महापुरुषों पर राजनैतिक ट्रायल खतरनाक

 व्ही.एस.भुल्ले। जिसने भी राष्ट्र के लिये जो कुछ भी किया देश के सामने है देश वासियों के दिलो में भी उन महापुरुषो के लिये बड़ा स मान है जिन्होंने अपने राष्ट्र के लिये अपना सबकुछ न्यौछावर कर सारा जीवन देश सेवा में समर्पित कर दिया, भले ही तत्वकालीन समय उनकी जो भी भूमिका रही है।

आज जब देश की राजनीति में लेागों के चाल चरित्र जुदा है और प्रतिभाओं का पैमाना खुला है, ऐसे में किसी भी स मान को लेकर महापुरुषो पर राजनैतिक ट्रायल गलत ही नहीं उन महापुरुषों का अपमान भी है। जिन्होंने देश की सेवा बगैर किसी पुरुस्कार की लालसा लिये देश के लिये जान की बाजी लगा सारा जीवन देश को समर्पित कर दिया। आज देश व देश वासियो के दिलो में उन महापुरुषों का जो मान स मान है उसे किसी पुरुस्कार की सीमा में बांधना न्यायोचित नहीं है। क्योंकि दोनो परिस्थितियाँ भिन्न है।

आजादी के पूर्व का त्याग और आजादी के बाद राष्ट्र की सेवा की,समझ में कुछ अन्तर हो सकता है। मगर दोनो को एक ही पलढ़े में तौल दिया जाये, या उन पर अनौपचारिक डिवेट हो यह भारतीय लेाकतंत्र के लिये उचित नहीं।

क्योंकि जिस तरह का राजनैतिक ट्रायल महापुरुषों को लेकर देश में होने लगा है और देश की राजनीति जिस दिशा में चल पढ़ी है। वह विशुद्ध रुप से त्याग,कुर्बानी,सिद्धान्त कम सत्ता प्राप्ति कर सत्ता में निरन्तर बने रहने का साधन भर बन कर रह गई है। जिसमें वोट कबाडऩे व सत्ता हासिल कर सत्ता में बने रहने की होड़ सी मची हुई है।

जिसके चलते संवैधानिक संस्थाये ही नहीं सामाजिक ताने बाने भी कमजेार पढ़ रहे है। और स यता,संस्कृति,संस्कार तथा सिद्धान्त आज की राजनीति में हापनि भरते नजर आ रहे है।

बहरहॉल जो भी हो कम से कम पहले जो भी रहा हो, या हुआ हो, मगर अब इसे रुकना चाहिए। बेहतर होता सरकार या सरकारे में समधियाना बनाने के बजाये हमारे महापुरुषोंं के स मान हेतु अलग से कोई सर्वोच्च स मान बनाती और फिर औपचारिक अनौपचारिक तौर उन नामो पर भी विशेष टीप, तर्को और तथ्यो के आधार पर मुहर लगाती।

निश्चित ही आज कई हमारे महापुरुष है। जिनके स मान की जरुरत है। मगर सौभाग्य कि नई सरकार ने कुछ शुरुआत तो की, भले ही वो जैसी भी हो, मगर रास्ता अवश्य निकलेगा ,वशर्ते राजनैतिक ट्रायल न हो?



SHARE
    Your Comment

0 comments:

Post a Comment