मुख्यमंत्री श्री चौहान बैंगलुरू में यूके के उप प्रधानमंत्री से मिले

भोपाल : बुधवार, अगस्त 27, 2014, मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज बैंगलुरू में यूनाइटेड किंगडम के उप प्रधानमंत्री श्री निकोलस क्लेग से सौजन्य भेंट की। श्री क्लेग ने मुख्यमंत्री को बताया कि अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में इन्दौर में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में यू.के. का बड़ा ट्रेड प्रतिनिधि-मण्डल शामिल होगा। उप प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें मध्यप्रदेश के विकास के बारे में जानकारी है।

श्री क्लेग ने कहा कि मध्यप्रदेश ने अपनी विकास रणनीति में सबसे पहले कृषि क्षेत्र पर फोकस कर सही काम किया है। उद्योग मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया और मुख्य सचिव श्री अन्टोनी डिसा भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

श्री चौहान ने श्री निकोलस क्लेग को बताया कि विश्व भर से अनेक व्यापार प्रतिनिधि मण्डलों और प्रतिष्ठित कम्पनियों ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में आने की सहमति दी है। उन्होंने बताया कि 20 देश के उद्योगों के लगभग 3000 प्रतिनिधि के समिट में भाग लेने की संभावना है। श्री चौहान ने भारत और ब्रिटेन के ऐतिहासिक संबंधों की चर्चा करते हुए कहा कि व्यापार की असीम संभावनाएँ हैं। श्री क्लेग ने इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि यूनाइटेड किंगडम का इस समिट में उत्साहपूर्वक प्रतिनिधित्व रहेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने यू.के. के उप प्रधानमंत्री को मध्यप्रदेश में प्रमुख क्षेत्रों में तेजी से हुई प्रगति से अवगत करवाते हुए कहा कि मध्यप्रदेश को ग्लोबल इन्वेस्टमेंट हब बनाने के सघन प्रयास किये जा रहे हैं। श्री चौहान ने बताया कि आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का फोकस एग्री-बिजनेस, खाद्य प्र-संस्करण, औषधि निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं, नगरीय विकास और अधोसंरचना विकास, सूचना प्रौद्योगिकी और सूचना संचार आधारित सेवाएँ, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास, नवकरणीय ऊर्जा, टेक्सटाइल और हेण्डलूम, पर्यटन और हास्पिटेलिटी तथा ऑटोमोबाइल तथा इंजीनियरिंग क्षेत्रों पर आधारित होगा।

मुख्यमंत्री से सिंगापुर के हाई कमिश्नर ने भेंट की
जयपुर, 27 अगस्त। मु यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे से बुधवार को यहां मु यमंत्री कार्यालय में भारत में सिंगापुर के हाई कमिश्नर लिम थुआन कुआन ने भेंट की। मुलाकात के दौरान नगरीय विकास, नगर नियोजन, शहरी सौन्दर्यीकरण हाउसिंग, वेस्ट मैनेजमेंट, वाटर ट्रीटमेंट व रिसाईक्लिंग एवं पर्यटन के क्षेत्र में सिंगापुर की बड़ी क पनियों के साथ मिलकर काम करने और प्रदेश में निवेश बढ़ाने पर चर्चा हुई। उल्लेखनीय है कि मु यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे का आगामी अक्टूबर माह में सिंगापुर दौरा प्रस्तावित है, जिसमें उनकी वहां की बड़ी क पनियों के साथ प्रदेश में निवेश को लेकर चर्चा होगी।

इस दौरान अतिरिक्त मु य सचिव इन्फ्रा श्री सी.एस. राजन, अतिरिक्त मु य सचिव नगरीय विकास एवं आवासन श्री अशोक जैन, प्रमुख शासन सचिव इन्डस्ट्रीज श्रीमती वीनू गुप्ता के अलावा सिंगापुर हाई कमीशन के इकोनॉमिक काउन्सलर तथा एन्टरप्राईज सिंगापुर के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

मछली उत्पादन में छत्तीसगढ़ देश के छह अग्रणी राज्यों में शामिल : एक दशक में लगातार बढ़ी मछलियों की पैदावार
रायपुर, 27 अगस्त 2014 मछली उत्पादन के मामले में छत्तीसगढ़ देश के प्रथम छह अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। मछली पालन के व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए और मछुआ कल्याण के लिए घोषित छत्तीसगढ़ सरकार की नीतियों और विभिन्न योजनाओं के फलस्वरूप राज्य को यह कामयाबी मिली है।
राज्य के विभिन्न सिंचाई जलाशयों और तालाबों में पिछले वित्तीय वर्ष 2013-14 में दो लाख 84 हजार मीटरिक टन मछलियों की पैदावार मिली। इसे मिलाकर विगत दस वर्षों में छत्तीसगढ़ में 18 लाख 79 हजार मीटरिक टन मछलियों का उत्पादन हुआ। वर्ष 2004-05 में प्रदेश के मछुआरों ने एक लाख 20 हजार मीटरिक टन मछलियों का उत्पादन हासिल किया था, जो पिछले साल बढ़कर दो लाख 84 हजार मीटरिक टन तक पहुंच गया। राज्य में उपलब्ध कुल उपलब्ध एक लाख 57 हजार हेक्टेयर के जल क्षेत्र में से एक लाख 48 हजार हेक्टेयर को मछली पालन के लिए विकसित किया जा चुका है। यानी प्रदेश के कुल जल क्षेत्र के 94 प्रतिशत से ज्यादा हिस्से में मछली पालन का व्यवसाय हो रहा है। मछली उत्पादन में वृद्धि से प्रदेश के मछुआ परिवारों की आर्थिक स्थिति में भी काफी सुधार आ रहा है।
छत्तीसगढ़ की नदियों में कुल तीन हजार 573 किलोमीटर जल क्षेत्र प्राकृतिक रूप से मछली पालन के लिए उपलब्ध है। इसका भी समुचित उपयोग किया जा रहा है। राज्य में मुख्य रूप से रोहू, कतला और म्रिगल प्रजाति की मछलियों की पैदावार ली जा रही है। इसके अलावा विगत कुछ वर्षों में झींगापालन में भी मछुआरों का रूझान बढ़ा है। मछली पालन विभाग द्वारा ग्राम देमार (जिला धमतरी) में स्थापित मत्स्य प्रक्षेत्र में झींगा पालन के तौर तरीकों की जानकारी देने के लिए विशेष प्रदर्शन की व्यवस्था की गई है। वहां पर मछुआरों को झींगा पालन का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। मछलीपालन विभाग के अधिकारियों ने राज्य में विगत एक दशक में मछली उत्पादन के लगातार बढ़ते ग्राफ की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004-05 में एक लाख 20 हजार मीटरिक टन, वर्ष 2005-06 में एक लाख 32 हजार, वर्ष 2006-07 में एक लाख 38 हजार मीटरिक टन, वर्ष 2007-08 में एक लाख 39 हजार मीटरिक टन, वर्ष 2008-09 में एक लाख 59 हजार मीटरिक टन, वर्ष 2009-10 में एक लाख 74 हजार मीटरिक टन, वर्ष 2010-11 में दो लाख 28 हजार मीटरिक टन, वर्ष 2011-12 में दो लाख 50 हजार मीटरिक टन, वर्ष 2012-13 में दो लाख 55 हजार मीटरिक टन तथा वर्ष 2013-14 में दो लाख 84 हजार मीटरिक टन मछलियों की पैदावार हुई है।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि मछुआरों को मछलियों के बीज उपलब्ध कराने की दिशा में भी छत्तीसगढ़ में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। राज्य सरकार द्वारा कैट फिस के स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2013-14 में एक नई पंगेशियस हैचरी धमतरी जिले में स्थापित की गई है। इसी प्रकार सात मांगुर हैचरी दुर्ग, रायपुर, कबीरधाम, बिलासपुर, कोरबा, कोण्डागांव और कोरिया में स्थापित की गई है। प्रदेश सरकार की मछली पालन नीति के तहत दो सौ हेक्टेयर से एक हजार हेक्टेयर तथा पांच हजार हेक्टेयर से ज्यादा जल क्षेत्र के सिंचाई जलाशयों को मछली पालन के लिए पट्टे पर देने एवं प्रबंधन का अधिकार मछलीपालन विभाग को दिया गया है। इसी नीति के अनुसार पंचायत राज संस्थाओं को उनके कार्य क्षेत्र के अंतर्गत दो सौ हेक्टेयर जल क्षेत्र वाले सिंचाई जलाशयों को स्थानीय मछुआरों को निर्धारित प्राथमिकता क्रम में दस वर्ष के लिए पट्टे पर दिए जाने का प्रावधान किया गया है।


नई दिल्ली 27 अगस्त, 2014 सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक, श्री देवेन्द्र कुमार पाठक 27 अगस्त, 2014 को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह को जम्मू एवं कश्मीर में सीमा पर स्थिति की जानकारी देते हुए। साथ में गृह सचिव, श्री अनिल गोस्वामी, सचिव (सीमा प्रबंधन), श्रीमती स्नेह लता कुमार और गृह मंत्रालय तथा सीमा सुरक्षा बल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी हैं।

अर्थव्यवस्था में विकास का पूरा भरोसा, ईंधन भरने और अधिक
बिजली की मांग डॉ अरूप रॉय चौधरी, सीएमडी एनटीपीसी का कहना है
एनटीपीसी रुपये का कुल लाभांश का भुगतान करने के लिए. प्रति शेयर 5.75 नई सरकार ', हर घर को बिजली 24X7 प्रदान करने की दृष्टि क्षेत्र के लिए चुनौतियों के बीच मजबूत विकास के अवसरों में तब्दील हो. एक मंत्री के तहत कोयला, बिजली और अक्षय ऊर्जा डाल करने का निर्णय भी एक एकीकृत ऊर्जा दृष्टिकोण में यह परिणाम है, सभी संभव स्रोतों के दोहन पर मजबूत ध्यान भी अपनी कंपनी के लिए नए व्यापार के अवसरों को खोलता डॉ अरूप रॉय चौधरी, सीएमडी एनटीपीसी शेयरधारकों को संबोधित करते कहा कंपनी की 38 वीं वार्षिक आम बैठक में आज नई दिल्ली में हुई. कंपनी के सभी कार्यात्मक और स्वतंत्र निदेशकों अवसर पर उसके साथ मौजूद थे. कंपनी के प्रदर्शन के बारे में बोलते हुए कहा कि वह वर्ष के दौरान कंपनी 43,000 मेगावाट क्षमता को पार कर गया और मौजूदा स्थापित क्षमता 43,128 मेगावाट है कि कहा. 1835 मेगावाट की नई क्षमता वित्त वर्ष 2013-14 के दौरान जोड़ा गया है. एनटीपीसी 4,150 मेगावाट क्षमता के लिए काम से सम्मानित किया और रुपये के पूंजीगत व्यय लक्ष्य पार कर गया है. वर्ष के दौरान 20,200 करोड़ रुपये.
उन्होंने कहा कि कंपनी का पूंजीगत व्यय 2013-14 में लगभग 7.5% से अधिक के लक्ष्य का एक असाधारण और अभूतपूर्व उपलब्धि के साथ वर्ष 2011-12 के बाद से लगातार वृद्धि की गई है. समायोजित लाभ 16.44% तक पहुँचने रुपये की वृद्धि हुई. 10,562 करोड़ और 8.5% तक पहुँचने रुपये की वृद्धि हुई कुल आय. 74708 करोड़. एजीएम शेयरधारकों के दौरान रुपये के कुल लाभांश के लिए सहमति दे दी है. वर्ष के लिए प्रति शेयर 5.75.
वह भारत वर्तमान में ब्रिक्स देशों के बीच सबसे कम है जो दुनिया में 917.18 किलोवाट घंटा की सबसे कम सालाना प्रति व्यक्ति बिजली की खपत में से एक ने कहा कि क्षेत्र के विकास के बारे में. मांग, आपूर्ति और खपत के रुझान क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण होगा. उन्होंने कहा कि मैं भविष्य में बिजली के लिए अधिक मांग ईंधन भरने, अर्थव्यवस्था में वृद्धि देखेंगे विश्वास है कि कहा.

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