कानूनी अडग़ों और मजबूरियों के बीच अभियान: ग्राम देवरा में वनवासियो ने भरे 105 आवेदन

व्ही.एस.भुल्ले। मप्र के संभाग ग्वालियर जिला शिवपुरी के विकासखण्ड नरवर की ग्राम पंचायत देवरा के वनवासियो ने गत दिनो ग्राम सभा के समक्ष लगभग 105 आवेदन प्रस्तुत किये। जिन पर ग्राम सभा की मोहर के बाद जनपद, जिला स्तर पर जांच उपरान्त वनवासियों को वन भूमि पर उन्हें अधिकार दिया जायेगा।

ज्ञात हो कि समुचे मप्र में वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत मप्र सरकार ने चिन्हित ग्रामों में विशेष शिविर लगाकर 19 अगस्त से 31 अगस्त तक वनवासियो को वन अधिकार देने का अभियान चला रखा है। जिसके तहत शिवपुरी जिले के 2 सेकड़ा से अधिक गांवों में शासन द्वारा दल गठित कर कार्यवाही की जा रही है। उसी के तहत वन वासियों द्वारा गांव-गांव आवेदन के माध्ययम से वन भूमि पर जो कि चिन्हित गांव के 5 किलो मीटर के दायरे में आती है।

ज्ञात हो कि म.प्र. सरकार द्वारा 2008 में भी वन अधिकार अधिनियम के तहत लगभग 16 हजार आवेदन एकत्रित किये गये थे तथा वर्ष 2012-13 में भी 1 हजार आवेदन प्रस्तुत हुये। जिनमें से लगभग 2 हजार के लगभग से अधिक वन अधिकार के पट्टे जिले भर में बांटे जा चुके है। जिनमें कृषि भूमि, आवास, सामूहिक दावो से संबंधित है। मगर एक बड़ी तादाद में वन भूमि पर दावो का निराकरण अभी भी ल िबत है।

बहरहॉल जिस तरह का अभियान म.प्र. शासन ने प्रदेश भर में छ़ेड़ा है, उनकी खामिया आज भी इस अभियान के आड़े आ रही है। जिनमें प्रमुख रुप से कई ग्रामों में वन समतियो का गठन न हो पाना, ग्राम सभा का कॉरम पूरा न होना जाति प्रमाण पत्र की वाधा किसी-किसी वन वासी का राशन कार्ड, वोटर आईडी का न होना कई और ऐसी बाधाये है जिसमें प्रमुख रुप से लगभग 20 पृष्ठिये आवेदन पत्र जिसका भरना अपने आप में अनपढ़ आदिवासी,वन वासी के आगे सबसे बड़ी बाधा है। वहीं दबंगों की हालात यह है, कि जो आज भी वेखोफ हो वन भूमि जोत रहे है उनके डर से या तो लेाग आवेदन नहीं कर पा रहे, या फिर जिन्हें वन अधिकार मिल चुका है, वह भी खेती नहीं कर पा रहे। फिलहॉल तो म.प्र. शासन का वन अधिकार अभियान जोर-शोर से जारी है। देखना होगा विगत 7 वर्षो से मशक्कत में जुटा शासन वन वासियों को कितनी राहत दे पाता है।

राजस्थान में किसानों को मिल रही है 5 घंटे बिजली
जयपुर, 28 अगस्त। पिछले वर्ष के अगस्त माह के मुकाबले इस बार अगस्त माह में बिजली की खपत दुगुनी होने और बिजली उत्पादन में अचानक कमी आने के कारण देश के अन्य प्रदेशों की तरह राजस्थान में भी बिजली का संकट गहरा गया है, लेकिन इसके बावजूद भी राजस्थान में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब और हरियाणा से अधिक बिजली आपूर्ति हो रही है। किसानों को 5 घंटे बिजली मिल रही है, ताकि उनकी फसल खराब न हो। ग्रामीण क्षेत्रें में भी घरेलू बिजली कम से कम 18 घंटे मिल रही है। रात को 7 बजे से सुबह 7 बजे तक पूरे प्रदेश में कोई कटौती नहीं की जा रही। केवल रात्रि को 7 से 12 बजे तक बडे उद्योगों में कटौती है, जिसमें भी शीघ्र राहत दी जायेगी। यहां गौरतलब होगा कि राजस्थान में पिछले वर्ष इसी अगस्त माह में जहां 1400 लाख यूनिट प्रतिदिन सप्लाई की जा रही थी, उसके मुकाबले इसी अगस्त माह में इस वर्ष 2100 लाख यूनिट बिजली सप्लाई की जा रही है।

देश में बिजली का संकट उत्पन्न होने का बड़ा कारण यह भी है कि केन्द्रीय नियामक आयोग ने आयातित कोयले की कीमत बढऩे की वजह से जो बढ़ी हुई दर लागू करने के आदेश दिए थे, उस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। इसलिये टाटा, अडानी और दूसरे प्लांटों ने पूरे देश में बिजली उत्पादन कम कर दिया है। जिसका असर राजस्थान पर भी पड़ा है, क्योंकि टाटा द्वारा की जा रही बिजली आपूर्ति में राजस्थान का हिस्सा है। टाटा के दो यूनिट बंद होने से हमें 160 मेगावाट बिजली की कमी आ गई है, इसी तरह आरएपीपी में खराबी आने के कारण भी 250 मेगावाट की यूनिट फिलहाल बंद हो गई है। राजस्थान में अडानी के जो दो पावर प्लांट है, उसमें से एक प्लांट उसने भी बंद कर दिया है, इसलिये भी 600 मेगावाट की कमी और आ गई। यानि इन सब कारणों के चलते राजस्थान में करीब 1 हजार मेगावाट की अचानक कमी आ है, इसलिए प्रदेश में बिजली संकट उत्पन्न हो गया। बात राजस्थान की ही नहीं है बिजली संकट से पूरा देश जूझ रहा है। फिर भी पड़ौसी राज्यों की बनिस्पत राजस्थान में कटौतियाँ सबसे कम हैं।


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