ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारियों की प्रतिदिन समीक्षा करें - मुख्यमंत्री श्री चौहान

भोपाल : सोमवार, अगस्त 25, 2014,मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारियों की प्रतिदिन समीक्षा की जाय। आयोजन की व्यापक जानकारी तथा वातावरण निर्माण के लिये उद्योग जगत से जीवन्त सम्पर्क बनाया जाय।
इस प्रतिष्ठापूर्ण आयोजन में विश्व के 20 देशों की भागीदारी रहेगी। देश के बड़े उद्योगपतियों ने भी इसमें शामिल होने की सूचना भेजी है। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज यहां मंत्रालय में ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट की तैयारियों की समीक्षा बैठक ले रहे थे। बैठक में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया भी उपस्थित थीं। श्री चौहान ने कहा कि इस आयोजन के लिये दिन-रात काम करें। पूरे देश में मध्यप्रदेश में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के आयोजन का संदेश जाये। इसमें युवा उद्यमियों को भी बुलाया जाये। मंत्री श्रीमती सिंधिया ने कहा कि मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना में सफल उद्यमियों की सफलता की कहानियों की दृश्य श्रव्य फिल्म बनायी जाये। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिये आमंत्रित किये गये उद्यमियों से सतत संपर्क बनाया जाये। बैठक में बताया गया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट इन्दौर के ब्रिलियन्ट कन्वेशन सेंटर में होगी। आयोजन की नेशनल पार्टनर सी.आई.आई. और नालेज पार्टनर अर्नेस्ट एंड यंग है। मीट की वेबसाईट www.investmp.com आरंभ हो गयी है। मीट में उद्योग जगत के तीन हजार से अधिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। आयोजन के दौरान लघु और मध्यम उद्यमियों के लिये विशेष रूप से सेमीनार आयोजित किये जायेंगे। इस आयोजन के कन्ट्री पार्टनर भी अपने देशों के उद्योग परिदृश्य के बारे में सेमीनार आयोजित कर सकेंगे। विभिन्न विभागों द्वारा नीतियां अद्यतन की जा रही है। बैठक में प्रमुख सचिव उद्योग मो.सुलेमान, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री एस.के. मिश्रा, उद्योग आयुक्त श्री बी.एल. कांताराव, ट्रायफेक के प्रबंध संचालक श्री डी.पी. आहूजा, मुख्यमंत्री के सचिव श्री विवेक अग्रवाल, श्री हरिरंजन राव तथा श्री अरूण भट्ट उपस्थित थे।

तीन वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कुपोषण से बचाने छत्तीसगढ़ की अपनी योजना : मुख्यमंत्री की घोषणा पर हुआ त्वरित अमल
रायपुर, 25 अगस्त 2014 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की घोषणा के अनुरूप छत्तीसगढ़ के 85 आदिवासी बहुल विकासखण्डों में ‘फुलवारी योजना’ शुरू हो गई है। यह योजना तीन साल की उम्र से छोटे बच्चों को कुपोषण से बचाने और उनकी सेहत को बेहतर बनाने के लिए शुरू की गई है। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि जनभागीदारी और विशेष रूप से ऐसे बच्चों की माताओं की भागीदारी इस योजना की एक बड़ी विशेषता है। योजना के तहत राज्य के 27 में से 19 जिलों के इन विकासखंडों में दो हजार 850 फुलवारी केन्द्र खोलने का लक्ष्य है। इस लक्ष्य के विरूद्ध अब तक दो हजार 733 केन्द्र खोले जा चुके हैं, जिनमें 40 हजार बच्चों और 17 हजार गर्भवती एवं शिशुवती माताओं को प्रतिदिन संतुलित, गर्म और ताजा पका हुआ पौष्टिक आहार दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने पिछले साल गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रदेश की जनता के नाम अपने संदेश में राज्य के 85 आदिवासी बहुल विकासखंडों में ‘फुलवारी केन्द्र’ की योजना शुरू करने की घोषणा की थी। उनकी घोषणा के लगभग डेढ़ साल के भीतर पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने योजनाबद्ध ढंग से सभी संबंधित विकासखंडों में फुलवारी केन्द्रों की शुरूआत कर दी है और शेष रह गए मात्र 117 फुलवारी केन्द्रों को जल्द शुरू कर दिया जाएगा। इन केन्द्रों का संचालन ग्राम पंचायतों और मितानिनों के सहयोग से माताओं की समिति द्वारा सर्वसम्मति से तय किए गए निजी घरों की खाली जगह पर या गांव में उपलब्ध किसी खाली सरकारी भवन में किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि 31 मई 2014 की स्थिति में प्रदेश में सर्वाधिक 499 फुलवारी केन्द्र सरगुजा जिले में संचालित हो रहे हैं। जशपुर जिले में 221, बस्तर (जगदलपुर) जिले में 207, कांकेर जिले में 203, बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में 178, सूरजपुर जिले में 170, कोरिया जिले में 148, रायगढ़ जिले में 144, कोरबा जिले में 140, कोण्डागांव जिले में 140, दंतेवाड़ा जिले में 120, बीजापुर जिले में 98, गरियाबंद जिले में 90, राजनांदगांव जिले में 90, बिलासपुर जिले में 88, सुकमा जिले में 77, नारायणपुर जिले में 60, धमतरी जिले में 30 और बालोद जिले में भी 30 फुलवारी केन्द्र शुरू हो गए हैं। छत्तीसगढ़ की इस योजना को राष्ट्रीय स्तर पर भी लगातार पहचान मिल रही है। हैदराबाद (आंध्रप्रदेश) स्थित केन्द्र सरकार के संस्थान ‘सेन्टर फॉर इनोवेशन इन पब्लिक सिस्टम्स’ ने इस वर्ष लगभग तीन माह पहले 14 मई को बनाए गए अपने स्थापना दिवस समारोह में छत्तीसगढ़ की इस योजना को भारत में श्रेष्ठ नवाचार गतिविधियों के रूप में प्रस्तुत किया। समारोह में छत्तीसगढ़ विभाग के पंचायत विभाग को भी आमंत्रित किया गया था।
अधिकारियों के अनुसार राज्य में ‘फुलवारी’ योजना प्रायोगिक तौर पर पहली बार दो साल पहले अगस्त 2012 में सरगुजा जिले में शुरू की गई थी, जहां जिला पंचायत की पहल पर तीन सौ फुलवारी केन्द्र शुरू किए गए थे। मुख्यमंत्री ने इस योजना की सफलता से उत्साहित होकर राज्य के सभी 85 आदिवासी बहुल विकासखंडों में इसके विस्तार का ऐलान किया था। योजना प्रारंभ होने के बाद राजधानी रायपुर स्थित पंडित जवाहर लाल नेहरू एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों द्वारा किए गए अध्ययन और यूनिसेफ के सहयोग से एकत्रित आंकड़ों से इस योजना की उत्साहजनक सफलता की जानकारी मिली है। फुलवारी केन्द्रों में दर्ज होने के बाद एक साल के भीतर बच्चों की कुपोषण दर 45 प्रतिशत से कम होकर 30 प्रतिशत हो गयी है। उनकी सेहत में भी काफी सुधार आया है। छत्तीसगढ़ में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में से 37.2 प्रतिशत बच्चों में कुपोषण की समस्या है, जिसे राज्य सरकार ने एक बड़ी चुनौती के रूप में लिया है और आंगनबाड़ी केन्द्रों के साथ-साथ अब फुलवारी योजना के जरिये भी इस समस्या को हल करने के लिए रणनीति बनाकर योजनाबद्ध कार्य शुरू कर दिया है। कुपोषण की दर किसी भी देश अथवा राज्य में संयुक्त राष्ट्र संघ के सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्य (मिलेनियम डेव्हलपमेंट गोल्स) के अनुसार 28 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए और इसे लगातार कम करते जाना है।

प्रधानमंत्री ने सभी बैंक अधिकारियों को ई-मेल भेजा
25-अगस्त, 2014 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सभी बैंक अधिकारियों को एक ई-मेल भेजा है जिसमें उनकी स्‍वतंत्रता दिवस घोषणा ‘प्रधान मंत्री जन धन योजना’ का जिक्र है, जो वित्‍तीय समावेशन पर राष्‍ट्रीय मिशन है और जिसका उद्देश्‍य देश भर में सभी परिवारों को बैंकिंग सुविधाएं मुहैया कराना और हर परिवार का बैंक खाता खोलना है।
प्रधानमंत्री ने इसे अत्‍यंत बड़ी जिम्‍मेदारी करार देते हुए कहा है, ‘हमें सात करोड़ से भी ज्‍यादा परिवारों को प्रवेश देने और उनका खाता खोलने की जरूरत है। यह राष्‍ट्रीय प्राथमिकता है और हमें इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए निश्चित रूप से तैयार हो जाना चाहिए। इस प्रक्रिया की अहमियत को समझने की जरूरत है क्‍योंकि महज इस एक कमी के चलते सभी अन्‍य विकास गतिविधियां अटकती जा रही हैं। मुझे भरोसा है कि हम सभी मिलकर इस स्थिति से निपट लेंगे।’ प्रधानमंत्री ने बैंक अधिकारियों से आग्रह करते हुए कहा है, ‘आप चक्र को अपने कंधे का सहारा दीजिए और अपनी ओर से अथक प्रयास कीजिए ताकि कोई भी ऐसा परिवार न छूट जाए जिसके पास कोई बैंक खाता न हो। यह अपने-आप में आपके और आपकी टीम के लिए अत्‍यंत संतुष्टि का एक अहम स्रोत साबित होगा। मैं खुद सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन करने वाली शाखाओं की उपलब्धियों को ध्‍यान में रखूंगा।’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘प्रधान मंत्री जन धन योजना सब का साथ सब का विकास की हमारी विकास अवधारणा का अहम भाग है। जिस तरह से हम आधुनिक बैंकिंग एवं वित्‍तीय प्रणालियों वाले इस ज्ञान युग में आगे बढ़ रहे हैं, वैसे में यह बात असहनीय है कि हमारी आबादी का एक बड़ा हिस्‍सा बुनियादी बैंकिंग सुविधाओं से वंचित रह जाए। मुझे कभी-कभी यह सोचकर आश्‍चर्य लगता है कि क्‍या हमने स्थितियां इतनी जटिल कर दी हैं जिससे कि गरीब और हाशिए में खड़े लोगों को सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। हमें इस कुचक्र को तोड़ने की जरूरत है तथा जन धन योजना इस दिशा में पहला कदम साबित होगी। एक बैंक खाता खुल जाने के बाद हर परिवार को बैंकिंग और कर्ज की सुविधाएं सुलभ हो जाएंगी। इससे उन्‍हें साहूकारों के चंगुल से बाहर निकलने, आपातकालीन जरूरतों के चलते पैदा होने वाले वित्‍तीय संकटों से खुद को दूर रखने और तरह-तरह के वित्‍तीय उत्‍पादों से लाभान्वित होने का मौका मिलेगा।’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘पहले कदम के रूप में प्रधान मंत्री जन धन योजना के तहत हर खाता धारक को एक रुपे डेबिट कार्ड और एक लाख रुपए का दुर्घटना बीमा दिया जाएगा। आगे चलकर इन लोगों को बीमा और पेंशन उत्‍पादों के दायरे में लाया जाएगा।’

देवी-देवताओं के सम्मान को बनाया रखा जाएगा: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने आज यहां आयोजित अन्तरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि देवी-देवताओं के नाम पर इधर-उधर घूम-घूमकर सड़कों के किनारे धन उगाही करने वाले लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग हमारी देव संस्कृति के वितरीत कार्य करते हैं और देवी-देवताओं का नाम बदनाम कर लोगों के विश्वास के साथ खिलवाड़ करते हैं, जिसे सहन नहीं किया जाएगा। इस वर्ष दशहरा महोत्सव 3 अक्तूबर से 9 अक्तूबर तक मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व में कारदार देवी-देवताओं को पारम्परिक तौर पर पालकियों में बजंतरियों द्वारा परम्परागत वाद्य यंत्रों के साथ ले जाते थे, परन्तु यह खेदजनक है कि कुछ लोग दो-तीन के समूहों में सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थलों पर बैठे रहते हैं और देवी-देवताओं के नाम पर धन उगाही करते हैं। यह प्रदेश की समृद्ध संस्कृति के विरूद्ध है। हमारी देव संस्कृति का उपहास बनाने वाले इस प्रकार के प्रचलन को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने जरूरी हैं। मुख्यमंत्री ने उत्सव के दौरान ग्रामीण खेलों के आयोजन की आवश्यकता पर भी बल दिया और कहा कि इन्हें ‘ग्रामीण खेल’ के रूप में पहचान मिलनी चाहिए और इन्हें प्रतिस्पर्धात्मक बनाया जाना चाहिए ताकि प्रदेश में ग्रामीण खेलों को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ग्रामीण खेल जैसे कब्बडी, वालीबाल इत्यादि को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वालीबाल प्रतियोगिता के आयोजन के लिए कुल्लू में देव सदन के पीछे अलग से मैदान बनाया जाएगा, लेकिन इसके लिए मैदान के हरित क्षेत्र को छेड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा यहां आयोजित होने वाली वालीबाल प्रतियोगिता में अन्य राज्यों की टीमों के भाग लेने की संभावना है। उन्होंने कहा कि मंदिर हमारी संस्कृति का हिस्सा हैं और इनका संरक्षण करना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार मंदिरों के चैकीदारों और इनके रख-रखाव करने वालों को मांग के अनुरूप फायर आर्म लाईसेंस उपलब्ध करवाने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि जहां तक रिवाल्विंग फंड का प्रश्न है, यह केवल उन्हीं मंदिरों के लिए है, जो सरकार के अधीन हैें अथवा आक्युपेंसी टेनेंट्स (मुजारा) के अंतर्गत आते हैं। इन मंदिरों के रखरखाव के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करवाई जाएगी तथा उन्हें पर्याप्त वित्तीय सहायता भी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इन मंदिरों को निर्धारित सीमा से अधिक की धनराशि के लिए भी सरकार आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाना सुनिश्चित बनाएगी ताकि प्राचीन मंदिरों का अस्तित्व बना रहे। इससे पूर्व, कुल्लू के उपायुक्त श्री राकेश कंवर ने मुख्यमंत्री को दशहरा महोत्सव के दौरान होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों एवं इसके लिए किए गए प्रबंधों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ने महोत्सव के दौरान लोक नृत्य प्रतियोगिता के आयोजन का निर्णय लिया है, जिसमें 5000 से अधिक महिलाएं पारम्परिक वेशभूषा में भाग लेंगी, जिसके चलते इस प्रतियोगिता के लिम्का बुक आॅफ रिकार्ड में शामिल होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि कुल्लू दशहरा में देवताओं के साथ आने वाले कारदारों को प्रत्येक को दो टेंट उपलब्ध करवाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरान स्वच्छता की पूर्ण व्यवस्था की गई है और समिति द्वारा सांस्कृतिक संध्याओं को देखने के पश्चात लोगों के लिए बस सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाएगी। विधायक सर्वश्री महेश्वर सिंह, कर्ण सिंह, गोविंद राम एवं खूब राम, सांसद श्री राम स्वरूप, जिला परिषद कुल्लू के अध्यक्ष श्री हरि सिंह, कारदार संघ के अध्यक्ष श्री दौलत राम, मुख्य सचिव श्री पी. मित्रा, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री वी.सी. फारका, अतिरिक्त मुख्य सचिव, भाषा, कला एवं संस्कृति श्रीमती उपमा चैधरी, प्रधान सचिव, राजस्व श्री तरूण श्रीधर, पुलिस महानिदेशक श्री संजय कुमार और प्रदेश सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।

प्रदेशवासियों को प्रत्येक दशा में बिजली की सुचारु आपूर्ति सुनिश्चित की जाए मुख्यमंत्री
लखनऊ 25 अगस्त, 2014उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने प्रदेश वासियों को प्रत्येक दशा में बिजली की सुचारु आपूर्ति सुनिश्चित किएजाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा कम मात्रा में कोयला उपलब्ध कराए जाने से राज्य के कुछ बिजलीघरों में उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसलिए अन्य स्रोतों से भी प्राथमिकता पर बिजली की व्यवस्था सुनिश्चित करायी जाए। मुख्यमंत्री आज यहां एक बैठक में विद्युत आपूर्ति की समीक्षा कर रहे थे। श्री यादव ने आपूर्ति में तत्काल सुधार लाने के लिए अधिकारियों को सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश देते हुए कहा कि एनर्जी एक्सचेंज,बैंकिंग सहित अन्य स्रोतों से बिजली का इंतजाम कर प्रत्येक दशा में प्रदेश की जनता को समुचित बिजली की आपूर्ति की जानी चाहिए। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कोयला मंत्रालय एवं कोल इण्डिया से प्रभावी पैरवी कर वांछित मात्रा में कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए हैं। 2 बैठक में अधिकारियों ने यह जानकारी दी कि राज्य सेक्टर की अनपरा लैन्को (400 मेगावाॅट) और रोजा-शाहजहांपुर (500 मगावाॅट) विद्युत परियोजनाओं का संचालन कोयले की कमी के फलस्वरूप नही हो पा रहा है। इसके अलावा वर्तमान में अनपरा की यूनिट नं.-4 का जनरेटर ट्रांसफार्मर भी खराब है। इससे राज्य के बिजली उत्पादन में प्रतिदिन 500 मेगावाॅट की हानि हो रही है तथा उत्पादन में 35 मिलियन यूनिट की कमी आयी है। इसके अलावा केन्द्रीय सेक्टर की इकाइयां भी कोयले, गैस और पानी की कमी के फलस्वरूप प्रभावित है, जिससे 1273 मेगावाॅट अर्थात 30.5 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन में कमी आयी है। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को यह भी जानकारी दी कि एनर्जी एक्सचेंज से प्रतिदिन करीब 8 मिलियन यूनिट विद्युत क्रय की जा रही है। इसके अलावा बैंकिंग के जरिए 4.6 मिलियन यूनिट बिजली की व्यवस्था भी की जा रही है। यह भी अवगत कराया गया कि वर्तमान में मण्डल मुख्यालयों पर औसतन 17 से 19 घंटे, महानगरों में 19 घंटे तथा उद्योगों को 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है। जनपद मुख्यालयों को लगभग 13 घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 5 घंटे आपूर्ति हो पा रही है।

सरकार आपके द्वार गूगल पर थी दौरों की सीधी जानकारी
जयपुर, 25 अगस्त। उदयपुर संभाग में सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के तहत पहली बार अभिनव प्रयोग के रूप में राज्य सरकार के सभी मंत्रिगण एवं शासन सचिवों के ग्रामीण क्षेत्रों में दौरे की जानकारी गूगल मैप पर प्रदर्शित की गई। इसका सीधा लाभ यह मिला कि किसी दिन, कौन मंत्री या अधिकारी संभाग के किस जिले में, किस ग्राम पंचायत का दौरा कर रहे हैं, इसकी सीधी जानकारी आमजन स्वयं गूगल मैप से प्राप्त कर सकते थे।गूगल मैप पर रूट चार्ट प्रदर्शन की इस प्रक्रिया के तहत संभाग के सभी जिलों के मानचित्रों पर निर्धारित मार्गाें का चिन्हिकरण कर और उन्हें नीले रंग से प्रदर्शित किया गया। जिन रूटों पर टीम द्वारा यात्रा करना निर्धारित किया जाता था, उन्हें लाल रंग से अंकित किया गया। टीमों द्वारा लक्षित ग्राम पंचायतों तक पहुंचने के बाद वहां तक का रूट हरे रंग में बदल जाता था। इस नये प्रयोग की सहायता से जहां एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न टीमों का मुवमेंट मॉनिटर करने में अत्यधिक सहायता मिली, वहीं आमजन को भी गूगल मैप पर सरकार के दौरों की सीधी जानकारी उपलब्ध हो सकी।

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