मनरेगा में 22 करोड़ के बुक एडजस्मेन्ट की तैयारी, घोटाला छिपाने की कवायद

मप्र भोपाल। शिवपुरी मनेरगा में मुरम, बोल्डर, सड़को के नाम पर हुई लगभग 22 करोड़ की अनियमिता अधीक्षण यंत्री आरईएस मण्डल ग्वालियर मप्र की जांच में साबित होने के बाद तथा समाचार पत्रो मेें उक्त अनियमितता संबंधी समाचार प्रकाशन के बावजूद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने के बजाये शिवपुरी जिला पंचायत द्वारा 22 करोड़ से अधिक की अनियमितता को छिपाने एक प्रस्ताव बुक एडजस्मेन्ट के लिये मप्र मनरेगा ग्रामीण विकास विभाग भोपाल को भेजा गया है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आयुक्त कार्यालय के आदेशानुसार जिस जांच को अधीक्षण यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा मण्डल ग्वालियर ने कि और जिसने जांच उपरान्त शिवपुरी मनरेगा में पदस्थ आठो सहायक यंत्री और उपयंत्रियो सहित आठो जनपद सीईओ को लगभग 22 करोड़ से अधिक की अनियमितता के लिये दोषी ठहराया है। जिसकी जांच रिपोर्ट समस्त दस्तावेजो के साथ मई 2014 में ही आयुक्त कार्यालय भेज दी गई थी। मगर 8 जुलाई 2014 तक कड़ी कार्यवाही करने के बजाये जिला पंचायत ने एक प्रस्ताव इस अनियमितता को नियमित करने मनरेगा ग्रामीण विकास विभाग मप्र शासन को भेजा है।

देखना होगा व्यापाम जैसे महा भ्रष्टाचार से जूझ रही मप्र की शिवराज सरकार अपने ही आदेश निर्देशो को वापस ले कैसे बुक एडजस्टमेन्ट को सर अन्जाम देती है। जो कि धीरे-धीरे समूचे मप्र में चर्चा का वायस बनती जा रही है।

अगर जानकारो की माने तो शासन आदेशो के विरुद्ध मनमाफिक ढंग से 22 करोड़ से अधिक की भारी भरकम राशि के बुक एडजस्मेन्ट होते रहे तो सरकार और शासन का अर्थ क्या रह जायेगा, यह सोचनीय विषय है।

फिलहॉल तो शिवपुरी से पूरी तैयारी के साथ भोपाल होकर आई टीम के लौटने के बाद मनरेगा में इतनी बड़ी अनियमितता करने वालो की टोली के बारे में यह चर्चा सरगर्म है कि किसी भी कीमत पर 22 करोड़ से अधिक की हुई अनियमितता को नियमित कराना है। जिसके लिये मनरेगा के कई अधिकारी भोपाल मेें मोर्चा जमा आये है। बहरहॉल मजदूरी की बिना पर हुई इतनी गंभीर अनियमितता शिव सरकार कैसे लेगी इसको लेकर फिलहाल सभी स्तब्ध हैं।

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