रुपये तथा विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों की दिहाड़ी को 170 रुपये से 450 रुपये तक बढ़ाया है। प्रदेश सरकार ने इस वित्त में अंशकालीक जलवाहकों के मानदेय को भी 1300 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये किया है। सरकार ने 8 वर्ष का नियमित सेवाकाल पूरा करने वाले अंशकालिक कर्मियों की सेवाओं को दैनिक भोगी में परिवर्तित करने का निर्णय लिया है। इसी प्रकार आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में 150 रुपये, मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में 125 रुपये और आंगनवाड़ी सहायकों के मानदेय में 100 रुपये प्रतिमाह की वृद्धि की गई है। सिलाई अध्यापिकाओं के मानदेय को 1600 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये प्रतिमाह किया गया है तथा गृह रक्षकों की दिहाड़ी को 225 रुपये से बढ़ाकर 260 रुपये करने के साथ-साथ रैंक भत्ते में 20 प्रतिशत की बढ़ौतरी की गई है। प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों का कल्याण सुनिश्चित बनाने के लिए इस वित्त वर्ष में अन्य पग भी उठाए हैं। इनमें वर्ष 1997 से वर्ष 2002 के मध्य अनुबन्ध आधार पर नियुक्त काॅलेज काडर के प्रवक्ताओं को नियमित करना, अनुबन्ध कर्मचारियों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में लाना, 2006 से पूर्व सेवानिवृत हुए पैंशनधारकों की पैंशन को संशोधित करना, अनुबन्ध आधार पर नियुक्त महिला कर्मचारियों के मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 16 सप्ताह करना, सभी अनुबन्ध कर्मचारियों को 10 दिन का चिकित्सा अवकाश और प्रति वर्ष 5 दिन का विशेष अवकाश प्रदान करना और जनजातीय तथा अन्य कठिन क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के शीतकालीन भत्ते को 200 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिमाह किया गया है।

बटाने और उत्तर कोयल जलाशय के अवशेष कार्यों को शीघ्र पूरा करा कर किसानों को पटवन की सुविधा सुलभ कराये- मुख्यमंत्री
पटना, 28 अगस्त 2014:- मुख्यमंत्री श्री जीतन राम माँझी ने आज मुख्यमंत्री आवास के विमर्श सभाकक्ष में जल संसाधन विभाग की विभिन्न जलाशय योजना से प्राप्त उपलब्धी एवं उनके निर्माण में उत्पन्न कठिनाईयों की उच्च स्तरीय समीक्षा की। बैठक में मुख्य सचिव श्री अंजनी कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, सचिव जलसंसाधन श्री दीपक कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अतीश चन्द्रा सहित सिंचाई विभाग के अन्यवरीय अधिकारियों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री ने बटाने एवं उत्तर कोयल जलाशय परियोजना से किसानों को उपलब्ध करायी जा रही पटवन की जानकारी ली और निर्देश दिया कि इन दोनों जलाशय योजना के अवशेष कार्यों को शीघ्र पुरा कर किसानों को पटवन की सुविधा सुलभ करायी जाये। मुख्यमंत्री को बताया गया कि इन परियोजनाओं से राज्य के एक लाख 3 हजार हेक्टर सिंचाई क्षमता प्रस्तावित है। इसी प्रकार झारखण्ड राज्य में इस योजना से लगभग 11 हजार हेक्टर में पटवन की सुविधा सुलभ होगी। बैठक में बताया गया कि जलाशय के निर्माण का कार्य 80 प्रतिशत से अधिक पुरा हो चुका है, किन्तु 20 प्रतिशत काम झारखण्ड और बिहार सरकार के बीच कुछ बिन्दुओं पर विवाद रहने के कारण लम्बित है। मुख्यमंत्री ने सचिव जल संसाधन को निर्देश दिया कि वे झारखण्ड जाकर वहाॅ के जल संसाधन सचिव से वार्ता करे और उत्पन्न विवादों को यथाशीघ्र निराकरण कराये। बटाने जलाशय परियोजना के फाटक को नीचे किये जाना है और उत्तर कोयल परियोजना के कुकुट डैम में फाटकलगाना है। इन परियोजनों से नवीनगर, कुटुम्बा, देव एवं डुमरी क्षेत्र में पटवन की सुविधा बढ़ेगी।

लोक सेवा प्रदाय गारंटी कानून के दायरे में आयेंगी निवेशकों को मिलने वाली सेवाएँ
भोपाल : गुरूवार, अगस्त 28, 2014,मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि राज्य शासन की ओर से निवेशकों को मिलने वाली सेवाओं को लोक सेवा प्रदाय गारंटी अधिनियम के दायरे में लाया जायेगा ताकि निवेशक सेवाओं के प्रति आश्वसत हो जायें। श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में आर्थिक विकास की सभी जरूरी अधोसंरचनाएँ पूरी कर ली गई हैं। श्री चौहान बैंगलूरू में गत दिवस उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे। श्री चौहान आज कोयंबटूर पहुँचे और निवेशकों से मुलाकात की। इनमें शिवा टैक्स यार्न के श्री सी. कृष्णकुमार, रंगम्मा स्टील के उपाध्यक्ष श्री के. इलांगो, अन्नामलैया इंजीनियरिंग लिमिटेड के प्रबंध संचालक श्री एस. चन्द्रशेखर, आटोप्रिंट मशीनरी मेन्युफेक्चरिंग के प्रबंध संचालक श्री सी.एन. अशोक और केपीआर मिल्स के प्रबंध संचालक श्री पी. नटराज प्रमुख है। श्री चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि मध्यप्रदेश की आज देश में चर्चा है। विकास और अर्थशास्त्र से जुड़े विशेषज्ञों के लिये यह आश्चर्यजनक है कि कैसे मध्यप्रदेश तेजी से आगे बढता राज्य बन गया है। उन्होंने कहा कि सिर्फ लोगों के विकास और कल्याण के प्रति चिंता और विकास के लिये प्रगतिशील नीतियाँ बनाने और उपलब्ध संसाधनों का कुशलता और दूरदर्शिता के साथ उपयोग करने से प्रदेश में काफी परिवर्तन आया है। सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग और सहायता से सुशासन की व्यवस्थाएँ बनाने से यह परिवर्तन साफ दिख रहा है। श्री चौहान ने निवेशकों को विकास का सहभागी बताते हुए कहा कि राज्य सरकार ने निवेशकों को अपना सहभागी माना है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को और अधिक शक्तिशाली बनाना है ताकि गरीबों की गरीबी दूर हो और युवाओं को रोजगार के भरपूर अवसर मिले। उन्होंने विकास में भष्टाचार को बड़ी बाधा बताते हुए कहा कि राज्य सरकार ने ऐसे हरसंभव कदम उठाये हैं जिनसे भ्रष्टाचारियों को सबक और कड़ी सजा मिले। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के प्रकरणों को छुपाकर नहीं रखा गया। सरकार की सोच रही है कि हर भ्रष्टाचारी को सजा मिले

ईको बाल मेला में आए बच्चों ने देखा छत्तीसगढ़ विज्ञान केन्द्र तीन दिवसीय ईको बाल मेले का आज होगा समापन
रायपुर, 28 अगस्त 2014 छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राज्य स्तरीय ईको बाल मेले के दूसरे दिन आज स्कूली बच्चों ने यहां छत्तीसगढ़ विज्ञान केन्द्र का अवलोकन किया। दंतेवाड़ा, जगदलपुर, जशपुर, कोरिया, अंबिकापुर, रायगढ़, सरायपाली, बसना, पैकिन आदि स्थानों से आए इन बच्चों को विज्ञान केन्द्र के महानिदेशक डॉ. पी.के. भट्ट ने विज्ञान के विभिन्न आविष्कारों, महत्व और विज्ञान के रहस्यों के बारे में बताया। विज्ञान केन्द्र कोलकाता के संचालक डॉ. चौधरी ने भी बच्चों से रू-ब-रू चर्चा कर उन्हें जीवन में विज्ञान के महत्व और उपयोग के बारे में बताया। विज्ञान केन्द्र में बच्चों ने जल स्तर के मापन, ऊर्जा के उपयोग, हवा की गति की माप, ध्वनि स्तर माप, भूकम्प, पानी के महत्व, रक्तचाप माप, तथा औद्योगिक गतिविधियों के बारे में जाना। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि ईको बाल मेले के दूसरे दिन दोपहर के बाद ईको बाल क्लब चयन के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की गई। कार्यक्रम का समापन कल 29 अगस्त को होगा। आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री राजेश मूणत समापन समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। आवास एवं पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव श्री एन. बैजेन्द्र कुमार समारोह की अध्यक्षता करेंगे।

जलग्रहण परियोजना से कृषि विश्वविद्यालयों को जोडऩे के प्रयास -पंचायतीराज आयुक्त
जयपुर, 28 अगस्त। राजस्थान जल्द ही समेकित जलग्रहण प्रबंधन परियोजना को कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से लागू करने वाला देश का प्रथम राज्य बन सकता है। पंचायतीराज आयुक्त एवं शासन सचिव श्री राजेश यादव ने इस स बन्ध में अभिनव पहल कर गुरुवार को राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और इनमें कार्यरत जल प्रबन्धन के विशेषज्ञों से प्रारंभिक वार्ता की।
पंत कृषि भवन में आयोजित वार्ता में श्री यादव ने कहा कि राज्य में जल की कमी है। इस सीमित पानी का सही संरक्षण और प्रबन्धन किया जाये तो राज्य के विकास में नए आयाम जुड़ सकते हैं। समेकित जलग्रहण प्रबन्धन परियोजना का यही उद्देश्य है। राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों के पास जल, मृदा, वन संरक्षण के क्षेत्र में अथाह ज्ञान है। स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप इस ज्ञान का जल संरक्षण और जल प्रबन्धन में उपयोग करने के लिए विश्वविद्यालयों को प्रोजेक्ट इ प्लीमेन्टेशन एजेन्सी (पीआईए) बनाने का विचार आया है। इसके लिए विश्वविद्यालयों को पर्याप्त वित्तीय मदद दी जायेगी। उन्हें अस्थायी तौर पर (संविदा एवं अन्य तरीके से) स्टाफ लेने की छूट दी गई है। कृषि कॉलेज एवं कृषि विज्ञान केन्द्र भी पीआईए बन सकते हैं। इससे विश्वविद्यालयों को रिसर्च के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे। लैब का ज्ञान खेत तक जल्दी पहुंचेगा। पीआईए का कार्य कृषक तथा अन्य ग्रामीणों को जल संरक्षण का महत्व बताना, सामुदायिक चेतना बढ़ाना, कम लागत की जल बचत एवं जल संरक्षण तकनीक का प्रचार-प्रसार कर उसे लागू करवाना, टे्रनिंग, स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक फसल उत्पादन को प्रोत्साहन देना, जलग्रहण ढांचे विकसित कर इनकी मॉनिटरिंग करना होगा। सामान्यतया विभिन्न विभागों, केन्द्र व राज्य सरकार के स्वायत्तशाषी संगठनों, रिसर्च संस्थानों, ग्राम पंचायतों को पीआईए बनाया जाता है लेकिन कृषि विश्वविद्यालयों के ज्ञान को ग्रामीण विकास में काम लेने तथा रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए राज्य में अभिनव पहल की गई है। आगामी 15-20 दिन में विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं स बन्धित फैकल्टी पूर्व में निर्मित वाटरशेड ढांचों व चल रही गतिविधियों का अध्ययन करेंगे तथा एक माह बाद प्रोजेक्ट चयन पर विस्तार से चर्चा होगी। वार्ता में उपस्थित कुलपतियों एवं अन्य विद्वानों ने श्री यादव की इस पहल को सराहनीय बताते हुए राज्य में जल संरक्षण एवं ग्रामीण विकास के लिए हर संभव मदद का विश्वास दिलाया। इस अवसर पर प्रोजेक्ट निदेशक श्री एम.एस.काला, महाराणा प्रताप कृषि एवं तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ओ.पी.गिल, कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर के कुलपति प्रो. एल.एन.हर्ष, श्री करण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के कुलपति डॉ. एस.एन.सोलंकी, संयुक्त सचिव कृषि श्री होशियार सिंह समेत बड़ी सं या में जल संरक्षण विशेष एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

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Village Times: प्रधानमंत्री जन-धन योजना.......?
प्रधानमंत्री जन-धन योजना.......?
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