शिवपुरी में शिव सरकार की दुर्दशा: अंधेरर्गदी का अखाड़ा बना शहर

म.प्र. शिवपुरी। यह कोई कहानी नहीं बल्कि म.प्र. के एक ऐसे शहर का सच है, कभी जहां के निवासी 100 वर्ष पूर्व मौजूद नैसर्गिक सुविधाओं पर इठलाते नहीं थकते थे। क्योंकि उस समय यह शहर तत्कालीन स्टेट की ग्रीष्मकालीन राजधानी हुआ करता था। जिसमें सचिवालय व अधिकारियों की बड़ी-बड़ी कोटिया, होटल, खेल-मैदान, सांस्कृतिक भवन, क्लब, सीवर लाइन शहर के अन्दर चौड़ी-चौड़ी सड़के शहर के चारों ओर रिंग रोड़ कुओं, तालाबों का शुद्ध पेयजल, नेशनल पार्क, वोट हाउस, सुन्दर झील, अब्बल समुचे शहर को वातानुकूलित रखने बीसियों ताल तलैयाऐं और हरे-भरे जंगल थे।
अगर यो कहें कि जंगलो के साथ ही शहर के अन्दर आम जामफलो जैसे फलो के बगीचे थे। मगर आज सारी सुविधायें काफुर है। न तो शहर वासियों को पीने शुद्ध पेयजल न ही शहर में चौड़ी-चौड़ी सड़के और न ही कुऐं बावडिय़ों का नामो निशान बचा है। रहा सवाल ताल-तलैयों का तो अब इन में पानी की जगह कॉलोनियो कट बड़े-बड़े भवन खड़े है, वहीं अतिक्रामको शहर के नाले और सड़को को पाट भवन तान रखे है उन भ्रष्ट अधिकारियों के संरक्षण में जो या तो भ्रष्टाचार की अकूत कमाई कर शहर छोड़ चुके है तो कुछ यहीं पर बने हुये है।

बहरहॉल बात बहुत ल बी है, अगर हम यहां पर बात शहर वासियों को शुद्ध पेयजल और सड़को की हालात की ही कर ले, तो अंधेरर्गदी का आलम पता चल जायेगा। देखा जाये तो शहर मेंं सप्लाई होने वाले शुद्ध पेयजल की बात करे तो शहर में पेयजल शहर में मौजूद बोर बेल या फिर चाँदपाटा झील से किया जाता है। जिस झील में सारे शहर के गन्दे नालो का पानी गटर गन्दगी के साथ बरसाती पानी चांदपाठा पहुंच जाता है। जिसके लिये सिन्ध जलावर्धन की शुरुआत हो करोड़ो फूकने के बावजूद बन्द हो चुकी है। वहीं सड़को का आलम यह है कि जिला मु यालय पर मौजदू अधिकारी रोजाना ऊबड़-खाबड़ सड़को से गुजर न जाने किसका लिहाज करते है इन सड़को पर तैनात उपयंत्री पगार सरकार से ले किसकी नौकरी करते है, किसी को पता नहीं।

 मगर माननीय न्यायालय के आदेशों को नकार अंधेरर्गदी पर तुली शिव सरकार की नौकरशाही को इतना भी इल्म नहीं कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी यह स्पष्ट किया है कि और कानूनों में भी लिखा है,कि जनसुविधाओं की बिना पर विकास नहीं होना चाहिए। मगर इस शहर में वह सबकुछ खुले आसमान के नीचे हो रहा है जो नहीं होना चाहिए। धन्य है शिवपुरी शहर की जनता जिसकी जुबान आज भी बन्द है। नहीं तो क्या बात है,कि इस शहर में इतनी दुशबारियों बढऩे के बाद भी कोई आवाज नहीं उठती। शहर की जनता ने तो अंगे्रजो की गुलामी तक को मात कर दिया कम से कम उस समय लेाग आजादी के लिये तो लड़े थे। ये तो खुद की सुविधाओं पर पड़े डांके पर भी चुप है। इससे बड़े त्याग और गुलामी की मिशाल और कहां मिलेगी। जो शिवपुरी में शिव सरकार के राज में देखने भोगने मजबूर लेागों को मिल रही है।

विकास का वादा पांच माह का नहीं पांच साल का है-मु यमंत्री
जयपुर, 19 अगस्त। मु यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने कहा है कि राजस्थान के विकास के लिए हमने प्रदेश की जनता से पांच वर्ष का वादा किया है, पांच माह का नहीं। हम निश्चित रूप से जनता की उ मीदों पर खरा उतरेंगे, लेकिन इसके लिए धैर्य रखना होगा। अब तक का समय तो हमारी सरकार का सफाई करने में ही गुजर गया। अब विकास की बारी है। श्रीमती राजे मंगलवार को सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के अन्तर्गत डूंगरपुर जिले के सागवाड़ा कस्बे में जनसुनवाई शिविर में उपस्थित जनसमुदाय को स बोधित कर रही थी।
विकास के लिये 100 में से सिर्फ 3 रुपये
मु यमंत्री ने कहा कि प्रदेश का विकास इतना चुनौतीपूर्ण है, इसका अन्दाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि 100 रुपये में से सरकार सिर्फ 3 रुपये ही विकास पर खर्च कर सकती है, बाकी 97 प्रतिशत पैसा वेतन, पेेंशन और ब्याज पर खर्च हो रहा है।
श्रीमती राजे ने कहा कि आज प्रदेश की कुल आय 55 हजार 594 करोड़ रुपये है। इसमें से वेतन, पेंशन और ब्याज पर 53 हजार 765 करोड़ रुपये खर्च होता है जो कुल आय का 97 प्रतिशत है। प्रदेश का यह हाल कांग्रेस के 52 साल के कुशासन की वजह से हुआ। विकास के लिए जातिवाद के झगड़ों से दूर रहना होगा
श्रीमती राजे ने कहा कि राजस्थान को आगे बढ़ाने के लिए हमें 10 सालों के लिए जातिवाद, मजहबवाद सहित सभी प्रकार के वाद एवं झगड़े-फसाद को छोड़कर केवल राजस्थान के विकास के लिए काम करना होगा। अगर राजस्थान आगे नहीं बढ़ेगा तो हममें से कोई भी आगे नहीं बढ़ सकेगा।

जनप्रतिनिधि हो या कलक्टर सब जनता के सेवक
मु यमंत्री ने कहा कि जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करने के लिए जनप्रतिनिधि हो या कलेक्टर, तहसीलदार हो या पटवारी सबको सेवा भावना के साथ कार्य करना होगा। जनता खुश नहीं है तो समझ लो सरकार भी खुश नहीं है। जनसुनवाई में हजारों की सं या में आने वाले परिवाद ये साबित करते हैं कि नीचे के स्तर पर कार्य सही नहीं हो रहा है। इस चरमराई व्यवस्था को सुधारने के लिए ही हम 'सरकार आपके द्वारÓ कार्यक्रम के माध्यम से गांव-गांव तक पहुंच रहे हैं।

गृह मंत्री आपदा जोखिम कम करने के लिए नागरिक रक्षा मुख्‍यधारा योजना की शुरुआत करेंगे
१९-अगस्त, २०१४ गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह आपदा जोखिम कम करने के लिए च्नागरिक रक्षा मुख्‍यधारा योजनाज् की कल यहां शुरुआत करेंगे। देश में नागरिक रक्षा संगठन को मजबूत बनाने की सरकार की घोषित नीति को प्रोत्‍साहन देने के लिए केन्‍द्र सरकार ने इस प्रणाली को मंजूरी दी है। इसे १२वीं पंचवर्षीय योजना अवधि के दौरान २९१ करोड़ रूपये की लागत से देश के ३२ राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य समुदाय की आपदा का सामना करने की क्षमता को बढ़ाना, जानमाल के नुकसान को कम करना और प्राकृतिक अथवा मानव निर्मित किसी भी आपदा के बाद सामान्य जीवन को प्रभावित होने से बचाना तथा आपदा के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने और आपदा बहाली समुदाय बनाने की दिशा में केन्द्र सरकार के प्रयासों में तेजी लाना है। इसका उद्देश्य नागरिक रक्षा संगठन की संभावनाओं को बाहर निकालना और देश के सभी संवेदनशील शहरी और ग्रामीण इलाकों में एक तत्पर और प्रभावी प्रतिक्रिया तंत्र प्रदान करने के लिए आपात कर्मचारियों का प्रशिक्षित स्वयं सेवी बल बनाने के लिए संसाधनों का उपयोग करना है।

ग्राम पंचायतों के हर गांव में होगी ग्राम सभा : आज से शुरू होगा सिलसिला : मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से की ग्राम सभाओं में शामिल होने की अपील
रायपुर, १९ अगस्त २०१४ मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य की ग्राम पंचायतों में कल २० अगस्त से आयोजित की जा रही ग्राम सभाओं की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं दी हैं। इन ग्राम सभाओं का आयोजन अलग-अलग तारीखों में प्रत्येक ग्राम पंचायत के हर गांव में किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से ग्रामसभाओं में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। राज्य के सभी २७ जिलों में ग्राम सभाओं के आयोजन की तैयारी पूरी कर ली गई है।

मुख्यमंत्री ने आज यहां जारी शुभकामना संदेश में कहा है कि ग्रामसभा और ग्राम पंचायत हमारे लोकतंत्र की बुनियाद है। उनकी सफलता के लिए उनमें स्थानीय मतदाताओं की सीधी भागीदारी जरूरी है। पंचायतों के काम-काज का पूरा हिसाब जनता को मिल सके और पंचायती राज व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे, इसके लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने पंचायत राज अधिनियम में संशोधन कर हर ग्राम पंचायत के प्रत्येक गांव में वर्ष में कम से कम चार विशेष अवसरों पर ग्रामसभाओं का आयोजन अनिवार्य कर दिया है। ये ग्रामसभाएं हर साल २३ जनवरी को नेता सुभाषचन्द्र बोस की जयंती पर, १४ अप्रैल को संविधान शिल्पी डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती पर, २० अगस्त को पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री राजीव गांधी की जयंती पर और दो अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर आयोजित करने का प्रावधान किया गया है। इसी सिलसिले में कल २० अगस्त को स्वर्गीय श्री राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर ग्राम सभाओं का सिलसिला शुरू हो रहा है।

यह भी उल्लेखनीय है कि ग्रामसभाओं में राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। इन योजनाओं के तहत चयनित हितग्राहियों को सामग्री वितरण भी जनता के सामने किया जाएगा। प्रदेश हर गांव के मतदाता अपनी ग्रामसभा के सदस्य होते हैं। उनकी उपस्थिति में ग्रामसभाओं में पंचायतों के बजट तथा उनकी प्रस्तावित योजनाओं का अनुमोदन किया जाएगा। पिछले साल के व्यय का भी अनुमोदन होगा और शासकीय योजनाओं के तहत लिए जाने वाले कार्यों तथा हितग्राहियों का चयन भी किया जाएगा। ग्राम पंचायतों के कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण इन ग्रामसभाओं में होगा। इसके तहत ग्राम पंचायतों के आय-व्यय का हिसाब जनता के सामने रखा जाएगा।
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