देश की बिना पर बयानों की नूराकुस्ती गलत, सरकार को समय देना चाहिए

व्हीएस भुल्ले।  ऐसा लिखतें वक्त हो सकता है, कि मैं राजनैतिक दलो की नजर में किसी भी दल के प्रति अतिवादी दिखू। मगर मेरा सोच है, कि वर्तमान...

व्हीएस भुल्ले। ऐसा लिखतें वक्त हो सकता है, कि मैं राजनैतिक दलो की नजर में किसी भी दल के प्रति अतिवादी दिखू। मगर मेरा सोच है, कि वर्तमान राजनैतिक हालात और राजनैतिक दलो सहित सरकार को लेकर जिस तरह से बयानबाजी देश में चल रही है वह सिर्फ और सिर्फ देश की बिना पर नूराकुस्ती से अधिक कुछ भी नहीं।

नई सरकार है तो शुरुआत में समय तो लगता है मगर जिस तरह से स्वयं की सत्ता गंवा, सत्ता से बाहर हुई कांग्रेस द्वारा विभिन्न मुद्दों को लेकर भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पर जरा-सी जरा-जरा सी बातों को लेकर टीका टिप्पणी की जा रही है। वह कहीं से भी उचित प्रतित नहीं होती है। बल्कि हार के बावजूद कांग्रेस जन मानस के बीच हसी का पात्र अवश्य बनी है।

होना तो यह चाहिए कि जो दल हाल ही में सत्ता से बाहर हो, विपक्ष में बैठे है उन्हें कम से कम सरकार को 6 महिने का समय तो अवश्य देना चाहिए। इस बीच अगर सरकार कोई ऐसा निर्णय लेती है जिस पर तत्काल प्रतिक्रिया आवश्यक हो तो देश की जनता के बीच पूरे जोर-शोर से रखना चाहिए। न कि ऊल जुलूल अनावश्यक व्यान दे हसी का पात्र बनना चाहिए। जैसा कि वर्तमान सरकार को लेकर विपक्षी दलो द्वारा किया जा रहा है।

बेहतर होता कि दल अपनी हार की समीक्षा लग अपनी जमीन तरासते फिर जाकर 6 महिने पश्चात सरकार की रीति-नीति पर सवाल उठाते। आज जिन सवालो को लेकर कांग्रेस या कुछ विपक्षी दल सरकार को गाहे बगाये सरकार को कोसते रहते है। उन्हें शायद यह इल्म नहीं कि उनका एक बहुत बड़ा जमीनी अक्श सिमट चुका है। और यहीं हाल रहा तो बुर्ज बैठ सरकार को कोसने वाले चिल्लाते ही रह जायेगें और सरकार में बैठे लोग आगे बढ़ते जायेगें।

हो सकता है मेरी अक्क्षुण बुद्धि की यह पराकाष्टा हो मगर सच यहीं है, कि जिस दल के नेतृत्व में सरकार दिल्ली की गद्दी पर विराजमान है। उसे मालूम है, कि चिल्लाने वाले को कैसे चुनावों में धूल चटाई जा सकती है। सत्ता धारी दल के लिये यह कोई नई बात नहीं। क्योंकि इसी फॉरमूले के सहारे देश भर में अप्रत्याशित जीव दर्ज कर सत्ताधारी दल दिल्ली की सत्ता में बैठा है। जिसकी मीडिया बैल्यू ही नहीं जडिय़े स्तर तक माऊस पब्लिसिटी का नेटवर्क विभिन्न स्तरों पर फहला है।

पुरानी कहावत है, कि अंहकारी बलशाली व्यक्ति से युद्ध जीतने के लिये आपको छद्धम विद्या का ज्ञान आवश्यक है। इसी का इस्तेमाल कर अपने आरोपो और व्यानों के माध्ययम से सत्ताधारी दल ने देश भर में विपक्षी दलो को धूल चटाई है। और अब उसका मिशन जबकि केन्द्र में अब उनकी सरकार है। ऐसी स्थिति में इसी फॉर्मूले के तहत शेष भू-भाग पर वह अपनी फतह चाहती है।

मगर दुर्भाग्य कि विपक्षी दल अभी भी सत्ताधारी दल द्वारा बिछाई गई विसात पर अपने मोहरे बेतुके व्यान और वे मतलब के मुद्दों को छेड़ अपनी छवी जनता की नजरों में खराब करने पर तुले है। देश की आवाम इतनी मूर्ख नहीं कि आये दिन हो रहे बड़ी-बड़ी योजनाओं के लेाकार्पण को नहीं समझती। या फिर पूर्व सरकार द्वारा लागू की गई योजनाओं की महत्वत: को नहीं समझते। स्व.गांधी को पूजने वालो को शायद यह इल्म नहीं कि कभी उन्होंने कहां था कि आप जबकि कोई निर्णय सत्ता में बैठकर ले, तो समाज के उस अन्तिम व्यक्ति के स्थान पर अपने आपको खड़ा करना। फिर कोई निर्णय लेना। क्योंकि सरकार द्वारा आम व्यक्ति के लिये, लिये गये निर्णय को लागू ही नहीं दिखना चाहिए बल्कि उसे महसूस भी होना चाहिए।

यह सहीं है कि जिन योजनाओं का लेाकार्पण सत्ताधारी दल के प्रधानमंत्री कर रहे है, भले ही उन योजनाओं को विपक्ष में बैठे दलो की सरकारों ने शुरु किया हो। मगर देश की जनता सत्ता धारी दल की सरकार में उनका लाभ उठाने जा रही है। इसलिये इन मुद्दों पर सवाल खड़े करना गलत है। अगर आज सत्ताधारी दल कई क्षेत्रों में त्वरित निर्णय ले उन निर्णयों को अमल में ला रहा है, तो इसमें हर्ज ही क्या? क्योंकि सभी का लक्ष्य देश की आम जनता का कल्याण करना है। और देश को एक शसक्त, खुशहाल और स पन्न राष्ट्र बनाना है। एक ऐसे लेाकतंत्र की अनुभूति देश वासियों को कराना है जिससे वह आजादी के 67 वर्षो तक दो-चार होती रही है। आज जब नई सरकार आम देश वासी के लिये कुछ कदम उठाना चाहती है तो उसमें सकारात्मक पक्ष विपक्ष का भी होना चाहिए। अगर सरकार कुछ गलत कर रही है,तो विपक्ष को संसद ही नहींं सड़क पर उतर खुलेयाम विरोध करना चाहिए। विरोध भी ऐसा कि दिल्ली से लेकर देश के हर गांव तक हो। मगर वे मतलब की ब्यान बाजी और सरकार के निर्णयों का विरोध नहीं होना चाहिए। तभी हम विश्व में एक शसक्त स पन्न और खुशहाल देश बन सकेगें।

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तीरंदाज,328,व्ही.एस.भुल्ले,523,
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देश की बिना पर बयानों की नूराकुस्ती गलत, सरकार को समय देना चाहिए
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