संवेदनहीन समाज में संस्कारो को रौंदता स्वार्थ

व्ही.एस.भुल्ले। ये अलग बात है कि मनुष्य बेहतर वर्तमान और सुरक्षित भविष्य की चाह में संस्कारों को रौंद, स्वार्थ की खातिर एक संवदेन हीन स...

व्ही.एस.भुल्ले। ये अलग बात है कि मनुष्य बेहतर वर्तमान और सुरक्षित भविष्य की चाह में संस्कारों को रौंद, स्वार्थ की खातिर एक संवदेन हीन समाज के निर्माण लगा हो मगर अगले 10 वर्ष में जो तस्वीर समाज और देश की बनने वाली है, वह बड़ी ही भयाभय और खतरनाक होगी।

क्योंकि व्यक्तियों के समूह से समाज और समाजों के समूह से किसी निश्चित भू-भाग पर निर्धारित कानूनों के तहत रहने वालो से राष्ट्र का निर्माण होता है। जिसका निर्माण वह स्वयं करता है। जिसमें कत्र्तव्य, अधिकारो से लेकर स्वयं के द्वारा निर्धारित सिद्धान्त कानूनो का पालन करना अहम होता है। जिसमें विभिन्न जाति, समुदाय,धर्म के लेाग हो सकते है। जिनके अपने जीवन जीने का आधार भिन्न हो सकता। मगर स्वयं के द्वारा स्थापित व्यवस्था के तहत कानून सभी के लिये समान होता है। जिसका पालन करना सभी को अनिवार्य होता है।

मगर स्वयं के स्वार्थो के चलते जिस तरह निर्धारित व्यवस्था को आंख चिढ़ा कानून से खिलवाड़ कर लेाग एक दूसरे की भावनाओं के साथ खेल रहे है। फिर कारण जो भी वह संवदेनहीनता को ही दर्शाता है। और यह सब कुछ हमारे भारतीय समाज में संस्कारों की बिना पर हो रहा है।

हालात ये है कि जहां धार्मिक उपदेश और उपदेश सुनने वाले श्रोता भी समाज में कम पढ़ रहे है। वहीं आजादी और अधिकारो का बहाब, अब हमारी व्यवस्था पर भारी पढ़ रहा है। वह भी विश्व के महान लेाकतंत्र होने के नाम पर, हर क्षेत्र में स्वार्थ और स्वार्थो से सनी अराजकता ने समाज ही नहीं समाज के कन्धे पर बैठ व्यवस्था के ऊपर भी अपनी पैठ बना ली है। जिसे देखकर तो बस यहीं कहां जा सकता है कि हम पुन: करोड़ो वर्ष पुरानी स यता, संस्कारो को तिलांजली दे। पुन: अनादि काल की स यता की ओर बढ़ रहे है। जिसमें जिन्दा रहने एक शक्तिशाली जीव कमजोर को मार अपना पेट भर अपना व अपने परिवार का जीवन सुरक्षित करता था।

इसी प्रकार आज की सबसे बड़ी महामारी भ्रष्टाचार जो विभिन्न रुपो में अलग-अलग हो सकती दूसरा स्वार्थ जो सर्वोपरि है। तीसरी अनुशासन हीनता है। देखा जाये तो भारतीय समाज का दर्पण प्राय: वर्तमान में यह है कि कोई भी मनुष्य स्वयं के द्वारा निर्धारित कानूनो की परवाह किये बगैर कुछ भी कर रहा है। व्यवस्था पंगू इसलिये है कि इसे चलाने वाले इसी समाज से आ रहे है। जबकि दोषारोपण उसी व्यवस्था पर हो रहा है, जो संवदेनहीन हो चुके समाज पर निर्भर है। नहीं तो क्या कारण है, जो मनुष्य जाति के समाज में महिलाओं, बच्चियों के साथ गैंग रैप, सरेयाम छेडख़ानी यहां तक कि हत्या सहित उनके ऊपर तेजाब तक फेंक जिन्दा जलाया जा रहा है। यह तो हमारे स य समाज की नजीर भर है, जो समाज को बनाने वालो को जन्म देती है।

इसके अलावा सड़क पर एक्सीडेन्ट के पश्चात वाहनो को जलाना उपद्रव करना कानून व्यवस्था भंग करना, ट्राफिक नियमों को तोडऩा, सुरक्षा बलो पर हमले करना, सरेयाम स्वार्थ के लिये धर्नाजन की खातिर लेागों को परेशान कर रिश्वत लेना, अपना व अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित करने की खातिर भ्रष्टाचार करना, गरीबों का हक लूटना ये वो उदाहरण है जो इस बात के स्पष्ट संकेत है, कि हम हमारे ही देश में किस तरह के समाज का निर्माण कर रहे है। जो लेाग ऐसे समाज के निर्माण में अन्धे बन संवदेनहीन हो लगे है। शायद इन्हें ये ज्ञान नहीं कि वो जिस भी स्थिति या ओहदे पर है उससे निवृत होने के बाद उन्हें भी इसी समाज में जीवन बसर करना है। 

और उनकी आने वाली पीढ़ी को भी इसी समाज में जिन्दा रहना है। हो सकता है,कि जो आज समाज और व्यवस्था में ,खास और रुतवेदार है कल न हो, तब उन्हेें भी उन्हीं के द्वारा र्निमित इसी समाज में जिन्दा रहना होगा जिसकी वह आज अपने स्वार्थो के कारण अनदेखी कर रहे है। हो सकता है, तब बहुत देर हो चुकी होगी कुछ करने में इसलिये बेहतर है, कि समाज के मुखिया, धर्म गुरु और व्यवस्था के ओहदेदार समय की नजाकत को समझ स्वयं में सुधार कर ले बरना जिस स यता के विकास का हम दम भरते है, वह काफुर होते नजर आयेगी।

COMMENTS

Name

तीरंदाज,328,व्ही.एस.भुल्ले,523,
ltr
item
Village Times: संवेदनहीन समाज में संस्कारो को रौंदता स्वार्थ
संवेदनहीन समाज में संस्कारो को रौंदता स्वार्थ
http://3.bp.blogspot.com/-tmRTmfG-af0/U9u8nv3P5VI/AAAAAAAA5As/ZihGPYbgyCM/s1600/file_photo+(4).jpg
http://3.bp.blogspot.com/-tmRTmfG-af0/U9u8nv3P5VI/AAAAAAAA5As/ZihGPYbgyCM/s72-c/file_photo+(4).jpg
Village Times
http://www.villagetimes.co.in/2014/08/blog-post.html
http://www.villagetimes.co.in/
http://www.villagetimes.co.in/
http://www.villagetimes.co.in/2014/08/blog-post.html
true
5684182741282473279
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy