काश मैं भी मुख्यमंत्री बन पाता

व्ही.एस.भुल्ले@तीरंदाज
भैया- खदान,व्यापाम तो दूर की कोणी, बिजली, पानी, सड़क ही नहीं संघ लेाक सेवा वाला भी छाती पीटता रह जाता। अकेले मनरेगा में ही ऐसी जुगाड़ कर खेल जमाता कि, आज का पंच-सरपंच भले ही परमेश्वर बने या न बने खुद के लिये अवश्य पहले एक्सीलेन्स,फिर राष्ट्रपति और बाद में पदमश्री पुरुस्कार ले आता। और हाथों हाथ प्रदेश की भोली भाली जनता के बीच अपनी छवि चमकाने ब्लॉक बस्टर फिल्म बनाता। जो रातो रात सुपर हिट हो लाखो नहीं करोड़ों कमा लेती और वहीं दौलत मुझे हाथो हाथ मु यमंत्री बना देती। क्योंकि आखिरकार हम आजादी का 68 वाँ स्वतंत्रता दिवस जो मना रहे है, बोल भैये कैसी रही। 

भैये-तने तो बावला शै,कै थारे को मालूम कोणी, जबान हिलाने से कोई मु यमंत्री और आरोप लगाने से कहीं घपले घोटाले थोड़े ही हो जाते। सरकार ऐसी हो कि टी.व्ही. चैनलो पर सरेयाम सच बोले, नौकरशाहों के आगे, भले ही दीनहीनो के पसीने छूटे, ऐसे में मीडिया मोथरा बन तमाशबीनों की तरह देखे, तो ऐसे में कई भाई लेाग मु यमंत्री बन लिये होतेे। अब्बल मु यमंत्री की कुर्सी हथियाने अपने ही लेाग, अपनापन भूल सत्ता हथियाने कड़ी कुन्दे फिट नहीं कर रहे होते। वो तो भगवान भला करे दुश्मनो के घर भेदियो का सो व्यापम के कोहराम में जाति कुर्सी बच गई। मगर ऐसा नहीं कि फिलहॉल आफत टल गई। आखिर मुए समय का क्या करें जो अपनी रफतार से चलता रहता है। हर किसी को मु यमंत्री जैसा पद ऐसे ही थोड़े मिलता है। सो मुए भाई के पीछे चूल बांध कर पड़े है। और हिमायती बन पीछे ही खड़े हो पत्थर फेकते रहते है। 

भैया- मने समझ लिया थारा इसारा तू भी टी.व्ही. चैनलो और गजभर रंग बिरंगे अखबार के नाम बिचते पैंमलेटो की भाषा बोल रहा है। और आज भी स्वार्थो की खातिर खनिज,व्यापम का हुक्का भर बिजली, सड़क, पानी, मनरेगा और करोड़ों की क प्यूटर खरीदी पर कुछ नहीं बोल रहा है। बिजली विहीन ग्राम पंचायतो और अप्रशिक्षित ग्राम सचिवो को पी-3, पी-4 नहीं बिन्डो 7,8 की पूरी की पूरी किट 1 लाख रुपये में परोस, प्रदेश की ग्राम पंचायतो को हाईटेक होने का दम भर रहा है। मनरेगा में प्रदेश भर में बंटे लेपटॉप ही कम थे, जो तू ई-डिस्ट्रिट के नाम पर इतने हाई-फाई क प्यूटर गाँव-गाँव परोस रहा है। पंच परमेश्वर योजना से लेकर मुरहम, बोल्डर, सड़कों का, प्रदेश भर में मु यमंत्री सड़कों का जाल बिछाने के बावजूद भी और शासन की रोक बावजूद, न जाने कितने करोड़ का बुक एडजस्टमेन्ट का खेल भोपाल में कार्योत्तर स्वीकृति के नाम भोपाल में चल रहा है। मगर कै करुं हारा दुर्भाग्य कि मने आज भी मु यमंत्री बनने का मौका नहीं मिल रहा है। 

भैये- तने तो बावला शै, गर तूने जनसेवा, समाज सेवा, राष्ट्र सेवा की जगह दिल्ली के भू-भाग पर बैठे राजनीति के महा मण्डलेश्वरों की झोपडिय़ों की परिक्रमा कर, मक्खन की थप्पी लगा, च पी कर ली होती तो थारी मु यमंत्री बनने की मंशा हाथो हाथ पूरी हो ली होती। 

भैया- चुप कर मुए गर हारे को जरा-सा भी इल्म होता, तो सत्ता में आते ही सबसे पहले अपना घर भर अपनी चमड़ी इतनी मोटी कर लेता,और जनसेवा के नाम मैवा से अन्डी बच्चों तक मजबूत कर लेता। रहा सवाल मेरी भगवान बैचारी जनता जनार्दन का तो वह तो पूर्व की भांति हारे जैसे सेवक की सरकार में ाी कार्यालयों के चक्कर लगा खुलेयाम धक्के खाती और मुगेरी लाल की तरह सुन्दर सपने देख चुपचाप सो जाती। भाया आज ही मैं किसी बड़े नेता के घर जाऊंगा कीमत जो भी हो उसकी देहरी खंूद दर की मिट्टी खोद लाऊंगा। साथ ही घपले घोटालो में माहिर मूड़धन्यो की तस्वीर ही नहीं उनकी खड़ाऊं भी ले आऊंगा जिन्हें पूज आज नहीं तो कल मु यमंत्री अवश्य बन जाऊंगा। क्योंकि ई-टेन्डर के माध्ययम से अच्छा वक्ता और किरदार बनने अखबारों में निविदा विज्ञाप्ति छप बाऊंगा, कीमत जो भी हो तहे दिल से अपनी मातृ भूमि और लाखों, करोड़ दीन-हीनो की खातिर भाड़ो को मुंह मांगी कीमत भी चुकाऊंगा। मगर इस कीमत पर आम गरीब की आंखो में मायूसी नहीं देख पाऊंगा। जय,जय,जय श्रीराम 
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