68वां स्वतंत्रता दिवस, कुछ अनबूझे सवाल और आजादी का सच

व्ही.एस.भुल्ले।  निश्चित ही आजादी भारत का सपना देखने वालो को मन मस्तिष्क में तत्कालीन हालातो के मद्देनजर एक ही सवाल रहा होगा, कैसे देश ग...

व्ही.एस.भुल्ले। निश्चित ही आजादी भारत का सपना देखने वालो को मन मस्तिष्क में तत्कालीन हालातो के मद्देनजर एक ही सवाल रहा होगा, कैसे देश गुलामी से बाहर हो और कब हम और हमारे लेाग देश, देश वासियों की पीढ़ा समझ देश को शसक्त समृद्ध और खुशहाल बनाये।

सेकड़ों कुर्बानियों और लाखों जबानियो को आजादी की खातिर बैभाव लुटा हम देश आजाद करने में तो सफल करने में तो सफल रहे। जिसका 68 वां स्वतंत्रता दिवस हम मना रहे है। मगर हम असफल रहे, उन पीढ़ाओं संकटो को हरने में जिनसे देश वासी गुलाम भारत में भी दो-चार हेाता रहता था।

ऐसा नहीं कि देश और देश वासियो ने विकास नहीं किया यह सच है कि हमने कॉफी विकास किया। मगर वह छितड़ा ही रहा जिसमें से 125 करोड़ आबादी के बीच 80 करोड़ के करीब आज भी विकास के लिये मेाहताज है। जिसकी चर्चाये हर वर्ष लाल किले की प्रचीर से होती रही है। मगर सच क्या है? वह आज भी बाहर नहीं आ पाता क्योंकि सरकारे उपलब्धियाँ गिनाती है। और क पनियों मार्केटिंग कर अपना माल खपाती है। और जनता चुपचाप तमाशा देखती जाती है। मगर सच कोई बोलने तैयार नहीं। चूंकि आज स्वतंत्रता दिवस है। इसलिये आज बोलने की भी स्वतंत्रता होना चाहिए तो सुनिये सच क्या है?

देखा जाये तो हमारे देश में स्वतंत्रता पश्चात लेाकतंात्रिक व्यवस्था को चुना गया था। जो आज भी कायम है अर्थात जनता के लिये, जनता द्वारा चुनी गई सरकार और शासन तथा संविधान में लिखित कानून का राज।
मगर हम हमारी लेाकतांत्रिक व्यवस्था के सिद्धान्तों से इतर व्यवहार में झांके तो, पायेगें कि जिस व्यवस्था में हम जिन्दा है। आखिर अब उसे क्या नाम दे? जिसने देश की आधे से अधिक प्रकृति प्रदत्त सुविधाओं से मोहताज कर रखा है। देखने को देश में कानून का राज है। पुलिस है, समाज के मुखिया है, धर्म गुरु है। शिक्षण संस्थान है। मगर अवला आज भी परेशान है।

बलात्कार कम अब तो गैंगरैप हो रहे है, हत्याओं से लेकर सरेराह बहिन,बेटियों पर तेजाब फिक रहे है। सांस्कृतिक और मंनोरंजनात्मक कार्यक्रमों की आड़ में संस्कृति,स यता के परखच्चे उड़ रहे है। बौद्धिक चर्चाओं में नैतिकता के सारे बंधन तोड़ ओंछे हमले हो रहे है। जाति ,भाषा,क्षेत्रवाद और धर्माधिता काविष ऐसा कि उसके आगे राष्ट्रीयता के ताने बाने भी कम पड़ रहे है।

सेवाओं की हालात ऐसी कि सेवक कम हमारे लोकतंत्र में अघोषित डकैत आम जनता का हक हड़प कर सेरयाम लूट रहे है। स्वास्थ पेयजल,सड़क के हालात ऐसे है कि आजाद भारत मेें भी इन नैसर्गिक सुविधायें हासिल करने लेाग कलफ रहे है। बिजली है, संचार और आवागमन की सुविधा भी मगर व्यवस्था गत कानून की आड़ में यह क्षेत्र भी देश की जनता को अघोषित रुप से लूट उससे मोटी रकम ऐठ रहे है। और जनता को ही दोषी ठहरा अपने कत्र्तव्यों की इतश्री कर रहे है। कहने को गांव से लेकर शहरों तक शिक्षक और स्कूल भवन है। मगर न तो शिक्षा है, और न ही बैठने लायक भवन। आंगनबाड़ी,मध्यान भोजन ही नहीं गरीबों के तेल राशन को भी भाई लेाग जमकर हजम कर रहे है। मनरेगा में मजदूरी ऐसी कि लाख दो लाख नहीं करोड़ों हजम हो रहे है।

लेाग जहां प्राकृतिक आपदाओं से निढाल हो स्वयं जूझ रहे है, वहीं हेेंगरो और गोदामों में पड़ संसाधन धूल फांक रहे है। बिजली गिरे चाहे बाढ़ आये मगर मरने वाला तो मर कर चला जाता है। फिर वहीं यक्ष सवाल सामने आता है। कि जिस देश में जांबाज सैनिक और सेकड़ों हेलिकॉप्टर हजारों संसाधन धूल खाते रह जाते है। मगर विपदा में फसे कुछ ही लेाग घन्टो इन्तजार के बाद बच पाते है। आखिर ऐसा क्यों? ये देश हमारा है, इस देश के लोग हमारे है, इन्हीं के बीच हम सबको रहना है, फिर ऐसी बेरुखी क्यों? हमें सोचना होगा और उस खामी को ढूंढ खत्म करना होगा जिस को लेकर अब तो लेाग भी कहने लगे है,कि ऐसी आजादी से तो गुलामी ठीक थी। क्योंकि गुलामी में यह अफसोस नहीं रहता था। कि हम आजाद है। मगर आज लेागों में कष्ट इस बात का है, कि हमारे देश में सरकार हमारी है। पुलिस हमारी है,फिर भी हम स्वयं को महफूज महसूस नहीं कर पाते। आज आम मजबूर व्यक्ति की हालात ऐसी है कि न तो वह अपने चुने हुये जनप्रतिनिधियों न ही स्वयं के टेक्स से नौकरशाहों की पगार वेतन भत्ते देने वालो की आंख में आंख डालकर यह पूंछ सके कि यह दुर्गति हमारे ही देश में हमारी क्यों? एक उ मीद देश वासियों को लेाकतंत्र के चौथे स्त भ मीडिया से जरुर है और थी। जिसमें धन लालचियों और मुनाफा खोरों की फौज ने जड़े जमा उसे सरकारों की सह पर दीमक की तरह चट कर खोखला कर वेजुबान और निक बा कर डाला। मगर हमें या हमारी व्यवस्था में बैठे उन जनप्रतिनिधि,नौकरशाह,धन कुबेरो को यह नहीं भूलना चाहिए कि जिस नई व्यवस्था का निर्माण हम अपने निहित स्वार्थो के चलते देश के करोड़ो करोड गरीबों,पीढि़तो की बिना पर कर रहे है। उसी व्यवस्था में आज नहीं तो कल हमें नहीं तो हमारी आने वाली उस नस्ल को जिन्दा रहना है। तब समय सवाल करेगा कि क्या यहीं आजादी है।

साइकिल चलाने से स्वास्थ्य और पर्यावरण ठीक रहता है: मुख्यमंत्री
लखनऊ: १६ अगस्त, २०१४ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने कहा है कि साइकिल चलाने से स्वास्थ्य भी ठीक रहता है और पर्यावरण पर भी कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। इस सवारी का इस्तेमाल सभी करते हैं। बच्चों, बुजुर्ग, किसान, मेहनतकश, सिपाही और विद्यार्थियों का वाहन है साइकिल।
श्री यादव आज यहां गोमतीनगर इलाके में विमेन पावन लाइन-१०९० के कार्यालय के समीप साइक्लो ग्रीन रैली के विजेताओं के पुरस्कार वितरण कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। साइकिल रैली का आयोजन एन.बी.टी. समाचार पत्र के प्रकाशन के एक वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में किया गया था, जिसमें समाचार पत्र वैण्डरों ने प्रतिभाग किया। विजेताओं को पुरस्कार स्वरूप साइकिल प्रदान की गई।
श्री यादव ने कहा कि दुनिया में कुछ ऐसे देश भी हैं, जो साइकिल को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने नीदरलैण्ड्स का उदाहरण देते हुए कहा कि इस मुल्क में आबादी से अधिक संख्या में साइकिले हैं। साइकिल चालकों के लिए वहां काफी सुविधाएं और
संसाधन मौजूद हैं। लोग आवागमन के लिए इस साधन का इस्तेमाल गर्व से करते हैं,
२ क्योंकि यह ईको-फ्रैण्डली है। उन्होंने पत्थरों के इलाके में साइकिल रैली के आयोजन को संतुलित पर्यावरण के प्रति जागरुकता पैदा करने वाला कार्य बताया। मुख्यमंत्री ने समाचार पत्रों को पाठकों तक पहुंचाने में वैण्डरों की भूमिका को सर्वाधिक महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इनकी बदौलत सभी को घर बैठे अखबार पढ़ने की सुविधा मिलती है। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर बच्चे खेल के तौर पर साइकिल चलाते हैं, वहीं दूसरी ओर वैण्डर साथी अपने काम के लिए साइकिल चलाते हैं। श्री यादव ने कहा कि मीडिया द्वारा प्रसारित खबरों से जनमानस प्रभावित होता है। इसलिए निष्पक्ष और समाज को आगे ले जाने वाली खबरें लोगों तक पहुंचाई जानी चाहिए। अगर वास्तव में कोई कमी है तो उसकी खबर लोगों तक पहुंचाने के साथ-साथ सरकार के अच्छे कार्यों से भी जनता को अवगत कराया जाना चाहिए।
इससे मीडिया के प्रति भरोसा बढ़ता है। मुख्यमंत्री ने रैली के १२ विजेताओं को पुरस्कार स्वरूप साइकिल प्रदान की। विजेताओं में श्री एस.पी. वर्मा, श्री अशोक मिश्रा, श्री अनिल प्रजापति, श्री महमूद अली, श्री ऋषभ शर्मा, श्री कमल वर्मा, श्री रंजीत रावत, श्री सुमित चैहान, श्री गौरव सिंह,
श्री अनिल यादव, श्री रिंकू कश्यप एवं श्री मा.े आरिफ शामिल थे। इस मौके पर राजनैतिक पेंशन मंत्री श्री राजेन्द्र चैधरी, विशेष कार्याधिकारी
मुख्यमंत्री श्री जगदेव सिंह, सूचना निदेशक डाॅ. रूपेश कुमार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

जेनेरिक औषधियों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना जरूरी: डॉ. रमन सिंह कलेक्टरों को डॉक्टरों और दवा विक्रेताओं की बैठक बुलाने के निर्देश
रायपुर, १७ अगस्त २०१४ मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने जिला कलेक्टरों को प्रदेश के सभी जिलों में मरीजों के लिए जेनेरिक औषधियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जेनेरिक औषधियों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना जनहित और मरीजों के हित में जरूरी हो गया है। डॉ. सिंह ने यहां अपने निवास कार्यालय में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कलेक्टरों से कहा कि वे इसके लिए जल्द से जल्द इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के सदस्य डॉक्टरों और दवा विक्रेता संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक बुलाकर उन्हें इस बारे में राज्य सरकार के नीति-निर्देशों की जानकारी दें। सभी डॉक्टरों को जेनेरिक दवा लिखने के लिए समझाइश दी जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा - ब्रांडेड दवाइयों की तुलना में जेनेरिक दवाई की कीमत कम होती है, लेकिन उसकी गुणवत्ता ब्रांडेड दवाइयों जैसी होती है। यह मरीजों और उनके परिवारों के लिए आर्थिक दृष्टि से भी लाभदायक है। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को सभी सरकारी जिला अस्पतालों और रेडक्रास सोसायटी के मेडिकल स्टोर्स में जेनेरिक दवाईयों का स्टाक पर्याप्त मात्रा में रखवाने के भी निर्देश दिए। डॉ. सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में जिला कलेक्टरों को हर जिले के सरकारी अस्पतालों में मलेरिया परीक्षण के लिए विकसित नई तकनीक का इस्तेमाल करने और इसके लिए हाल ही में इजाद की गई रेपिड डाग्यनोस्टिक किट की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए। इस नये और छोटे से उपकरण के जरिए कोई भी व्यक्ति आसानी से स्वयं का रक्त परीक्षण कर मलेरिया होने अथवा नहीं होने की पुष्टि कर सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब मलेरिया के इलाज के लिए एक नई औषधि ए.सी.टी. भी आ गई है। इलाज में इसका इस्तेमाल किया जाए।

मु यमंत्री की केयर्न इंडिया व वेदांता गु्रप के साथ बैठक
जयपुर, 17 अगस्त। मु यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे की रविवार को उदयपुर में केयर्न इंडिया और वेदांता गु्रप के अधिकारियों के साथ बैठक हुई।
बैठक में मु यमंत्री ने कहा कि केयर्न इंडिया और वेदांता द्वारा राज्य में चलाये जा रहे निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) प्रोजेक्ट्स की रूप रेखा राज्य सरकार के साथ मिलकर तय की जानी चाहिए। श्रीमती राजे ने कहा कि स्थानीय जनता के हितों के लिए चलाये जाने वाले ऐसे प्रोजेक्ट्स के बेहतर परिणाम तभी सामने आयेंगे। क पनी के अधिकारियों ने इस पर अपनी सहमति दी।
बैठक में मु य सचिव श्री राजीव महर्षि, अतिरिक्त मु य सचिव इन्फ्रा श्री सीएस राजन, वेदांता गु्रप के सीईओ श्री टॉम एलबेन्स, केयर्न इंडिया के सीएफओ श्री सुधीर माथुर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

एक नदी से दूसरे नदी को जोड़ा जाना चाहिये, इससे बाढ़ की वीभिषिका कम हो सकती है:- मुख्यमंत्री
पटना,१६अगस्त २०१४ वर्षा अधिक हो और जलस्तर न गिरे, इसके लिये अधिक से अधिक वृक्ष लगायें। राज्य में वन क्षेत्र को कम से कम २० से ३० प्रतिशत करें। वृक्ष लगायें और उन्हें बचायें। आज मुख्यमंत्री श्री जीतन राम माँझी स्थानीय तारामण्डल सभागार में पब्लिक रिहैबिलिटेशन एण्ड वेलफेयर सेन्टर पटना के तत्वावधान में सामुदायिक जल प्रबंधन एवं नदी पुनर्जीवन विषय पर आयोजित संगोष्ठी का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलित कर कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल ही जीवन है। जल के बारे में सोंचने की आवश्यकता है। जल को कैसे बचायें और इसका प्रबंधन कैसे करें, इस पर सोंच की जरूरत है। जल की कमी के कारण अनेक कठिनाइयाँ उठानी पड़ रही है। सिंचाई में कठिनाई हो रही है, साथ ही पेयजल का संकट बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि पहले पाॅच से दस फीट के नीचे जल सुलभ होता था और खेती करने के लिये पाॅच से दस फीट नीचे गड्ढ़ा खोदकर लाठा-कुड़ी से
पटवन की जाती थी, मगर आज जलस्तर काफी नीचे हो गया है। १००-१५० फीट नीचे जाने पर पानी मिलता है। विशेषज्ञा ें को इन विषयों पर चिन्तन करना चाहिये कि जल स्तर भागे नहीं। उन्होंने कहा कि मध्य बिहार में तालाब होते थे तथा जंगल का क्षेत्र भी बड़ा था, मगर जब धड़ल्ले से लोगों ने वनों की कटाई शुरू कर दी। ताल-तलैया को भरने लगे, जिसके कारण वर्षापात में कमी होने लगी। तालाबों से जल की आवश्यकता पूरी होती है तथा वाटर चार्ज होते थे। उन्होंने कहा कि बिहार में मात्र सात प्रतिशत जंगल रह गया था, जो काफी प्रयास के बाद अब बारह प्रतिशत तक पहुॅच गया है, मगर इसे २० से ३० प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषण के बढ़ते प्रभाव एवं प्रकृति के साथ छेड़छाड़ के कारण भी प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है। बेमौसम बरसात होती है, बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। प्राकृतिक संतुलन को बनाये रखने के लिये हमें प्रकृति से खिलवाड़ नहीं करना होगा। वन क्षेत्र को बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के असंतुलित हो जाने के कारण कई तरह के पशु-पक्षी विलुप्त हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जैविक खेती पर ध्यान देना होगा। खेतों में
अत्यधिक रसायनिक खाद एवं कीटनाशक का उपयोग न कर कम्पोस्ट एवं जैविक खेती पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा किपी पल के वृक्ष अत्यधिक आॅक्सिजन देते हैं इसलिये इन्हें ब्रह्म वृक्ष माना जाता है और इसका उपस्कर नहीं बनता है, मगर आज हम सब कुछ भूल रहे हैं। अपनी संस्कृति से दूर हट रहे हैं, यही सब कारण हो सकता है, जिस कारण जल की कमी हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक नदी से दूसरे नदी को जोड़ा जाना चाहिये, इससे बाढ़ की विभिषिका कम होगी। ग्यारह नदियों को जोड़ने का प्रस्ताव बनाकर केन्द्र सरकार को भेजा जा चुका है। समारोह की अध्यक्षता श्री राजेन्द्र सिंह ने किया। इस अवसर पर श्रीमती रागिनी रंजन, श्री राकेश कुमार, श्री अभय सिन्हा, श्री बी०के० सहाय, श्रीमती रत्ना पुरकास्था, डाॅ० राजीव रंजन प्रसाद, कुमार शुभमूर्ति, डाॅ० बिनोद कुमार एवं जदयू प्रवक्ता श्री राजीव रंजन प्रसाद ने भी समारोह को संबोधित किया। मंच संचालन श्री एम०के० मधुप ने किया।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री द्वारा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर शुभकामनाएं


राज्यपाल श्रीमती उर्मिला सिंह और मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर प्रदेश के लोगों को शुभकामनाएं दी हैं। श्रीमती उर्मिला सिंह ने कहा कि जन्माष्टमी हिंदुओं का एक पावन पर्व है, जिसे सभी हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाएं व दर्शन आज के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जिनका अनुसरण कर हम अपना जीवन सफल कर सकते हैं। मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने अपने संदेश में कहा कि भगवत् गीता के दर्शन ने विदेशियों को भी आकर्षित किया है। भगवत् गीता हम सभी के लिए सफल जीवन जीने का मार्ग प्रशस्त करती है। 

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Village Times: 68वां स्वतंत्रता दिवस, कुछ अनबूझे सवाल और आजादी का सच
68वां स्वतंत्रता दिवस, कुछ अनबूझे सवाल और आजादी का सच
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