कैसे संभव है, कांग्रेस मुक्त भारत

व्ही.एस.भुल्ले। क्या कुर्बानियों से भरी विचारधारा का अन्त ऐसे ही हो जायेगा जैसा कि लेाग कह रहे है वो भी उस विचार धारा का जिसने 200 वर्षो की गुलामी अपने कड़े संघर्ष और सेकड़ों कुर्बानियाँ देने के बाद देश को आजादी दिलाई थी। हो सकता है, कांग्रेस मुक्त भारत का सपना देखने वालो का हुनर ठीक हों, क्योंकि देश वासी आज जिस दल को कांग्रेस के रुप में देखते है,वह कुछ स्वार्थी,सत्ता लोलुप, साम्राज्यवादी, सामंतवादी और परिवार वादियो का समूह भर हो, वह कांग्रेस नहीं हो सकती। क्योंकि असली कांग्रेस तो आम गरीब,किसान और जवानो की रगो में बसती है।

यह देश का दुर्भाग्य ही है, कि जिस महान दल या विचारधारा पर लेागों को गर्व होना चाहिए उस कांग्रेस पर लेाग शर्म महसूस कर उसका उपहास उड़ाने से नहीं चूक रहे। शायद इसीलिये आजादी के पश्चात महात्मा गांधी जी ने अपनी व्यक्तिगत इच्छा व्यक्त करते हुये कहा था कि अब कांग्रेस को खत्म कर देना चाहिए। मगर जिन्होंने गांधी जी की इस इच्छा को दरकिनार कर कांग्रेस को जिन्दा रखा, उन्होंने अपने जीते जी कभी कांग्रेस के मान, स मान पर कभी आंच नहीं आने दी। चाहे वह स्व.पंण्डित जवाहर लाल नेहरु, सरदार बल्लभ भाई पटेल, लाल बहादुर शास्त्री, इन्दिरा गांधी, राजीव गांधी जैसे नेता रहे हो। उन्होंने समय आने पर जान की बाजी लगा देश को बचाने कुर्बानियाँ दी। मगर कांग्रेस पर एक दाग तक नहीं लगने दिया।

कांगे्रस वह महान विचार धारा है, जिसकी स्थापना भले ही एक अंग्रेज ने की हो। मगर उस विचार धारा ने समुचे भारत को एक सूत्र में पिरो लालालाज पतराये, महात्मा गांधी, सुभाष चन्द्र बोस, मोलाना अब्दुल कलाम आजाद, अब्दुल गफफार खान,सीमान्त गांधी,आचार्य जे.बी. क्रिपलानी, विनोवाभावे,शेख अब्दुल्ला, जय प्रकाश नारायण, राम मनोहर लेाहिया,डॉ. भीमराव अम्बडेकर के मार्गदर्शन में भारत जैसे महान देश को एक दिशा दी। जिसका परिणाम कि आज हम विश्व के सामने आंख में आंख डालकर खड़े है।

ऐसे में इस महान विचारधारा कांगेे्रस मुक्त भारत की बात अगर हो रही है,तो यह भारतीय लेाकतंत्र के लिये सबसे बड़ा खतरा है। इस तरह की बातें भारत जैसे महान देश के लिये कहीं से भी शुभ संकेत नहीं मानी जा सकती है। ये अलग बात है, कि कलयुग में बड़े अर्थ युग के चलते कांग्रेसी विचारधारा में सुनियोजित बिखराओं विगत 20 वर्षो में अवश्य आया है जिसने नीति,सिद्धान्त,संस्कृति,संस्कार सभी को तिलांजली दे स्वार्थो को सर्वोपरि बना दिया। और कांग्रेस नाम का प्रतीक धीरे-धीरे चाहे अनचाहे ढंग से ऐसे हाथो में जाता रहा जिनका न तो आम गरीब,किसान और जवान के स्वाभिमान से नाता रहा, न ही देश के लिये कोई योगदान। अगर यो कहें कि कांग्रेस 2 पाटो के बीच में स्वत: ही पिसती रही तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी। एक धड़ा कांग्रेस नेतृत्व के अनुभव और तर्र्जुवे के साथ राजनैतिक समझ न होने का फायदा उठा सत्ता सुख उठाता रहा, तो दूसरा धड़ा कांग्रेस के अन्दर लेाकतांत्रिक पर पराओं को दफन देख या तो कांग्रेस से टूट अलग हो गया, तो वहीं आम कांग्रेसी अपने घर जा बैठा।

आम कांग्रेसी को उ मीद थी कि वह देश भर में हुई इतनी बड़ी करारी हार के बाद कुछ बदलाब शायद कांग्रेस में हो। मगर आज भी हालात वैसे ही है,जैसे कि पहले थे। क्योंकि जो कांग्रेस का तमगा लिये कांग्रेस नेतृत्व की अनुभवहीनता का लाभ आज तक लेते रहे। वहीं आज भी कांग्रेस के खेरोगार बन 10 जनपथ और 24 अकबर रोड़ से बाहर निकलने के बजाये टीव्ही, अखबारों में ही अपने धन बल के अंहकार में संघर्ष करना चाहते है। और कांगे्रस के नाम कांग्रेस नेतृत्व को बदनाम कर अपनी रोटियाँ सेकना चाहते है। कहते है कि एक घर तो भट्टी भी छोड़ती है, मगर आज की स्थिति में अगर कोई दल यह सोचता है, कि भारत कांग्रेस मुक्त हो, तो इसमें गलत क्या? क्योंकि भारत तो कई वर्ष पहले ही कांग्रेस मुक्त हो चुका है। अब उसमें नया क्या? मगर अफसोस कि कांग्रेस में कई युवा तुर्क अन्दर और बाहर होने के बावजूद उन सत्ता लेालुपो से कांग्रेस मुक्त नहीं करा पा रहे, जो न तो खुद कुछ कर पा रहे और न ही दूसरो को कुछ करने दे रहे है। स भावना तो लेाग यहां तक व्यक्त करते है,कि कांग्रेस में ठीक कुछ ऐसे लेाग है,जो सत्ताधारी दलो से बेमेल अघोषित गठबन्धन कर सत्ता की मलाई लूटते रहते है। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि सरकार किसकी बने और किसकी बिगड़े।

बहरहॉल जिस आत्म विश्वास से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस को लेकर कहा है तो निश्चित ही उनके पास कोई पु ता आधार अवश्य होगा। मगर यह उस कांग्रेस के बारे में हो सकता है, जो चन्द लेागों की कटपुतली बन मायूस है, मगर असल कांग्रेस विचारधारा मजबूर नहीं। ये अलग बात है कि कांग्रेस नेतृत्व के स पर्क में वे भले ही न हो मगर उनकी रगो में कांग्रेसी विचारधारा अवश्य मौजूद है। जो आज नहीं तो कल अवश्य है इस देश के लेागों के विकास में एक बार फिर से सारथी बन सिरमौर साबित होगी।

अगर वाक्य में ही कांग्रेस नेतृत्व अपने आपको और महान कांग्रेस को इस महा कलंक से बचाना चाहता है,कि भारत कांग्रेस मुक्त हो तो उसे आज ही अपने पूर्वजो से प्रेरणा ले बगैर किसी साथी सलाहकार के देश के भ्रमण पर निकलना चाहिए। तथा देश की छोटी से छोटी मीडिया और आम कांग्रेसी से दिल खोलकर पूरी सुरक्षा के साथ मिलना चाहिए। और देश को समझना चाहिए क्योंकि अभी पूरे पांच वर्ष बाकी है। पुन: चुनावी मैदान में जाने के लिये। ये अलग बात है,कि कुछ राज्य में चुनावी श्रृंखला चलती रहेगी। जिसकी जबावदारी उन्हीं सलाहकारों को देना चाहिए वह भी इस शर्त पर कि कांग्रेसी विचारधारा से दूर किसी भी ऐसे दल से गठबन्धन न कर सरकारे बनवाये। 

साथ ही ऐसे छोटे-मोटे दल सामाजिक संस्थाऐं जो कांग्रेस विचार धारा में विश्वास रखती है, उन्हें कांग्रेस से जोडऩे का काम स्वयं को करना चाहिए। तभी कांग्रेस जैसे महान संगठन को पुर्न जीवित कर उस सशक्त दल से मुकाबला कर पायेगें जिसके पीछे 100 से अधिक संस्थाऐं जमीनी स्तर तक काम करती है। यहीं उनके अंहकार का कारण है,जो वह सार्वजनिक मंच से कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते है। कांग्रेस को देश और देश के आम गरीब,किसान और जवान को बताना होगा,समझाना होगा कि जो देश में सबका साथ और सबके विकास की बात करते है। उनकी सरकारे जिन प्रदेशों में भी काम कर रही है, वहां क्या हो रहा है। क्या वह उतनी ही संवदेनशील और जनसमस्याओं के प्रति उतनी ही जागरुक है। 

क्या आम नागरिक के लिये इन सरकारों के राज्यो में जरा भी लेाकतंत्र बचा है या फिर सरकारे फासिटवादियो की तरह काम कर आम गरीब,किसान और जवान को निक बा बना मायूस बनाने पर तुली है। इन्हें न तो जनता की परवाह है, न ही लेाकतंत्र के चौथे स्त भ मीडिया और बुद्धिजीवियो की भावनाओं की उन राज्यों में भ्रष्टाचार ऐसा कि आम गरीब तो दूर अच्छे खासे कुबेर पति की भी रुह कांप जाये। बेहतर हो कि जिस जमी ने बड़े-बड़े वीर होनहार सपूत दिये जिस आकाश तले बड़ी-बड़ी पताकाये लहराई वह हर उस वीर और हर उस होनहार सपूत के लिये आंचल फैलाये बैठी है। जरुरत है 10 जनपथ से कदम निकाल भारत भ्रमण की जहां करोड़ो आपके अपने दबे कुचले मगर पूरे उत्साह के साथ संघर्ष के लिये तैयार मिलेगें। 


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